नवजात बच्ची को एक मां ने फेंका, तो दूसरी ने अपने दामन में समेटा

: बस्‍ती के एक सिपाही की पत्‍नी ने पेश की ममता की एक नयी मिसाल : कडाके की ठंड में इस नवजात की सांसें जमने से पहले ही एक मां ने अपना दामन ओढ़ा लिया : बस्‍ती के पैकोलिया गांव की आशा देवी वाकई देवी बन कर ही आयीं इस बच्‍ची के जीवन में :

बीएन मिश्र

बस्ती : ऐसे मौसम में जब लोग-बाग अपने घरों में रजाई में दुबने पर मजबूर हैं, एक अभागी मां ने न जाने किन हालातों में अपनी नवजात बच्‍ची को सड़क पर फेंक दिया। पैकोलिया थाना क्षेत्र के इमिलियाधीश गांव में जहाँ एक मां की ममता इस कदर निष्ठुर हो गयी कि अपनी कोख मे नौ माह पाल कर जन्म देने के बाद इस काडाके की ठंड मे मात्र एक कपडे मे लपेट कर झाडिय़ों मे फेक दिया। लेकिन वह तो गनीमत रही कि एक महिला की नजर इस बच्‍ची पर पड़ी, तो उसने लपक कर उस बच्‍ची को अपने आंचल की छांव मुहैया कर दिया। अब यह बच्‍ची इस महिला के साथ ही है, और यह महिला यहां के एक थाना में तैनात एक सिपाही की पत्‍नी बतायी जाती है।

बुधवार की सुबह सडक के किनारे एक बच्चे की रोने की आवाज जब गांव की ही एक महिला आशा देवी के कानों मे पडी तो रोने की आवाज की दिशा में देखा एक नवजात बच्ची झाड़ियों में रो रही थी आशा देवी ने आसपास के लोगो को बताया और वहाँ ग्रामीणों की भीड इक्ट्ठा हो गयी। किसी ने डायल 100 नम्बर पुलिस को फोन् कर दिया। सूचना पर पहुची 100 नम्बर की टीम जब मौके पर पहुंची और नवजात शिशु को अपने साथ लेकर सीएचसी हरैया आयी जहाँ डाक्टरो ने नवजात बच्ची का इलाज किया। बच्ची स्वस्थ है। 100 नम्बर टीम के प्रभारी प्रेम शंकर शुक्ला व कॉन्स्टेबल सन्दीप कुमार ने एक नवजात शिशु की जिन्दगी बचाकर सराहनीय कार्य किया है ।

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शायद इसी को कहते है जिसका कोई नहीं होता है उसका भगवान होता है। पैकोलिया थाना के इमिलियाधीश गाँव में जहां एक मां की ममता मर गयी वहीं दूसरी मां ने नवजात बच्ची को अपने आंचल की छांव मे रखकर मिशाल पेश किया है। हर्रैया थाने में तैनात सिपाही हरित प्रसाद यादव की पत्नी रानी यादव ने उसे अपनी ममता की छांव दी। महिला के पति ने भी हर्षित मन से उस नवजात शिशु को अपने सीने से लगाया लिया।