विद्यापति की मिथिला में संभावना सेठ की अश्‍लीलता परोस दी जागरण ने

: महानतम संस्‍कार-भूमि में दैनिक जागरण ने संभावना सेठ की वाचाल टीम को परोस दिया लालुप स्‍वाद वाला छौंक पकवान : ऐसी कोशिशों के चलते ही जल्‍दी ही इस क्षेत्र में उन्‍मुक्‍त यौनाचार की फसल उगने लगे, तो चिल्‍ल-पों मत कीजिएगा :

शेषमणि पाण्‍डेय और बीएन मिश्र

दरभंगा : मधुबनी क्षेत्र के मैथिल संस्कृति में महा कवि-ज्ञानी विद्यापति और उनकी संस्‍कृति के पहरूए 200 साल बाद भी आज भी चमत्कार करते हैं। और यह यूं ही मजाक में नहीं है कि विद्यापति और मैथिल संस्‍कृति दरभंगा से सैकड़ों मील दूर घर-घर गायी-सुनायी जाती हैं। लेकिन दैनिक जागरण ने शायद तय कर रखा है कि वे क्षेत्र में इस महान विद्यापति सम्राट की कोशिशें और मैथिल संस्कृति को छिन्न-भिन्न करके ही दम छोड़ा जाएगा।

ताजा मामला है गरबा- डांडिया के गुजरात का। धर्म से शुरू, लेकिन बाद में धर्म को पूरी तरह विसर्जित कर देने वाला यह पर्व पहले तो महाराष्ट्र और उसके बाद दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में उसने अपनी पैठ जमाने शुरू कर दिया।  कहने की जरूरत नहीं कि मुंबई महाराष्ट्र और गुजरात में गरबा यानी डांडिया पर्व फ्री-सेक्स का एक बहुत बड़ा उन्‍मु‍क्‍त मेला माना जाने लगा है। इन इलाकों में यह पर्व एक ऐसा मेला के तौर पर स्‍थापित होता जा रहा है, जो खुले और उन्‍मुक्‍त यौनाचार से ढंक चुका है।

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आपको बता दें कि सरकारी दावों के अनुसार उस दौरान गर्भपात की संख्‍या कई गुना बढ़ जाती है और गर्भनिरोधक दबाव तथा उपकरणों की बिक्री कई सौ गुना तक बढ़ जाती है। यहां आपको बता दें कि बिहार और यहां के मैथिल क्षेत्र ऐसे यौनाचार से कोसों दूर ही रहते हैं, जहां उन्मुक्त यौनाचार की गुंजाइश सर्वाधिक होती है। मुझे मिली खबरों के अनुसार दरभंगा और मैथिल के नाम पर मशहूर इस क्षेत्र में ऐसेकदाचार और भ्रष्टाचार से कोसों दूर हैं। मैथिल क्षेत्र पढ़ाई लिखा समाज माना जाता है।

लेकिन पिछले सितंबर दैनिक जागरण पे दरभंगा में जिस तरह गरबा और डांडिया का बड़ा आयोजन किया वह मैथिली संस्कार को काफी चकनाचूर करने वाले षड्यंत्रों में से एक है। जागरण ने फिल्मी अदाकारा संभावना सेठ और उनके समूह के लड़कियों को रात भर नचाया। कम कपड़ों में और बेहूदा तथा अश्लील संकेताक्षर और मुद्राओं के चलते पूरा मैथिल क्षेत्र उत्तेजित होता है। हो हल्ला हुआ शोर उल्लू हुई धमाचौकड़ी हुई और इस दौरान बिहार और मैथिल संस्कृति लहूलुहान होती रही।

तस्दीक देखने के लिए तस्दीक के लिए मुझे लगता है यह निम्न फोटो ही पर्याप्त होंगी