फर्जी बाबाओं पर जेहाद छेड़ा था, अब खुद ही रगेदे गये कुशमुनि

: इलाहाबाद के ही बाबा है कुश मुनि बाबा, मालामाल बाबाओं में उनकी गणना अग्रगण्‍य है : अखाड़ा परिषद ने जिन 14 फर्जी बाबाओं की लिस्‍ट जारी कर उन्‍हें पर प्रतिबंध लगाया है, कुश मुनि का नाम भी शामिल है : अब अखाड़ा परिषद पर पानी पीकर गालियां दे रहे हैं कुश मुनि :

कुमार सौवीर

लखनऊ : कुश मुनि ने एक बिल्‍ली पाल ली थी। उसको सिखाया था कि जिस-तस को पंजा मारना। लेकिन अचानक उस बिल्‍ली ने अपने तेवर गजब दिखा दिये। उसने अपने ही मालिक के चेहरे पर एक दिन एक जोरदार पंजा मार दिया। अब यह मालिक कुश मुनि का चेहरा बुरी तरह लहू-लुहान हो गया है, और वे जहां-तहां अपनी चिल्‍ल-पों करते दिख रहे हैं।

यह मामला है इलाहाबाद का। यहां के एक बाबा हैं कुश मुनि। अक्‍सर ही वे अपने कृत्‍यों को लेकर बहुत चर्चित होते रहे हैं। करीब छह महीना पहले उन्‍होंने यह कह कर सनसनी फैला दिया था कि देश में बेहिसाब और फर्जी शंकराचार्य बन गये हैं कि उनके चलते यह जगत ही छोटा पड़ गया है। ऐसे में ऐसे फर्जी बाबाओं को चिन्हित कर उन्‍हें संत समाज से निकाल बाहर कर हिन्‍दू संस्‍कृति को बचाना अब समय का तकाजा हो गया है। लेकिन हाल ही 11 सितम्‍बर को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अपनी एक बैठक में देश के जिन 14 फर्जी बाबाओं की लिस्‍ट जारी कर उन्‍हें हिन्‍दू समाज से बहिष्‍कृत करने की कवायद छेड़ी है, उसमें कुश मुनि का नाम भी शामिल है। अब कुश मुनि ने पानी पी-पी कर अखाड़ा परिषद के खिलाफ गालियां देना शुरू कर दिया है।

इसके पहले कुश मुनि ने कहा था कि इस देश मे इतने जगद्गुरू शंकाराचार्य बन गये हैं कि जगत छोटा पड़ गया है। फर्जी जगद्गुरू शंकराचार्यों के बोझ से यह बेचारी धरती दबी जा रही है। संत समाज को फर्जी शंकराचार्यों का बहिष्कार करना होगा। उक्त बातें आचार्य कुशमुनि ने लगातार बढ़ रहे बाबाओं की संख्या और उनके राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर कटाक्ष करते हुए कहीं।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने खुद को शारदा पीठ का शंकराचार्य घोषित कर दिया है, मतलब एक फर्जी शंकराचार्य और बढ़ गया। देश मे फर्जी शंकाराचार्यों और फर्जी महामंडलेश्वरों की बाढ़ आ गयी है। जिसके पास कुछ पैसा आ गया, बढ़िया मठ बन गया, गाड़ी-घोड़ा का इंतजाम हो गया, वही खुद को शंकराचार्य या जगद्गुरू घोषित कर देता है। उन्होंने कहा कि मेरी समझ मे नहीं आता कि जब ईसाई समाज का एक पोप से काम चल रहा है, तब हिन्दू समाज को इतने जगद्गुरू शंकराचार्यों की क्यों जरूरत है? भारत के मुस्लिमों में जो हैसियत दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम की है क्या वह हैसियत किसी हमारे शंकराचार्य की है?

आचार्य कुशमुनि ने कहा कि यदि हिन्दू धर्म के ठेकेदारों ने जल्दी ही इसका हल नही निकाला तो हिन्दू समाज का बहुत नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि मैं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि और अखाड़ा परिषद के महंतों और हरिद्वार की स्थानीय जनता की सराहना करता हूँ कि उन्होंने फर्जी शंकराचार्य अच्युतानंद तीर्थ के तथाकथित पट्टाभिषेक कार्यक्रम का बहिष्कार किया और इस फर्जी कार्यक्रम में सन्नाटा रहा। अंत में उन्होंने संत समाज से निवेदन किया है कि फर्जी शंकराचार्य अच्युतानंद तीर्थ का बहिष्कार करें।