वकीलों का टीएन शेषन, गजब चुनाव कराया

: प्रदेश में पहली बार इतना सिस्‍टमेटिक चुनाव कराने का तमगा आईबी सिंह के सीने पर दर्ज : अवध बार एसोसियेशन के चुनाव में सात निर्वाचन अधिकारियों की टीम समेत 77 लोगों की टीम ने आश्‍चर्यजनक चुनाव सम्‍पन्‍न : प्रतिबंध लगने से नये दो हजार सदस्‍य बढ़ने के बावजूद छह सौ वोट कम पड़े :

कुमार सौवीर

लखनऊ : टीएन शेषन इस बैक। लेकिन इस बार आम चुनावों की राह पर नहीं, बल्कि आम चुनावों की आचार-संहिता में आमूल-चूल बदलाव लाने के लिए एक नये टीएन शेषन का अवतार हो गया है। इस नये शेषन का नाम है आईबी सिंह। आपराधिक मामलों के विशेषज्ञ आईबी सिंह ने अवध बार एसोसिशेशन के चुनाव को जिस तरह संचालित किया है, उसे देख कर लोगों ने दांतों तले उंगली दबा लीं। लेकिन हैरत की बात कि आईबी सिंह और उनकी टीम ने जिन भी नियम बनाये, उसे कड़ाई के साथ लागू तो किया ही, लेकिन साथ ही इस पूरे दौरान उनके फैसलों पर कोई भी ऐतराज दर्ज नहीं हो पाया।

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लर्नेड वकील साहब

अवध बार एसोसियेशन के ताजा हुए चुनाव के तरीकों और उसके फैसलों से इतना साफ हो गया है कि आदर्श डगर पर काफी कुछ डि-रेल कर वकीलों की राजनीति को खासा नुकसान पहुंचा देने वाली परम्‍परा को इस बार फिर नयी पटरी पर लाने की सम्‍भावनाएं जमीन पर उगने लगी हैं। अवध बार एसोसियेशन के बीते हुए चुनाव में तो ऐसी ही तस्‍वीर स्‍पष्‍ट होती दिख रही है कि भविष्‍य में अब अवध एसोसियेशन में केवल वाकई और अर्हता रखने वाले वकीलों का ही दस्‍तखत मंजूर हो पायेगा।

बार एसोसियेशन का चुनाव अब तक किसी भेडि़या-धंसान से कम नहीं होता था। एक-एक प्रत्‍याशी पचासों लाख रूपया फूंकता था, न जाने कहां-कहां के बिल से बाहर निकल कर मतदान करने पहुंच जाते थे वकील। फर्जी सदस्‍यता कार्ड का धंधा भी खूब चलता था। लगभग सभी प्रत्‍याशी अपने पक्ष में वोटों को प्रभावित करने के लिए दावतों पर पैसा खर्च करता था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया। आईबी सिंह का ही सिक्‍का चला, और खूब शिद्दत के साथ चला।

इस चुनाव के लिए सहायक निर्वाचन अधिकारियों में सम्‍पूर्णानंद, एजेड सिद्दीकी, केडी नाग, संजय सिंह, अमित जायसवाल, प्रशांत सिंह अटल, और सूर्यमणि रैकवार की टीम बनायी गयी थी। बाकी पूरे प्रक्रिया के लिए कुल 77 लोग तैनात किये गये थे। इनमें महिला वकील भी अच्‍छी-खासी संख्‍या में तैनात थीं।

मतदान के दो दिन पहले तक से पूरी टीम ने सीसीटीवी पर लगातार सतत निगरानी की और पूरी कोशिश की, ताकि अधिकांश मतदाताओं को पहचाना जा सके। इसके लिए प्रत्‍येक मतदाता के लिए बार-कोडिंग कार्ड जारी किये गये। ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी पर लगाम लगाया जा सके। हालांकि इतने कड़े प्रतिबंधों के बावजूद एक मतदाता मौके पर पहुंच ही गया, लेकिन सतर्क निर्वाचन अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया।

आईबी सिंह बताते हैं कि इस चुनाव में करीब 27 सौ वकीलों ने अपना मताधिकार का प्रयोग किया। जबकि पिछले चुनाव में करीब 33 सौ वकीलों ने अपना वोट डाला था। इतना ही नहीं, आईबी सिंह बताते हैं कि इस बीच दो हजार नये सदस्‍य बनाये गये थे। लेकिन इसके कड़े प्रतिबंधों के चलते इस बार वोटिंग में 27 सौ वैध मतदाता ही आये। उनका कहना है कि पिछले बरस अप्रैल-16 को चुनाव हुए थे। इसलिए इस बार ऐन वक्‍त पर उन्‍हीं लोगों को सदस्‍य माना गया, जो अप्रैल-17 तक अपना सदस्‍यता शुल्‍क जमा कर चुके थे। ऐसी हालत में अधिकांश वकील तो मतदाता के तौर पर छंट कर बाहर हो गये।

इसका कारण है कि अवध बार एसोसियेशन को माखौल बना कर केवल कुर्सी हड़पने की प्रवृत्ति को खत्‍म करना ही था, जो इस बार सफल हो गयी। पिछली बार, वे बताते हैं कि, हर प्रत्‍याशी 45 लाख रूपयों तक का खर्चा करता था। खर्चा क्‍या, पैसा फूंकता था। लेकिन इस नये नियम से वही वकील मतदाता के तौर पर चिन्हित हो पाये जो नियमित रूप से अपना शुल्‍क अदा करते हैं। जाहिर है कि यह वही लोग होंगे, जो हाईकोर्ट में नियम से आते होंगे। आईबी सिंह बताते हैं कि इस बार अवध बार एसोसियेशन की सदस्‍यता साढे़ सात हजार से भी ज्‍यादा हो चुकी थी, लेकिन कड़े प्रतिबंधों के चलते केवल 2700 लोग ही पात्र पाये गये, और उन्‍होंने ही श्रद्धापूर्वक मतदान किया।

इस निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल अपनी पूरी टीम को आईबी सिंह ने हार्दिक धन्‍यवाद और आभार व्‍यक्‍त किया है। उन्‍होंने इस बात की भी सम्‍भावनाएं व्‍यक्‍त की हैं, कि अवध बार एसोसियेशन का भविष्‍य इसी तरह की निर्वाचन प्रक्रियाओं से ही पुष्पित और पल्लवित होता रहेगा।