पत्रकारिता में इंसानियत खोजना है? कमर अब्‍बास से मिलो

: गोंडा के मनकापुर में एक नवोदित महिला पत्रकार की सरेआम हुई पिटाई से व्‍यथित हैं ब्‍यूरो-चीफ : अगर हम निरीह, बेसहारा और पीडि़तों की आवाज नहीं उठा सकते, तो जीवन ही निरर्थक : अगर लड़की चाहे तो उसे पत्रकारिता सिखाने को तैयार हैं अब्‍बास :

कुमार सौवीर

लखनऊ : गोंडा के मनकापुर नामक बड़े शहर में एक युवती को सरेआम-दिनदहाड़े चंद गुण्‍डे उसे पीट देते हैं, भद्दी गालियां देते उसे सड़क पर घसीटा जाता है, बेहिसाब और बेसाख्‍ता नंगी-नंगी गालियां दी जाती हैं।

यह जानते हुए भी कि यह युवती पत्रकार है, लेकिन इस हादसे पर पूरे शहर में कोई भी आवाज तक नहीं उठती है। जब वह युवती पुलिस कोतवाली पहुंचती है, तो उसे उससे भी बुरे अनुभवों से गुजरना होता है। कोतवाल की कुर्सी पर बैठा शख्‍स किसी घटिया-नृशंस जानवर की तरह उस पर गालियां बरसते हुए दबोचने की शैली में हमलावर बन जाता है।

जी हां, चार दिन पहले इस पूरे क्षेत्र में राजमहल के तौर पर बेहद सम्‍मानित राजभवन-राजपरिवार के शहर में कोई भी चर्चा ही नहीं हो रही है। जनमानस से उठती विरोध की आवाज को महफूज रखने का दावा करने वाले पत्रकार मनकापुर में कहने को तो करीब पांच दर्जन से ज्‍यादा हैं, लेकिन इस मामले पर कोई भी नहीं बोलता है। अगर कोई बाेलता भी है, तो केवल इतना ही कि वह लड़की खुद ही लोगों को गालियां दे रही थी।

वह बच्‍ची पत्रकारिता का ककहरा सीखने आयी। बेशर्मों, तुमने उसे पिटवा दिया ?

लेकिन इस पूछतांछ करने की आवश्‍यकता कोई भी पत्रकार नहीं समझता है कि अगर वह युवती गालियां दे भी रही थी, तो उसका असल वजह क्‍या थी। सरोज मौर्या नाम की यह युवती का आरोप है कि एक स्थानीय दबंग पत्रकार के इशारे पर पुलिस ने उसकी इज्‍जत को सरेआम तार-तार कर दिया।

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विशाल ककड़ी: हाथ का हथियार, पेट का भोजन

बहरहाल, इस मामले में हमने गोंडा के कई पत्रकारों से बातचीत की। इनमें से हिन्‍दुस्‍तान के ब्‍यूरो प्रभारी कमर अब्‍बास का जवाब वाकई बेहद संवेदनशील रहा। वे बोले कि यह हादसा बेहद शर्मनाक है, और इस पर कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए। उनका कहना था कि वह खबर मिलते ही उन्‍होंने उस सम्‍बन्धित रिपोर्टर से बातचीत कर उसके रवैये पर खासी नाराजगी भी जाहिर की। कमर अब्‍बास कहते हैं कि उस बच्‍ची की मदद के लिए जो भी हो सकेगा, वे हमेशा तत्‍पर रहेंगे।

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पत्रकार पत्रकारिता

उनका कहना है कि उनके अखबार की नींव ही मानवीय संवेदनाओं पर टिकी है। अब्‍बास ने यह भी बताया कि अगर वह बच्‍ची चाहेगी, तो वह आये। मैं उसे पत्रकारिता के क्षेत्र में जितना भी प्रशिक्षण हो सकेगा, मुहैया कराऊंगा।