यह नयी सदी की जुझारू बच्चियां हैं, सबसे पहले तो इनके हौसलों को सलाम

: लिंग-अनुपात का निकृष्‍ट नमूना है हरियाणा, और यहीं की बच्चियों ने अपनी शिक्षा के लिए जेहाद छेड़ दिया : आठ दिनों तक मुसलसल भूख हड़ताल से टूट गयी हरियाणा, विद्यालय के अपग्रेशन के आदेश जारी :

हर्ष कुमार

रेवाड़ी : छेड़छाड़ से आजिज आकर रेवाड़ी (हरियाणा) की 30 लड़कियों ने अपने स्कूल को अपग्रेड करने के लिए पिछले 8 दिनों से अनशन किया था। पहले तो सरकार और प्रशासन ने उसे बहुत हल्‍के से लिया, लेकिन जैसे-जैसे उनकी भूख ने पूरे प्रदेश को सूखना शुरू किया, हरियाणा की सरकार दहल गयी। नतीजा यह हुआ कि इन नन्‍हीं बच्चियों के हौसलों के सामने प्रदेश सरकार ने घुटने टेक दिये। फैसला हुआ है कि अब हरियाणा सरकार की नींद टूट गयी है और सरकार ने गोठड़ा टप्पा डहीना स्कूल को इंटरमीडियट यानी कक्षा बारह तक करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकारी आदेश के तहत अब इस स्‍कूल में एक प्रिंसिपल को नियुक्त कर दिया है।

दरअसल, यह किसी एक सामान्‍य और सड़कछाप आंदोलन नहीं था। बल्कि अपनी मांग और उस आंदोलन के चरित्र के मामले में यह एक अनोखा और लाजवाब संघर्ष था। लेकिन सरकार ने उसे शुरू से ही किसी सामान्‍य आंदोलन के तौर ही लिया। वही टालू-टरकाऊ आश्‍वासनों की चाटनी-चाशनी चटाने का पुराना ढर्रा। लेकिन यह बच्चियां कोई पेशेवर आंदोलनकारी नहीं थीं। वे संकल्‍प कर चुकी थीं, कि चाहे कुछ भी हो जाए इस विद्यालय को उच्‍चीकृत करा के ही मानेंगी। कारण यह कि छोटे दर्जे की पढाई वाले इस स्‍कूल के चलते यहां आसपास कोई ठोस सुरक्षा व्‍यवस्‍था नहीं होती है। स्‍कूल के आसपास शोहदों की भीड़ लगी होती है, जिसके चलते इन बच्चियों की शिक्षा-दीक्षा भी बेहद प्रभावित होती है।

इससे पहले स्कूली शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा के आश्वासन पर लड़कियों ने अपना अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया था। तबीयत खराब होने के बावजूद ये लड़कियां अपनी मांग पर अड़ी रही और अंतत: सरकार को झुकना ही पड़ा। ये नई सदी की वो लड़कियां है, जो अपने हक के लिए लड़ना जानती है। शिक्षा की ज्योति जगाने के लिए अग्रसर इन लड़कियों को सौ-सौ बार सलाम। हरियणा वह राज्य है जहां लड़कियों का अनुपात देश में सबसे कम है और वहां से लड़कियां अगर शिक्षा को लेकर जंग के मूड में है तो यह अपने आप में एक बहुत बड़ा बदलाव है।