अखिलेस जी! ई का यूपी में हो त

: चुनाव में बलियाटिक-भोजपुरी चाशनी में राजनीतिक हास्‍य और व्‍यंग्‍य शैली : यूपी में चुनावी माहौल क्‍या गरमाया है, जनार्दन यादव की बांछें खिल गयीं : बीएसएफ वाले जनार्दन ने सम्‍भाल लिया है चुनावों में गीतों के साथ तरन्‍नुम वाली सीढ़ी : अपना वीडियो-एल्‍बम की शुरूआत मेरी बिटिया डॉट कॉम से शेयर किया इस बलियाटिक जवान ने :

कुमार सौवीर

लखनऊ : आप अगर जनार्दन यादव को नहीं जानते हैं, तो भी कोई दिक्‍कत नहीं। फिकिर नॉट। क्‍योंकि अब जनार्दन यादव अपने ही गीतों को अपने ही बुने तरन्‍नुम के साथ गूंथ कर चुनावी-दंगल में अपनी बेमिसाल गायन-शैली में अपना वीडियो-एल्‍बम तैयार कर रहे हैं। जल्‍दी ही यह एल्‍बम बाजार में दिखेगा। और फिर उसके बाद ही मचेगी धूम, झमाझम भोजपुरी बोली में राजनीतिक गीतों का धमाका होगा।

जी हां, यह कमान सम्‍भालने जा रहे हैं जनार्दन यादव। बलिया के सहतवार के रहने वाले जर्नादन यादव पहले सीमा सुरक्षा बल में तैनात रहे हैं, लेकिन जर्नादन ने हाल ही अपनी 25 साल की नौकरी से इस्‍तीफा देकर अपना बाकी जीवन भोजपुरी गीतों को समर्पित करने का फैसला किया है। वे अपने जीवन के इस प्रयास को जीवन की एक नयी चुनौती के तौर पर देख रहे हैं। वे कहते हैं कि :- अब चाहे कुछ भी हो जाए। भोजपुरी गीतों को एक नये अंदाज में पेश करने का अभियान छेड़ कर ही मानूंगा, जहां भोजपुरी गीत की प्रचलित अश्‍लीलता वाली धारा के खिलाफ एक नये हास्‍य और व्‍यंग्‍य का स्‍तम्‍भ स्‍थापित किया जाएगा। इसमें राजनीतिक चुटीले गीत ही प्रमुख होंगे। हां, सामाजिक और आर्थिक मसले भी शामिल किये जाएंगे।

जनार्दन इस समय दिल्‍ली में रह रहे हैं। सपरिवार। एक बेटी शालिनी आजमगढ़ मेडिकल कालेज में एमबीबीएस में दूसरे वर्ष में पढ़ रही है। पत्‍नी साथ में हैं और इस दम्‍पत्ति के साथ छोटे दो बेटे दिल्‍ली में पढ़ रहे हैं। वैसे तो जनार्दन की पढ़ाई ग्‍वालियर में हुई, और अपनी बीएसएफ की नौकरी के चलते वे देश भर में जहां-तहां राष्‍ट्रसेवा में मस्‍त रहे। लेकिन गीतों को बुनना और उन्‍हें तरन्‍नुम में गाना उनका शौक रहा। चूंकि जनार्दन का पैत्रिक घर बलिया ही है, इसलिए जनार्दन के गायन में माध्‍यम भोजपुरी ही रहा। आपको बता दें कि जनार्दन को बीएसएफ में वाद-विवाद प्रतियोगिता में कई बार राष्‍ट्रीय पदक और सम्‍मान मिल चुके हैं।

ताजा गीत यूपी में अखिलेश यादव की सरकार की समीक्षा के तौर पर है। यह गीत 1090 चौराहा के सामने हम लोगों ने तब रिकार्ड किया था, जब वे हमसे मिलने लखनऊ पधारे थे। उसी दौरान कार पर बैठे-बैठै ही उन्‍होंने अपना यह ताजा गीत सुनाया था। जाहिर है कि मैंने भी उनके गीत के साथ संगत दी और कार को तबले की तरह बजाना शुरू कर दिया। रही-बची कसर मैंने अपने मुंह से ढोलक की आवाज से निकाल कर किया। सुन कर बताइयेगा जरूर कि कैसा रहा जनार्दन का यह गीत।

इस गीत को सुनने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा :- अखिलेस जी! ई का यूपी में हो त