पराली पर बवाल: दिल्‍ली में भी मौजूद हैं बड़ी-बड़ी छोटी-सोनालियां पलाक्षियां

: सोनाली को चंडीगढ़ सरकार के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 11 हजार का पुरस्‍कार दिया : पत्रकार की पोती नन्‍हीं परी पलाक्षी की प्रदूषण विरोधी युद्ध की सबसे बड़ी सेनानी है : इस बच्‍ची ने अपनी शिक्षक और मां का कहना माना, और पटाखा को नो कह दिया :

दिल्‍ली : एक तरफ चंडीगढ से खबर आ रही है कि फसल का अवशेष (पराली) जलाने पर पिता की शिकायत करने उस पर जुर्माना कराने वाली किशोरी को प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड सम्मानित किया जाएगा। बोर्ड उसे 11 हजार रुपये और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेगा। दीपावली पर लोगों खासकर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उसी दूसरी ओर दिल्‍ली की एक नन्‍हीं बच्‍ची पलाक्षी ने दिल्‍ली के प्रदूषण के खिलाफ बाकायदा जेहाद छेड़ दिया है। इस नन्‍हीं पर्यावरण-परी ने संकल्‍प लिया है कि वह न तो पटाखा चलायेगी, और न ही इस बारे में लोगों को जागरूक भी करेगी।

बता दें कि जींद जिले के गांव ढाकल निवासी सोनाली श्योकंद ने स्थानीय प्रदूषण नियंत्रक अधिकारियों को पिता द्वारा पराली जलाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सोनाली ने कहा कि समझाने के बावजूद पिता मानने को तैयार नही थे और धान की फसल काटने के बाद खेत में ही पराली जला दी। किसान को 2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारिय के अनुसार, पर्यावरण बचाने के लिए किशोरी की सोच को सलाम करते हुए उसे सम्मानित किया जाएगा। बोर्ड अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे अन्य बच्चों, युवाओं और किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने की प्रेरणा मिलेगी।

बता दें कि हरियाणा सहित कई राज्यों में खेतों में पराली जलाने से भारी वायू प्रदूषण होता है और ठंड के मौसम में यह घने कोहरे में तब्दील हो जाता है। इससे लोगा को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार ने खेतों में पराली जलाने पर रोक लगा रखी है, इसक बावजूद किसान इससे बाज नहीं आ रहे। सोनाली श्योकंद को रांंज्य में फसलों के अवशेष न जलाने के लिए दिए गए अपने इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए 11,000 रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रीय राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली ने राज्य प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड और राज्य सरकार को फसल के अवशेष जलाने के बारे में जिला स्तर पर जागरूकता लाने के लिए कमिटी गठित करने के निर्देश दिए थे। ये कमिटियां कैंपेन के माध्यम से पराली जलाने के मामलों की रोकथाम के लिए निगरानी करेंगी। बोर्ड अधिकारियों को आशा है कि इससे अन्य बच्चों, युवाओं और किसानों को वर्तमान कटाई मौसम में फसलों के अवशेष जलाने को रोकने के लिए प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि बच्चों को ग्रीन दीपावली मनाने को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि पटाखों का कम से उपयोग हो और दिल्ली व एनसीआर क्षेत्रों में वायु प्रदूषण को कम किया जा सके।

उधर दक्षिण दिल्‍ली में एक बच्‍ची ने पटाखों को नो कह दिया। एक पत्रकार शीतल सिंह की पोती पलाक्षी दक्षिण दिल्‍ली के वसंत कुंज में रहती है। नाम है आनंद निकेतन वाला माउंट कार्मल स्‍कूल।  उसने इस बार तय कर लिया कि वह दीपावली में प्रदूषण के कारक तत्‍वों का बहिष्‍कार कर लेगी। कक्षा एक में पढ़ने वाली इस बच्‍ची को उसके दादा शीतल पर्यावरण-परी कहते हैं। शीतल ने बताया कि इस नन्‍हीं सी परी पलाक्ष ने इस साल एक भी पटाखा नहीं चलाया। इतना ही नहीं, उसने आसपास की कालोनियों के बच्‍चों को भी प्रदूषण के खतरों को लेकर उन्‍हें जागरूक किया और अपील की कि आइंदा वे भी पटाखा ही नहीं, बल्कि ऐसा कोई भी काम नहीं करेंगे, जिससे दिल्‍ली या हमारे समाज के आसपास प्रदूषण बढ़े। उसकी अपील है कि वे सब मिल कर पौधारोपण करें।