यूपी सचिवालय में काम नहीं, खूब होती है दलाली?

: जुगाड़ लगाना है तो सचिवालय आइये, दलाली कराने का अड्डा बन चुका है उत्तर प्रदेश सचिवालय : जो काम बड़े-बड़े नेता नहीं करा पाते, वो चुटकियों में करा देते हैं सचिवालय के अफसर और बाबू : लोक सेवा आयोग पर सीबीआई जांच को प्रभावित करने की साजिशें :

कुमार सौवीर

लखनऊ : क्या? आपका मनचाहे जिले में ट्रांस्फर नही हो रहा? आपको पीडब्लूडी वाले ठेका नही दे रहे? आपके मोहल्ले की सड़क नही बन रही? घर पर बिजली नही आती? अगर आपके पास भी इस तरह की समस्यायें हैं और कोई आपकी मदद नही कर पा रहा तो हम आपको एक सलाह दे रहे हैं। वो भी बिल्कुल मुफ्त ! किसी सचिवालय कर्मी को पकड़ लीजिए। किसी को भी, भले वह कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हो या फिर समीक्षा अथवा उसके ऊपर का कोई अफसर-बाबू। उससे बात कीजिए, डील कीजिए। फिर क्‍या, आपका काम चुटकियों में हो जाएगा, कागज-पत्‍तर आपके घर तक पहुंचा दिया जाएगा। अच्छा आप समीक्षा अधिकारी को जानते है? अरे वाह तब तो क्या कहनें। तब इंतजार किस बात का? मिठाई लेकर जाइय्ये और काम निकलवाइये।

जी हां, ये सौ फीसदी सच बात है। दरअसल वर्षों से उत्तर प्रदेश सचिवालय लॉबींग का गढ़ बन चुका है। कोई भी काम हो कैसा भी काम हो, सचिवालय कर्मों की मदद से वो मिनटों में हो जाता है। और अब हाल ही में खबर आई है की कुछ अधिकारी जो 2012-2017 के दौरान उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा विभिन्न परीक्षाओं के जरिये चयनित हुए हैं और वर्तमान में आयोग में चल रही सीबीआई जांच से परेशान हैं, वे सब अधिकारी एकजुट हो रहे हैं। एक सचिवालय के समीक्षा अधिकारी के माध्यम से जांच की आंच से बचने का जुगाड़ लगा रहे हैं।

एक जानकार ने यह जानकारी प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम के संवाददाता को दी है। उसका कहना है कि हालात अब लगातार बदतर होते जा रहे हैं, और ऐसी हालत में सरकार को इस बात का तुरंत संज्ञान लेना चाहिये और जांच करानी चाहिये। दरअसल सचिवालय में तैनात कर्मचारी व अधिकारी दिनभर सत्ता शीर्ष के करीब रहते हैं। चाहें व मंत्री हों, मुख्यमंत्री हों अथवा नौकरशाही के प्रमुख सचिव या मुख्य सचिव। सबके इर्द-गिर्द फाइल लेकर दिनभर सचिवालय के ही अफसर घूमते हैं। एसे में बहुत से सचिवालय कर्मी शासन के दुलरुआ हो जाते हैं जिसका फायदा वे बखूबी उठा लेते हैं।

सचिवालय कैडर के एक रिटायर्ड विशेश सचिव तो अपने ज़माने में इतने ताकतवर कहे जाते थे की लोग बताते हैं की उनकी शिकायत पर कई जिलों के कलेक्टरों के भी तबादले हो जाया करते थे। हमारा मानना है की अगर आपको ईश्वर ने ताकत दी है तो उसे लेकर आग मूतना ठीक नही है। उससे बेहतर है आप उसका सदउपयोग करें। अगर आप दिनभर मुख्य सचिव के पीछे टहल रहे हैं तो आप किसी अधिकारी के लिये दलाली करने के बजाय किसी गरीब की समस्या का निपटारा कर दीजीये। आपको पैसा तो नही मिलेगा पर दुआयें खूब मिलेंगीं।