मंडल-गिरोह ने महिलाओं का ब्रा-हनन कर डाला

: बेरोजगार होते ही दिलीप मंडल का सामने आ गया असली चेहरा : नये मुहावरे गढ़े गये हैं कि कर दी न,ब्राह्म्‍णों वाली बात, और नहाओ, धोओ। क्‍या ब्राह्मण की तरह मुंह बना रखा है : ब्राह्मण को नंगा करने के लिए जो प्रतीक गढ़े हैं इस गिरोह ने, उसका नाम रखा गया है ब्रा हनन :

कुमार सौवीर

लखनऊ : ब्राह्मण जब पतित होने लगता है तो अपने समुदाय के लिए भी कैंसर जैसा घाव पैदा कर देता है। ताजा नजीर हैं दिलीप मण्‍डल। अब यह तो पता नहीं है कि दिलीप मंडल जन्‍मना क्‍या थे, लेकिन इतना जरूर है कि उन्‍होंने शुरूआती जीवन में अध्‍ययन और ब्रह्म पर शोध किया और बाकायदा ब्राह्मण हो गये। तो, दिलीप जब तक पढ़ते-सोचते-लिखते रहे, तब वाकई ब्राह्मण ही थे। इंडिया टुडे जैसी पत्रिकाओं में रहे, लेकिन अचानक पढ़ना-लिखना बंद हुआ तो सोचने का क्रमवार रसातल में रपटने-फिसलने लगा। नतीजा, इंडिया टुडे का साथ छूट गया। किसी और पत्रिकाओं ने उन्‍हें घास नहीं डाली। नतीजा, वैचारिक गंदगी में डुबकी लगाते हुए पूर्णकालिक मूर्खता में जुटे हैं।

आज उन्‍होंने कुछ नये मुहावरे गढ़े हैं। मसलन:-

कर दी न,ब्राह्म्‍णों वाली बात

नहाओ, धोओ। क्‍या ब्राह्मण की तरह मुंह बना रखा है।

ब्राह्मण का कुत्‍ता न घर का, न मंदिर का।

मार-मार कर ब्राह्मण बना दूंगा

ब्राह्मण की बुद्धि घुटने में होती है। वगैरह-वगैरह।

आज उनकी वाल पर उन्‍होंने और उनकी टोली ने ब्राह्मणों के खिलाफ एक नया शब्‍द गढ़ लिया है। ब्रा हनन। यानी स्‍तनों को नंगा कर देना।

आपको बता दें कि बौद्धिक चिंतन से जुड़े समुदाय में दिलीप मंडल का नाम एक घटिया सोच के तौर पर दर्ज है। वे समाज सुधार नहीं, समाज को सड़ा-गला डालने की वकालत करते हैं। लेकिन अपने भावातिरेक में मंडल और उनके यार यह भूल गये हैं कि ब्रा तो अब हर जाति की महिलाएं पहनती हैं।

सच बात तो यही है कि इस सोच ने ब्राह्मण पर हमला किया है अथवा नहीं, लेकिन उनकी विष-बौछार सभी समुदाय और जाति की महिलाओं पर अनिवार्य रूप से पड़ी है। ऐसे मुहावरे गढ़ने वालों के घर में भी यही मुहावरा लागू हो सकता है, काश वे यह समझ सकते।

बहरहाल, इस घटना से इतना तो तय हो ही गया है कि जाति नजरिया से समाज सुधारने का दम्‍भ-घमंड पाले लोगों की मानसिकता महिलाओं पर स्‍नेहशील नहीं, आक्रामक और बलात्‍कारी ही होती है।