अमर उजाला ने मेधावियों में बजाया यौन-डॉक्‍टर का डंका

: अमर उजाला की गजब पहल, सीबीएसई के मेधावी बच्चों को बाजारू यौन-विशेषज्ञों के विज्ञापनों से रू-ब-रू कराया : श्रेष्ठतम नंबर के साथ उत्‍तीर्ण मेधावियों की खबर के साथ खिचड़ी पका डाली यौन चिकित्सक के साथ : पैसा कमाने की मशीन बन गए अखबार अब बेशर्मी की हर सीमा पार करने पर आमादा :

कुमार सौवीर

सोनभद्र : पिछले दिनों मैं सोनभद्र में था। पत्रकारिता दिवस पर आयोजित एक समारोह में वक्‍ता के तौर पर मुझे बुलाया गया था। उस दौरान अमर उजाला अखबार के पन्‍ने पलटते मैं चौंक पड़ा। आप भी अब जरा देखिये कि किस तरह मेधावी बच्चे अपने सपने बुनने का ऐलान कर रहे हैं, और दूसरी ओर अमर उजाला उन्हें यौन-समस्याओं का बेशर्मी के साथ ककहरा सिखा रहा है।

दृश्य-एक :- सीबीएसई का रिजल्ट निकल गया है। अच्छे नंबरों पर पास सारे बच्चे झूम रहे हैं। पत्रकारों से अपनी खुशी बांट रहे हैं यह मेधावी बच्‍चे, और बता रहे हैं कि वह भविष्य में क्या बनना चाहेंगे। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर बनना चाहता है, तो कोई आईएएस और आईपीएस बन कर देश की सेवा करना चाहता है। अपनी मेहनत की जीत वाली मस्ती और खुशियों का सैलाब बह रहा है।

दृश्‍य-दो :- अमर उजाला के विज्ञापनवाले इस मौके पर दोनों हाथों से पैसा बटोर रहे हैं। हर बिकाऊ चीज बेचने वाले हर शख्स या संस्‍थान से विज्ञापन लिया जा रहा है। रकम गिनी जा रही है। विज्ञापन बुक हो रहे हैं। पेज की सजावट तैयार की जा रही है। तय किया जा रहा है कि कौन सा विज्ञापन किस पेज पर लगाया जाएगा, ताकि एक खास पाठक वर्ग को आकर्षित कर अपने कस्‍टमर को प्रभावित कर सके। जाहिर है कि हर तरफ विशुद्ध व्‍यावसायिक एक खास एजेंडे के तहत काम चल रहा है।

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दृश्य-तीन : 30 मई के अखबार में यह दोनों ही एकसाथ छप गये हैं। पहले दृश्‍य के साथ ही साथ दूसरे दृश्य का मैटर भी एक ही पेज पर प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। लेकिन दोनों ही आमने-सामने और एक दूसरे को चुनौती देते हुए दिख रहे हैं। एक ही पन्ने पर यौन रोग, पतलापन, धात गिरना, लिंग छोटा होना, कमजोरी आना, बेचैनी और यौन समस्याओं के इलाज के शर्तिया ठेकेदार जैन क्लीनिक वालों का पूरे एक कॉलम का लम्‍बा विज्ञापन छप गया है। और उसके बगल में ही छपा है उन मेधावी बच्चों के सपने, उनकी कल्पनाएं, उनकी प्राप्तियां, उनकी खुशी और उनके हौसलों का पूरा जिक्र।

सवाल यह है आखिरकार अमर उजाला क्या दिखाना चाहता है। जाहिर है कि इस दृश्य-दो को देखकर दृश्‍य-एक वाले बच्‍चों का अपने सपनों से विचलित हो जाएगा और वह जैन क्लीनिक का अता-पता, नंबर और अपने शारीरिक बनावट की जांच पड़ताल में जुड़ जाएगा। इन हालातों में कोई भी बच्‍चा बाध्‍य हो जाएगा कि वह जैन क्लिनिक वाले विज्ञापन पर प्रभावित हो जाए। ऐसे में उसका अध्‍ययन, उसके सपने, उसकी कल्‍पनाएं, उसकी निष्‍ठा, समर्पण वगैरह काफी कुछ तबाह होगा।

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सोनांचल

दोस्तों यह बहुत बुरी स्थिति है। हम एक तरफ तो अखबार के नाम पर स्वच्छता और पारिवारिक माहौल देने के दावे करते हैं लेकिन साथ ही साथ नये उदीयमान मेधावियों को विचलित करने की साजिश भी कर रहे हैं। वह भी चंद पैसों के लिए। शर्म की बात है कि अमर उजाला में इस विज्ञापन को किसी अन्य पृष्ठ पर छापने के बजाय, सीधे उन मेधावियों के पास ही ठीक सामने पेश कर दिया। क्या एक साजिश के तहत था कि वह मेधावियों को उस तथाकथित यौन-विशेषज्ञ वाले जैन क्लीनिक के भविष्‍य के उपभोक्ता में तब्दील करना चाहता है।