वहाबी देवबंद का फतवा, धत्‍त शिया कहीं के

: देवबंद से हुआ मुसलमानों में बंटवारा की साजिश, दारूल उलूम का फतवा जारी : तीन मौलवियों ने ऐलान किया है कि शियाओं की शादी या इफ्तार पार्टी में न जाएं सुन्नी मुसलमान :  इसके पहले बैंककर्मियों से शादी, हस्‍तमैथुन और वीर्यपात जैसे मसलों पर भी फतवे जारी कर चुका है देवबंद :

कुमार सौवीर

लखनऊ : फतवों की नगरी सहारनपुर को लेकर फिर एक नया हंगामा खड़ा कर दिया है वहां के दारुल उलूम ने। आज जारी एक नये फतवे पर मुफ्तियों ने साफ कहा है कि सुन्नी मुसलमानों को उनके यहां खाने-पीने ही नहीं, उनके यहां जाने तक से परहेज करना चाहिए। शरीयत का हवाला देते हुए यहां के तीन मुफ्तियों ने इस फतवे को जारी किया है। फतवे में सुन्नियों को सलाह जारी है कि वे शिया मसलक को मानने वालों के यहां इफ्तार पार्टी या शादी की दावत में जाने से परहेज किया जाना चाहिए। गौरतलब बात है कि यह पहला मौका है जब दारूल उलूम ने धार्मिक उन्‍माद बढ़ाने तथा मुसलमानों को बांटने की साजिश की है, जिसका जाहिरा असर शिया और सुन्‍नी समुदायों के बीच गहरी खाई करने में दिखेगा।

खुद को शुद्ध, असली और शुचितावादी वहाबी मुसलमानों के शिक्षा-केंद्र कहलाने का दावा करने वाले देवबंद दारुल उलूम से जारी हुए इस फतवे पर मुफ्तियों ने शरीयत का हवाला देते हुए साफ कहा कि सुन्नी मुसलमानों को उनके यहां जाने में परहेज करना चाहिए। उनके हिसाब से ऐसा करना शरीयत के खिलाफ और गैरइस्‍लामी हरकत होगी।

यह पहला मौका है जब देवबंद ने मुसलमानों के बीच भी एक गहरी खाई खोद डाली है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि देवबंद के फतवों पर विवाद नहीं खड़ा हुआ है, लेकिन कभी भी देवबंद ने सुन्‍नी और शियाओं के बीच बंटवारे की कोई हरकत खुलेआम नहीं की है। देवबंद के फतवे इसके पहले काफी चटखारेदार माने जाते रहे हैं। मसलन, हस्‍तमैथुन और सहवास से जुड़ी कई निजी मामलों पर भी देवबंदी फतवों पर काफी विरोध हो चुका है। लेकिन जानकार बताते हैं कि देवबंद के इस ताजा फैसले से शिया और सुन्‍नी समुदायों में काफी दूरी फैल जाएगी। हालांकि इस फतवे पर मुसलमानों के बीच भी काफी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। कई प्रमुख मुसलमान नेताओं, लेखकों और पत्रकारों ने भी देवबंद के इस फतवे पर कड़ी निंदा की है।

फतवा का सवाल यहां के मोहल्ला बड़जिया उलहक निवासी सिकंदर अली ने उठाया था। दारुल उलूम में स्थित फतवा विभाग के मुफ्तियों से लिखित में सिकंदर ने सवाल पूछा था कि शिया समुदाय के लोग रमजान-उल-मुबारक में रोजा इफ्तार की दावत करते हैं। इस रौशनी में सवाल यह उठाया गया था कि शियाओं के रोजा इफ्तार समारोहों में क्या सुन्नी मुसलमान का इसमें शरीक होना जायज है अथवा नहीं? जबकि दूसरे सवाल में पूछा है कि शिया हजरात के यहां शादी वगैरह के मौके पर जाना और वहां खाना कैसा है?

इस सवाल के जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने जवाब में कहा है कि दावत चाहे इफ्तार की हो या फिर शादी की शियाओं की दावत में सुन्नी मुसलमानों को खाने पीने से परहेज करना चाहिए।

हैरत की बात यह है कि यह फतवा तब जारी हुआ है, जब पहले से ही शिया और सुन्नी मुसलामानों के बीच इस्लामी मसले को लेकर विवाद चला आ रहा है। ऐसे में शिया मुसलामानों के यहां दावत में जाने को लेकर पूछे गए सवाल और उस पर दारुल उलूम के मुफ्तियों द्वारा दिए गए जवाब से एक नई बहस भी छिड़ सकती है।

फतवों की राजनीति बहुत घटिया होती है। अक्‍सर तो ऐसे फतवे निहायत मूर्खतापूर्ण, अराजक, विषयहीन, बेहूदे और सामाजिक तन्‍तुओं को किसी भयावह कैंसर की तरह कत्‍ल कर डालने वाले हैं। उससे जुड़ी बाकी खबरों को पढ़ने के लिए कृपया नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक कर दीजिए:-

हंगामी फतवा