लो विकास-पुरूष ! तुम्‍हारे यूपी में भूख से बिलखते दो मासूम बच्‍चों समेत एक मां ने आत्‍मदाह कर लिया

: उत्‍तम प्रदेश में भूखमरी, एक माँ ने अपने दो मासुम बच्चों के साथ खुदकुशी : घर का कंगाल चूल्‍हा बयान करता है इस रोंगटे खड़े वाले इस हादसे की असलियत : जौनपुर प्रशासन अब इस हादसे को दबाने की साजिश में जुटा : एडीएम उमाकांत झूठ बोल रहा, बीपीएल का कार्ड तक नहीं बना था बाबर घर :

रियाजुल हक

जौनपुर : पिछले हफ्ते किरतराय गाँव में रूखसाना अपने दो बच्चों के साथ जल मरी। ऐसा लगा कि सरकारी योजनाएं भी उसके साथ ही जल गईं। गरीबों का पेट पालने का दावा करने वाली सरकारों को इस घटना ने आइना दिखा दिया। घर का सूखा और कंगाल चूल्‍हा इस दर्दनाक व निर्मम सामाजिक-राजनीतिक और प्रशासनिक हत्‍या का बयान कर रहा है। जबकि प्रशासन अब इस मामले की आग पर झूठ का पानी फेंक रहा है।

यह मामला यहां के मडि़याहूं के सुरेरी इलाके का है। पेट की आग बुझाने के लिए इस परिवार के पास कोई सहारा नहीं था। मंदबुद्धि बाबर पल्लेदारी करता है, जो थोड़ा बहुत कमाता उसी से पत्नी व बच्चों का पेट पालता था। उसके पास अंत्योदय व पात्र गृहस्थी कार्ड भी नहीं था, जिससे सस्ते दर पर सरकारी अनाज घर आता। कभी गाँव का कोई व्यक्ति कोटेदार से सिफारिश कर देता तो थोड़ा सा केरोसिन मिल जाता। इससे भी बमुश्किल घर में रोशनी आ पाती। मां मीना के पास एक राशन कार्ड है, लेकिन घर से अलग रहने के कारण उसका एक भी दाना बाबर के परिवार को नहीं मिलता। घर में फाका होता तो बच्चों का रोना रूखसाना को कलेजा छलनी कर जाता। इसी बात पर उसका पति से झगड़ा भी होता। रविवार को रूखसाना ने आखिरकार दुख भरी जिदगी से नाता तोड़ लिया।साथ ही अपने दोनों बच्चों को भी इस दुनिया से लेती गई।

जाँच में जुटा प्रशासन, नतीजा होगा टांय टांय फिस्‍स।

एडीएम उमाकांत त्रिपाठी ने बताया कि एसडीएम और तहसीलदार को मौके पर भेजा गया है। जाँच हो रही है कि आत्महत्या की वजह क्या थी। जल्द ही नतीजा सामने आ जाएगा। लेकिन प्रथम दृष्टि से तो मौत का कारण भुखमरी ही थी। अब प्रशासन अपनी नकामी छुपाने के लिए चाहे जो बताये। सबसे बड़ा सवाल यह है कि घर घर अन्त्योदय की जाँच कराने वाला प्रशासन अमीरों का कार्ड तो बनवा दे रहा है, पर जो उसके असली हकदार है वो आज भी अपने हाथो मे राशन कार्ड का आनलाइन भरा फार्म लेकर जिला पुर्ति कार्यालय का चक्कर काट रहे है। सरकारी तंत्र कोटेदार एवं जिला प्रशासन की मिली भगत से अमीरो के घरो मे तो राशन भरवा रहा है और जो अन्त्‍योदय के असली हकदार है वो आत्महत्या करने पर मजबुर है। और जिला प्रशासन एवं जनता के नुमाइदे अपनी अपनी जेबे गर्म करने के फेर मे है।गरीब ऐसे ही पेट भरने के लिए मरता रहा है और मरता रहेगा।

शर्मनाक। यदि कारण भुखमरी ही है तो रुखसाना के पडोसी, रिस्तेदार, गांव के प्रधान सभी को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। एक बेबस महिला का चूल्हा नहीं जल सका। बहुत खुदगर्ज होता जा रहा है समाज।