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देवरिया का सपाइ जिला पंचायत अध्‍यक्ष फरार

: पुलिस ने किया गिरफ्तारी पर दस हजार रुपयों का ईनाम : जिला पंचायत अध्यक्ष है राम प्रवेश यादव, भाजपा में खोला सपा के खिलाफ मोर्चा : रामप्रवेश की मां और पत्नी को पुलिस ने हिरासत में रखा :

गौरव कुशवाहा
देवरिया :
अपहरण कर 10 करोड़ की संपत्ति का जबरन बैनामा कराने का मास्टरमाइंड 10 हजार का इनामी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव अभी भी फरार चल रहा हैं। इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष की माँ मेवाती देवी पत्नी सीमा सिंह और गांव के एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही हैं।अध्यक्ष के भाई समेत 4 लोगों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी हैं।
जिले में उप निबंधन कार्यालय और भूमाफिया के अवैध संबंध उजागर हुए हैं। फरार चल रहे सपा नेता व जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव उर्फ बबलू यादव ने अपने ऊची रसूख के चलते 10 करोड़ की संपत्ति का बैनामा महज 10 लाख के स्टांप पर करा लिया।बकाया लगभग 69 लाख के स्टांप बाद में लगाने की मंजूरी भी ले ली। बहरहाल स्टांप की कमी के कारण पंजीकरण अभी अधूरा हैं।वहीं मामले की गंभीरता देख सहायक आयुक्त स्टांप ने स्टांप एक्ट के तहत केस दर्ज कर दिया है।
पहचान गुप्त रखने के शर्त पर रजिस्ट्री आफिस एक कर्मचारी ने प्रमुख न्यूज़ पोर्टल मेरीबीटिया डॉट कॉम से बताया कि जिला पंचायत अध्यक्ष और रजिस्ट्री आफिस के जिम्मेदारों के मिली भगत के बिना ऐसा संभव ही नही है कि लगभग 80 लाख के स्टांप में सिर्फ दस लाख के स्टांप लगा के बैनामा करा लिया जाए।लेकिन इस मामले में उप निबन्धन कार्यालय द्वारा अध्यक्ष पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गयी है।जो कार्यालय के उच्च अधिकारियों की सहभागिता के बिना संभव नही हैं।इस पूरे मामले में उप निबन्धन कार्यालय के अधिकारी भूमाफिया से मिले हुए हैं।
वही सहायक आयुक्त स्टांप ने बताया कि सब रजिस्ट्रार फूलचंद्र यादव और प्रभारी सब रजिस्ट्रार सोमनाथ रॉव से बैनामे में संलिप्तता पर स्पष्टीकरण मांगा गया हैं।साथ ही रिपोर्ट प्रमुख सचिव को भेज दी गई हैं।
दूसरी ओर पुलिस ने जिला पंचायत अध्यक्ष के करीबी चार जिला पंचायत सदस्यों को अपने रडार पर ले लिया हैं।जिनकी पूरी गतिविधियों पर पुलिस की नजर हैं।वही सूत्रों का दावा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के राहत एवं बचाव कार्य मे सत्ताधारी दल के दिग्गज नेता एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।पत्रकारिता के मुखबिरों का कहना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव भाजपा के किसी दिग्गज नेता के संरक्षण में हैं।
शनिवार को क्राइम ब्रांच और कोतवाली पुलिस ने उप निबन्धन कार्यलय में छापेमारी कर सब रजिस्ट्रार फूलचंद यादव समेत चार लोगों को हिरासत में ले लिया हैं।जिनसे कोतवाली पहुंच एसपी रोहन पी कनय ने घण्टों पूछताछ की।इस पूरे मामले पर जिले के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि सत्ता दल के कुछ दिग्गज नेता एसपी रोहन पी कनय के जांच को प्रभावित करने में लगे हैं।अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाय तो निबन्धन कार्यलय के अधिकारियों कर्मचारियों के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष के मिलीभगत उजागर हो जायेंगे।

लखनऊ का बड़ा दारोगा सोता नहीं, मनन करता है

: समारोह में सोते हुए देखे गए बड़े दरोगा, पोल खुली तो महकमा को हलकान कर दिया : बनियों-व्यवसाइयों ने बड़े दरोगा को मक्खन लगाने को कराया था सम्मेलन : सम्मान से पहले ही कई दरोगा समेत कुछ लोग खर्राटे भरने लगे :

कुमार सौवीर
लखनऊ :
बड़े दारोगा को शौक है खुद को चुस्त-चौकस होने का ढिंढोरा सुनने का। अक्सर ऐसे लोगों का जुमला होता है कि वे 24 घंटों में 36 घंटों तक का काम करते हैं। लेकिन जब कोई आपके किसी ऐसे दमन पर छींट खोज लाये तो क्या होगा?
जी हां, वही होगा, जो जुहेर का हुआ। मामला था बड़े दरोगा का। सल्तनत उसी की थी, एमजीआर उस जुहेर ने नुक्ता खोज लिया। बात बिगड़ गई। मचा हल्ला और हंगामा। तलब किया गया जुहेर। कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, छीछालेदर की धमकियां दी गईं। माफी मंगवाई गयी। उसके बाद ही बड़ा दारोगा खुश हो पाया।
तो पहले किस्सा संक्षेप में समझ लीजिए। एक पत्रकार हैं, जो जोशीले हैं, संघर्षशील है, खबर की तमीज है, खबर सूघने का शऊर है, लिखने का तरीका है, खबर सुनने का सलीका है और मेहनत बेहिसाब। किसी से डरते और झुकते नहीं, खबर चाहे किसी की हो लिखेंगे जरूर।
उनकी यही बदतमीजी उन पर पिछले दिनों काफी भारी पड़ गई है। उनकी इसी बदतमीजी के चक्कर में उन्हें न्यूज़ संस्थान से भी हटा दिया गया। कहा तो यहां तक गया था कि बड़ा दरोगा ही उसके पीछे पड़ा था। नतीजा यह हुआ कि उस चैनल के ब्यूरो चीफ के पास फोन आया। फोन आया तो उसने खुद ही वह ब्यूरो चीफ पकैया-पकैया चलकर बड़े दरोगा के घर पहुंचा और फर्शी  कोर्निश करके बोला:-हुजूर, क्या गड़बड़ हो गई ? हुकुम करो?
बड़े दारोगा ने ब्यूरो चीफ से हुकुम दिया कि: उस रिपोर्टर को फौरन से पेश्तर अपने दफ्तर से लात मार कर ऐसे बाहर निकाल करो, जो जिल्लेजिलाही तक आवाज बा बुलंद पहुंचे। नतीजा इस रिपोर्टर के पिछवाड़े पर जो गजब लात पड़ी कि बड़ा दरोगा अलमस्त हो गया।
जी हां, वह गरीब , मेहनती, जुझारू रिपोर्टर उसी वक्त निकाल दिया गया चैनल से।
तो कल अमीनाबाद में अमीनाबाद के व्यापारियों ने एक सम्मेलन आयोजित किया था यह सम्मान सम्मेलन था सम्मान होना था लखनऊ के बड़े दरोगा यानी SSP दीपक कुमार का अलग या कोई भी नहीं समझ पा रहा है यह सम्मान किस बात पर हुआ ऐसा कौन सा काम पुलिस ने कर दिया अमीनाबाद में जिसके लिए व्यापारियों ने दीपक को सम्मान कर दिया जाहिर है कि मामला तेल मालिश कर खुशामद का।
एक सूत्र बताते हैं कि अमीनाबाद के इस्पेक्टर साहब ने दीपक कुमार को खुश करने के लिए अमीनाबाद के धंधेबाजों को बुलाया था और कहा कि बड़े दरोगा को सम्मानित कर दो तो वह खुश हो जाएंगे। और जब खुश हो जाएंगे, तो चूँकि यह मेरा हल्का है इसलिए वह मुझसे भी खुश हो जाएंगे। और जब मैं खुश हो जाऊंगा तो मैं तुम व्यापारियों को खुश कर दूंगा। एक धांसू खबर बन जाएगी दुनिया-जहान में तारीफ की। तुम मेरी पीठ खुजला देना, और मैं तुम्हारी पीठ खुजला दूंगा।
व्यापारियों की समझ में आ गया और बड़े दरोगा को सम्मानित करने के लिए यह समारोह आयोजित कर लिया
समारोह में बड़े दरोगा आए। माला-शाला पहना, गुलदस्ता पकड़ा, इधर-उधर बोतल से पानी निकाल पर पानी पिया, कुतरा कुछ बिस्कुट-काजू, मोबाइल पर सर्फिंग की। इसी बीच सरकार-बहादुर को नींद आ गयी, और लगे खर्राटे लेना। एक पत्रकार ने उनके सोते वक्त की फोटो खींच ली। फोटो मिली तो पत्रकार ने उस पर खबर लिख दी। तो बस तहलका मच गया।

मैं आंख बंद कर मनन करता हूँ, बोले लखनऊ के बड़े दारोगा

कलम पर कहर, पत्रकार का कचूमर निकालेगी पुलिस

: पत्रकारों को धमका रही लखनऊ की पुलिस : लखनऊ के पत्रकार जुहेब आलम की रिपोर्ट पर बौखलायी पुलिस, व्यापारियों से लिखवाई गजब अर्जी : खबर है कि खबर लिखने वाले पत्रकार का टेंटुआ दबोचा जाएगा :

कुमार सौवीर
लखनऊ :
5  मई को गणेश गंज में व्यापारीयों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में झपकी ले रहे एसएसपी लखनऊ की वीडिओ
सोशल मीडिया पर प्रसारित क्या कर दी, पुलिस वालों के गुस्से का पारा थर्मामीटर फोड़ने पर आमादा लगता है। अपराधों को दबाने-छुपाने में माहिर पुलिस ने जब अपने बड़े दारोगा पर छींटें पड़ती देखीं, तो अपनी असलियत पर उतर पड़ी पुलिस और उसके कारिंदे। खबर है कि खबर लिखने वाले पत्रकार का टेंटुआ दबोचा जाएगा।
आपको बता दें कि अमीनाबाद के व्यवसाइयों ने लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार का सम्मान करने के लिए एक समारोह आयोजित किया था।सूत्र बताते हैं कि इस समारोह में बड़े दरोगा जी लगे थे झपकी लेने। एक फोटोग्राफर ने फोटो खींची तो एक रिपोर्टर ने उस पर खबर चेंप दी।
फिर क्या ? मच गया हंगामा।
होना भी था। बड़े दरोगा बिगड़ पड़े मातहतों पर। छोटे अफसरों की चूड़ी टाइट होने लगी तो छुट भइया अफसर अपना चेत छोड़ कर रिपोर्टर की चमड़ी उतारने में जुट गए। खोज शुरुआत हुई रिपोर्टर की खबर हटवाने की। नया नया न्यूज पोर्टल था, हड़क गया। उसने हटा दी खबर। मगर इसपर भी चैन नही मिला पुलिस को। पेशी कराई गई बड़े दरोगा के सामने। हड़काया गया पत्रकार। दीपक कुमार का दावा था कि वे सो नही रहे थे, बल्कि चिंतन-मनन में बिजी थे।
उधर उसके पहले आनन फानन में व्यापारीयों ने तहरीर अमीनाबाद पुलिस को दे दी थी कि यह गड़बड़ जुहेब आलम ने की है। उधर जुहेब आलम ने यू ट्यूब वीडिओ से वह खबर भी हटा दी।
लखनऊ पुलिस ने टविटर पर पत्रकार जुहेब आलम को व्यक्ति लिख दिया है,  पत्रकार नहीं ।  व  पत्रकार जुहेब आलम की वीडिओ /खबर  को भ्रामक होने का ऐलान कर दिया जब इस मामले में इंस्पेक्टर अमीनाबाद से पूछा गया की पत्रकार जुहेब आलम को कौन कौन सी धाराओं में निरुद्ध किया है ? तो इंस्पेक्टर अमीनाबाद  का कहना था की अभी तहरीर आई है जाँच होगी। 
लखनऊ पुलिस  यह बताने की मेहरबानी करेगी की बगैर जाँच के खबर  को भ्रामक होने का ऐलान कैसे कर दिया? एसएसपी लखनऊ सो रहे थे या झपकी ले रहे रहे थे ?
बहरहाल, दबाव बहुत पड़ा तो जुहेब ने माफीनामा लिख कर एसएसपी दीपक को दे दिया।

कुड़ुक हो गया है लोकसेवा आयोग, नौकरी नहीं देता

: अब तो  सुनहरे सपनों को कत्‍ल करने पर आमादा है लाखों छात्रों का भविष्‍य छानने वाला उप्र लोकसेवा आयोग : एक अध्‍यक्ष और सात सदस्‍य आखिर इलाहाबाद में कितने मच्‍छर मार रहे हैं : पांच बरस से सिर्फ धांधली और बेहिसाब काहिली : युवकों के भविष्‍य, बनाम योगी जी का घण्‍टा - दो :

कुमार सौवीर

लखनऊ : कोई मुर्गी जब कुड़ुक हो जाती है, यानी हमेशा-हमेशा के लिए अंडा देना बंद कर देती है, तो उसका हश्र अगले ही दिन उसके गोश्‍त से तैयार बोटी-कबाब के तौर पर सामने आ जाता है। ठीक यही हालत बिजली के ट्रांसफार्मर अथवा नलकूप या ट्यूबवेल की भी होती है, जब उनके फेल होते ही उन्‍हें तत्‍काल उखाड़ कर दूसरा नयी मशीन स्‍थापित कर दी जाती है। इतना ही नहीं, कोई कर्मचारी जब अपने दायित्‍वों को पूरा करने में असफल हो जाता है, उसकी नाकारा हरकतें हद पार कर चुकी हैं, तो फिर पहले तो निलंबित और फिर बर्खास्‍त कर दिया जाता है।

मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की बात और है। वे विशाल हृदय के नेता हैं, कुछ भी सहन कर सकते हैं। यह भी सहन कर सकते हैं कि उनके युवाओं के सपनों की सामूहिक नृशंस हत्‍याएं हो रही हैं। वे देख रहे हैं कि उनके खुद के संकल्‍प धूल-धूसरित होते जा रहे हैं, और इसके लिए जिम्‍मेदार अफसर लोग लगातार मस्‍ती और हरामखोरी पर आमादा हैं। वे यह भी बर्दाश्‍त कर सकते हैं कि अगले ही बरस यानी 2019 में लोकसभा का आम चुनाव है, जिसमें भाजपा ही नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्‍य नाथ की प्रतिष्‍ठा दांव पर लग सकते है।

जी हां, यह मामला है उप्र लोक सेवा आयोग की बेशर्मी का। पिछले पांच बरसों से यह आयोग बाकायदा किसी सफेद हाथी की तरह होनहार युवाओं के भविष्‍य को खाता-चरता जा रहा है, लेकिन अपनी स्‍थापना के मकसदों से यह आयोग कोसों-योजनों दूर हो चुका है। पिछले तीन बरस से इस आयोग ने कोई परीक्षा ही आयोजित नहीं की है। तीन बरस पहले पीसीएस की परीक्षा तो हो गयी, लेकिन उसका रिजल्‍ट तक नहीं सार्वजनिक कर पाया है यह उप्र लोकसेवा आयोग।

वहज है बेईमानी, काहिली, नाकारा पन, भ्रष्‍टाचार और धांधली के कारनामे। पहले पांच साल तो धांधली के आरोप लगे और अब लगातार एक साल से परीक्षा का पूरा कार्यक्रम बेपटरी हो चुका है। रुकी पड़ी है पीसीएस 2016/2017 व 2018 की भर्ती। शर्मनाक बात तो यह है कि इस आयोग ने लोकसेवा आयोग का परीक्षा पैटर्न तो अपना लिया मगर उप्र लोकसेवा आयोग ने लोकसेवा आयोग की नियमितता के पैटर्न पर एक बार भी महसूस करने की कोशिश नहीं की है।

आपको बता दें कि हाल ही मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने ऐलान किया था कि जल्‍द ही पांच लाख से ज्‍यादा नौकरियां भरी जाएंगी। उधर संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ ने भी घोषणा की थी कि भारत में तत्‍काल रूप से कम से कम 98 लाख नौकरियों की सख्‍त जरूरत है। लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि उप्र लोकसेवा आयोग जैसी संस्‍थाओं की काहिलियत के कारण ऐसे लक्ष्‍य कैसे अपने मुकाम तक पहुंच सकेंगे। (क्रमश:)

किसी भी युवक-युवती की कल्‍पनाओं में सबसे श्रेष्‍ठ काम होता है अपनी कल्‍पनाओं को पंख देना। इसके लिए प्रतिभागी लोग अपनी जान लगा देते हैं। प्राण-प्रण से मेहनत करते हैं। ताकि उनके सपनों को किसी सम्‍मानित मुकाम पर जगह मिल जाए। लेकिन ऐसे सपनों को अमल में लाने के पहले औपचारिक परीक्षाओं का संचालन करने वाली संस्‍था इस वक्‍त नपुंसक साबित होती दिख रही है। पिछले तीन बरसों से जिस तरह यूपी लोकसेवा आयोग ने लाखों प्रतिभागियों के साथ जो बेशर्मी और आपराधिक हरकतें की हैं, वह अकल्‍पनीय है। इस पूरे दौरान अपनी हरकतों से इस आयोग पर प्रतिभागियों का गुस्‍सा बेहद बरस रहा है। वह तो बड़प्‍पन तो इन प्रतिभागियों का है कि वे पूरे संयम के साथ खामोश है, वरना न जाने क्‍या हो जाता।

वैसे भी उप्र का लोकसेवा आयोग हमेशा से ही विवादों में घिरा ही रहा है। आज अपनी पूर्व निर्धारित परीक्षा का कलेंडर 24 जून का कार्यक्रम भी अनिश्चित काल के लिए स्‍थगित कर इस आयोग ने साबित कर दिया है कि लाखों प्रतिभागियों के भविष्‍य के प्रति उनका कोई भी लेनादेना नहीं है। हम इसी मसले को श्रंखलाबद्ध तरीके से प्रकाशित करने जा रहे हैं। आज से उसकी बाकी कडि़यों का प्रकाशन नियमित रूपे से किया जाएगा। आपको इस बारे में कोई भी जानकारी हो, आयोग का कोई पक्ष हो, कोई अन्‍य जानकारी हो, तो उसे हमें तत्‍काल बताइयेगा। हम उसे अपने प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरीबिटिया डॉट कॉम पर पूरे सम्‍मान के साथ और अनिवार्य रूप से प्रकाशित करेंगे।

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प्रतिभागियों के भविष्‍य का कत्‍लगाह

उप्र लोकसेवा आयोग: तीन सत्र शून्‍य, परीक्षा फिर टली

: फिर लटका दिया 24 जून से शुरू होने वाला परीक्षा कलेंडर, उप्र लोकसेवा आयोग की करतूतों से लाखों युवा बेहाल : सन-16 में हुई पीसीएस की परीक्षा का नतीजा अब तक सार्वजनिक नहीं कर पाया है बेशर्म आयोग : युवकों के भविष्‍य, बनाम योगी जी का घण्‍टा - एक :

कुमार सौवीर

लखनऊ : है पीर परवत सी पिघलनी चाहिये, इस हिमालय से कोई नयी गंगा अब निकलनी चाहिये। दुष्यंत कुमार की ये कविता उप्र लोक सेवा आयोग पर फिट बैठती हैं। एक तरफ परीक्षार्थी बेहाल हैं, उनकी उम्र बीतती जा रही है और बढ़ती उम्र के साथ उनका साहस भी जवाब दे रहा है वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग अपनी कछुए की चाल चलने में मस्त है। बेखुदी का आलम यहां तक पहुंच चुका है कि तीन बरस से लाखों युवकों के सपने लगातार कत्‍ल किये जा रहे हैं। लेकिन आयोग अपनी कुम्‍भकर्णी नींद नहीं तोड़ पा रहा है। बेशर्मी यहां तक है कि सन-16 में हुई पीसीएस परीक्षा का रिजल्‍ट तक यह आयोग घोषित नहीं कर पाया है। और अब आज जब आयोग ने ऐलान किया है कि वह अपने पूर्व-घोषित कलेंडर पर भी परीक्षाएं नहीं कर पायेगा, तो इन प्रतिभागियों का दिल ही धक्‍क से रह गया।

आपको बता दें कि दिसंबर 2017 में आयोग ने साल 2018 में होने वाली अपनी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया था। उस कैलेंडर में साफ लिखा था की पीसीएस 2018 की प्रारंभिक परीक्षा 24 जून 2018 को कराई जायेगी। सब परीक्षार्थी जमकर तैय्यारी में लग गये। पर कल शाम को आयोग द्वारा जारी की गई एक नोटिस से परीक्षार्थीयों में गुस्से का माहौल है। उस नोटिस में लिखा है की 24 जून को होने वाली पीसीएस 2018 की प्रारंभिक परीक्षा टाल दी गई है।

आपको जानकर हैरानी होगी की पीसीएस 2016, जिसकी मुख्य परीक्षा सितंबर 2016 में कराई गई थी, उसकी मुख्य परीक्षा का परिणाम आजतक आयोग ने घोषित नही किया है। मतलब दो साल होने को आ गये पर अब तक कोई परिणाम नही दिया गया। यही हाल पीसीएस 2017 की परीक्षा का है। इसकी प्रारंभिक परीक्षा सितंबर 2017 में कराई गई थी और मुख्य परीक्षा भी 17 मई से होना संभावित है परंतू जानकार कह रहे हैं की आयोग किसी भी सूरत में ये परीक्षा 17 मई से नही करा पायेगा।

इतने पर ही रुक जाते तो भी ठीक था, पर आयोग ने तो बेशर्मी की सारे हदें तब पार कर दीं जब उसने पीसीएस 2018 की प्रारंभिक परीक्षा जो 24 जून को होनी प्रस्तावित थी, उसको भी अनिश्चितकाल के लिये टाल दिया है। यानि अब ये परीक्षा 24 जून को नही होगी और फिलहाल कोई नई तारीख भी आयोग ने मुकर्रर नही की है और ना ही इस परीक्षा का विज्ञापन आज तक निकाला है। मतलब प्रदेश की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा के तीन सत्र अधर में लटके हैं। (क्रमश:)

किसी भी युवक-युवती की कल्‍पनाओं में सबसे श्रेष्‍ठ काम होता है अपनी कल्‍पनाओं को पंख देना। इसके लिए प्रतिभागी लोग अपनी जान लगा देते हैं। प्राण-प्रण से मेहनत करते हैं। ताकि उनके सपनों को किसी सम्‍मानित मुकाम पर जगह मिल जाए। लेकिन ऐसे सपनों को अमल में लाने के पहले औपचारिक परीक्षाओं का संचालन करने वाली संस्‍था इस वक्‍त नपुंसक साबित होती दिख रही है। पिछले तीन बरसों से जिस तरह यूपी लोकसेवा आयोग ने लाखों प्रतिभागियों के साथ जो बेशर्मी और आपराधिक हरकतें की हैं, वह अकल्‍पनीय है। इस पूरे दौरान अपनी हरकतों से इस आयोग पर प्रतिभागियों का गुस्‍सा बेहद बरस रहा है। वह तो बड़प्‍पन तो इन प्रतिभागियों का है कि वे पूरे संयम के साथ खामोश है, वरना न जाने क्‍या हो जाता।

वैसे भी उप्र का लोकसेवा आयोग हमेशा से ही विवादों में घिरा ही रहा है। आज अपनी पूर्व निर्धारित परीक्षा का कलेंडर 24 जून का कार्यक्रम भी अनिश्चित काल के लिए स्‍थगित कर इस आयोग ने साबित कर दिया है कि लाखों प्रतिभागियों के भविष्‍य के प्रति उनका कोई भी लेनादेना नहीं है। हम इसी मसले को श्रंखलाबद्ध तरीके से प्रकाशित करने जा रहे हैं। आज से उसकी बाकी कडि़यों का प्रकाशन नियमित रूपे से किया जाएगा। आपको इस बारे में कोई भी जानकारी हो, आयोग का कोई पक्ष हो, कोई अन्‍य जानकारी हो, तो उसे हमें तत्‍काल बताइयेगा। हम उसे अपने प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरीबिटिया डॉट कॉम पर पूरे सम्‍मान के साथ और अनिवार्य रूप से प्रकाशित करेंगे।

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प्रतिभागियों के भविष्‍य का कत्‍लगाह

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