Meri Bitiya

Monday, Sep 24th

Last update02:57:01 PM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

हमारे लिए महत्‍वपूर्ण हैं हमारी बेटियां और इसीलिए है मेरी बिटिया डॉट कॉम

मंत्रीजी ने शादी करायी, दूल्‍हा भाग गया। मचा हंगामा

: मध्‍यप्रदेश की शिवराज सरकार का एक नया कारनामा, पुरातन-रूढि़यों के ढर्रे पर वापस लौट रहे हैं : एमपी पर्यटन विकास के लिए एक नया आध्‍याय बन सकते हैं ऐसे आयोजन, एमपी गजब है, सबसे अलग है : बारिश के लिए मेघदूत का आह्वान करने के लिए मंत्रीजी ने कराया था यह आयोजन :

मेरी बिटिया संवाददाता

छतरपुर : अब आप उस हालत पर क्‍या बोलेंगे कि एक खास आस्‍थागत धार्मिक कार्यक्रम धूमधाम के साथ आयोजित तो हुआ, लेकिन ऐन वक्‍त पर पूरा मामला सरभण्‍ड हो गया। हुआ यह कि एक मंत्री जी ने लोक-कल्‍याण के लिए एक विवाह का आयोजन किया। चूंकि इसमें सरकार के लोग शामिल थे, इसलिए भारी भीड़ जुटी। दूल्‍हे-दुलहन को सजाया, कहारों के सहारे डोली उठायी, जयमाल हुआ, और प्रीतिभोज का भी झमाझम आयोजन हुआ।

लेकिन ऐन विदाई में जब रोना-धोना शुरू हो गया तो फिर एक नया रोना-धोना प्रारम्‍भ हो गया। हुआ यह कि विदाई के वक्‍त ही दूल्‍हा पाण्‍डाल से भाग निकल गया और दुलकी चाल में उचकते-उचकते अपनी पत्‍नी और मौजूद लोगों की मौजूदगी के बावजूद अपनी प्रेमिका के साथ भाग निकला। सरकारी सुरक्षाकर्मियों ने दूल्‍हे को पकड़ने के लिए लपके, लेकिन इसके पहले कि वे सुरक्षाकर्मी उसे दबोच सकते, दूल्‍हा भाग कर एक नाले में घुस गया। उसकी प्रेमिका भी उसके साथ ही बतायी जाती है। खबर है कि इस आयोजन का नेतृत्‍व करने वाली मंत्री जी इस भागा-दौड़ी से काफी हताश हैं। उन्‍हें दूल्‍हे के भागने से उतनी दिक्‍कत नहीं है, जितनी लोक-कल्‍याण की दिशा में हो रहे अपने प्रयासों के असफल हो जाने का।

आपको बता दें कि भाजपा ही असली ताकत तो आस्‍था ही है न, इसलिए भाजपा के अधिकांश कार्यक्रम या आयोजनों का केंद्र हमेशा आस्‍था ही होता है। शर्बत में मिठास की तर्ज पर। अपनी इसी आस्‍था के तहत शिवराज सिंह की भाजपा सरकार में पिछड़ा-कल्‍याण और अल्‍पसंख्‍यक-कल्‍याण विकास विभाग की मंत्री ललिता यादव ने यह विवाह आयोजन किया था। इस अनोखे आयोजन के तहत मेंढ़की और मेंढ़क का विवाह होना था। आपको बता दें कि लोक-रूढि़यों और आस्‍था के अनुसार समय से बारिश न होने पर कई कई तरह के टोने-टोटके आयोजित किये जाते हैं। इसमें से एक प्रमुख टोटका है मेंढक और मेंढकी की शादी करा देना।

तो मंत्री जी द्वारा इस आयोजन में बड़ी संख्‍या में जनता ही नहीं, बल्कि सरकारी लोग भी शामिल थे, झमाझम कार्यक्रम हो गया। विश्‍वस्‍त सूत्र बताते हैं कि स्‍थानीय फूलादेवी मंदिर में यह कार्यक्रम अभी चल ही रहा थाकि अचानक हल्‍ला मच गया। दूल्‍हा एकाएक उचका और सड़क की ओर भागा, अचानक उसे एक अन्‍य मेंढकी दिखायी। दोनों ही एकसाथ उचकने लगे, पुलिसवाले पीछे पड़े थे। बबली और बंटी की स्‍टाइल में। दोनों ही लपक कर एक बड़े नाले में कूद पड़े और उसके बाद वे किस सीवर या नाले गये, पता ही नहीं चला।

बाद में हताश मंत्री ललिता यादव जी की आंखों से आंसू छलक पड़े। फिर फैसला किया गया कि उस मेंढकी को भी उसी नाले में छोड़ कर विदाई की रस्‍म पूरी कर ली जाए।

हालांकि विवाह के बाद मेंढक-मेंढकी की शादी की बात तो सभी मान रहे हैं। स्‍थानीय अखबारों ने भी इस पर खूब कागज रंगे हैं, लेकिन किसी भी अखबार में विवाह के दौरान मेंढक-दूल्‍हे राजा के रफू-चक्‍कर हो जाने की खबर नहीं है। लेकिन इसके बावजू ऐसे अंधविश्‍वास की डगर पर चल रही ललिता यादव और उनकी सरकार इस समय कठघरे में खड़ी हो गयी है।

कन्‍याभ्रूण। डॉक्‍टर एक, सेंटर अनेक, जांचें धकाधक

: न मान्यताप्राप्त डिग्री और न ट्रेनिंग, रेडियोलाजिस्ट के तौर पर अवैध रजिस्‍ट्रेशन हो रहा है पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत : अधिकांश रजिस्‍टर्ड एमडी रेडियोलॉजिस्‍ट को अल्‍ट्रासाउंड का ज्ञान तक संदिग्‍ध : मेरीबिटिया डॉट कॉम की पहल पर निकले डरावने तथ्‍य :

कुमार सौवीर

लखनऊ : ओ हो। तो आप अगर कन्‍या भ्रूण हत्‍या की बढ़ती तादात और उनकी बेतहाशा बढ़ती आशंकाओं को लेकर चिंतित हैं, तो फिर आपको सरकारी कामकाज की शैली पर एक नजर डालनी होगी. मां के पेट पलने वाली अजन्‍मी बेटियों को मौत के घाट तक उतारने के लिए असल जिम्‍मेदार है पीसीपीएनडीटी एक्‍ट का दुरूपयोग जो कि अवैध कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है.

डॉक्‍टरों से जुड़ी खबरों को बांचने में अगर इच्‍छुक हैं, तो कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

डॉक्‍टर

इसका खुलासा तब हुआ जब प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम ने पूरे देश और खास तौर पर यूपी के सभी जिलों में सरकारी कागजों और वहां दर्ज सूचनाओं का जायजा लिया। मेरी बिटिया डॉट कॉम ने इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारियों, मुख्‍य चिकित्‍सा अधीक्षकों, जिलाधिकारियों, पीसीपीएनडीटी के तहत गठित समिति के पदाधिकारियों, सभी मेडिकल कॉलेजों तथा देश के सभी एम्‍स और भारतीय चिकित्‍सा परिषद तथा सभी प्रदेशों के चिकित्‍सा परिषदों से इस बारे में विस्‍तृत जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया था।

इस प्रयास के तहत जो भी सूचनाएं मिलीं, वे हैरतनाक, आश्‍चर्यजनक होने के साथ ही प्रशासनिक व सरकारी कामकाज के बेहद अराजक और खतरनाक स्‍तर तक की थीं। इन सूचनाओं से साफ स्‍पष्‍ट होता है कि कन्‍या भ्रूण के संरक्षण और कन्या भ्रूण हत्‍या के खिलाफ झंडा उठाने वाले पीसीपीएनडीटी कानून के अनुपालन की असलियत क्‍या है। साफ पता चला है कि जिस कानून को कन्या भ्रूणहत्या रोकने के उद्देश्‍य के लिए बनाया और लागू कराया गया था, वह अपंग साबित हो रहा है.

कन्‍या भ्रूण को मां की पेट में ही मार डालने से जुड़ी दर्दनाक घटनाएं और उससे निपटने वाली सरकारी मशीनरी को समझने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

दुर्दशा कन्‍या भ्रूण की

देश में बिना मान्यता प्राप्त डिग्री या ट्रेनिंग के रेडियोलाजिस्ट की श्रेणी में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत गलत रजिस्ट्रेशन करा कर अल्ट्रासाउंड कर रहे अनेक डॉक्टर। CT स्कैन और एमआरआई MRI से भी हो सकती है। लिंग की जांच लेना होगा संज्ञान, लाना होगा पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में।

पेट में पहचान कर मारी जा रही हैं भविष्‍य में स्‍त्री बन सकने वाले कन्‍या-भ्रूण। सड़क-नाले के किनारे गुमटी खोले अप्रशिक्षित और झोलाछाप डॉक्‍टरों की करतूतों पर मेरी बिटिया का एक सशक्‍त हमला। पूरा मामला समझने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

कन्‍या-भ्रूण

अल्ट्रासाउंड करने हेतु डॉक्टर का पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत स्थानीय सीएमओ ऑफिस में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है. यह रजिस्ट्रेशन विभिन्न श्रेणियों में किया जाता है जैसे रेडियोलाजिस्ट, ओब्स् एंड गायनी विशेषज्ञ, अन्य स्नातकोतर डिग्री तथा एमबीबीएस अल्ट्रासाउंड करने के लिए न्यूनतम ६ माह की ट्रेनिंग भी अनिवार्य है जो की पिछले कुछ ही वर्षों से रेडियोलाजिस्ट (केवल एमडी डिग्री) और ओब्स गायनी के पाठ्यक्रम में सम्मिलित है, जब की अन्य डॉक्टर्स को यह अलग से करनी होती है एक्ट के अनुसार डॉक्टर की डिग्री मेडिकल  (MCI)से अवश्य मान्यता प्राप्त होनी.

डॉक्‍टरों से जुड़ी खबरों को देखने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

भगवान धन्‍वन्तरि

परन्तु सच यह है कि हमारे प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में ऐसे डॉक्टर्स रेडियोलाजिस्ट की श्रेणी में रजिस्ट्रेशन करा कर अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं जिनकी एमडी रेडियोलोजी की डिग्री कोर्स करने के समय भारतीय चिकित्‍सा परिषद से मान्यता प्राप्त नहीं थी। इसका कारण उस वक़्त विभाग में अल्ट्रासाउंड मशीन और कई आधुनिक उपकरणों के न होने से पूर्ण पाठ्यक्रम ही नहीं संचालित होता था। आरटीआई सूचनाओं के हवाले से यह भी पता चलता है कि हमारे प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में अल्ट्रासाउंड मशीन सन-2000 के उपरान्त आयी। यह भी गौर करने योग्य है कि कई कॉलेजों में अल्ट्रासाउंड मशीन विभाग की एमडी रेडियोलोजी भारतीय चिकित्‍सा परिषद द्वारा मान्यता हो जाने के भी कई वर्षों बाद आयी अर्थ यह कि बहुत से एमसीआई से मान्यता मान्यता प्राप्त रेडियोलोजी डिग्री के डॉक्टर्स ने कभी अपने कोर्स के दौरान अल्ट्रासाउंड सीखा ही नहीं।

डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियोडायग्नोसिस (DMRD)दो साल का होता है जिसमे ६ महीने की अल्ट्रासाउंड ट्रेनिंग का प्रावधान नहीं है क्यूंकि ३ साल की MD डिग्री में ही ६ माह की अल्ट्रासाउंड ट्रेनिंग की व्यवस्था है. इसी प्रकार DMRE(डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियोलोजी एंड एलेक्ट्रोलोजी) किये गए अनेकों डॉक्टर्स भी रेडियोलाजिस्ट की श्रेणी में रजिस्टर्ड हैं जबकि यह डिप्लोमा MCI से मान्यता प्राप्त नहीं है और न ही इसमें ६ माह की अल्ट्रासाउंड ट्रेनिंग दी जाती है.

अजब-गजब दुनिया होती है चिकित्‍सकों की। अगर आप उनसे जुड़ी खबरों को देखना-बांचना चाहते हों, तो कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

चिकित्‍सक

स्पष्ट है कि DMRD अथवा DMRE डॉक्टर्स का भी PCPNDT एक्ट में रेडियोलाजिस्ट की श्रेणी में रजिस्ट्रेशन होना पूर्णतया गलत है। इस तरह के बहुत रेडियोलाजिस्ट डॉक्टर्स ने अन्य श्रेणियों (जैसे MBBS, दूसरी विधाओं में MD) के ही समान बाहर चल रहे अल्ट्रासाउंड ट्रेनिंग कोर्स किये हैं क्योंकि विगत में केवल ये ही उपलब्‍ध थे। कुछ ऐसे रेडियोलाजिस्ट भी हैं जिन्होंने अल्ट्रासाउंड में कभी किसी भी प्रकार का प्रशिक्षण या अनुभव प्राप्त ही नहीं किया।

यूपी समेत पूरे देश में कन्‍या भ्रूण हत्‍या पर रोकथाम करने वाली सरकारी एजेंसियां इस हालत को थामने के बजाय सीएमओ और जिलाधिकारियों समेत कई सम्‍बन्‍धी अफसरों की मुट्ठी गरम करने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम द्वारा की गयी छानबीन और जन सूचना अधिकार के तहत जुटायी गयी सूचनाओं को हमने विश्‍लेषित करना शुरू कर दिया है। हम इसअभियान को अब श्रंखलाबद्ध प्रकाशित करने की तैयारी कर रहे हैं।

अधिकांश अल्‍ट्रासाउंड सेंटर का मतलब अब किसी कत्‍लगाह से कम नहीं रह गया है, जहां मां के पेट में जन्‍म लेने की तैयारी कर रहे कन्‍या भ्रूण की आपराधिक पहचान कर उसे मौत के घाट उतारने की साजिशों की जाती हैं। इससे जुड़ी खबरों को देखने को अगर इच्‍छुक हों तो कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

कन्‍या भ्रूण के कत्‍लगाह

भूमिहारी-झण्‍डा लेकर दौड़े एसएसपी दीपक कुमार

: छन्‍द-फन्‍द और जोड़-तोड़ में माहिर दीपक कुमार ने भूमिहारों का गृह-कलह सुलझाया : संपादक के घर एसटीएफ की गुंडागर्दी, 13 तथ्‍यों पर निगाह डाल लो, वरना तेरहवीं की तैयारी तो हो ही चुकी : एसटीएफ की करतूत की माफी दीपक ने क्‍यों मांगी, सवाल गरम है :

कुमार सौवीर

लखनऊ : यह स्‍वादिष्‍ट पंचमेली चाट है। इसे जो भी चखा है, बरबस चटखारे लगाने लगता है। एक ही मसाला, एक ही नमक, एक ही आलू, एक ही दोना-पत्‍तल, एक ही चम्‍मच, और एक ही स्‍वाद। अलग-अलग आंच वाले अलग-अलग स्‍टोव में विशेष तासीर में पकाई और फिर तली और भूनी गयी है यह चाट। भई वाह, जिसे भी चखा है, मस्‍त हो गया है। सूत्र बताते हैं कि लखनऊ में यह चाट फिलहाल प्रयोग के तहत तैयार की गयी है। इसके आविष्‍कारक हैं भूमिहार चाट कार्नर, जिसने अपनी एक धमाकेदार इंट्री ले कर अपने स्‍वाद के अपने झण्‍डे फहरा दिया है।

गोमती नगर में राकेश तिवारी नामक एक दबंग भूमिहार अपना मकान बना रहा था। उसने भवन निर्माण सामग्री अपने भूमिहार पड़ोसी सुभाष राय के दरवज्‍जे पर कुछ इस तरह ढेर लगा दिया कि रास्‍ता ही जाम हो गया। आना-जाना दूभर हो गया। कार फंस गयी, तो सुभाष राय ने इस पर ऐतराज किया। कई बार डायल-100 पर फोन करने अपनी दिक्‍कत बतायी। हर बार पुलिस ने राकेश को चेतावनी दी कि वह सुभाष राय के घर के सामने लगाये ढेर को हटा ले। पहले तो राकेश तिवारी ने इस पर सदाशयता दिखायी, लेकिन बाद में गुंडई पर आमादा हो गया। सुभाष राय दैनिक जनसंदेश टाइम्‍स के सम्‍पादक हैं।

कई दिन तक तो सुभाष राय ने सहन किया, लेकिन बाद में उसे कड़े शब्‍दों कहना शुरू कर दिया। इस पर राकेश तिवारी अपनी औकात में आ गये। अगले दिन राकेश तिवारी का एक रिश्‍तेदार रणजीत राय कई गाडि़यों में सुभाष राय के घर धमक पड़ा। पता चला कि रणजीत राय एसटीएफ में इंस्‍पेक्‍टर है, और उसके साथ सुभाष राय के घर घुसे लगे एसटीएफ के ही पुलिसवाले थे। उन लोगों ने सुभाष राय और उनकी पत्‍नी को बुरी तरह अपमानित और आतंकित किया। इतना ही नहीं, चेतावनी भी दी कि उनकी पत्रकारिता यथास्‍थान पर घुसेड़ दी जाएगी।

पुलिस से जुड़ी खबरों को देखने के लिए क्लिक कीजिए:-

बड़ा दारोगा

आहत सुभाष राय ने इस पूरे हादसे को अपनी वाल पर दर्ज किया, तो पूरा पत्रकार जगत में तूफान उमड़ पड़ा। विरोध व्‍यक्‍त करने के लिए गांधी प्रतिमा पर कड़ी धूप में भी भारी संख्‍या में पत्रकार जुट गये। सुभाष राय ने एसटीएफ के आईजी को पत्र लिखा, लेकिन उसका कोई भी जवाब नहीं आया। थाने पर भी वे मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने एफआईआर ही दर्ज नहीं की। हालांकि शासन स्‍तर पर हंगामा पहुंचा, तो डीजीपी ओपी सिंह ने रणजीत राय को कानपुर तबादले पर भेज दिया। उधर पुलिस ने इस मामले में गलती मानने की पेशकश की।

कल 20 जून की शाम लखनऊ के वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार अपने लाव-लश्‍कर के साथ सुभाष राय के घर पहुंचे। हालांकि उनके आने से पहले ही सुभाष राय ने अपने कई मित्रों को बुला लिया था। ड्राइंगरूम भर गया था। दीपक कुमार ने सुभाष राय से इस घटना पर खेद व्‍यक्‍त किया और रणजीत राय की करतूत पर माफी मांगी। इस बारे में एक लिखित पत्र भी दीपक कुमार ने सुभाष राय को दिया है, लेकिन सुभाष राय ने इस पत्र को अपनी वाल पर सार्वजनिक नहीं किया है।

यहां कुछ तथ्‍य और कुछ सवाल उठ रहे हैं। पहले तो यह कि राकेश तिवारी, रणजीत राय, दीपक कुमार और सुभाष राय एक ही जाति यानी भूमिहार हैं। ( हालांकि इन चारों में इकलौते सुभाष राय ही ऐसे हैं, जो जाति-धर्म से परे सोचते हैं। उनकी छवि कभी भी किसी जाति-विशेष व्‍यक्ति के तौर पर नहीं रही। वे विशुद्ध लेखक, चिंतक और कवि-साहित्‍यकार हैं, जो अपना पेट पालने के लिए पत्रकारिता की दूकान पर मुनीमी करने बैठने पर मजबूर है। )

दूसरी बात यह कि लखनऊ में कानून-व्‍यवस्‍था की हालत यह है कि कई बार डायल-100 अपनी शिकायत दर्ज कराने का कोई भी मतलब नहीं रह गया है। तीसरी बात यह कि रणजीत को राकेश तिवारी के पक्ष में इतनी गुंडई करने का मकसद क्‍या था, क्‍या वह वाकई राकेश तिवारी का मित्र है, या फिर उस गुंडागर्दी की एवज में उसे मोटी रकम भी मिली थी। चौथी बात कि एसटीएफ या पुलिस के किसी इंस्‍पेक्‍टर की इतनी औकात कैसे हो सकती है कि वह कानून को धता देते हुए किसी गुंडे-मवाली की तरह व्‍यवहार करे। पांचवी बात कि सुभाष राय की अर्जी पर एसटीएफ के आईजी ने क्‍या कार्रवाई की। छठवीं बात कि थाने पर अर्जी देने के बावजूद विभूति खंड थाने ने एफआईआर दर्ज क्‍यों नहीं की।

सातवीं बात यह कि यह मामला तो एसटीएफ के इंस्‍पेक्‍टर और उसके एसटीएफकर्मियों की गुंडागर्दी का था, ऐसी हालत में लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार ने किस आधार पर प्रायश्चित किया, माफी मांगी और बाकायदा लिखित माफीनामा भी सुभाष राय को थमाया। आठवीं बात यह कि उस माफीनामा पर ऐसा क्‍या है, जिसे न तो दीपक कुमार ने सार्वजनिक किया और न ही सुभाष राय ने अपनी वाल पर शाया करने की जरूरत नहीं समझी। नौंवी बात यह कि इस माफीनामा केवल वरिष्‍ठ पत्रकार सुभाष राय के मामले में होने के चलते लिखा गया है जिनके पक्ष में पूरा पत्रकार समुदाय एकजुट हो गया था। दसवीं बात यह कि अपने लोगों की ऐसी करतूतों पर भी क्‍या भविष्‍य में दीपक कुमार इसी तरह शर्मिंदा होते रहेंगे।

ग्‍यारहवीं बात अपने पुलिसवालों की अतीत या भविष्‍य में होने वाली किन्‍हीं भी करतूतों पर दीपक कुमार सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करते रहेंगे। बारहवीं बात यह कि एसटीएफ के इंस्‍पेक्‍टर सहित अन्‍य एसटीएफकर्मियों पर क्‍या कार्रवाई की जाएगी। और तेरहवीं बात यह कि मुख्‍यमंत्री के प्रमुख सचिव पर रिश्‍वत मांगने का आरोप लगाने वाला अभिषेक गुप्‍ता और हाईकोर्ट के ख्‍यातिनाम अधिवक्‍ता प्रिंस लेनिन के घर घुसकर उनके बुजुर्ग माता-पिता और उनकी बहन के साथ हुई घटना के दोषी पुलिसवालों पर क्‍या कार्रवाई होगी, और दीपक कुमार इस मामले में ऐसा क्‍या करेंगे कि भविष्‍य में ऐसी हालत न हो पाये।

तो दोस्‍तों। यह तो है तेरह बिन्‍दु वाले प्रश्‍न और तथ्‍य।

इनका समाधान हो जाए तो ठीक, वरना प्रशासन और पुलिस की करतूतों के चलते राजधानी समेत पूरे यूपी में कानून-व्‍यवस्‍था की तेरहवीं आयोजित करने का तो पूरी व्‍यवस्‍था तैयारी चल ही रही है।

पत्रकारिता से जुड़ी खबरों को देखने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

पत्रकार पत्रकारिता

आप मासूम बच्‍चों को धर्म की घुट्टी क्‍यों पिला रहे हैं

: वंदना हो ही क्यों ? बच्चे तो स्वयं भगवान की प्रतिमूर्ति : मातृभाषा में ही शिक्षा देते हैं, धार्मिक समूहों को अपने संस्थान चलाने की इजाज़त : अलीगढ़ के मिशनरी स्कूलों को ये आदेश दिए गए हैं कि स्कूल के हिन्दू बच्चों को ईसाई धर्म की शिक्षा :

शीतल पी सिंह

नई दिल्‍ली : मेरी पोती दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ती है जिसे क्रिश्चियन मिशनरी चलाते हैं । क्रिसमस-अवकाश के दौरान वहां क्रिसमस-उत्‍सव की तैयारियाँ चल रही थीं। एक भजनों की डायरी उसके हाथ में थमा दी गयी। पता चला कि उसके स्कूल के हर बच्चे के पास है जिसमें यीशु मसीह की वन्दना करते भजन हैं । अगर वह “शिशु मंदिर”में पढ़ती होती तो दूसरे क़िस्म के भजन गा रही होती और किसी मदरसे में पढ़ रही होती तो तीसरे क़िस्म के !

सवाल यह है कि शिक्षा संस्थानों में बच्चों को ज़बरन धर्म की घुट्टी पिलाने वाले किसी भी करतब की अनुमति एक धर्म निरपेक्ष देश में क्यों होनी चाहिये ?

शीतल की इस वाल पर इस पोस्‍ट होते ही विचारों का तांता लग गया। किसी ने लिखा कि इजराइल और जापान ,न केवल शिक्षा में एकरुपता है, बल्कि अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा देते हैं। एक का कहना था कि धार्मिक समूहों को अपने संस्थान चलाने की इजाज़त है जहाँ वे अपनी श्रद्धा के हिसाब से भजन गवाते हैं। उधर एक ने बताया कि अलीगढ़ के मिशनरी स्कूलों को ये आदेश दिए गए हैं कि स्कूल के हिन्दू बच्चों को ईसाई धर्म की शिक्षा न दें। जबकि एक अन्‍य का कहना था कि जबरदस्ती धर्म-ईश्वर का अफीम चटा रहे हैं बच्चों को। अधिकांश गार्जियन इससे बड़े खुश हो जाते हैं।

आइये देखिये कि बाकी लोगों का इस पोस्‍ट पर क्‍या-क्‍या कहना है: -

Gaurav Singh Rathore नही होनी चाहिए .. सहमत सर ।।

Vikas Tailor Feeding religion via education is the root cause of making it legalized! It should be ended

Prabhat Kumar जो सेंसस कराया था उसके भी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए।

शिखा अपराजिता इसीलिए हम कॉमन स्कूल सिस्टम की मांग करते हैं

Pinto CP Ignatius Government school zindabad

शिखा अपराजिता Government school भी कॉमन , केन्द्रीय विद्यालय , नवोदय , नेतरहाट , जिला स्कूल , वरीय स्कूल , इतने सारे संस्तर का कोई मतलब नहीं , जब सब नागरिक समान हैं

Deepak Singh sahi kaha aapne

Pankaj Srivastava धार्मिक समूहों को अपने संस्थान चलाने की इजाज़त है जहाँ वे अपनी श्रद्धा के हिसाब से भजन गवाते हैं...सरकारी स्कूलों में सब प्रार्थनाएँ हिंदू धर्म की चलती हैं...बेहतर हो कि प्रार्थनाओं का रिवाज ही बंद हो...या फिर सभी धर्मों की जानकारी दी जाए और बच्चे आगे चलकर अपना धर्म खुद चुनें...नास्तिकता के तर्कों से भी परिचित कराया जाए...पर इन बातों का कोई अर्थ नहीं..अभी सबके लिए ब्लैकबोर्ड भी नहीं है...

Raj Kumar सिखाएं, लेकिन अन्य धर्म के पर्व-त्योहार पर भी उसी जोश, उत्साह से सिखाएं, ताकि बच्चे धर्म के साथ संस्कृति को जान सकें।

Ratan Pandit भाई आपकी लिस्ट में कोई भक्त तो नहीं???

Ahmad Kamal Siddiqui स्कूल के फार्म पर धर्म वाला कालम ही नहीं होना चाहिए,,,,

Manika Mohini शाम टी वी में कुछ ऐसी ही खबर आ रही थी कि अलीगढ़ के मिशनरी स्कूलों को ये आदेश दिए गए हैं कि स्कूल के हिन्दू बच्चों को ईसाई धर्म की शिक्षा न दें।

Kapilesh Prasad ऐसी अनुमति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

Santosh Kr. Pandey Prashn ye Hai ki aap bitiya ko Christian school me kyo bhejte haiN jabki naam see aap Hindu haiN ? Isi me aapke prashn ka uttar Hai. Bakiya siddhant tou upar Kai logoN ne thela Hai lekin wahan se koi raah na niklegi aur na hi milegi.

Sheetal P Singh दिल्ली में स्कूल चुनना किसी के हाथ में नहीं । स्कूल में दाख़िला मिलना एक असाधारण प्रतियोगिता है । नेबरहुड मेरिट में उसे यह स्कूल मिला था !

SO U R Abh गर वो शिशु मंदिर में पढ़ती तो 'वंदे सदा वत्सले मातृभूमि' पढ़ती जिसमे मातृभूमि की आराधना है. क्या गलत पढ़ती. आज प्राइवेट व मिशनरी स्कूल की भारी भरकम फीस के मुकाबले शिशु मंदिर की सस्ती फीस मे उच्च गुणवत्ता की पढ़ाई मिल जाती हैं.बिटिया को वहीं भेज दीजिए. शिशु मंदिर वाले ना जात देखते हैं ना धर्म. याद है ना आसाम का मुस्लिम धर्मावलंबी छात्र जोकि शिशु मंदिर में पढ़ता था इंडिया टॉपर था.

Vijay Kumar बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। आज मेरी बेटी ने बताया कि उसके स्कूल (CMS) में आज कोई बाबाजी आये थे और उन्होंने सभी बच्चों को गीता पढ़ाई है। ये स्कूल, जहां हमलोग अपने बच्चों को शिक्षा पाने को भेजते हैं, जबरदस्ती धर्म-ईश्वर का अफीम चटा रहे हैं बच्चों को। अधिकांश गार्जियन इससे बड़े खुश भी होंगे, की चलो कम-से-कम स्कूल ने महान सनातन संस्कृति का ख्याल तो रखा..

Avanish Mishra Cms m gandi ji roj gita padate lkin sir sb jagh prob hai ap prob jan k bhi wahi bhejenge padne k lie

Shamim Ansari kisi ke liye ye choot nhi honi chahiye .....it should be private

Imraan Imran मैं भी जिस कैथोलिक्स स्कूल में पढ़ा हू वहां की डायरी के पहले दस पंद्रह पन्नो पे यीशु के गुणगान करते भजन लिखे होते थे जिन्हे हम सब असेम्ब्ली में ऱोज गाते थे

अच्छी बातें ही लिखी होती थी उनमे तो कभी किसी ने ऐतराज़ भी नहीं किया.! पर ये ग़ैर ज़रूरी चीज़ बंद कर देनी चाहिये स्कूलों में ..!

Saurav Sharma सब फर्जी हैं ये

Parveen Abbasi मुझे नही लगता मिशनरी स्कूलों से अच्छी training कहीं होती हे

Sheetal P Singh विषय पर रहें ।

Prakash Govind सवाल ये है कि स्कूल के माहौल में/पाठ्यक्रम में वंदना हो ही क्यों ?? ये बच्चे तो स्वयम में भगवान की प्रतिमूर्ति हैं

Gati Upadhyay Maaf kijiyega sir Kya ap missonry likhte waqt smjh nhi paye ki missionary ka primary mission Kya h secondary mission educate krna... Siksha agr dharm se nhi judegi... To mass education impossible h... Is bat ka Rona rone ka Kya mtlb h kuch smjh nhi pa rhi hu.. Apki bato se pahli bar asahmat hu

Suvesh Verma शिक्षा ही एकता के सूत्र में बाँधती है। लेकिन भारत ही शायद विश्व का एकमात्र देश होगा,जहाँ शिक्षा की ही एकता नही है और मनमानी शिक्षा दी जा रही है। इजराइल और जापान ,न केवल शिक्षा में एकरुपता है, बल्कि अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा देते हैं,अपनी शिक्षा के बलबूते ही खड़े हैं।

बाप रे ! सेवाआयोग के अफसर ने ही लीक किया परचा

: आयोग के समीक्षा अधिकारी के कोचिंग सेंटर पर जो सवाल-जवाब सिखाये गये थे, वे ही हू ब हू आयोग की परीक्षा में आये : सवाल यह कि आयोग के अध्‍यक्ष पर अब तक क्‍यों प्रश्रय दिये हुए है जोगी सरकार : सपा सरकार में बड़े अफसरों और नेताओं के बच्‍चों को रेवडी की तरह बांटी थी नौकरी :

मेरी बिटिया संवाददाता

लखनऊ : उप्र लोक सेवा आयोग पूरी तरह नंग-धड़ंग हो चुका है, उसकी बेहूदा कार्यशैली और बेइमानियों के नित-नये सबूत किसी बड़ी नुमाइश की तरह जग-जाहिर होते जा रहे हैं। प्रतिभागियों को नम्‍बर देने में घालमेल, सवालों में गड़बडि़यां, प्रभावशाली लोगों के बच्‍चों को टॉप कराने जैसी कई करतूते हो रही हैं। खुलेआम कोचिंग सेंटरों पर सिखाये गये सवाल और उनके जवाब हू-ब-हू परीक्षाओं में आने लगे हैं। इतना ही नहीं, आयोग के एक समीक्षा अधिकारी ऐसी कोचिंग सेंटर के मालिक-संचालक हैं। लेकिन इसके बावजूद योगी सरकार इस आयोग की नंगई पर दंडित करने के बजाय, आयोग प्रशासन की नंगई को ओढ़-थोप देने की जुगत में है।

कल की ही घटना को देख लीजिये। कल इलाहाबाद में एक सेंटर पर तब हंगामा हो गया जब पीसीएस मेंस परीक्षा में सुबह हिंदी के पर्चे के बजाय शाम को होने वाला निबंध का पर्चा बंट गया। जब इस पर हल्ला हुआ तो दोनों पालियों की परीक्षायें रद्द कर दी गईं। इसी मामले से जुड़ी एक नई खबर आ रही है। खबर है कि आयोग का एक समीक्षा अधिकारी इलाहाबाद में एक मशहूर कोचिंग चलाता है। इस कोचिंग में विशेश तौर पर निबंध और हिंदी की कोचिंग दी जाती है। ऐसा बताया जा रहा है की कल की रद्द हो चुकी परीक्षा में जो हिंदी और निबंध के पर्चे बांटे गये उनमें दिये गये प्रश्न इस अधिकारी की कोचिंग द्वारा दिये गये सैंपेल पेपर्स के सवालों से मैच करता है। मिलता-जुलता नहीं, बल्कि पूरा का पूरा प्रश्न मैच करता है।

ये क्या मात्र संयोग हो सकता है की आयोग का ही एक अधिकारी एक नामी कोचिंग चलाता हो और उस कोचिंग के नोट्स में दिये गये प्रश्न परीक्षा में आये प्रश्नों से हूबहू मिल जायें। और अगर ये सब एक खेल के तहत हुआ है तो क्यूं नहीं योगी सरकार इस आयोग को भंग कर देती है? आखिर क्या मजबुरी है? पिछले चार महिनों से सीबीआई जांच का झुनझुना बजाया जा रहा है पर अब तक इस जांच का कोई निश्कर्ष नही निकल सका है। सीबीआई ने एक एफआइआर भी दर्ज कर रखी है पीसीएस 2015 परीक्षा में धांधली को लेकर पर अब तक कोई गिरफ्तारी नही की गई है। क्या परीक्षा में चयनित बड़े अधिकारियों के बच्चों को बचाने के लिये ही जांच को प्रभावित किया जा रहा है? या फिर जांच में कोई तथ्य निकले ही नहीं हैं और सारे आरोप फर्जी थे? जो भी हो सरकार को अब अपना श्रीमुख खोलकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये।

आयेग के वर्तमान अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव एक छोटे से कस्बे के इंटर कौलेज के प्राचार्य थे और उनको सीधे वहां से उठाकर इतने बड़े ओहदे पर बैठा दिया गया। अनिरुद्ध यादव सपा नेताओं के करीबी होने के अलावा पुराने संघी भी बताये जाते हैं। कहते हैं कि सरकार बदलने पर यादव ने संघ के पुराने संबंध खोज निकाले और अपनी कुर्सी बचा ली। अगर सरकार वाकई ईमानदार है तो इस स्थिति को देखते हुए संविधान में दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए आयोग के अयोग्य अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव को राज्यपाल की शक्ति से निलंबित करा के एक नये अध्यक्ष की नियुक्ति करनी चाहिये जो की किसी विश्विधालय का कुलपति रहा हो या बड़े स्तर का IIT-IIM का प्रोफेसर हो या फिर कोई ईमानदार बड़ा अधिकारी। जब तक ये आयोग की सत्ता दागी व अयोग्य लोगों के हाथ में रहेगी तब तक एसे कारनामे रोज़ होते रहेंगें।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग- जी हां, ये है देश का सबसे बदनाम, बेशर्म और घटिया चयन आयोग। इस आयोग के बारे में जो कहा जाये कम है। इतनी बदनामी के बाद भी ये आयोग सुधरने का नाम नही ले रहा। अखिलेश यादव की सरकार ने इस आयोग में एसे निकम्मे और दुष्ट लोगों को अध्यक्ष और सदस्य बनाया की उसका परिणाम आज भी परीक्षार्थी भुगत रहे हैं।

यूपी लोक सेवा आयोग से जुड़ी खबरों को अगर आप बांचना चाहें, तो कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

बदहाल है यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री

Page 4 of 704