Meri Bitiya

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सक्सेस सांग

डेंगू से ग्रसित एक महिला की जिन्‍दगी खतरे में, दौड़ पड़ी बच्चियां

: जिनकी डीएनए में यह आदत है, नियमित रक्‍तदान करना आपको संतोष और दूसरों को जिन्‍दगी देता है : सवाल प्रशंसा जुटाना नहीं, किसी का जीवन बचाना खुद को प्रेरणा दे जाता है : मैं केवल आत्‍म-स्‍तुति नहीं मानता, लेकिन अगर जो अगर यह करना भी चाहें तो इसमें हर्ज क्‍या :

कुमार सौवीर

लखनऊ : आज अचानक शिवानी कुलश्रेष्‍ठ ने अस्‍पताल में भर्ती डेंगू से ग्रसित एक बिटिया की खबर पोस्‍ट की है, जिसकी हालत काफी नाजुक है और उसे तत्‍काल पांच यूनिट खून की जरूरत है। मैंने स्‍वाभाविक तौर पर न केवल अपनी सहमति दे दी, बल्कि यह भी कह दिया कि दूसरा यूनिट ब्‍लड मेरी बड़ी बिटिया बकुल दे देगी। डोंट वरी। शिवानी मेरी बेटी की तरह है और लखनऊ हाईकोर्ट में बिलकुल अभी अभी प्रेक्टिस करने पहुंची है। हालांकि उसका मकसद न्‍यायिक सेवा अधिकारी बनना है। बहरहाल।

लेकिन यह केवल लफ्फाजी नहीं, यह सब मेरी आदतों में शामिल है। और सिर्फ मैं ही नहीं, मेरे परिवार के डीएनए में, रग-रग में शामिल हैं यह गुण। केवल बड़ी़ बेटी बकुल सौवीर ही नहीं, मेरी छुटकी बिटिया साशा सौवीर भी इस अभियानों में बढ़-चढ़ कर सक्रिय रहती है।

खैर, आइये। इस वीडियो को निहारिये। यह वीडियो, छह साल पुराना है और सात सितम्‍बर के दिन का ही है।

नियम से रक्त-दान करने वाली मेरी बेटी बकुल के चेहरे पर कितनी मुस्कुराहट और आत्मविश्वास है। है ना ? यह फोटो उन लोगों के लिए तो खासतौर पर प्रेरणा-स्रोत बन सकती है, जिनके मन में रक्तदान किसी हौवे की तरह बैठ चुका है। आपका खून किसी के काम आ जाए, इससे बढकर और क्या हो सकता है? भइया आप किसी की जान बचा रहे हैं, किसी का घर अंधेर ...के घेरे से निकाल रहे हैं। यह पुण्य है। खूब कीजिए। बेहिचक।

वैसे मैं यह काम किसी प्रशंसा के लिए नहीं करता हूं। लेकिन यह भी मानता हूं कि पीठ थपथपाया जाना एक बहुत महत्वपूर्ण प्रेरणास्पद बात होती है। हां, एक बात और, किसी घटना को होता हुआ देखना भी उससे कई गुना ज्यादा प्रेरणा दे जाती है। मेरी बडी बेटी का नाम बकुल सौवीर है। बीए थर्ड इयर में पढती है। इसी साल जुलाई के पहले हफ्ते में मेरे एक मित्र की मां को खून की जरूरत थी। मेरे साथ मेरे सहयोगी कुलदीप द्विवेदी ने भी रक्त दिया। फिर भी कम पडा तो बकुल पहुंच गयी। आप देख सकते हैं कि नियम से खून दान करने वाली बकुल के चेहरे पर कितनी मुस्कुराहट और आत्मविश्वास है। यह फोटो उन लोगों के लिए तो खासतौर पर प्रेरणा-स्रोत बन सकती है, जिनके मन में रक्तदान किसी हौवे की तरह बैठ चुका है।

बकंल द्वारा किया गया रक्‍तदान का नजारा अगर आप देखना चाहें तो निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए। इससे बकुल के चेहरे पर तनाव-रहित और दमकता उल्‍लास दिखेगा। इसे आप अपने घर-पड़ोस-मोहल्‍ले की बच्चियों को दिखा कर उन्‍हें प्रोत्‍साहित कर सकते हैं:- बे‍टी के लिए बेटी का रक्‍तदान

 

धंधेबाज सुब्रत राय फिर शिकंजे में। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कहां से मिली इत्‍ती रकम?

: सुप्रीम कोर्ट तक को मूर्ख बनाने का दुस्‍साहसी सुब्रत राय आज फिर सवालों की चूहेदानी में फंसा : कोर्ट ने पूछा कि 24 हजार करोड़ के भुगतान का जरिया बताओ, सुनवाई अब 15 दिन बाद होगी : सहारा इंडिया के वकील कपिल सिब्‍बल के ऐतराजों पर सहमत नहीं हो पायी कोर्ट, जरिया तो बताना ही पड़ेगा : सर्वोच्‍च अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी रकम आसमान से तो नहीं ही टपकी होगी :

संवाददाता

नई दिल्‍ली : धोखा और तिकड़ीबाज सहारा इंडिया का मुखिया की पूंछ आज फिर सुप्रीम में फंस गयी। देश के भोले-भाले निवेशकों की 24 हजार रूपयों की खून-पसीने की रकम को अपनी टोपीबाजी के चक्‍कर में लूटने के चक्‍कर में सवा दो साल तक तिहाड़ जेल में चक्‍की पीसने बावजूद सुब्रत राय की तिकड़मबाजी खत्‍म नहीं हो पायी। लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुब्रत राय की करतूतों को दबोच ही लिया, जैसे भागता चूहा चूहेदानी में फंसता है।कोर्ट ने आज साफ कहा कि यह बात हमें यह हजम नहीं हो रहा कि सहारा समूह ने दो महीने के भीतर लाखों निवेशकों के पैसे वापस कर दिए। शीर्ष अदालत ने कहा  कि 24000 करोड़ रुपये आसमान से नहीं गिरे होंगे।

अदालत ने समूह को इतनी रकम लाने का स्रोत बताने के लिए कहा है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि हम दो महीने के भीतर लाखों निवेशकों के पैसे वापस लौटने के आपके मुवक्किल की क्षमता पर संदेह नहीं कर रहे हैं लेकिन हमें यह बात हजम नही हो रही है। पीठ में न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति एके सीकरी भी शामिल हैं. पीठ अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को करेगी.

पीठ ने सहारा समूह को अदालती आदेश केदो महीने के भीतर निवेशकों के पैसे वापस लौटाने के लिए 24000 करोड़ रुपये का इंतजाम करने का स्रोत बताने के लिए कहा है। पीठ ने कहा, इतनी रकम का इंतमाज करने का स्रोत क्या है। क्या आपने अन्य कंपनियों से रुपये लिए हैं। क्या आपने यह रकम बैंकों से निकाला है या अपनी संपत्ति बेचकर इसका जुगाड़ किया है। आप प्रमाणित कर दें तो हम मिनटों में निपटा देंगे मामला। पीठ ने कहा कि रुपये तो इन्हीं तीन विकल्पों से आए होंगे, कोई आसमान से तो नहीं टपके होंगे। पीठ ने यह भी कहा कि अगर आप प्रमाण देते हैं कि सभी निवेशकों के पैसे वापस कर दिए गए हैं तो हम मिनटों में मामले को रफा-दफा कर देंगे।

इस पर सिब्बल ने कहा कि विभिन्न स्रोतों से रकम का जुगाड़ किया गया है। हमने पहले ही हलफनामे में इसका ब्योरा दे दिया है। वहीं सेबी की ओर से पेश वरिष् वकील अरविंद दत्ता ने कहा कि हम जाकर निवेशकों का पता नहीं लगा सकते हैं, लेकिन हम रकम के इंतजाम का स्रोत अवश्य जानना चाहते हैं। जवाब में सिब्बल ने कहा कि हमने निवेशकों केपैसे वापस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक आपको यह लग सकता है कि हमने इसके लिए काले धन का इस्तेमाल किया हो। अगर ऐसा है तो यह देखने का काम आयकर विभाग का है न कि सेबी का। मालूम हो कि सहारा प्रमुख फिलहाल पैरोल पर हैं। पांच हजार करोड़ रुपये नगद और इतनी ही राशि की बैंक गारंटी का इंतजाम न कर पाने के कारण अब तक उन्हें जमानत नहीं मिल सकी है।

सहारा समूह ने बाद में इस बारे में एक बयान में कहा है, 'यह बताना प्रासंगिक होगा कि सहारा देश भर में लगभग 5000 शाखाओं के जरिए परिचालन करता है और यह भुगतान केवल उन्हीं शाखाओं के जरिये किया गया.' इसके अनुसार, 'सहारा की शाखाओं के अखिल भारतीय नेटवर्क के जरिए ही कंपनी ने धन लौटाया (रिफंड किया) है.' समूह ने अपने वकील के माध्यम से कहा है कि इन भुगतान (रीपेमेंट) से जुड़े सभी दस्तावेजों की मूल प्रतियां व निवेशकों द्वारा लौटाए गए मूल ब्रांड प्रमाण पत्र सेबी को सौंप दिए गए हैं.

मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, 'आप बताएं कि इस पैसे का स्रोत क्या है? क्या आपको अन्य कंपनियों और अन्य योजनाओं से 24,000 करोड़ रुपये मिले? बैंक खातों से यह राशि निकाली? या फिर संपत्ति बेचकर यह राशि जुटाई? यह इन तीनों में से किसी एक माध्यम से होगी। पैसा उपर से नहीं गिरता। आपको बताना होगा कि यह धन आपको कहां से मिला। पीठ ने सहारा समूह के वकील से कहा, ''हमें आपके मुवक्किल की निवेशकों को करोड़ों रुपये लौटाने की क्षमता पर संदेह नहीं है। वह भी सिर्फ दो महीने में नकद भुगतान। लेकिन, आप इस धन का स्रोत बताएं, उसके बाद भानुमति का पिटारा खोलने की जरूरत नहीं पडे़गी।'

इस बेंच में न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति एके सीकरी भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की बेंच इस मामले की सुनवाई अब 16 सितंबर को करेगी। पीठ ने कहा कि आप उस दिन सुनवाई की शुरुआत यह बताकर ही कह सकते हैं कि आखिर आपको इतनी रकम मिली कहां से। सहारा प्रमुख सुब्रत राय के वकील कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि समूह ने धन जुटाकर निवेशकों को नकद में लौटा दिया है और सेबी करोड़ों निवेशकों को तलाशने से पीछे हट रहा है।

इस पर पीठ ने कहा, 'आप हमें दस्तावेज दिखाएं। अन्य योजनाओं में कैसे धन पड़ा है।' शीर्ष अदालत ने कहा कि यह आपका दावा है। सेबी का काफी सरल सवाल है। हमें बताएं कि आपको यह पैसा कहां से मिला। आप हमें बताएं हम मामला बंद कर देंगे। आप बताएं कि आपने 25,000 करोड़ रुपये नकद कैसे जुटाए।

सिब्बल ने कहा कि समूह किसी तरह की भी जांच को तैयार है। यदि यह माना जाए कि यह कालाधन था तो भी समूह की जांच की जा सकती है, लेकिन यदि यह कालाधन है तो सेबी जांच करने वाला कौन है। यह आयकर विभाग का मामला है। हालांकि, इस पर पीठ ने कहा कि यह उद्योग घराने को बताना है कि धन का स्रोत क्या है। क्या यह हिसाबी धन है या बेहिसाबी धन है। 'यह आपके बैंक खाते में पड़ा था या फिर आपकी अन्य योजनाओं से आया है।

बसपाई छियो-राम छियो-राम: मोदी को साबुन लगाकर खूब धोया मायावती ने

: आजमगढ़ रैली में बिलकुल टोटल मेच्‍योर नेता दिखीं मायावती और उनके तेवर : अंडर-करंट अभी भी दौड़ रहा है बसपा का यूपी की रग-रग में : यूपी सरकार को भी नंगा किया, जैसे ही बोलने को उठीं सुप्रीम-माया बिजली ही काट दिया प्रशासन ने :

यशवंत सिंह

लखनऊ : मायावती ने आजमगढ़ में बसपा की रैली में नरेंद्र मोदी को साबुन लगा लगा कर खूब धोया। सवाल उछाले कि तुमने किया क्‍या है अब तक। जाहिर कर दिया मायावती ने यूपी की जनता में आज भी बसपा का अंडर-करंट है। वे बिलकुल अभी-अभी आजमगढ़ रैली में बोल कर उठी हैं। पूरे दौरान बिलकुल टोटल मेच्‍योर नेता की तौर पर दिखीं मायावती और उनके तेवर। अपने भाषा में मायावती ने मोदी के साथ ही यूपी सरकार को भी नंगा किया। हालत तो यह रही कि जैसे ही वे बोलने को उठीं, बिजली ही काट दिया प्रशासन ने।

आजमगढ़ में केवल भीड़ ही नहीं, बल्कि मायावती भी सभा में आयी लाखों की भीड़ को देख कर खूब उत्‍साहित थीं। अपने उद्बोधन में उन्‍होंने जनता के सामने दिल्‍ली और यूपी सरकार को आइना दिखाया। बार बार पूछा कि महंगाई घटी है या नहीं। राशन सस्ता हुआ, नौकरी मिली, मकान मिला, रुपया एकाउंट में आया... जनता ने हर बार ना कहा. व्यापम घोटाला, विजय माल्या घोटाला, ललित मोदी घोटाला, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के घोटालों का जिक्र कर मायावती ने बताया कि यह मोदी सरकार भी कम घोटालेबाज नहीं है.

मायावती ने देर तक जमकर बोला. उनको टीवी पर शुरू से अंत तक सुनने के बाद समझ में आया कि वह बहुत मेच्योर नेता हैं जो अपने वोट बैंक या अपने टारगेट आडियेंस को बहुत ही कायदे से समझती हैं और उसे कायदे से समझा ले जाती हैं, कनवींस कर ले जाती हैं. मुलायम की छाती पर यानि आजमगढ़ में इतनी सफल रैली करके मायावती ने दिखा दिया है कि यपी में बसपा का अंडरकरंट है और वह लीड ले चुकी हैं..

सर्वे, मीडिया वाले चाहे जो करें और सोशल मीडिया वाले अपर कास्टी चाहें जो नारे लगाएं.. एक सूचना ये भी है कि मायावती ने ज्योंही अपना भाषण आजमगढ़ में शुरू किया, यूपी के कई इलाकों में बत्ती गुल हो गई. कुछ लोगों ने भड़ास निकाली कि शायद अखिलेश बुरी तरह डर चुके हैं अपनी बुआ से इसीलिए लाइन कटवा दिए ताकि प्रदेश के दूसरे इलाके के लोग अपने अपने टीवी पर बुआ का लाइव भाषण न सुन सकें. भगवान जाने क्या सच है क्या झूठ।

(यशवंत न्‍यूज पोर्टल भडास4मीडिया के सम्‍पादक हैं। उनके तेवर देखने हों तो उनके ब्‍लॉग पर पधारिये।)

साले, नीच, कमीने, हरामजादे हैं पब्लिक सर्विस कमीशन वाले, 50 लाख का नुकसान करा दिया

: यकीन मानिये कि यह तो सिर्फ एक कहानी है, लेकिन कितनी सच है। है न : यह कहानी चंद्रशेखर त्रिपाठी ने मुझे भेजी है, जिसे गिरमिटिया मजदूरों को पूरी दुनिया से खोज निकालने में महारत है : सरकारी नौकरी मिलते ही कमीनगी एकदम उछल जाती है हमारे मध्‍यवर्ग समाज में :

चंद्र शेखर त्रिपाठी

बलिया : चौबे जी का लड़का है; अशोक, एमएससी पास| नौकरी के लिए चौबे निश्चिन्त थे, कहीं-न-कहीं तो जुगाड़ लग ही जायेगा| ब्याह कर देना चाहिए।

मिश्रा जी की लड़की है - ममता| वह भी एमए, पहले दर्जे में पास है| मिश्रा जी भी उसकी शादी जल्दी कर देना चाहते हैं।

सयानों से पोस्ट ग्रेजुएट लड़के का भाव पता किया गया। पता चला, वैसे तो रेट पांच से छः लाख का चल रहा है, पर बेकार बैठे पोस्ट ग्रेजुएटों का रेट तीन से चार लाख का है। सयानों ने सौदा साढ़े तीन में तय करा दिया।

बात तय हुए अभी एक माह भी नहीं हुआ था कि कमीशन से पत्र आया कि अशोक का डिप्टी कलक्टर के पद पर चयन हो गया है।

चौबे जी - साले, नीच, कमीने, हरामजादे हैं पब्लिक सर्विस कमीशन वाले|

चौबन - लड़के की इतनी अच्छी नौकरी लगी है, नाराज क्यों होते हैं?

चौबे - अरे, सरकार निकम्मी है| मैं तो कहता हूँ इस देश में क्रांति होकर रहेगी| यही पत्र कुछ दिन पहले नहीं भेज सकते थे? डिप्टी कलेक्टर का 40-50 लाख रुपया यूँ ही मिल जाता|

चौबन - तुम्हारी भी अक्ल मारी गई थी| मैं न कहती थी कि महीने भर रुक जाओ, लेकिन तुम न माने| हुल-हुला कर सम्बन्ध तय कर दिया| मैं तो कहती हूँ मिश्रा जी को पत्र लिखिये वे समझदार आदमी हैं|

प्रिय मिश्रा जी,

अत्र कुशलं तत्रास्तु!

आपको प्रसन्नता होगी कि अशोक का चयन डिप्टी कलेक्टर के लिए हो गया है| विवाह के मंगल अवसर पर यह मंगल हुआ| इसमें आपकी सुयोग्य पुत्री के भाग्य का भी योगदान है|

आप स्वयं समझदार हैं, नीति व मर्यादा जानते हैं। धर्म पर ही यह पृथ्वी टिकी हुई है| मनुष्य का क्या है? जीता-मरता रहता है| पैसा हाथ का मैल है| मनुष्य की प्रतिष्ठा बड़ी चीज है| मनुष्य को कर्तव्य निभाना चाहिए, धर्म नहीं छोड़ना चाहिए और फिर हमें तो कुछ चाहिए नहीं, आप जितना भी देंगे अपनी लड़की को ही देंगे|

मिश्रा जी के परिवार ने पत्र पढ़ा, विचार किया और फिर लिखा:

प्रिय चौबे जी,

आपका पत्र मिला, मैं स्वयं आपको लिखने वाला था| अशोक की सफलता पर हम सब बेहद खुश हैं| आयुष्मान अब डिप्टी कलेक्टर हो गया हैं| अशोक चरित्रवान, मेहनती और सुयोग्य लड़का है| वह अवश्य तरक्की करेगा|

आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि ममता का चयन आईएएस के लिए हो गया है| आयुष्मति की यह इच्छा है कि अपने अधीनस्थ कर्मचारी से वह विवाह नहीं करेगी| मुझे यह सम्बन्ध तोड़कर अपार हर्ष हो रहा है|

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लो देख लो, बड़े बाबुओं की करतूतें

दल्‍लों ने दल्‍लों की मीटिंग में दलाली की, बांटा ज्ञान

: मंत्री के खौफनाक बेटे ने नागरिकों और पत्रकार को सरेआम पीटा, दलाल-श्री अपनी दलाली में जुटे रहे : दलालों को वरिष्‍ठ की मान्‍यता दिलाने वाली फैक्‍ट्री हैं हेमन्‍त तिवारी : लखनऊ में मंत्री के पीए बन कर एक युवती से बलात्‍कार करने वाले रतनलाल का मामला सुलटा लिया हेमन्‍त ने : जनगणमन के गान से शुरू की गयी जनगणमन की छीछालेदर : पत्रकार का पिछवाड़ा लाल कर दिया मंत्री के मनबढ़ बेटे ने, दलाल-श्री बिल में घुसे :

कुमार सौवीर

जौनपुर : ठहाके बाद में लगाना। फिलहाल तो आपसे गुजारिश है कि पहले मेरी बात सुन लीजिए। यह बयान ठहाके और मूर्खता का पुलिन्‍दा है, लेकिन जब आपको पता है कि यह बात वह कह रहा है कि वह मूलत: दल्‍ला है तो फिर काहे की टेंशन। खुद को महान पत्रकार के तमगे टांगे इस जमूरे का नाम है हेमन्‍त तिवारी। अभी चंद दिन पहले ही जौनपुर में हेमंत ने अपने चिन्‍टू-पिन्‍टू को बुलाकर पुलिस, पब्लिक और पत्रकार की मीटिंग की, जिसमेंं पुलिस की चरण-वन्‍दना झूम-झूम कर की गयी।

हां, तो चुटकिला यह है कि, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे तथाकथित यूपी प्रेस मान्यता समिति के फर्जी अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने कहा कि, "आज विश्व के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में हमारी पुलिस दिन रात जनता के बीच में रहकर काम करती है पत्रकार भी उनसे अछूते नहीं रह गये है लेकिन जिस तरह से आज सूचना क्रांति का दौर चल रहा है उससे अब कोई भी बात छुपी नहीं रह सकती। यही वजह है कि शासन-प्रशासन ने जनता से सीधे जुड़ने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लेना शुरु कर दिया है अब जनता सीधे अपनी शिकायत अथवा अपनी बातें शासन प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा सकती है।"

सुन लिया आपने पत्रकारिता के जगत में आज स्‍थापित हो चुके इस दलाल-श्री का बयान। यह है हेमन्‍त तिवारी। बेहद बेशर्म। मुझे हमेशा शर्म आती है कि हेमन्‍त तिवारी जैसे घटिया लोग लगातार पत्रकारिता को वेश्‍यालय में तब्‍दील करने हैं और उसे बाकायदा धंधा साबित करने में जुटे रहते हैं। यह वही हेमन्‍त तिवारी है जो धर्म, कर्म, और शर्म के बलबूते पर केवल और सिर्फ केवल दलाली किया करता है। आम पत्रकार की अस्मिता को लूट और उसका बलात्‍कार कर चुके इस हेमन्‍त तिवारी अब एक घटिया प्राणी-नुमा आदमी है, यकीन नहीं आता। कहना कुछ, करना कुछ। घटिया गिरगिट। शाहजहांपुर में जिन्‍दा फूंक डाले गये पत्रकार जागेंद्र सिंह ही नहीं, ऐसे न जाने कितने मामलों पर केवल दलाली करायी है हेमन्‍त ने।

अब असल सवाल पर निगाह डाल लीजिए। दो दिन पहले मडि़याहूं में अमर उजाला और ईटीवी के पत्रकार ब्रजराज चौरसिया की सरेआम पिटाई हुई। यह पिटाई की थी यहां के मंत्री पारसनाथ यादव के गुण्‍डे लक्‍की यादव और उसके एक नाजायज गनर ने। लेकिन हेमंत तिवारी अपनी दारू लेकर लखनऊ में टल्‍ली हो कर फिर---। पुलिस कप्‍तान अतुल सक्‍सेना केराकत में बिजी हो गया। दीपू एंड कम्‍पनी ने इनफार्मर यानी अफसरों व मंत्रियों के बीच धंधा तेज कर लिया। यह वही लोग-पत्रकार हैं जो 17 जुलाई-16 को सामूहिक बलात्‍कार से पीडि़त बच्‍ची को न्‍याय देने के बजाय, जुल्‍फी प्रशासन को मर्दाना ताकत देते में जुटे रहे, ताकि उस बच्‍ची के मामले को सामूहिक बलात्‍कार के आरोप के बजाय उसे पागल साबित करते हुए उसे बनारस के पागलखाने तक भेज दिया जाए।

संस्था के अध्यक्ष असलम शेर खान सहित अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। अब यह मत पूछियेगा कि यह असलम शेर खान कौन है। स्वागत भाषण कार्यक्रम संयोजक आशीष चौरसिया व आभार फैसल हसन तबरेज ने प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन हसनैन कमर दीपू ने किया। दीपू वह वही पत्रकार हैं, जो 18 अगस्‍त-04 को सोंधी ब्‍लाक चुनाव के मतदान के दौरान स्‍थानीय नेता ललई यादव की लात खाकर कूं कूं कूं कर रहे थे, लेकिन आजकल बड़े पत्रकार बन चुके हैं। लोग बताते हैं कि अपनी पत्रकारिता का धंधा मंदा देख कर दीपू ने इनफार्मर का धंधा सम्‍भाल लिया है। इन्‍फार्मर का मतलब, हर मतलब वाले बड़े हैसियत शख्‍स तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाना।

पुलिस, पब्लिक और पत्रकार के बीच ऐसा सामंजस्य बनाने की जरुरत है जिससे की पूरे समाज को इसका लाभ मिल सके और हमारा विभाग इसके प्रति दृढ़ संकल्प लेकर काम कर रहा है। यही वजह है कि जनता और पुलिस के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के लिए जल्द ही सभी थाना क्षेत्रों में स्पेशल पुलिस अधिकारी (एसपीओ)  की तैनाती की जाएगी। जनता के बीच से ही अच्छा काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनों व अन्य सम्भ्रांत लोगों को लेकर यह काम जल्द ही किया जाएगा। यही नहीं तहसील व गांव स्तर पर भी जनता व पुलिस के बीच सीधे संवाद स्थाापित करने के लिए गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। उक्त बातें पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना ने कही।

उन्होंने कहा कि जनता व पुलिस के बीच जो गलतफहमियां व डर का माहौल बना हुआ है उसे दूर करने के लिए शासन-प्रशासन ने कई निर्देश जारी किये है। अपराधियों में भय का माहौल बना रहे इसलिए जनता को भी चाहिए कि वे ऐसे लोगों को चिन्हित कर पुलिस को सूचित करें जिससे कि समाज में फैली बुराइयों को दूर किया जा सके। सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी। संस्था की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक अच्छी पहल है जिससे पुलिस, पब्लिक और पत्रकार तीनों मिलकर समाज में फैली बुराइयों को दूर करने का काम करेंगे।

लेकिन हैरत की बात है कि इस लक्‍की यादव जैसे गुण्‍डों की करतूतों और पत्रकारों की दलाली, खामोशी और बिचौलियों की भूमिका पर एकजुट हमला नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह सिर्फ यह है कि पत्रकार खुद ही ऐसे धंधे में लिप्‍त हैं। ऐसे में आम पत्रकार की आवाज दब जाती है। बहरहाल, ऐसे हादसों-हमलों पर www.meribitiya.com लगातार सतर्क और सक्रिय है।

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