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सक्सेस सांग

सुप्रीम कोर्ट में लगेगा महिला वकील हिंगोरानी का पोट्रेट

: भारत की शीर्ष अदालत के 67 साल के इतिहास में पहली बार पुस्तकालय में एक महिला वकील का एक चित्र सजेगा : पुष्‍पा कपिला हिंगोरानी को जनहित याचिकाओं की मां के तौर पर सम्‍मान दिया जाता है : न्याय का एक सशक्‍त और ईमानदारी की अग्रदूत मानी जाती रही हैं कपिल हिंगोरानी :

मेरी बिटिया संवाददाता

नई दिल्‍ली : मुल्‍क की सबसे बड़ी अदालत की लाइब्रेरी में अब एक ऐसी शख्सियत का नाम चित्रयुक्‍त नाम जुड़ने वाला है, जिसे वास्‍तविक अर्थों में न्‍याय की अग्रदूत और जनहित याचिकाओं की जननी मानी जाती रही है। तय हुआ है कि न्यायिक दिग्गज एम सी सैतलवाड़, सीके डाफ़्ट्री और आरके जैन की छवियों के साथ-साथ विख्यात बैरिस्टर कपिला हिंगोरानी की तस्वीर शुमार की जाए। इस महान महिला वकील का नाम है स्‍वर्गीय पुष्‍पा कपिला हिंगोरानी। न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने मंगलवार को अपने चित्र को रिहा करने के बाद कहा, "यह लंबे समय से लंबित था"। उन्‍होंने बताया कि हिंगोरानी के लिए सम्मान बहुत पहले आ जाना चाहिए था क्योंकि वह अजीब के लिए न्याय का एक सच अग्रदूत था।

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जस्टिस और न्‍यायपालिका

ब्रिटेन में कार्डिफ लॉ स्कूल से स्नातक होने वाली पहली भारतीय महिला कपिल हिंगोरानी, ​​1979 में शीर्ष अदालत में सार्वजनिक हित याचिका (पीआईएल) दर्ज करने वाली पहली वकील थीं। उनकी याचिका उन कैदियों के लिए थी जो कई वर्षों तक मुकदमे का इंतजार कर रहे थे । कभी-कभी जेल में अधिक से अधिक समय के लिए उन्हें सजा देने के लिए अधिक सजा भुगतनी पड़ती थी।

कपिल हिंगोरानी को जनहित याचिकाओं की मां कहा जाता है। उनकी पहली जनहित याचिका ने तेज परीक्षणों के लिए दिशा-निर्देश तय करने के लिए शीर्ष अदालत का नेतृत्व किया।

बिहार सरकार के हजारों कर्मचारियों को 4 माह से लेकर 94 महीने तक वेतन देने से वंचित करने के लिए हिंगोरानी ने दूसरी महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की थी। एक बैरिस्टर, हिंगोरानी कार्डिफ में कानून का अध्ययन करने वाली पहली भारतीय महिला थीं। हालांकि उनका परिवार नैरोबी और लंदन में बस गया, उसने भारत में रहने के लिए चुना क्योंकि वह महात्मा गांधी से प्रेरित थीं। उसकी जनहित याचिका ने उच्च न्यायालयों को शीघ्र परीक्षणों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी करने के लिए नेतृत्व किया और लगभग 40,000 कैदियों को जारी किया गया था।

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लर्नेड वकील साहब

नैरोबी में 1 9 27 में जन्मे, हिंगोरानी महात्मा गांधी से प्रेरित थीं। सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ तीन महिला वकीलों थे जब उन्होंने वहां अभ्यास शुरू किया था। वह 86 साल की थी, जब वह 60 साल के एक उल्लेखनीय कैरियर के विस्तार के बाद 2013 में मृत्यु हो गई थी। हिंगोरानी और उनके तीन बच्चों - वकील अमन, प्रिया और श्वेता - शीर्ष अदालत में 100 से ज्यादा मामले लड़े।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रुपिंदर सूरी ने कहा कि यह चित्र बार के सदस्य के रूप में हिंगोरानी की उपलब्धियों की सही पहचान है। "वह सिर्फ एक वकील नहीं बल्कि एक बैरिस्टर भी थी वह ब्रिटेन में रह सकती थी, लेकिन भारत को चुना, "उन्होंने कहा।

पत्रकारों का आशियाना उजाड़ रहे योगी, जबकि खट्टर उन्‍हें भुखमरी से बचाने

: दस हजार रूपया महीना पेंशन देगी हरियाणा सरकार पत्रकारों को : पांच बरस तक सतत पत्रकारिता के बाद मान्‍यता मंजूर कर दी जाएगी : वयोवृद्ध पत्रकारों को पेंशन की योजना भी लागू कर दी मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने :

कुमार सौवीर

चंडीगढ़ : हरियाणा के पत्रकार आज बिना दारू के ही मस्‍त हैं। आज एक बूंद भी नहीं चखी है इन पत्रकारों ने, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी तरह टल्‍ली हो चुके हैं। वजह है हरियाणा सरकार का वह ऐलान, जिसके तहत हर पत्रकार को अब हर महीने दस हजार रूपयों की अनिवार्य पेंशन दी जाएगी। शर्त सिर्फ यह होगी कि वह लगातार पांच बरस तक श्रमजीवी पत्रकार की भूमिका में कार्यशील रहा हो। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने आज यहां पंचकूला में सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मासिक पेंशन योजना की शुरूआत करके 9 व्योवृद्ध पत्रकारों को पेंशन प्रदान की।

इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इस योजना के अन्तर्गत दैनिक, संध्या, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक समाचार पत्र, समाचार एजेंसियों, रेडियो स्टेशनों, समाचार चैनलों के 60 वर्ष से अधिक आयु के मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मियों को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन प्रदान की जाएगी।

पात्रता मानदण्ड की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि दैनिक, संध्या, साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक समाचार पत्र, समाचार एजेंसियों, रेडियो स्टेशनों, समाचार चैनलों के मान्यता प्राप्त मीडिया कर्मी जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कम से कम 20 वर्ष का अनुभव हो और उनकी आयु 60 वर्ष से अधिक हो, पेंशन के पात्र होंगे। इसी प्रकार, मीडिया कर्मी की कम से कम पिछले पांच वर्षों से सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।

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पत्रकार पत्रकारिता

नियम एवं शर्तें के बारे में उन्होंने बताया कि लाभार्थी मीडिया कर्मी को अपने बैंक खाते में पेंशन की रकम जमा करने के लिए किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में आधार लिंक बचत बैंक खाता खोलना होगा और हर वर्ष जनवरी मास में इस आशय का एक प्रमाण पत्र देना होगा।

उन्होंने बताया कि किसी अन्य राज्य सरकार या समाचार संगठन से किसी भी प्रकार की पेंशन या मानदेय प्राप्त कर रहे मीडिया कर्मी भी पात्र होंगे। बहरहाल, यदि कोई अन्य पात्र मीडियाकर्मी किसी अन्य राज्य सरकार से 10,000 रुपये प्रतिमास से कम राशि की पेंशन प्राप्त कर रहा है तो इस योजना के तहत पेंशन की पात्रता में से वह राशि घटा दी जाएगी।लाभार्थी मीडिया कर्मी के निधन के मामले में, मासिक पेंशन उसके पति/पत्नी (पत्नी या पति, जैसा मामला हो सकता है) को दी जायेगी, यदि उसे किसी भी संगठन या राज्य सरकार से वेतन/मेहनताना/पेंशन या कोई अन्य नियमित वित्तीय सहायता नहीं मिल रही है।

एक पत्रकार ने खट्टर के इस फैसले पर झूमते हुए बताया कि:- लो 10 हजार रुपये महीने का तो जुगाड़ कर दिया हरियाणा सरकार ने--बस छह महीने और चल जाए मेरी मान्यता तो हो जाउंगा पात्र (पांच वर्ष से हरियाणा सरकार की मान्यता है जरूरी)।

मजीठिया पर श्रम मंत्रालय ने मीडिया हाउसों के पेंच कसे, जवाब-तलब

: केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने मजीठिया मामले पर मीडिया हाउस से सीधे मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट : मध्‍य प्रदेश के पत्रकार संगठन की शिकायत पर करवाई : जुलाई-10 से बकायों की वसूली की मांग की गयी थी :

रमेश चंद राय

वाराणसी : केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में आने वाले मीडिया हाउस से मजीठिया वेज बोर्ड के अंतर्गत तय वेतन के आधार पर पी एफ की कटौती के मामले में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।

इस मामले में मध्यप्रदेश पत्रकार संगठन ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय में शिकायत की थी। इस शिकायत में संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सुचेन्द्र मिश्रा ने मांग की थी कि 19 जून 2017 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में मजीठिया वेज बोर्ड देने के निर्देश दिए गए थे। इस आधार पर संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष ने मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा निर्धारित वेतन के आधार पर भविष्य निधि की कटौती करने और जुलाई 2010 से बकाया की वसूली करने की मांग की गई थी।

इस मामले को श्रम मंत्रालय ने अपनी कंप्लायंस विंग को सौंप दिया है और इस विंग ने सीधे मजीठिया वेज बोर्ड के दायरे में आने वाले मीडिया हाउसेस को नोटिस जारी कर उनसे इस मामले में एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजने को कहा है। भविष्य निधि केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय के अंतर्गत आता है इसके चलते इस मामले में केंद्रीय श्रम मंत्रालय राज्य के श्रम विभागों पर निर्भर नहीं है। वही मजीठिया वेज बोर्ड के अंतर्गत वेतन दिलाने का मामला राज्य के श्रम विभागों के अंतर्गत आता है।

इस तरह से पहली बार मजीठिया मामलों में केंद्रीय श्रम मंत्रालय मीडिया हाउसेस से जवाब तलब करेगा। इसके चलते भविष्य निधि के मामले में करवाई की उम्मीद बंधी है।

जागरण में उत्‍पीड़न पर रोक, तबादले का आदेश रद

: मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में श्रम विभाग ने लगायी जागरणकर्मी के ट्रांसफर पर रोक : वेज मांगने पर सिलीगुड़ी भेज दिया था एक सेल्‍समैन को : कमजोर पेड़ काटने की सुपारी दी गयी थी कुख्‍यात अजय सिंह को :

शशिकांत सिंह

कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर से दैनिक जागरण को एक बड़ा झटका लगा है। कानपुर जहां दैनिक जागरण का मुख्यालय है वहां दैनिक जागरण के मालिकान को ताजा झटका कानपुर श्रम विभाग से मिला है। वह भी जागरण के एक सेल्समैन ने उसकी स्थिति से उसको अवगत करा दिया है। सहायक श्रम आयुक्त आरपी तिवारी ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन एवं बकाये की मांग करने वाले दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत सेल्सकर्मचारी रामजी मिश्रा के सिलीगुड़ी स्थानांतरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। श्री तिवारी द्वारा जारी आदेश में दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से रामजी मिश्रा का कानपुर कार्यालय से सिलिगुड़ी किए गए तबादले को अनुचित एवं अवैधानिक करार दिया गया है और इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी गयी है। रामजी मिश्रा दैनिक जागरण में सेल्समैन के रुप में वर्ष २००० से कार्यरत हैं।

गौरतलब है कि रामजी मिश्रा ने कानपुर श्रम विभाग में दिनांक 18 जुलाई 2017 को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में रिकवरी का क्लेम फाइल किया था। जिससे झुब्ध होकर दैनिक जागरण के प्रबंधक ने दिनांक 24 जुलाई 2017 को रामजी का तबादला सिलीगुड़ी कर दिया था। जिसके बाद रामजी ने तबादला निरस्त किए जाने की गुहार कानपुर श्रम विभाग में लगाई थी।

बतातें चलें कि 19 जून 2017 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से देश के स्वघोषित इस नंबरवन अखबार के मालिक सकते में आ गए थे। कोर्ट के रुख और भविष्य की अड़चनों को सतही तौर पर ध्यान में रखते हुए मलिकान ने "कमजोर पेड़" काटने की "सुपारी" प्रबंधक अजय सिंह को दे दी थी। जिसके बाद अजय सिंह ने बेहद शातिराना अंदाज में उत्पीड़न करने के बाद 23 लोगों का तबादला कर दिया था। ये फैसला इन्हीं 23 कर्मचारियों में शामिल रामजी मिश्रा के मामले में आया है।

फिलहाल श्रम विभाग द्वारा लगाये गये इस रोक से जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मांगने वाले कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है। देखना है कि इसी तरह दुसरे श्रम विभाग कब पहल करते हैं। एक बातचीत में रामजी मिश्रा ने कहा कि वे मजीठिया से रिलेटेड किसी भी ग्रूप में शामिल नहीं हैं और मजीठिया वेज बोर्ड की न्यूज सोशल मीडिया पर पढ़कर उन्होने भी क्लेम लगा दिया और उसके बाद उनका कंपनी ने सिलीगुड़ी ट्रांसफर कर दिया था।

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