Meri Bitiya

Thursday, May 24th

Last update05:24:48 PM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

सैड सांग

बच्चियों पर यौन-हमले: अरे हम बाप हैं, दुष्‍कर्मी नहीं

: सच कहूं, तो ऐसे शैक्षिक वीडियों ने तो सारे मर्दों को रेपिस्‍ट साबित करने में कोई कसर तक नहीं छोड़ी : अरे यह तो बताओ कि उनसे लिपटा शख्‍स पुरूष-मात्र नहीं, बल्कि उनका अपना ही असली बाप है : आखिरकार आप और हम कैसे तरह का समाज निर्माण करने पर आमादा हैं :

कुमार सौवीर

लखनऊ : वाट्सऐप पर अभी एक वीडियो आया है, पूरी तरह शैक्षिक। बच्चियों के साथ हो रही अभद्र यौन-उत्‍पीड़न को लेकर बेहद प्रभावशाली तरीके से गम्‍भीर बातचीत की गयी है इस वीडियो में। बताया जा रहा है कि बच्चियों के साथ होने वाली अभद्र-अश्‍लील यानी यौन-अपराधों की हरकतों का केंद्र और उनके स्‍पर्श-इंद्रियों पर सतर्कता को लेकर बच्चियों को क्‍या प्रतिक्रिया करनी चाहिए, कि सीमा तक, और किससे करनी चाहिए।

मगर मेरे अनुभव और मेरी प्रवृत्तियां बिलकुल अलहदा हैं, जो उस वीडियो की शिक्षा से हल्‍का-सा भिन्‍न भी हैं। मसलन, मैं अपनी बेटियों की उम्र की बेटियों को मिलते समय अथवा उनसे विदा लेते वक्‍त उनका सिर चूम लेता हूं। ऐसे हर वक्‍त में मुझे साफ लगता है कि मैं अपनी प्राणों से प्‍यारी बेटियों को ही महसूस कर रहा हूं। मैंने हमेशा पाया है कि ऐसी बच्चियां मेरे सामने खुद ही अपना सिर झुका कर अपने सिर को चूमने देने की इजाजत मुझे देने पर गर्व की अनुभूति महसूस करती हैं। कम से कम तो इस बारे में किसी भी बच्‍ची ने इस बारे में कोई भी ऐतराज जाहिर नहीं किया है। न मुझसे, न मेरी बेटियों से और न ही किसी अन्‍य से। बल्कि वे सब हमेशा मुझसे स्‍नेह और आत्‍मीयता से पेश आती हैं। मेरे सामने आते ही वे अपना सिर खुद ही मेरे सामने झुका देती हैं। खिलखिलाती हैं, और उसके बाद हाथ मिलाती हैं मुझसे। कुछ तो लिपट तक जाती हैं मुझसे। पूरे स्‍नेह और आत्‍मीयता के साथ। जैसे उनके साथ लिपटा शख्‍स कोई पुरूष नहीं, बल्कि उनका अपना ही असली बाप हो।

सच कहूं ? इस वीडियो ने तो मुझे कठघरे में खड़ा कर दिया है। यह वीडियो बता रहा है कि सिर के बाल तक छूना भी अपराध है, और ऐसी हरकत करने वाले शख्‍स की कुत्सित का परिचायक है, बच्चियों को उससे बचना चाहिए। ऐसा करने वाले शख्‍स पर फौरन तेज आवाज में, और चिल्‍ला कर प्रतिवाद करना चाहिए।

अब आप बताइये न, कि मुझे क्‍या करना चाहिए।

खास तौर पर तब, जबकि मुझे हमेशा यही लगता रहा है कि किसी भी शिक्षक को अपने विषय को उठाने और उसकी व्‍याख्‍या करने का दायित्‍व निभाना ही चाहिए। किसी भी शिक्षक के हर तर्क हर कसौटी पर बिलकुल सटीक ही हों, ऐसी गारंटी देने की कोशिश करने से किसी भी शिक्षक को बचना चाहिए।

मेरे दोस्‍तों। हमें हर कीमत पर अपनी बच्चियों को बचाना है ताकि उन पर मंडराते खतरों से उन्‍हें सुरक्षित छाता मुहैया कराया जा सके। यह कोशिश दुनिया की हर कीमत चुका कर ही निपटानी होगी। लेकिन इसके साथ ही हमें यह भी देखना होगा कि बच्चियों के प्रति होने वाले ऐसे जघन्‍य अपराधों की आड़ में कहीं ऐसे निर्दोष रिश्‍तों के धागे-तन्‍तु तो नहीं टूटे-बिखेरे जा रहे हैं, जो मानवता की सर्वोच्‍च और प्राथमिक पाठशाला में कत्‍ल हो जाएंगे।

और अगर ऐसा हुआ, तो न हम अपनी बच्चियों के सामने अपना चेहरा दिखा पायेंगे, और न ही हम लोग उनकी आंखों में आंखें डाल कर बात कर सकेंगे।

तो फिर तय कीजिए मेरे दोस्‍त, कि आप और हम किस तरह का समाज तैयार करना चाहते हैं।

पत्रकार समिति के चुनाव में भारी उगाही, शिकायत दर्ज

: अध्‍यक्ष के पद के लिए चुनाव लड़ रहे एक प्रत्‍याशी पर लगा गम्‍भीर आरोप, फिलहाल नाम का खुलासा नहीं : एक लाख रूपयों की मांग, धमकी दी कि बड़े से बड़े नेता-फनेता तक का प्रेस-कांफ्रेंस खारिज करा देंगे : एक वरिष्‍ठ पत्रकार ने चुनाव अधिकारियों से की इस बारे में शिकायत :

मेरी बिटिया संवाददाता

लखनऊ : पत्रकार जब भी अपने बिरादरी के चेहरे पर लगे दाग-धब्‍बों को साफ करने की गम्‍भीर कोशिशें शुरू करते हैं, कुछ न कुछ ऐसा हो ही जाता है कि सारी कवायदें ही धूल चाट जाती हैं। उप्र राज्‍य मुख्‍यालय मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाता समिति के चुनाव में भी यही सब गंदा धंधा की शिकायत आयी है। पता चला है कि समिति के चुनाव में बड़े ओहदों पर अपनी किस्‍मत आजमा रहे कुछ प्रत्‍याशियों ने अपने चुनाव के नाम पर नेताओं से भारी उगाही का धंधा शुरू कर दिया है। फिलहाल, इस मामले की शिकायत समिति की चुनाव नियंत्रण समिति में दर्ज हो गयी है।

लेकिन कुछ भी हो, यह तो बेहद शर्मनाक हरकत चल रही है पत्रकारिता के नाम पर। अभी हमारे साथी राजेन्द्र द्विवेदी ने एक हादसे का जिक्र किया जिसमें कतिपय प्रत्याशी पत्रकार चुनाव आदि के नाम पर भारी उगाही करने का षड्यंत्र कर रहे हैं। राजेन्द्र द्विवेदी ने ऐसी कुत्सित हरकतों की खबर चुनाव अधिकारियों तक भेज दी है।

राजेन्द्र द्विवेदी ने जो पत्र चुनाव अधिकारियों को भेजा है, वह निम्नवत है:- माननीय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, लखनऊ। महोदय, मान्यता समिति के चुनाव में कुछ प्रत्याशियों के द्वारा चुनाव के नाम पर कई लोगों से पैसे की मांग की जा रही है। इस संबंध में व्यक्तिगत स्तर पर कई लोगों ने मुझसे यह जानकारी भी चाही कि मान्यता समिति क्या है? क्या इस चुनाव में लाखों रुपये खर्च होते है। अध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी का नाम लेकर बताया कि अमुख प्रत्याशी मुझसे चुनाव के लिए एक लाख रुपये की मांग कर रहा था। पैसा मांगने वाले पत्रकार ने यह भी बताया कि अगर मैं अध्यक्ष चुन लिया गया तो मुख्यमंत्री और सभी मंत्री बड़े-बड़े अधिकारी की प्रेसवार्ता मेरे अनुमति से ही होगी। अगर मैं अनुमति नहीं दूंगा तो सीएम भी प्रेस कांफ्रेस नहीं कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि मान्यता समिति का अध्यक्ष पूरे प्रदेश के हजारों पत्रकारों का नेता होता है। अध्यक्ष प्रत्याशी ने यह भी बताया कि उसकी जीत सुनिश्चित है। अपनी जीत के पक्ष में पत्रकारों की मतदाता सूची भी दिखाया और बताया कि चैनल के सभी साथी मेरे साथ है। प्रिंट और उर्दू, अंग्रेजी पत्रकार भी साथ है। अब तक चार बार फोन करके पैसे की मांग कर चुके है। इसी तरह और बहुत सारी बातें बताई जिसे पत्रकारों के सम्मान में लिखना उचित नहीं है।

आपसे यह अनुरोध है कि निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव खर्चे का भी एक निश्चित बजट निर्धारित किया जाना चाहिए। गाड़ियों के काफिले व अन्य मदों में हजारों रुपये खर्च करने वाले प्रत्याशियों पर कार्रवाई करने का प्राविधान चुनाव में होना चाहिए। भविष्य में जब भी चुनाव हो तो प्रत्याशियों को कम से कम अपनी आय-व्यय एवं आपराधिक  रिकॉर्ड के उल्लेख का प्रावधान नामांकन पत्र में अवश्य होना चाहिए। जिससे पत्रकारों की गरिमा बनी रहे। मेरा यह अनुरोध है कि चुनाव अधिकारी के स्तर से यह घोषण कर दी जाए कि अगर चुनाव के नाम पर कोई प्रत्याशी वसूली करते साक्ष्य के साथ पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। चुनाव कोई भी जीते हारे लेकिन मीडिया की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।

चुनाव अधिकारी से यह उम्मीद है कि चुनाव की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रत्याशियों की एक मीटिंग करके उनसे यह जरूर अनुरोध करेंगे कि चुनाव के नाम पर वसूली ना करें।

राजेंद्र द्विवेदी की इस शिकायत का खुलासा होने पर मेरी बिटिया डॉट कॉम के संस्‍थापक संपादक और उप्र राज्‍य मुख्‍यालय मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाता समिति के चुनाव में सचिव के पद पर प्रत्‍याशी कुमार सौवीर ने राजेन्द्र द्विवेदी से अपेक्षा की है कि वे इस मामले के उन सभी पहलुओं का खुलासा करें, जिससे दागी पत्रकारों का पर्दाफाश किया जा सके। कुमार सौवीर ने लिखा है कि,"

राजेन्द्र द्विवेदी जी!

फिर तो आपसे अपेक्षा है कि आप ऐसे लोगों के नाम फौरन सार्वजनिक कर दें. जो पत्रकारिता के चेहरे पर कालिख पोतने का षड्यंत्र कर रहे हैं।

आप को ऐसी हरकत करने वालों के बारे में जो भी सूचना है, वह सभी साथियों में वितरित कर दें। तत्काल ।

दूध का दूध और पानी का पानी अपने आप ही तय कर देंगे हमारे सभी सम्मानित पत्रकार साथीगण।

निवेदक:-

कुमार सौवीर

सचिव पद के प्रत्याशी।

भीड़ ने प्रेमी युगल को नंगा कर पीटा, जुलूस निकाला

: हिन्‍दुत्‍व के नाम पर आपने राजसत्‍ता तो बटोर ली है। लेकिन कौन सा राज-धर्म स्‍थापित कर रहे : घंटों तक चलता रहा हंगामा, राजदंड की प्रतीक पुलिस नहीं दिखी : आपकी नीतियों से उपजी घृणा से निकलती हैं ऐसी घटनाएं, जो समाज और आपके ढांचों तक को नेस्‍तनाबूत करेगी :

कुमार सौवीर

लखनऊ : आपको अगर दिल दहलाने वाले वीडियो से देखने से डर लगता हो, तो आपको चाहिए कि आप उस वीडियो को कत्‍तई न देखें।

यह वीडियो एक ऐसे हादसे से उपजा था, जिसकी शुरूआत तो प्रेम से हुई थी, लेकिन जैसे ही समाज को पता चला, उसकी बात का बतंगड़ कुछ ऐसा बना डाला कि लोगों को अपने इंसान होने से शर्म आने लगे। नंगे युवक और युवती का जुलूस निकाला गया और उन्‍हें खूब पीटा गया। लेकिन इस पूरे दौरान एक भी किसी भी व्‍यक्ति में उन युवती-युवक में अपने बहन या बेटी खोजने की कोशिश नहीं की। जुलूस में शामिल हर शख्‍स उसमें केवल अपने सेक्‍स-विद्रूप और विक्षिप्‍त भाव के साथ पागलों की तरह जयजयकारा लगाता दिखा। पुलिस नदारत।

हमारे एक समाजवादी चिंतक मित्र हैं सूर्य कुमार। उन्‍होंने ही मुझे यह वीडियो भेजा। हालांकि उस वीडियो में इस बात का खुलासा नहीं हो पा रहा है कि यह हादसा कहां का है, लेकिन वीडियो में चल रही हरकतें और बातचीत के अंदाज से साफ पता चल रहा है कि यह घटना पूर्वांचल अथवा किसी आसपास से जुड़े हिन्‍दी भाषा-भाषी इलाके की है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक प्रेमी-प्रेमिका को गांववालों ने पकड़ा होगा, और फिर उस युवती और उस युवक को सार्वजनिक रूप से बुरी तरह पीटा, उसे नंगा किया और फिर उनका बाकायदा जुलूस निकाला।

शर्मनाक बात यह रही कि दर्जनों गांववाले इस जुलूस में शामिल रहे, बाकायदा ढोल-ताशे बजाये गये। पहले तो नंग युवक के कांधे पर नंगी लड़की को बिठा कर उसका जुलूस निकाला। उस पूरे दौरान गांववालों ने उस युवक और युवती को लगातार पीटा। जब पिटाई से बेदम हो चुका युवक जमीन पर गिर गया, तो उस लड़की को बाध्‍य किया गया कि वह अपने कांधे पर उस घायल युवक को पैदल चलाये। लेकिन पिटाई का दौर तब भी चलता ही रहा। और वह घायल युवती चंद कदमों के बाद ही ढह गयी। और तब भी भीड़ का तरस नहीं आया, और उसके बाद भी वे उन दोनों को पीटते ही रहे।

वीडियो में इन दोनों का हाव-भाव इस तरह साफ दिख रहा है, मानो कि उनके साथ हुई भारी पिटाई के बाद उनमें जीने की हिम्‍मत ही टूट गयी। इतना टूट गयी, वह युवती कि उसे अहसास तक नहीं हो पा रहा था कि वह वाकई पूरी तरह नंगी है। बुरी तरह बदहवास हो चुकी है वह युवती कि उस पर उसके साथ हो रहे पाशविक हादसों तक का अहसास नहीं हो रहा। जो भी उससे कहा जा रहा है, वह बस कर रही है। बिना किसी हुज्‍जत के। पिटाई का अहसास तक उस पर नहीं हो रहा। ठीक यही हालत उसके साथी पुरूष की है। भीड़ इन पूरी तरह निर्वस्‍त्र-युगल के हर अंग-प्रत्‍यंग पर लात-घूंसे बरसा रही है, लोग लकड़ी और छड़ी तक से उसके नाजुक अंगों पर कोंच रहे हैं, पीट रहे हैं।

उफ्फ, इंसान क्‍या वाकई इतना निर्मम और क्रूर हो सकता है, यकीन तक नहीं आता है।

इस वीडियो की मियाद दो मिनट पचास सेकेंड की है। लेकिन जो पूरे दौरान हालात दिख रहे हैं, उससे साफ चल रहा है कि यह यह पूरा हादसा करीब तीन-चार घंटे तक लगातार चलता ही रहा। लेकिन उस पूरे दौरान कहीं भी राजसत्‍ता और राजदंड की प्रतीक मानी जाने वाली पुलिस नहीं दिखी। और तो और, गांव के बड़े बुजुर्ग और जिम्‍मेदार लोग भी या तो अपना मुंह काला कर छिप गये हैं, या फिर उस भीड़ को उसका रहे होंगे।

तो अब सवाल हमारे प्रधानमंत्री और मुख्‍यमंत्री से है कि हिन्‍दुत्‍व के नाम पर आपने राजसत्‍ता तो बटोर ली है। लेकिन आखिर आप कौन सा राज-धर्म स्‍थापित कर रहे हैं। क्‍या कारण है कि आपके आदर्श ऐसे मदांध भीड़ का चरित्र बनते जा रहे हैं। मैं मानता हूं कि ऐसे हादसे आपकी शह पर नहीं भड़के हैं। लेकिन आप इस तर्क को कैसे खारिज कर सकते हैं कि आपकी नीतियों से उपजी घृणा से निकलती हैं ऐसी घटनाएं, जो केवल समाज को ही नहीं, बल्कि समाज तो दूर, खुद आपको और आपके ढांचों तक को नेस्‍तनाबूत कर देती हैं।

इसीलिए मुझे तथाकथित धर्म और घिनौने जातिवाद से घृणा है।

यह वीडियो वाकई वीभत्‍स है। इतनी, कि मैं पूरी रात सो नहीं पाया। हालांकि उसके भयावह वीभत्‍स दृश्‍यों को ब्‍लर्क करने की कोशिश कर रहा हूं, ताकि आपको उसको काफी कुछ दिखाने की कोशिश की जा सके। मगर यह काफी श्रमसाध्‍य काम है। यकीन मानिये, कि जैसे ही यह वीडियो संशोधित हो पायेगा, हम उसे आप तक पहुंचा देंगे।


बधाई हिन्‍दू-सेनानियों, तुमने इंसानियत का कत्‍ल कर डाला

: दंगाइयों में तब्‍दील हो गयी बिहार वाले औरंगाबाद की राजनीति : इमरोज मियां का घोंसला उजाड़ डाला मर्यादा पुरूषोत्‍तम के नाम पर हुंकार भरने वालों ने : दंगाइयों ने आगजनी, लूटपाट की। एसपी ने फोन तक नहीं रिसीव किया : कैराना में पलायन की बात तो पक्‍की नहीं है, लेकिन इमरोज अब हांगकांग जा रहा है :

कुमार सौवीर

लखनऊ : क्‍या आप बिहार के औरंगाबाद के एक व्‍यवसायी का रोना-बिलखना पसंद करेंगे बुरी तरह छटपटाती हुई आवाज, दिल चीर कर देने वाला आर्त-स्‍वर, जिसमें प्रशासन के प्रति शिकायत भी है, और हिन्‍दुओं के प्रति सहज स्‍नेह-प्‍यार। लेकिन एक बार भी इस आवाज में घृणा का अंदाज नहीं है। इसके बावजूद इस दंगे में उसका सारा कुछ भस्‍म हो गया, लुट गया और बर्बाद हो गया।

जिस तरह एक चिडि़या अपने बच्‍चों को पालने-सम्‍भालने के लिए अपना घोंसला बेहद सुरक्षित ठिकाने पर बनाती है, ताकि उसके बच्‍चे हिफाजत से रहें, उन्‍हें कोई नुकसान न हो पाये। इमरान ने भी यही सोच कर औरंगाबाद में अपना ठिकाना बनाया था, सोचा था कि औरंगाबाद के हिन्‍दू-मुसलमान एकसाथ रहेंगे, तो तसल्‍ली रहेगी। मगर उनका यह फैसला उनकी जिन्‍दगी को बर्बाद कर गया। इमरान के पास अब कुछ नहीं है। पश्चिम यूपी के कैराना में मुसलमानों की करतूतों से त्रस्‍त होकर वहां हिन्‍दुओं के पलायन की बात तो अभी जांच-पड़ताल तक ही सिमटी है, मगर औरंगाबाद के इमरान ने फैसला कर लिया है कि अब चाहे कुछ भी हो जाए, वह औरंगाबाद में नहीं रहेगा। खुद को समेट कर उसने फिलहाल हॉगकॉंग जाने का फैसला क‍र लिया है।

आप अगर इमरान पर बीती पहाड़ जैसी सिसकियों को सुनना चाहें, तो नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक कर सुन सकते हैं:-

दंगा और इमरान

Page 6 of 231