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ज़िंदगी ओ ज़िंदगी

इनकी अपनी जिन्‍दगी खुशनुमा, दर्शक जाएं जहन्‍नुम में

: दोहा में एकसाथ कितना एन्‍ज्‍वाय कर रही हैं यह खासमखास दोस्‍त : टीवी में खूंख्‍वार, पर रिश्‍तों में इन जंगली बिल्लियों का प्रेम तो देखिये : हमें किसी की मौज-मस्‍ती पर कोई ऐतराज नहीं, लेकिन आप लोग दर्शकों को क्या परोस रही हैं जंगली बिल्लियों :

कांतिशिखा

मुरादाबाद : आइये, इन खूंख्‍वार और जंगली बिल्लियों की दिलकश तस्‍वीरें देखिये। इनमें से एक हैं कट्टर हिन्‍दुत्‍व समर्थक और भगवा विचारधारा से सराबोर भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता नूपुर शर्मा, दूसरी हैं भाजपा को धूल चटाने और धर्मनिरपेक्षता की नयी जमीन और नींव तैयार करने में जुटीं कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी। इनके साथ ही साथ हैं आप की अल्का लाम्बा। आपकी मतलब आप पार्टी की प्रवक्‍ता, जो एक तरफ कांग्रेस की जड़ें खोदने में जुटी रहती हैं, तो दूसरी ओर भाजपा को तबाह करने का संकल्‍प लेती हैं। टीवी के डिबेट में इन तीनों की भौंहें हमेशा तनी रहती हैं। तीनों ही एक दूसरे पर अपने पंजे मार-मार कर एक-दूसरे को घायल करने पर आमादा रहती हैं।

लेकिन आज इनकी यह नयी तस्‍वीर देखिये। किसी को यकीन तक नहीं आयेगा कि टीवी में एक दूसरे की धज्जियां उड़ाने वाली यह खूनी बिल्लियां दोहा कतर में एक साथ एन्जॉय कर रही हैं। एक साथ है, मौज कर रही है। जीवन को जीने की कोशिश में हैं। अलग-अलग नहीं, एकसाथ। मौज-मस्‍ती के साथ। बेतकल्‍लुफी के साथ।

टीवी डिवेट में अक्सर "खूनी बिल्लियों" की तरह ये तीनों आपस में लड़ती हैं, पर बाहर किस कदर एक साथ एन्जॉय करती हैं! और एक हम हैं कि आपस में ही लड़ते रहते हैं...

Uday Jeffory Belmonte : I believe they are not personal enemies, it very normal ,so many of my family members support BJP , so many Friends do but I don't...but we are still friends and family

Kanti Shikha : आप सही हैं, पर ये जब टीवी पर आपस में झगड़ती हैं तो उसका दर्शकों पर क्या प्रभाव पड़ता है, यह सोचने वाली बात है..

Uday Jeffory Belmonte : That is debate on ideological position...

Kanti Shikha : बहस कैसी भी हो..झगड़ने के बजाय इस मैत्रीभाव के साथ भी तो हो सकती है. दर्शकों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

शबाना कलीम अव्वल हम पगलेट हैं....और ये सब मिले हुये।

हमको भी ऐसे सेल्फी लेना अपने खास दुश्मनों के साथ

अजय कुमार सिंह : मुझे अच्छा लगा यह देखकर कि वैचारिक विरोध व्यक्तिगत विरोध नहीं है।

Kanti Shikha : आप सही कह रहे हैं, होना भी यही चाहिए...पर दर्शकों को क्या परोसा जाता है? काश ये टीवी डिवेट में भी इस भाव को बनाये रखें ?

Adarsh Mishra : कोई गलत नही है, विचार आपस मे अलग हो सकते है पर संबंध अपनी जगह होते है

Kanti Shikha : आप सही कह रहे हैं, होना भी यही चाहिए...पर दर्शकों को क्या परोसा जाता है? काश ये टीवी डिवेट में भी इस भाव को बनाये रखें ?

Md Ali : जिन लोगो की विचारधारा को हम देश के लिये और जनतंत्र के लिये बेहतर नहीं समझते, उनसे इस स्तर पर हम कैसे सामंजस्य बैठा सकते हैं कि उनके साथ सैर सपाटे और मौज मस्तियाँ हों ? भले ही ये पर्सनल सही मगर जनता की भावनायें यू खुले आम अगर आहत होती हैं तो सवाल स्वाभाविक है ।

Vivek Vikram Singh : वाह क्या पिक है पोल ही खोल दिया

Rajesh Tyagi यह पूरी राजनीति का सार है। इस वर्ग संलयन को समझ लें, तो क्रान्ति दूर नहीं।

Kanti Shikha : इस पोस्ट का सार यही है..

Yusuf Munna : एक टीवी प्रोग्राम में ओवैसी और संबित पात्रा आपस में भिड़े हुए थे ----- ब्रेक के दौरान एक दर्शक ने ओवैसी को अपशब्द कह दिया ---- ओवैसी ने कहा की मैं इस भाई की बात का जवाब कैमरे के सामने दूंगा ----- संबित पात्रा ने उस दर्शक को डांटते हुए कहा की ओवैसी मेरे भाई है ---- आप लोग जो कैमरे के सामने देखते है वो हमारी प्रोफेशनल लाइफ है ---- जो फिल्म की तरह है ---- आप लोग सिर्फ फिल्म देखिये

Kanti Shikha : यहाँ दर्शक ने क्या किया.. असल मसला तो यही है, ये लड़ाई झगड़ा दर्शकों को क्यों परोसा जाता है? बहस सद्भावना के साथ भी तो हो सकती है.. हम यही तो चाहते हैं कि झगड़े न हों...फिर जनता को क्यों झगड़ने के लिए उकसाया जाता है? ये कैसा प्रोफेशन है, कि दिलों में मोहब्बत है, एक दूसरे को भाई समझते हैं और जनता के सामने दुश्मन बनने का ड्रामा करते हैं..

Yusuf Munna : आपने जो कहा लोगों की समझ मे आ जाए तो अनेक मसले हल हो जाएं

सोनू खान राजनीति मूर्ख तो जनता है। भारतीय मूर्ख होते हैं  इसलिये यहाँ की राजनीति गंदी होती है।

Dinesh Aggarwal : ये तो चचेरी लग रहीं हैं।

Mahender Sehgal : हम एक हैं

Mukesh Bhargava : ये तो ठीक है। दुश्मनी तो नहीं है, ना।

हाँ, टी वी डिबेट में ज़रूर बातचीत का लहजा ठीक नहीं है, बिल्लियों की तरह खों-खो करती हैं। इसको ज़रूर ठीक करना चाहिए।

Kanti Shikha : गम्भीर बात तो यही है कि ये टीवी डिवेट में ये जो कुछ ड्रामा करती हैं, उसका समाज पर नकारात्मक असर पड़ता है...जब खुद आपस में अच्छे रिश्ते हैं तो समाज में सबको दुश्मनी की तरफ क्यों ढकेल रही हैं..

Dinesh Aggarwal : सब मिले हुए हैं जी। -Arvind Kejriwal

Swapan Bagchi : आप को अक्ल बहुत देर से आयी

Naresh Shandilya : ये तो अच्छी बात है।

Kanti Shikha : आप सही कह रहे हैं, होना भी यही चाहिए...पर दर्शकों को क्या परोसा जाता है? काश ये टीवी डिवेट में भी इस भाव को बनाये रखें ?

Moolchand Garg : Neta.aur.vkil.kevl.dikhane.ko.ldte.he

Pawan Kumar Goswami : कान्ति जी, इसे कहते हैं "चोर चोर मौसेरे भाई"..... जाने वो दिन कब आयेगा जब पब्लिक इन ठगबाजो को सरेआम "........." करेगी !!

San Jeev : They all are friends.. started their carrier from DU student union.

Bhagat Balliawadi : मतलब यार साथ रहना किसी से मिलना जुलना । गलत है क्या। डीबेट अपनी जगह दोस्ती अपनी जगह

Kanti Shikha : गम्भीर बात तो यही है कि ये टीवी डिवेट में ये जो कुछ ड्रामा करती हैं, उसका समाज पर नकारात्मक असर पड़ता है...जब खुद आपस में अच्छे रिश्ते हैं तो समाज में सबको दुश्मनी की तरफ क्यों ढकेल रही हैं..

Bhagat Balliawadi : ये तो श्रोताओं के समझ पर निर्भर करता है।

अरुण अवध लड़ना इनका पेशा है जिसके इन्हें पैसे मिलते हैं।

अरुण अवध क्योंकि जनता ऐंग्री यंगमैन पसंद करती है।

Laxmi Khanna Suman : They provide good intertainment

जिनपिंग ने ताल ठोंकी, सूच्याग्रं नैव दास्यामि बिना युद्धेन

: चीनी संसद में शी जिनपिंग ने दोहराया महाभारत का विनाश-वाक्‍य कि सूई की नोंक भर जमीन न दूंगा : हस्तिनापुर वाले दुर्योधन वाला भयावह ऐलान, जिससे कौरव-वंश तबाह हो गया था : चीनी-हिन्‍दी भाई-भाई का स्‍नेह-बंधन अब समाप्ति पर शुरू :

डॉ उपेंद्र

लखनऊ : सूच्याग्रं नैव दास्यामि बिना युद्धेन केशव ।( हे कृष्ण , बिना युद्ध के सूई के नोक के बराबर भी ( जमीन ) नहीं दूँगा ।

जी हां, यह वह विनाश-वाक्‍य है, जो महाभारत के पन्‍नों पर अमिट दर्ज हो चुका है। कौरव वंश के सबसे बड़े और नीति-नियंता, नेतृत्‍वकर्ता तथा कुरू-वंश को अपना नेतृत्‍व देने वाले दुर्योधन ने यह ऐलान किया था। यह तब हुआ था जब पाण्‍डवों के दूत और भगवान कृष्‍ण ने हाथ जोड़ कर दुर्योधन के सामने यह निवेदन किया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, मगर वह पांडवों को सुई के बराबर भी जमीन नहीं दूंगा।

महाभारत के पन्‍नों पर दर्ज है यह लाइनें। लेकिन अब लगता है कि चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने दुर्योधन के उस विवादित डायलॉग में अपना भविष्‍य खोज लिया है। हालांकि जिनपिंग ने केवल इस वाक्‍य की तेजी को ही अपनाया है, उसे तेज को नहीं। जिसमें साफ दर्ज है कि इसमें इन वाक्‍यों ने ही कौरव वंश को शांत किया था। वरना, ऐसा भी नहीं है कि अपनी शैली में जिनपिंग इन वाक्‍यों का परिणाम नहीं आंक पाते। ....after 5 thousand years China said, "China will not cede single inch of land, ready for 'bloody battle': Xi Jinping

In a 30-minute long nationalistic speech in China's Parliament, Xi said "since modern times, rejuvenation of the great Chinese nation has become the biggest dream of our nation"

अमर उजाला में खबर पर खेल, फर्जी खबर छापी

: दबंग भाजपा नेता की उंगलियों पर नाचती काशी की पुलिस ने एक निर्दोष को रंगदारी के मुकदमे में फंसा दिया : बनारस के अमर उजाला ने जो हरकत की है, वह इस अखबार में अभूतपूर्व रही : सम्‍पादक से शिकायत दर्ज, एक्‍शन नहीं लिया तो मुकदमा झेलें :

मेरी बिटिया संवाददाता

वाराणसी : अमर उजाला एक ऐसे अखबार की छवि रखता है, जहां दलाली और तथ्‍यों के साथ तोड़मरोड़ कर खबरों का प्रस्‍तुत नहीं किया जाता है, लेकिन अगर आपको यह भ्रम हो तो वाराणसी से छपने वाले इस अखबार के संस्‍करण को बांच लीजिए। जहां भाजपा के एक दबंग सभासद के इशारे पर पुलिस ने एक निर्दोष को रंगदारी उगाहने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया। लेकिन हैरत की बात यह रही कि इस मामले की छानबीन करने के बजाय इस अखबार ने इसे मामले को केवल उसी एंगेल तक ही सीमित रखे किया, जो पुलिस कागजों में दर्ज है। आरोप है कि भाजपा नेता के इशारे पर इस अखबार के संवाददाता ने इस पूरे मामले में एक निर्दोष को फंसाते हुए उसे समाज में नंगा कर आपराधिक साजिश कर डाली। अब मामला संपादक तक पहुंच गया है, लेकिन पीडि़त पक्ष ने तय किया है कि अगर इस मामले पर क्षमा याचना नहीं की गयी, तो वह इस अखबार को अदालत में खींचेंगे।

यह है वह गलत और फर्जी खबर, जिसे छापकर एक निर्दोष व्यक्ति ऊपर लगाया फर्जी मुकदमा की खबर।

हम आपको बता दे कि पूरा मामला थाना आदमपुर का है, जहां विनीत साहू नामक व्‍यक्ति ने अपनी शादी के लिए एक मैरिज लॉन बुक कराया था। इस लॉन पर एक पार्षद से कोई आर्थिक विवाद चल रहा था। पार्षद ने विवेक पर दबाव डाला कि उस लॉन का किराया लॉन मालिक को देने के बजाय, वह सीधे पार्षद को दे दे। लेकिन चूंकि ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं था, इसलिए विवेक ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसी पर विवाद खड़ा हुआ और जिसमे मारपीट तक हो गयी। विनीत साहू ने उसी वक्‍त पुलिस-100 को फोन कर पुलिस बुला ली थी, जिसके बीच ही चर्चा हुई। पुलिस के सामने ही  उसी रात दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हो चुका था। लेकिन इसके बावजूद उस पार्षद ने विनीत साहू पर रंगदारी उगाहने का आरोप लगाते हुए आदमपुर थाने में दर्ज करा ली।

विनीत साहू के लोगों का आरोप है कि उस खबर को गलत तरीके से परोसा गया है। जिस अखबार पार्षद से रंगदारी के मामले प्रकाश में आया है।तो दूसरा पक्ष विनीत शाहू का पूरा मामला प्रकाश में नही लाया गया। जबकि फोन करके बुलाया गया विनीत के आने पर जया गार्डेन में विवाद हो गया। सच बात तो यही है कि विनीत ने ही 100 डायल को फोन करके पुलिस बुलाया था। सवाल यह है कि रंगदारी मांगने वाला व्यक्ति क्या इसी तरह रंगदारी मांगता है। अगर रंगदारी मांगता तो फिर 100 डायल को फोन क्यों करता।

खैर अब बात की जाए उस सम्मानित अखबार अमर उजाला के वरिष्ठ क्षेत्रीय संवादाता की जो इस खबर को गलत तरीके से पेश किया है। इस पर अखबार के जिम्मेदार व्यक्तियों को मामले की गहराई में जाकर पता लगाना चाहिए कि ये खबर में समझौता होने का जिक्र क्यों नही किया गया और इस मामले को अमरउजाला ने ही क्यों तूल दिया है।और जबकि थाना आदमपुर में कोई भी मुकदमा किसी के नाम पर पंजीकृत नही किया गया है। इसकी पुष्टि नही की गई समझौता हुआ कि नही इसकी भी पुष्टि नही की गई तो कैसा है। अमरउजाला का पत्रकार इस मामले में लखनऊ से अमरउजाला अखबार के जिम्मेदार व्यक्ति ने प्रहलाद गुप्ता को फोन करके सारी जानकारी ली है। और वाराणसी अमर उजाला के दफ्तर ने भी नाराजगी जताई है कि ये बहुत बड़ी गलती हुई है।अब देखने वाली बात ये है कि अमरउजाला अखबार की ओर से क्या कोई कदम उठाया जाता है। या फिर इस खबर का खंडन किया जाएगा।

एसोसियेटेड प्रेस को मिली नयी रवानी, बागडोर मृणाल को

: नवजीवन, कौमी आवाज और नेशनल हेराल्‍ड का प्रकाशन करता है यह प्रेस-समूह : जवाहर लाल नेहरू और फिरोज गांधी ने शुरू किया था यह प्रकाशन समूह : करीब तीन दशकों से अपने सबसे कठिन और बेहद कष्‍टप्रद समय से जूझ रहा है एसोसियेटेड प्रेस :

ओबैद नासिर

लखनऊ : देश में पत्रकारिता की अलख जगाने में सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने प्रकाशन समूह के दिन अब लगता है, सुधरने वाले ही हैं। फिलहाल तो इस समाचार समूह की बागडोर देश की प्रख्‍यात पत्रकार श्रीमती मृणाल पाण्डेय और श्री ज़फर आग़ा को दी गयी है। मृणाल पाण्‍डेय अब इस समूह से छपने वाले नेशनल हेराल्ड नवजीवन और कौमी आवाज़ का मुख्य सम्पादकीय सलाहकार की कुर्सी सम्‍भालेंगी, जबकि जफर आगा को इस समूह का ग्रुप एडिटर बनाया गया है।

आशा है को दोनों मूर्धन्य पत्रकारों के नेत्रित्व में हेरल्ड ग्रुप अपनी पुरानी साख परम्परा और प्रभाव बहाल करेगा।

दोनों पत्रकारों को दिली मुबारकबाद

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