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सक्सेस सांग

बैंक में खाता नहीं है, मगर बन गयी करोडपति

कौन बनेगा करोडपति में बाजी मार ले गयी बिंदास तस्लीम

झारखंड के गिरिडीह की रहने वाली है राहत तस्लीम

कोच्चि में पति के साथ जीवन संघर्ष में जुटी हैं राहत

सिलाईकढाई कर दोतीन हजार महीना कमा लेती हैं राहत

यह हमारी महिलाओं की मजबूती की प्रतीक है अमिताभ बच्‍चन

जरा सोचिए ऐसी महिला के बारे में जो रातोंरात करोडपति बन गयी। लेकिन बात महज इतनी ही नहीं है। खासबात तो यह है कि करोडपति बनने वाली इस महिला का आज तक कभी किसी भी बैंक में कोई खाता ही नहीं रहा हैा है ना लाजवाब बात। बहरहाल, अमिताभ बच्चान के अनुसार यह महिला समाज में महिला सशक्तिकरण की एक जीती जागती मिसाल बन गयी हैा

झारखण्ड  की राहत तस्लीनम को तो इस बात का इलहाम ही नहीं था कि वह कभी अमिताभ बच्चगन के आमने सामने खडी होगी और इतना ही नहीं, बल्कि एक ऐसी मोटी रकम जीत जाएगी जिसकी कल्प ना तक उसने कभी नहीं की थी। लेकिन उसकी यह अकल्पननीय बात आखिरकार साकार हो ही गयी और वह थोडा बहुत नहीं, बल्कि एक करोड जैसी एक भारी भरकम रकम की मालकिन भी बन गयी। हालांकि राहत तस्लीथम को इस मुकाम तक पहुंचाने में उसके आत्मएविश्वासस ने सबसे ज्याेदा सहायता की। राहत तस्ली।म की इस हैसियत के कायल तो खुद महानायक अमिताभ बच्चकन भी हो गये।

मालामाल बनाने वाले टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में पहली बार एक ऐसी महिला करोड़पति बनी है, जिसने जिंदगी भर किसी बैंक में खाता नहीं खोला। यह है, झारखंड के गिरीडीह की राहत तस्लीम। कार्यक्रम के प्रस्तोता अमिताभ बच्चन ने तस्लीम का यह राज अपने ब्लॉग में खोला है। वह शो के चौथे संस्करण में करोड़ रुपये जीतने वाली पहली प्रतिभागी हैं। बिग बी ने लिखा है, वह अब भी सामाजिक और परंपरागत तकाजे के चलते पर्दे में रहती है। बकौल अमिताभ, वह साधारण महिला हैं, जो घर में सिलाई का काम करके घर चलाने के लिए महीने के 2000-3000 रुपये कमाती हैं। अपनी सीमित कमाई के चलते उन्होंने जीवन में कभी बैंक खाता नहीं खोला। कभी लाख रुपए नहीं देखे और कभी नहीं सोचा कि वह एक दिन हॉट सीट तक पहुंचेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा कर दिखाया।

अमिताभ ने लिखा है, उनके पति कोच्चि (केरल) में रह कर काम करते हैं। राहत ने अपने स्तर पर केबीसी के लिए आवेदन किया। जब चयन प्रक्रिया शुरू हुई, तो खुद बस, ट्रेन और संभवत: शायद पहली बार हवाईजहाज में बैठ कर मुंबई आईं। अमिताभ के मुताबिक, राहत बिल्कुल मंजे हुए खिलाड़ी की तरह खेलीं, 50 लाख रुपए तक के लगभग सभी सवालों के जवाब वह जानतीं थीं और उसके बाद उन्होंने करोड़ रुपये का सवाल भी बूझ डाला। उनके चेहरे पर कहीं चिंता की लकीरें नहीं आईं। पूरे आत्मविश्वास से उन्होंने खेला। अमिताभ ने लिखा है, वह हमारे देश की महिलाओं के लिए अद्भुत पल था, जो दिखा सकती हैं, कि आप उन्हें मौका दीजिए, जिसमें वह दिखा देंगी कि उनमें आसमान में रोशन होने की काबिलियत है

 

अब घूंघट नहीं, विकास की साक्षी हैं देवास की बालाएं

बदल गया घूंघट वाला देवास

चीन की देखादेखी हमने भी हटा दिये बाथरूम से आइने

पुरूषों के साथ बराबरी से कदमताल कर रही है लडकियां

पहले जवानी की दहलीज से पहले ही घूंघट में छिप जाती थीं बहारें महिलाओं के सम्बहन्धह में अगर आप देवास में पहले जैसा माहौल देखना चाहते हों तो शायद आपको निराश ही होना पडेगा। वहां अब लम्बेी घूंघट वाली महिलाएं नहीं दिखायी पडती हैं। हां, पहले जरूर होता था कि किसी भी लडकी के जवानी की दहलीज पर पैर रखने के पहले ही घूघट की चाहरदीवारी में कैद कर दिया जाता था। लेकिन अब देवास पहले जैसा नहीं रहा। यहां पर अपने में ही सिमटी’सिकुडी लडकियां नहीं, बल्कि समय के साथ कदमताल करती लडकियां पुरूषों से बराबर का कदमताल करती दिख जाती हैं। तो आइये, हम आपको ले चलते हैं इस नये और आकर्षक देवास में। देवास में लड़कियां जन्म से लाड़ली लक्ष्मी नहीं थीं। जिंदगी के कठिन सफर में इन्हें राह दिखाने वाला कोई नहीं था। चेहरे पर लंबा घूंघट,पिछड़ापन और चहारदीवारी में कैद होकर रह जाना ही शायद इनका नसीब था, लेकिन इन्होंने साहस दिखाया। तमाम दुश्वारियों को नकारते हुए अपने नसीब को चुनौती दी। आज हालात बदले हुए हैं। ये जमाने के साथ कदमताल कर बराबर का सम्मान पा रही हैं।

आत्मविश्वास से लबरेज इन बिंदास बालाओं को देखकर शायद ही किसी को अंदाजा हो सके कि ये किस गर्त से निकलकर आई हैं। देवास की टाटा इंटरनेशनल लिमिटेड के लेदर एक्सपोर्ट फुटवेयर मेकिंग डिविजन में काम करने वाली ये 47 लड़कियां कुछ समय पहले ही चीन से तीन महीने का प्रशिक्षण लेकर लौटी हैं। इनमें से ज्यादातर समाज के कमजोर तबके अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग से आती हैं, लेकिन अब पिछड़ापन तो कहीं पीछे छूट-सा गया है। चेहरे पर आत्मविश्वास और शरारत लिए जब पूनम पटेल चीनी भाषा में पूछती हैं ‘नी हाऊ’ यानी आप कैसे हैं? तो सामने वाला चौंक जाता है। इनमें से कुछ विवाहित लड़कियां जब यहां आईं थीं तो आधे फुट का घूंघट उनके चेहरे पर था। लेकिन अब कंपनी के ड्रेस कोड जींस-टी शर्ट के साथ चेहरे पर उन्मुक्त मुस्कान ने उनकी पहचान बदल दी है।

हौसले को मिली राह- वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और आयुक्त आदिवासी विकास अरुण कोचर कहते हैं कि इन लड़कियों के पास हौसला तो था, लेकिन राह नहीं मिल पा रही थी। मप्र रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद मैपसेट भोपाल से प्रशिक्षण लेकर इन्होंने इतिहास बना दिया।

रोज एक लड़की बेहोश हो जाती थी- टाटा इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक ओके कौल बताते हैं कि जब प्रशिक्षण शुरू हुआ,तो रोज इक्का-दुक्का लड़कियां बेहोश होकर गिर पड़ती थीं। इसकी वजह घर में उन्हें पर्याप्त पौष्टिक भोजन न मिलना था, लेकिन अब कहानी बदल चुकी है। हर महीने पांच से दस हजार रुपए तक कमाने वाली इन लड़कियों को घर में न सिर्फ अर्निग मेम्बर का दर्जा हासिल है, बल्कि उसका बेहतर असर उनकी सेहत पर भी दिखाई देता है। योजना पूरे प्रदेश के लिए है। प्रसन्नता की बात यह है कि इसके नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं। केंद्र सरकार के संस्थान आईडीईएमआई और एमएसएमई के जरिए हम प्रदेश के इस वर्ग के लड़के लड़कियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। इंदौर में इसकी शुरुआत 25 नवंबर से होने जा रही है।

मध्‍यप्रदेश के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के मंत्री विजय शाह बताते हैं कि बदल गए जिंदगी के मायने लड़कियों की जिंदगी अब उत्साह से लबालब है। टाटा कंपनी में 396 दलित और आदिवासी समुदाय की 41 लड़कियां प्रशिक्षण लेकर नौकरी कर रही हैं। मेपकास्ट के महानिदेशक प्रदीप खंडेलवाल कहते हैं कि कंपनी में और भी रोजगार की गुंजाइश है। प्रदेश के किसी भी हिस्से से इच्छुक दलित और आदिवासी वर्ग की पांचवीं तक शिक्षित लड़की प्रशिक्षण लेकर कंपनी में रोजगार पा सकती है।

आदिवासी सीमा परते बड़े उत्साह से कहती हैं कि ‘सर चीन में हमने देखा कि वहां टॉयलेट में शीशा नहीं लगा था। जब हमने वजह पूछी तो चाइनीज लड़कियों ने कहा कि शीशा लगा हो तो मेकअप वगैरह की तरफ ध्यान जाता है और वक्त बरबाद होता है। वहां से लौटने पर हमने यहां भी टॉयलेट से शीशे हटवा दिए।’ इन लड़कियों ने दुनिया भर में शू निर्माण की दिग्गज कंपनी जॉर्ज शू डागवान से प्रशिक्षण लिया।

10 करोड एलबम बिक चुके हैं आई जीहू के

होटल में बर्तन धोने वाली लड़की बनी चीनी मैडोना


उत्तेजक वीडियोज के चलते पसोपेश में पडी चीन सरकार
12 साल पहले चीन से कैम्ब्रिज जा बसा था जाहू का परिवार

कैम्ब्रिज में अपने मां-बाप के रेस्टोरेंट में बर्तन धोने वाली लड़की के गीतों की 10 करोड़ प्रतियां बिकने के बाद वह चीन की सबसे सनसनीपूर्ण गायिका बन गई है। 25 वर्षीय आई जीहू संगीत कार्यक्रमों में 16 लाख से ज्यादा प्रशंसकों के सामने परफॉर्म कर चुकी है।
उसके उत्तेजक वीडियोज देखकर उसे चीनी मैडोना का नाम दिया गया है। आई 13 वर्ष की थी जब उसका परिवार चीन के लीबो से लंदन जा बसा था। उसे लंदन की एक म्यूजिक कंपनी ने साइन कर लिया था। उसकी पहली एल्बम ट्राई मी की अब तक 10 करोड़ डाउनलोड कॉपीज बिक चुकी हैं। उसकी एल्बम के प्रोमोज इतने उत्तेजक हैं कि चीनी सरकार के लिए एक सिरदर्द बन गए हैं।
आई ने कहाए मैं सेक्सी और उत्तेजक हूं। मेरे बारे में ऐसी बहुत सी बातें हैं जिन्हें चीनी सरकार पसंद नहीं करती। मुझे अपनी उत्तेजक वीडियोज से कोई परेशानी नहीं है। मैं बस इतना जानती हूं कि मैं जल्द ही अपनी नई एल्बम लेकर आउंगी। इसी माह मैं यूके में एकल संगीत प्रोग्राम देने वाली हूं।

तीन भारतीय पा रहे हैं सबसे ज्यादा वेतन

अमेरिका में आज भी शीर्ष भारतीय सीईओ हैं नूई


इंदिरा नूई, संजय झा और विक्रम पंडित श्रेष्ठ सीईओ की सूची में
वेतन के मामले में भारतीय मूल की इंदिरा नूई 67 नम्बर पर हैं
नूई का सालाना पैकेज 1397 करोड डालर तक पहुंच गया
संजय झा 377वां और पंडित को सूची में 450वां पायदान मिला

सर्वाधिक वेतन पाने वाले अमेरिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की सूची में भारतीय मूल के तीन सीईओ अपनी हैसियत को बरकरार रखे हुए हैं। इसमें पेप्सीको की इंदिरा नूई, मोटोरोना के संजय कुमार झा और सिटीग्रुप के विक्रम पंडित शामिल हैं।
वाल स्ट्रीट जर्नल की इस सूची में सालाना 1,397 करोड़ डालर के वेतन पैकेज के साथ नूई 67वें स्थान पर, जबकि झा को 377वें पायदान पर रखा गया है। उनका पैकेज 34, 5 लाख सालाना है। सूची में 456 अमेरिकी कंपनियों को शामिल हैं। एक अन्य भारतीय पंडित को सूची में 450वां स्थान दिया गया है। उनका पैकेज 125,000 अमेरिकी डालर है। सूची में लिबर्टी मीडिया कार्प के प्रमुख मफेई 8,71 करोड़ डालर के वेतन पैकेज साथ पहले पायदान पर है। मफेई के बाद लैरी इलीसन का स्थान है जिनका वेतन पैकेज 6,86 करोड़ डालर सालाना है।
आसिडेंटल पेट्रोलियम कार्प के राय ईरानी तीसरे पायदान पर हैं। उनका सालाना पैकेज 5,22 करोड़ डालर है। प्रबंधन परामर्श कंपनी हे ग्रुप द्वारा किए गए इस सर्वे में उन 456 कंपनियों को शामिल किया गया है जिनकी सालाना आय एक अक्टूबर 2009 से 30 सितंबर 2010 तक चार अरब डालर से अधिक रही है।

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