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सक्सेस सांग

महिला अधिकारों पर छक्का लगायेंगे सचिन तेंदुलकर

स्त्रीसशक्तीकरण के लिये कमर कसी, मराठी में है कविता

नई दिल्ली : मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को बल्ले से जोरदार शॉट्स लगाते हुए आप कई बार देख चुके हैं, लेकिन महिला अधिकारों के लिए उन्हें कविता पढ़ते हुए देखना अलग ही अनुभव होगा. तेंदुलकर ने साबित कर दिया है कि वो असली 'मर्द' हैं.

तेंदुलकर निर्देशक और अभिनेता फरहान अख्तर के ‘बलात्कार और भेदभाव के खिलाफ पुरुष’ (मर्द) अभियान के लिए मराठी में कविता पढ़कर महिला अधिकारों के प्रति पुरुषों को जागरुक करने की कोशिश करेंगे. 'मर्द' ने बयान में कहा, ‘मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने महिलाओं के प्रति भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है. वह महिलाओं का सम्मान करने के लिए पुरुषों में जागरुकता लाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिये मराठी में विशेष कविता पाठ करेंगे.’

बयान में कहा गया है, ‘सचिन की देश में लोकप्रियता को देखते हुए उनके इस अभियान में शामिल होने से कई लोग इस नेक काम से जुड़ने के प्रति प्रेरित होंगे.’ यह कविता गीतकार और कवि जावेद अख्तर ने लिखी है. इसे मूल रूप से हिंदी में लिखा गया है और इसका तेलुगु, तमिल, पंजाबी और मराठी जैसी विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया है.

तेलुगु में कविता पाठ टोलीवुड स्टार महेश बाबू करेंगे. तेंदुलकर कविता का मराठी संस्करण पढ़ेंगे जिसका अनुवाद जितेंद्र जोशी ने किया है.

सिंधू का बैडमिंटन में कांस्य पक्का, देश में हर्ष

रचा इतिहास, इस दिशा में बनीं पहली भारतीय खिलाड़ी

ग्वांग्झू : भारत की नई स्टार पीवी सिंधू ने शुक्रवार को ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए महिला सिंगल्स में सातवीं वरीयता प्राप्त चीन की शिजियान वांग को लगातार गेमों में 21-18, 21-17 से हराकर विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में प्रवेश करने के साथ ही देश के लिए कांस्य पदक पक्का कर दिया। भारत ने इससे पहले इस टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स का पदक नहीं जीता था।

विश्व की 12वें नंबर की खिलाड़ी सिंधू का सेमीफाइनल में सामना कैरोलीना मारिन और रातचानोक इंतानोन के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा। सिंधू से पहले भारत के लिए प्रकाश पादुकोण ने पुरुष सिंगल्स और ज्वाला गट्टा-अश्विनी पोनाप्पा की जोड़ी ने महिला डबल्स में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप का कांस्य पदक जीता था। पादुकोण ने कोपेनहेगन में 1983 में और गट्टा-अश्विनी ने लंदन में 2011 में यह कारनामा किया था।

शुक्रवार की सुबह भारत अपनी नंबर एक खिलाड़ी और तीसरी वरीयता प्राप्त साइना नेहवाल व पारुपल्ली कश्यप की क्वार्टरफाइनल में हार के साथ निराशा के सागर में डूबा हुआ था, लेकिन सिंधू ने अपने स्वप्निल प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखते हुए एक और चीनी खिलाड़ी को लुढ़काकर सेमीफाइनल में स्थान बनाया। साइना को 13वीं वरीयता प्राप्त दक्षिण कोरिया की यिओन जू बेई ने 23-21, 21-9 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। साइना को चौथी बार विश्व चैंपियनशिप के कवार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है।

कश्यप ने तीसरी वरीयता प्राप्त चीन के पेंगयू दू के खिलाफ तीन गेम तक सराहनीय संघर्ष किया, लेकिन वह एक और उलटफेर को अंजाम नहीं दे पाए। भारतीय खिलाड़ी को एक घंटे 15 मिनट तक चले संघर्ष में 21-16, 20-22, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा।

मासूम बच्ची ने पिछाड़ा आइंस्टीन को

खगोलविद् स्टीफन हॉकिंग को भी मात दिया ब्रिटेन की बच्ची ने

लंदन : ब्रिटेन में एक स्कूली छात्रा ने बुद्धिमत्ता के मामले में भौतिक शास्त्र के महारथी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और भौतिकविद् स्टीफन हॉकिंग को मात दे दी है।

ब्रिटिश मेनसा के प्रवक्ता ने बताया कि 11 वर्षीय केरिस कुकसामी पारनेल ने मेनसा आइक्यू टेस्ट में 162 अंक हासिल किए। वह हॉकिंग, आइंस्टीन और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स से ज्यादा बुद्धिमान है, जिनका आइक्यू स्तर 160 है।

छठी कक्षा में पढ़ने वाली पारनेल ने मेनसा आइक्यू प्रतियोगिता में हिस्सा अपने पिता से ज्यादा अंक हासिल करने के लिए लिया था, जिन्होंने 142 अंक हासिल किए थे। डेली एक्सप्रेस अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, पारनेल ने न केवल अपने पिता से बल्कि टेस्ट में मिलने वाले सर्वाधिक 162 अंक हासिल किए हैं।' नार्थहैंपटन निवासी पारनेल ने गत 27 जुलाई को परीक्षा दी थी। वह यह टेस्ट देने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक हैं।

पारनेल ने कहा, 'टेस्ट देने का मेरा मकसद अपने पिता से ज्यादा अंक हासिल करना था, लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं इतने ज्यादा अंतर से जीत जाऊंगी।' वह एक बैंकर बनना चाहती हैं। उल्लेखनीय है कि जिंदा रहते हुए आइंस्टीन ने कभी आइक्यू टेस्ट नहीं दिया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उनका आइक्यू स्तर 160 के करीब था।

 

 

ठेला-चालक की बेटी ने विश्व हॉकी में मारा पेनाल्टी स्ट्रोक

जूनियर महिला विश्वकप हॉकी में रानी रामपाल की धूम

: घर में टीवी न होने से उसके खेल को नहीं निहार पाये घरवाले : हरियाणा के शाहाबाद वाली रानी में है किलर इंस्टिंक्ट : शुरूआत में तो किया था रानी के जुनून पर घरवालों ने जमकर विरोध :

नई दिल्ली : जूनियर महिला विश्वि कप हॉकी में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली रानी रामपाल जब पांचवी क्लास में थी तो उसके पास न जो जूते थे और न ही हॉकी किट लेकिन रानी के पास यदि कुछ था तो केवल खेल के प्रति जुनून. इसके अलावा रानी ने जब खेलना शुरू किया था तब रूढिवादी समाज के डर से उसके परिवार ने इसका सख्त विरोध किया था लेकिन आज पूरे कस्बे को इस होनहार खिलाड़ी पर गर्व है.

जर्मनी के मोंशेंग्लाबाख में संपन्न विश्व कप के कांस्य पदक के मुकाबले में तीन गोल करके भारत को जीत दिलाने वाली रानी 'प्लेयर आफ द टूर्नामेंट' भी रही. हरियाणा के शाहबाद की रहने वाली रानी के पिता अभी भी ठेलागाड़ी चलाते हैं और उनकी मासिक आय नौ से दस हजार रुपये है. रानी के पिता को इस  बात का मलाल है कि वे इस मैच को टीवी पर नहीं देख सके. उन्होंेने कहा, ‘बच्चा जब अच्छा खेलता है तो देखने का मन तो करता ही है. काश, हम टीवी पर देख पाते. हमें इंटरनेट से ही पता चला और अभी तक हम रानी को बधाई भी नहीं दे सके हैं. उसके लौटने पर ही बधाई देंगे.’

उन्होंने बताया कि रानी ने जब हॉकी खेलना शुरू किया, तब कई लोगों ने इसका विरोध किया था लेकिन अब उन सभी ने खुद बधाई दी है. उन्हों ने आगे कहा कि रानी जिद की पक्की थी और आज वे सभी लोग हमें बधाई दे रहे हैं जो कल तक उसके खेलने की आलोचना करते थे.’ रानी के पिता का कहना है, ‘जब उसने खेलना शुरू किया था तब हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. रानी ने भी काफी कष्ट झेले हैं लेकिन जब से रानी की नौकरी रेलवे में लगी है, वह अपना खर्च उठा रही है और परिवार की भी मदद करती है.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन जितनी वह मेहनत करती है और अच्छा खेलती है, उसके अनुसार नौकरी उसके पास नहीं है. यही नहीं उसे अभी तक कोई खेल पुरस्कार भी नहीं मिला है. महिला हॉकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिये. ये लड़कियां बड़ी तकलीफें उठाकर यहां तक पहुंची हैं.’ वहीं जूनियर महिला हॉकी विश्व कप में पहली बार पदक जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय टीम की स्टार फारवर्ड रानी का कहना है कि मुकाबले से पहले ‘चक दे इंडिया’ में शाहरूख खान की ‘70 मिनट वाली स्पीच’ सभी के दिमाग में थी.

रानी ने कहा, ‘क्वार्टर फाइनल में स्पेन को हराने के बाद हमारा आत्मविश्वास बढा था. इंग्लैंड के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले से पहले हम सभी ने आपस में बात की और हमें शाहरूख खान की 'चक दे इंडिया' वाली स्पीच याद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ये 70 मिनट जिंदगी के सबसे अहम पल हैं और

उन्होंने कहा, ‘टीम की कई सदस्यों का यह आखिरी जूनियर विश्व कप था और हमें भी लगा कि इन 70 मिनट में हमारी दुनिया बदल सकती है. हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है और इससे हमारा आत्मविश्वास बढा.’ हरियाणा के शाहबाद की रहने वाली रानी ने जीत का श्रेय पूरी टीम और कोचिंग स्टाफ को दिया.

इस बीच द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच बलदेव सिंह गौरवांवित हैं, क्योंकि उनके मार्गदर्शन में हॉकी के गुर सीखने वाली लड़कियों ने भारत को जर्मनी के मोंशेंग्लाबाख में जूनियर महिला हाकी विश्व कप में कांस्य पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई. बलदेव के पसंदीदा शिष्यों में से एक रानी रामपाल टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनी और कोच ने कहा कि यह 19 वर्षीय खिलाड़ी बेजोड़ प्रतिभा की धनी है जो लंबे समय तक देश की सेवा कर सकती है.

कोच ने कहा, ‘उसमें (रानी में) किलर इंस्टिंक्ट है. वह अन्य लड़कियों से अलग है और खेल को काफी जल्दी समझ जाती है. निश्चित तौर पर वह बेजोड़ प्रतिभा की धनी है.’ भारतीय टीम में शामिल हरियाणा की छह हाकी खिलाड़ियों में से पांच शाहबाद की हैं जिसमें नवजोत, मनजीत कौर, नवनीत कौर, रानी, मोनिका और पूनम रानी शामिल हैं. राज्य से हिसार की एक खिलाड़ी भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा है. शाहबाद की लड़कियों ने इलाके के अलावा देश को भी काफी गौरवांवित किया है.ajtak

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