Meri Bitiya

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सक्सेस सांग

पीपली लाइव पार्ट-टू: डायरेक्‍टर को बलात्‍कार में सजा

: आमिर खान की इस फिल्‍म में बतौर डिप्‍टी डायरेक्‍टर थे महमूद फारूकी : अमेरिकी युवती के साथ दिल्‍ली की फ्रेंड्स कालोनी में किया था महमूद ने बलात्‍कार : फिल्‍म की निर्देशक अनुषा रिजवी के पति हैं महमूद फारूकी :

नई दिल्‍ली : लो दोस्‍तों। एक नयी खबर सुन लो। पता चला है कि दिल्‍ली में बलात्‍कार के एक मामले में बहुचर्चित फिल्‍म 'पीपली लाइव' के सह-निर्देशक, इतिहासकार और डायलॉग राइटर महमूद फ़ारूक़ी फंस गये हैं। यहां की एक अदालत ने फारूकी को उस बलात्कार के मामले में दोषी क़रार दिया है और अब अगली दो अगस्‍त को उन्‍हें सजा सुनायी जाएगी। फिर क्‍या, उसके बाद फारूकी को सीधे चक्‍की पीसने के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया जाएगा। वकीलों का कहना है कि इस सजा की मियाद कम से कम सात साल हो सकती है।

आपको बता दें आज से 11 साल पहले एक युवती के साथ यह बलात्‍कार हुआ था। वह अमेरिकी युवती थी और दक्षिणी दिल्‍ली की न्‍यू फ्रेंड्स कॉलोनी में यह बलात्‍कार महमूद फारूकी ने किया था।

फ़ारूक़ी को उसी दिन हिरासत में ले लिया गया था। फ़ारूक़ी की पत्नी अनुषा रिज़वी हैं, जिन्होंने 2010 में पीपली लाइव का निर्देशन किया था। गौरतलब है कि महमूद फ़ारूक़ी पीपली लाइव फ़िल्म के लेखक और सह निर्देशक भी हैं जबकि इस फ़िल्म के निर्माता है मशहूर अभिनेता आमिर ख़ान। महमूद ने देहरादून से लेकर ऑक्‍सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्‍वविद्यालयों तक में पढ़ाई की है।

चाहे झोलाछाप वेब-डेवलपर कहें या मूर्ख, लेकिन मैं हूं आपके साथ

: मेरी बिटिया डॉट कॉम के लिए बढ़ रहे हैं सहयोगी कदम : मॉस कॉम किया, पर पाया कि यहां तो 99 फीसदी गंदगी भरी है : यह युवक चाहता है कि मेरी बिटिया को लाइव टीवी में बदल दे :

अजय पाण्‍डेय

शाहगंज, जौनपुर : सर प्रणाम। मैं आपकी परेशानी समझ सकता हूँ... सर...आप बिना किसी स्वार्थ के गलत विरोध करते है, सबकी नींद हराम कर देते है। आप बेफिक्र रहिये, जुलाई के लास्ट तक आकर आपसे लखनऊ मिलूंगा......जिस लायक हूँ हमेशा आपके साथ रहूंगा।

( यह चिट्ठी भेजी है अजय पाण्‍डेय ने। यह जौनपुर के शाहगंज शहर का रहने वाला है।

मेरी बिटिया डॉट कॉम के सहयोग के लिए मैने जो कल अपील जारी की थी, उसका जवाब दिया है अजय ने।

आप भी देखिये, बांचिये और देखिये कि कैसे-कैसे प्रतिकूल हालातों के बावजूद लोग कितनी जिजीविषा रखते हैं,

खुद के लिए भी और दूसरे के लिए भी, और पूरे समाज के लिए भी। )

मैं भी किसी रोजी-रोजगार में अपने कुछ अवगुणों के चलते नही फिट हो सका और भविष्य में उम्मीद भी नही है कही होने की। फ़िलहाल BCA/MCA करने के बाद इसी अनर्गल को बर्दास्त न कर पाने के चलते..Mass Comm करके पत्रकारिता में कदम रखा सोचा बड़ा पवित्र पेशा होगा। पर आने के बाद इसमें 99% गन्दगी ही दिखी। और अपने लोगो से ही दुश्मनी होने लगी।

झोलाछाप सॉफ्टवेयर डेवलपर कह लीजिये या निहायत मुर्ख ...स्कूलो/ दुकानों/ शोरुमो में अपना खुद का बनाया हुआ सॉफ्टवेयर लगाता हूँ....उसी से रोजी रोटी चलती है।

साथ ही लाइव वेबकास्टिंग भी करता हूँ...पैसा तो था पर दिल्ली जाकर एक बड़ा वाला कैमरा ले कर चला आया...। स्कूलो में नया सेशन सुरु हुआ है....थोडा सा काम कर ले कही...फिर जरूर मुलाकात होगी ।

रही बात आपके वेबसाइट में सहयोग की तो यदि आप लाइव टीवी चलाना चाहे तो मैं आपको पूरा सेटअप देने के लिए तैयार हूँ....जिसमे 100% न्यूज़ टीवी चैनल का आउटपुट आपको मिलेगा। जितना खर्च आएगा उसे मैं वहन करूँगा। लेकिन आप हताश मत होइए...आपकी इस समाज / देश  के साथ ही साथ हमे सबसे बड़ी जरुरत है। क्योंकि जिस ईमान की बात सिर्फ कहानियो में सुनते और किताबो में पढ़ते थे, वो मुझे इस कलयुग में सिर्फ और सिर्फ आप में दिखी है। इसलिए मैं जो भी हूँ जैसा भी हूँ...जिस लायक भी हूँ हमेशा आपके साथ हूँ।

प्रणाम

नवजात बच्ची बिदक गयी, और जुल्फी पर कर दिया पेशाब

: डैमेज-कंट्रोल के लिए खुद की इमेज बनाने के लिए अस्पताल पहुंच गये थे जुल्फी बाबू : अब गांव-चौपालों पर आग की तरह वायरल हो रही है मूत्र-विसर्जन का दिलचस्प मामला : पत्रकार भले न समझने की कोशिश करें, लेकिन नवजात बच्ची ने समझदारी दिखा दी :

कुमार सौवीर

लखनऊ : जो बात खुद को जिले का दिग्गज असरदार मानने वाले पत्रकार नहीं कह पाये, उसे एक मासूम नवजात बच्ची ने बेहिसाब साहस का प्रदर्शन किया। न जाने उसे कैसे पता चल गया कि जिस शख्स ने उसे अपनी गोद में उसे ले कर उसको पुचकारना शुरू किया है, वह दरअसल बच्चियों के सम्मान के प्रति नकारात्मक भाव रखता है। इतना ही नहीं, उस  बच्ची को पता चल गया कि यह अफसर आम आदमी को सुधारने के लिए जूते मारने की धमकी देता घूमता है। बस, फिर क्या था। उस सद्य-स्तनपायी बच्ची की त्योरियों बदल गयीं। वह उस अफसर की गोद से उतरने के लिए छटपटाने लगी। खूब रोई-चिल्लाई, लेकिन उस अफसर ने उसे मनाने के लिए ओ-हो ओ-हो कहते हुए पुचकारना शुरू किया तो बच्ची बिफर पड़ी। असहाय बच्ची आख्रिर क्या करती। लेकिन जो उसके वश में था, वह तो उसने कर ही दिया। उसने आव देखा न ताव। उस अफसर पर पेशाब कर दिया।

यह दिलचस्प वाकया अब आजकल दिलचस्प किस्सों में गलियों में तैरने लगा है। लोग चुस्कियां ले रहे हैं, चटखारे ले रहे हैं। पूरे जिले में हंगामा मचा हुआ है। चौपाल से लेकर कलेक्ट्रेट तक जहां भी देखिये, ठहाकों पर ठहाके ही लगाये जा रहे हैं। बच्ची के पत्रकार पिता और उसके चचा अपनी सफाई देने में बिजी हो गये हैं, जबकि उस हादसे से व्याकुल होकर अफसर ने इस पर चर्चाएं आम होते हुए आनन-फानन नउवा को बुला कर अपनी जुल्फों को कटवा दिया है।

किस्सा ठीक उसी तरह है, जैसा मुझे उस जिले के कई पत्रकारों ने जस का तस फोन करके बताया। इस घटना को वहां के सजग लेखक और समाजसेवियों ने भी लखनऊ में मुझसे भेंट करके यह हैरतनाक किस्सा बताया और उस अफसर व उसके बाप-चचा की खिल्ली उड़ाते हुए उस नवजात बच्ची के हौसलों की दिल खोल कर प्रशंसा की। इन्हींव लोगों ने भी बताया है कि इस हादसे के बाद से ही अब जुल्फी-प्रशासन की अदाएं अब काफी कम होती जा रही हैं।

तो दोस्तों इस जिले के अधिकांश पत्रकारों की दिनचर्या केवल अफसरों का चरण-चुम्बहन करने में ही बीतता है। इसके लिए यह किसी भी हद तक उतर सकते हैं। अफसरों की खुशामद के लिए यह लोग समाज में होने वाली गम्भीर अपराधों तक को पचा जाते हैं, उसे दबा लेते हैं। हाल ही एक किशोरी के साथ हुई दरिंदगी के मामले में भी इन पत्रकारों ने यही किया। लेकिन मेरी बिटिया डॉट कॉम ने इस मामले की धज्जियां उड़ायीं और खुलासा कर दिया कि प्रशासन के जिम्मेदारों ने उस बच्ची को न्याय दिलाने के बजाय उस प्रकरण को ही दबा डाला।

यह और ऐसे दीगर मामलों का खुलासा जब होने लगा तो जुल्फी झटक-झटक कर प्रशासन करने वाले कारिंदों को होश आया। वे डैमेज-कंट्रोल पर जुट गये। इसलिए बीच एक पत्रकार के यहां एक बच्ची पैदा हुई। जुल्फी अफसर को यह मौका मुफीद लगा। उन्होंने अपने अधीनस्थ से भारी-भरकम उपहार लाने का आदेश दिया, नीचे वाले ने अपने नीचे और उसके नीचे वाले ने अपने नीचे के अफसर से हुकुम दिया। होते होते यह आदेश नायब और कानून-गो तक पहुंचा और उसके बाद एक कमाऊ लेखपाल को जिम्मेदारी दी गयी। बिना एक दमड़ी के खर्च के ढेर सारे उपहारों की डोली लेकर वह जुल्फी अफसर साहब उस नर्सिंग होम में पहुंचे, जहां पत्रकार के परिवार का जच्चा–बच्चा भर्ती थी।

आला हाकिम पहुंचने की खबर होते ही अस्पताल में भीड़ लग गयी। नवजात बच्ची के नवजात बाप और उसके नवजात चचाओं की भीड़ भी कैमरा-शैमरा लेकर पहुंच गयी। हाकिम इसी चक्कर में थे। फ्लैश चमकने के पहले ही उन्होंने लपक कर उस नवजात को गोदी में ले लिया। प्रदर्शन किया, मानो कि बच्चियों की सुरक्षा ही प्रदेश सरकार की सर्वोच्च  प्राथमिकताओ में है, इसलिए वह आज उसका ऐलान करके ही मानेंगे। बच्ची सो रही थी, ले‍किन अचानक उसकी छठवीं इंद्री जाग गयी। उसने फटाक से अपनी आंख खोली, जुल्फी के चेहरे को देखा, छुआ, सूंघा और फिर अचानक बिदक गयी। लगी छटपटाने। लेकिन जुल्फी ने उसे मनाने के लिए उसे ओहो-ओहो कहते हुए पुचकारना शुरू किया।

लेकिन यह क्या। जुल्फी की पुचकार से बच्ची शांत होने के बजाय, बुरी तरह बिदक गयी। लगी जोरों से चिल्ल-पों करने। जुल्फी के सामने नवजात के नवजात बाप व चचाओं की भीड़ हो हो करके हंसने लगी।

जाहिर है कि बच्ची का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया होगा। लेकिन नन्हीं सी जान आखिर करती भी तो क्या। उसकी समझ में ही नहीं आ रहा था कि वह अब क्या  करे। अचानक उसकी समझ में आ गया। उसने अचानक उसने जुल्फी पर पेशाब कर के अपने गुस्से का इजहार कर दिया। अब कोई दीगर शख्स होता तो जुल्फी उसे हवालात के सिपुर्द कर देते, उसकी रिपोर्ट दर्ज करा दे, जूते मार कर दिमाग दुरूस्त करने की धमकी दे देते। उसे पागलखाने भिजवा देते, उसके नारी निकेतन भिजवाने की कवायद छेड़ देते। उसकी जिन्द‍गी खराब करने की धमकियां दे देते। लेकिन उस नवजात बच्ची का क्या करते। नतीजा, खिसियाये हुए जुल्फी ने अपनी गोद से बच्ची को बिस्तर पर लिटा दिया और मुंह लटकाते हुए वापस लौट आये।

उधर पता चला है कि इस वापसी में जुल्फी ने एक बार भी अपनी जुल्फी नहीं झटकी, जैसे वे दिन में पचासों बार किया करते थे। बल्कि उलटे हुआ यह कि बंगले पर एक नउवा को बुलवा कर अपनी जुल्फी छंटवा दीं।

चलो, देर आयद, दुरूस्त आयद।

फतह कर गयी माउंट एवरेस्ट यूपी की महिला आईपीएस

: सन-02 बैच की आईपीएस है अपर्णा कुमार, तुम को हम सब का सलाम : इस वक्त डीआईजी टेक्निकल के पद पर तैनात हैं अपर्णा :

लखनऊ : वर्ष 2002 बैच की यूपी कॉडर की आईपीएस अपर्णा कुमार के नाम एक नया रिकार्ड दर्ज हो गया। शनिवार को सुबह 11 बजे उन्होंने दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा व यूपी पुलिस का झंडा फहरा दिया। वह यूपी पुलिस में डीआईजी टेक्निकल हैं और लखनऊ में तैनात हैं।

अपर्णा अखिल भारतीय सेवा की ऐसी पहली अफसर हैं, जिन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह किया है। इस उपलब्धि पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व यूपी के डीजीपी जावीद अहमद ने उन्हें ट्वीट करके बधाई दी है। टि्वटर पर ही उत्तर प्रदेश सरकार और आईपीएस एसोसिएशन की तरफ से भी उन्हें बधाई दी गई है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपने टि्वटर हैंडल पर लिखा कि यह देश की फोर्स के लिए गर्व का मौका है।

अपर्णा ने इससे पहले यूरोप के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एलब्रस पर तिरंगा फहराया था। तब शून्य से 15 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे तापमान वाली इस पर्वत चोटी पर तिरंगा फहराने वाली पहली भारतीय महिला अफसर बन गई थीं। उन्होंने अफ्रीका के माउंट किलमंजारो पर्वत तथा अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी को भी फतह किया था। उनकी इन उपलब्धियों को महिलाओं के लिए प्रेरक मानते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मार्च 2015 में उन्हें रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया था। अपर्णा के पति संजय कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में इलाहाबाद के डीएम हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपर्णा कुमार को ट्वीट कर बधाई दी है। उन्होंने लिखा है कि यह देश की पुलिस फोर्स के लिए गर्व का मौका है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपर्णा के पति आईएएस अफसर संजय कुमार को फोन पर बधाई देते हुए अपर्णा को यूपी का गौरव बताया। पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने पूरे पुलिस परिवार की ओर से अपर्णा को बधाई देते हुए उनकी प्रशंसा की।

पुलिस उपमहानिरीक्षक तकनीकी सेवाओं के पद पर कार्यरत 2002 बैच की आईपीएस अपर्णा कुमार ने 8,848 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर शनिवार सुबह 11:02 बजे तिरंगा व यूपी पुलिस का ध्वज फहराया।

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