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सैड सांग

क्या आप अपने बच्चे को इस प्रतियोगिता में शामिल करेंगे ? शायद बिलकुल नहीं..

Baby Jumping Festival

You would be forgiven for being curious about the title of this article because even though Spain boasts some of the most unusual and bizarre festivals compared to the rest of the world, throwing tomatoes over each other as they do in Valencia or being chased down the street by a herd of bulls in Pamplona does not come close to the excitement aroused by the Baby Jumping Festival held each year in Castillo de Murcia near Burgos. 

Anyone who has a newborn addition to their family can bring their baby along to this festival known as the El Colacho which has taken place on an annual basis since way back in the 1620's. The festival itself is part of the celebrations held all over Spain for the Catholic festival of Corpus Christi and whilst at this particular time many other cities and towns have spectacular processions and a variety of other popular means of revelling and enjoying themselves, there is only one Baby Jumping Festival. 


The babes are laid on the ground in swaddling clothes and grown men, yes adult males, dressed as devils jump over the infants and this is supposed to cleanse them of all evil doings. The question of who is protecting the babies from the example being set by the adults begs to be asked but who are we to doubt this traditional combination of religion and Spanish folklore which proves to be great fun, if not a little scary, to watch.

see more photos below:

 

मेरी लाड़ली मैनें बुने हैं सपने तेरे लिए

मेरी लाड़ली


मैनें बुने हैं सपने तेरे लिए
अपनी बदरंग ज़िंदगी में
खिले एक सतरंगे इंद्रधनुष से.
तेरी कमान भौहों में
तेरी चकित आंखों में
पाता हूं वही सपना.....
शोर भरी उदास गलियों से
मैं ढ़ूढ़ लाता हूं
चिड़ियों की चहचहाहट
किसी उनींदे बरगद पर
गूंजते कलरव में
पाता हूं तेरी किलकारियां
सुबह की शोख किरणों में
खिलती तेरी खिलखिलाहट
मेरी थकी हारी शिराओं में
दौड़ जाती है,
हर नई सुबह, नई कोशिश की जुंबिश ले कर
मैं खपा देता हूं खुद को
कंकरीट के जंगल में
इस्पाती बौनों के बीच
खोजने के लिए
तेरे लिए एक कोना... महफूज़..
तरानों के किनारे
सपनीला घरौंदा..।
अपने खून की हर बूंद
पसीने और आंसुओं से
चिपचिपाए चेहरे से
चुका देना चाहता हूं
हर वह कीमत प्यार की
जब तेरे कपोलों से
लाज की लाली
कोई प्यारा सा सूरज
उधार लेगा.....।
वजह यही है कि
मैं सिर्फ कल्पना में देख पाता हूं
तेरा थिरकते हुए चलना
तेरी करधनी के घुंघरुओं का मचलना
तेरी तुतलाहट भरी बोली....
सिर्फ इसी आस में
कि उठा सकूं मैं अपने बेदम कंधों से
तेरी फूल सी डोली......

-अंशुमान त्रिपाठी

 

 

 

मारवाड़ की बेटी नंदिनी राठी को 1 करोड़ की छात्रवृत्ति- Goes off to study in American College..Scored 16th Rankin

मारवाड़ की बेटी नंदिनी राठी को 1 करोड़ की छात्रवृत्ति- Goes off to study in American College..Scored 16th Ranking

by Kamlesh Bhagwan on Sunday, September 19, 2010 at 1:06pm

जोधपुर/नागौर. नागौर की मूल निवासी नंदिनी राठी ने सात समंदर पार अमेरिका में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए नागौर व देश का नाम रोशन किया है।

 

फोर्ब्स मूल्यांकन के अनुसार व्हिटमेन कॉलेज अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में से 16वें स्थान पर है। इसमें प्रतिवर्ष 31 देशों के 1400 प्रतिभावान विद्यार्थियों को विभिन्न कोर्सेज के लिए प्रवेश दिया जाता है।

 

अमेरिका के श्रेष्ठ कॉलेजों में शुमार व्हिटमेन कॉलेज की स्टूडेंट नंदिनी (20) ने अपनी प्रतिभा के बल पर एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप हासिल की है। बाठड़ियों के चौक के मूल निवासी डॉ. एसके राठी की पोती नंदिनी का परिवार अभी कोटा में रह रहा है। नंदिनी के पिता घनश्याम राठी पेशे से चिकित्सक है। नंदिनी ने 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद पुणे स्थित महिन्द्रा यूनाईटेड वर्ल्ड कॉलेज से इंटरनेशनल बेकलोरेट कोर्स किया।

 

इसमें अच्छी रेंक के बाद उसे वाशिंगटन (अमेरिका) के ख्यातनाम कॉलेज व्हिटमेन में ना केवल प्रवेश मिला बल्कि कॉलेज प्रशासन की ओर से उसे चार साल में एक करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप के लिए भी चुना गया है। जानकारी अनुसार फोर्ब्स मूल्यांकन के अनुसार व्हिटमेन कॉलेज अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में से 16वें स्थान पर है। इसमें प्रतिवर्ष 31 देशों के 1400 प्रतिभावान विद्यार्थियों को विभिन्न कोर्सेज के लिए प्रवेश दिया जाता है।

 

बेटे से कम नहीं बेटी

पेशे से शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम राठी के एक ही बेटी है लेकिन अपनी लाडो के उपलब्धियों के कारण कभी उन्हें बेटे की कमी महसूस नहीं हुई। डॉ. राठी का कहना है उनकी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। नंदिनी ने न केवल अपने परिवार, शहर व जन्म स्थल का नाम रोशन किया बल्कि आगे भविष्य में भी वह इस क्रम को जारी रखेगी

 

http://www.bhaskar.com/article/RAJ-JOD-1-million-scholarship-got-daughter-of-marwar-1378987.html

मनीषा, मैं मृणाल पांडे नहीं, मृणाल वल्लरी हूं!

दोपहर ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रही थी कि मोबाइल बजा। हेलो किया और उधर से आवाज़ आयी – क्या आप मृणाल जी बोल रही हैं। मैंने कहा – हां। उधर से कहा गया – मैं दैनिक भास्कर भोपाल से फीचर संपादक मनीषा पांडेय बोल रही हूं। हम नये साल पर महिला सशक्तीकरण पर पेज बना रहे हैं। क्या आप उसके लिए लिख सकती हैं। अगर आपके पास टाइम न हो तो मैं आपसे बात कर इंटरव्यू तैयार कर लूंगी। मैंने कहा – मनीषा जी, मैं लिख कर ई-मेल कर दूंगी, मुझे अपना आईडी दें।

उसी वक्त विषय के विवरण के साथ मनीषा जी का मैसेज भी आ गया। मैंने उनके बताये विषय, शब्द सीमा और समय-सीमा के अंदर आलेख मेल कर दिया। मैंने उनसे फोन कर पूछा भी कि क्या आपको लेख मिल गया। उन्होंने कहा – हां, मिल गया। फिर एक दोपहर दैनिक भास्कर, भोपाल के नंबर से फोन आया। मनीषा पांडेय थीं। उन्होंने कहा – मृणाल जी, आपने अपना नाम मृणाल वल्लरी क्यों लिखा है? आपका नाम तो मृणाल पांडे है।

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