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सैड सांग

महिला पत्रकार ने की आत्महत्या, संपादक पर आरोप

: पहनावे, चलने के तौर-तरीके को लेकर लगातार दी जा रही थी प्रताडऩा, स्थानीय प्रबंधन साक्ष्य छिपाने की तैयारी में, पुलिस की ढीली कार्रवाई से मीडिया जगत में आक्रोश : अपने पहनावे पर ध्‍यान दिया करो, पत्रकारिता में चमकने के लिए स्‍मार्ट दिखना बहुत जरूरी होता है :

मेरी बिटिया संवाददाता

जगदलपुर : जगदलपुर से प्रकाशित दैनिक समाचारपत्र पत्रिका की ब्लॉगर रेणु अवस्थी की आत्महत्या के पीछे अखबार के स्थानीय संपादक की प्रताडऩा बड़ी वजह बनकर सामने आई है। स्थानीय संपादक की लगातार प्रताडऩा से त्रस्त होकर इस युवा पत्रकार ने शनिवार को अपने घर में फांसी में झूलकर खुदकुशी कर ली है। मृतका के परिजनों ने युवा पत्रकार की आत्महत्या के पीछे स्थानीय संपादक को जिम्मेदार ठहराते हुए उसके खिलाफ पुलिस में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की है। खबर तो यह भी है कि घटना के बाद मृतका की मां व भाई स्थानीय संपादक के घर पहुंचे और उसे खूब खरीखोटी सुनाई। मृतका की मां ने यहां तक कहा कि इस व्यक्ति (स्थानीय संपादक) को गोली मार देनी चाहिए।

दैनिक समाचारपत्र पत्रिका की ब्लॉगर रेणु अवस्थी की मौत के बाद बस्तर का मीडिया जगत सदमें में है क्योंकि बेहद कम उम्र में रेणु अवस्थी ने स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बना ली थी। खबर है कि प्रताडऩा का दौर कुछ दिनों पहले से शुरू हुआ। कुछ दिनों पहले पत्रिका की तरफ से किसी विषय पर एक टॉक शो का आयोजन किया गया था, जिसमें शहर की महिलाओं व युवतियों को आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम के बाद स्थानीय संपादक ने रेणु अवस्थी को प्रताडि़त करना शुरू कर दिया। वह रेणु अवस्थी के पहनावे को लेकर टिप्पणी करता था। उसे स्मार्ट बनने को कहता था। इतना ही नहीं, उसे रेणु अवस्थी के चलने के तरीके पर भी आपत्ति थी।

जानकारों के अनुसार घटना दिनांक को स्थानीय संपादक रेणु अवस्थी को लगातार प्रताडि़त करता रहा। उसे बार-बार अपने चैम्बर में बुलाता और प्रताडि़त करता रहा। पत्रिका कार्यालय के वीडियो फुटेज में इस बात का खुलासा है कि शनिवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक स्थानीय संपादक उसे लगातार अपने कक्ष में बुलाता रहा। एक फुटेज में रेणु अवस्थी टेबल पर सिर रखकर रोती हुई दिख रही है। इसके बाद उसने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी रायपुर स्थित अपने एक पुराने सहयोगी को दी (यह सहयोगी पहले पत्रिका, रायपुर में कार्यरत था) और उसे आत्महत्या करने की बात बताई। उस सहयोगी की सूचना पर जगदलपुर में जब तक रेणु अवस्थी की खोजबीन शुरू की जाती, वह खुदकुशी कर चुकी थी।

घटना के बाद दैनिक समाचारपत्र पत्रिका जगदलपुर कार्यालय में लगे वीडियो कैमरों के फुटेज के साथ छेड़छाड़ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। वहां के ब्रांच मैनेजर शब्द कुमार सोलंकी की देखरेख में साक्ष्य मिटाने की कोशिश की गई। घटना की खबर मिलते ही शब्द कुमार सोलंकी स्थानीय संपादक के निवास पहुंचे, जहां साक्ष्य मिटाने की रणनीति बनाई गई।

घटना के बाद मृतका के परिजनों ने स्थानीय सम्पादक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय संपादक और ब्रांच मैनेजर की प्रताडऩा से त्रस्त होकर रेणु आत्महत्या करने के लिए विवश हुई। मृतका का भाई अनूप अवस्थी भी मीडिया से जुड़ा हुआ है। वह रायपुर पहुंचकर पत्रिका के उच्च प्रबंधन से स्थानीय संपादक पर त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहा है अन्यथा सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। अनूप अवस्थी ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी बहन को न्याय मिले। उसे आत्महत्या करने के लिए विवश करने वाला कितनी भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, उसे सजा दी जाए। इसके लिए वे हर स्तर तक जाएंगे।

इस पूरे घटनाक्रम में जगदलपुर पुलिस की भूमिका की सर्वत्र आलोचना की जा रही है। घटना के दो दिनों बाद तक पुलिस पत्रिका कार्यालय जाकर साक्ष्य एकत्र करने की कोशिश नहीं की है। स्थानीय संपादक और ब्रांच मैनेजर के बयान नहीं लिए गए हैं। रेणु अवस्थी के मोबाइल की विस्तृत जांच नहीं की गई है। यह पता लगाने की कोशिश नहीं की गई है कि आखिर वह कौन सी वजह थी जिससे पत्रकारिता जगत में एक सितारा चमकने से पहले ही डूब गया। मृतका के भाई अनूप अवस्थी ने बताया कि पुलिस सिर्फ आश्वासन दे रही है, जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है।

अभ्‍यर्थी कुढ़न में, अफसर बदला लेने और सरकार मौज में

: जब जब पांव पड़े हैं संतन के, तब तब हुआ है बंटाधार : सीबीआई जांच से क्षुब्ध लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष छात्रों से बदला लेने पर आमादा : गलत प्रश्‍न-उत्‍तर तैयार करने वाले विशेषज्ञों पर कोई भी कार्रवाई नहीं, थोप दी परीक्षाएं :

अवनीश पाण्‍डेय

इलाहाबाद : लोक सेवा आयोग के पूर्व तथा वर्तमान अध्यक्ष सीबीआई जांच के दायरे में हैं। परीक्षा समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य ही होते हैं, जब प्रतियोगी छात्रों को लोक सेवा आयोग की शुचिता तथा निष्ठा पर से विश्वास ही समाप्त हो गया है। तथा इस तथ्य से अवगत होकर ही राज्य सरकार सीबीआई जांच करा रही है फिर इनके रहते शुचिता पूर्ण परीक्षा कैसे संभव है।

लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस 2016 की मुख्य परीक्षा सितम्बर 2016 में हुई थी। जिसका परिणाम अभी तक नहीं आया है। हालत यह है कि इस परीक्षा में गलत प्रश्नों तथा गलत उत्तर को खासा विवाद खड़ा हो चुका है। परीक्षार्थी बेहाल हैं, और दौड़-भाग में जुटे हैं ताकि कोई रास्‍ता निकल पाये, सरकार और आयोग के कानों पर जूं रेंग सके। लेकिन सरकार को अपनी राजनीतिक शतरंत की गोटियों को बिछाने और हटाने से ही फुरसत नहीं है। मजा ले रहा है लोक सेवा आयोग, ताकि जितना भी हो सके, मामले को और भी ज्‍यादा लटकाया जा सके। उसका मकसद इस परीक्षा के विवाद का निस्तारण करने नहीं, बल्कि उसे लम्बित रखना ही है।

यदि PCS 2016 के परिणाम आने के बाद PCS 2017 की परीक्षा होती हो उन बेरोजगार युवकों को नौकरी का अवसर प्राप्त होता जो अभी तक बेरोजगार हैं । दोनों मुख्य परीक्षा में हजार से अधिक कामन छात्र हैं और नौकरी में हैं । लोक सेवा आयोग प्रत्येक PCS की प्रारम्भिक परीक्षा में 10 से 12 गलत प्रश्न रखता रहा है इस बार भी यही किया है । मामला कोर्ट में गया है, कोर्ट को भी यह समझने की आवश्यकता है कि प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था से बार बार यह लगती क्यों हो रही है ? सही तो यह है कि न्यायालय को आयोग के प्रश्न बनाने वाले तथा उत्तर बनाने वाले एक्सपर्ट के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो ।

गड़बडि़यां तब से शुरू होने लगीं, जब से लोक सेवा आयोग में अनिल यादव का अध्यक्ष पद पर पदार्पण हुआ। उनकी करतूतों के चलते ही प्रतियोगी छात्रों को एक महीने का भी समय मुख्य परीक्षा हेतु नही मिला, और हालत आज भी सुधरने के बजाय लगातार बदतर ही होती जा रही है। मुख्य परीक्षा में 2 विषय के चार पेपर, सामान्य अध्ययन के दो पेपर, सामान्य हिंदी तथा निबन्ध के पेपर होते हैं, आखिर 20 दिन में छात्र कैसे कर सकता है तैयारी। सरकार बदलने के बाद यह उम्मीद जगी थी न्याय मिलेगा किन्तु आयोग की मनमानी आज भी उसी तरह जारी है जैसे पूर्व सरकार में जारी थी ।

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बदहाल है यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री

एक प्रकार से लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य छात्रों से सीबीआई जाँच का बदला ले रहे हैं तथा सरकार बेबस दिख रही है।

सरकार से अनुरोध है कि पहले भष्ट अध्यक्ष/सदस्यों को उनके पद से हटाए, उसके बाद ही कोई परीक्षा सम्पन्न कराए । यह सम्भव है कि सरकार जल्दी भर्ती चाहती हो तो इसका विकल्प है कि 2 वर्ष के लिए लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश की सभी परिक्षाओं को सम्पन्न कराने की जिम्मेदारी संघ लोक सेवा आयोग को सौंप दें । संविधान में यह प्रावधान है कि केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार की संस्तुति पर किसी भी लोक सेवा आयोग की भर्ती संघ लोक सेवा आयोग को दी जा सकती है ।

यह माँग उन छात्रों की है जिन्होंने पूर्ववर्ती सरकार के विरुद्ध आवाज उठाई, 48 बार लाठी खाये, 3 बार गोली चली, सैकड़ो छात्र जेल गए यहां तक कि छात्रों को 5 हजार का इनामी अपराधी तक घोषित किया गया। सरकार बदले इस उम्मीद से की वर्तमान सरकार में उनके जायज मांग को सुना जाएगा लेकिन 2 लाख ट्वीट लाखों मेल के बाद भी सरकार के कोई निर्णय न लेने पर छात्रों में वर्तमान सरकार के प्रति भी आक्रोश व्याप्त हो रहा है।

सपाई बीन पर जोगी सरकार के खर्राटे: लोकसेवा आयोग

: पूरे यूपी में हंगामा, मगर सरकार और जनप्रतिनिधि अलमस्‍त : अकर्मण्‍य आयोग के सपाई अध्‍यक्ष पर कोई भी कार्रवाई नहीं : दो पीसीएस परीक्षाओं का परिणाम की चाभी त्रिवेणी में फेंकी : यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री ही नहीं, लाखों युवाओं का भविष्‍य भी धूमिल :

कुमार सौवीर

लखनऊ : इससे बेहतर तो अखिलेश यादव थे। अखिलेश ने अनिल यादव को भले ही रेवड़ी की तरह यूपी लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष की कुर्सी थमा दी थी। लेकिन जैसे ही अदालत ने अनिल यादव पर कड़ी प्रतिक्रिया की, अखिलेश ने अदालत का सम्‍मान किया और बिना किसी चीं-चुपड़ के ही अनिल यादव को विदा कर दिया। भले ही अगला अध्‍यक्ष अनिरूद्ध यादव भी अखिलेश यादव का ही खासमखास निकला। लेकिन इसके बावजूद ताश की गड्डी फेंटने में जो साफगोई अखिलेश यादव ने दिखायी, वह बेमिसाल रही।

लेकिन अब हालत यह है कि आयोग की काहिली, नाकारापन के लिए जिम्‍मेदार अनिरूद्ध सिंह पर योगी सरकार चूं तक नहीं बोल पा रही है। पीसीएस की दो परीक्षाओं का परिणाम तक अनिरूद्ध सिंह नहीं घोषित कर पाये हैं, लेकिन आनन-फानन नयी परीक्षाओं की तारीख घोषित जरूर कर डाली। जाहिर है कि इससे सामान्‍य अ‍भ्‍यर्थियों का गुस्‍सा भड़क गया है। किसी भी सोशल साइट पर आप यूपी लोकसेवा आयोग की कार्यशैली पर तनिक भी कमेंट कर दीजिए, रोते-बिलखते युवक-युवतियां भरभरा कर वहीं पहुंच जाएंगे।

जरा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के इतिहास की हालिया हरकतों पर नजर डालिये, तो आपको साफ पता चल जाएगा कि आयोग में कार्यशैली और व्‍यवस्‍था के नाम पर केवल भ्रष्‍टाचार और बेईमानी ही रची-बसी रही है। पद बेचे-खरीदे गये हैं, परीक्षा-घोटाले भरमार हैं। जिसकी भी क्षमता होती है, वह अपने-अपनों के बच्‍चों के लिए मनचाहा पद लेकर भाग निकल जाते हैं। मोटी रकम की जरूरत होती है, या फिर राजनीतिक पहुंच। अखिलेश सरकार ने तो यहां बेईमानी की एक गजब दूकान खुलवा दी थी।

अभ्‍यर्थियों के लिए जूझने के मुताबिक आप गौर कीजिए कि 29 मार्च 2015 पीसीएस 2015 प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक होता है। छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद प्रथम पाली का परीक्षा निरस्त किया गया और छात्रों के साथ गंदा मजाक किया गया। यह सिलसिला यहीं नहीं रुकता है। समीक्षा अधिकारी 2016 का पेपर भी लीक होता है जिसका जांच आज भी लंबित है और अभ्यर्थियों के अमूल्य समय को बर्बाद किया जा रहा है। यह सब एक सुनियोजित तरीके से होता रहा और भ्रष्टाचार का सिलसिला बढ़ता गया। हमारे नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता रहा सरकारें चुप थी और नौजवान परेशान था।

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बदहाल है यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री

यहां लोकतंत्र में लोक खत्म हो गया था। और तंत्र ही बचा था। इसकाउदाहरण उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध में उतरे लाखों प्रतियोगी छात्रों पर 48 बार लाठीचार्ज 7 बार फायरिंग वाटर कैनन,आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रतियोगी छात्रों को जेल भेजा गया बात यहीं नहीं खत्म होती है। कई बार तो  छात्रों पर संगीन धाराएं लगाई गई। जैसे 7A /CLA गुंडा एक्ट। यहां तक कि कुछ छात्रों को 5000 का इनामी अपराधी तक घोषित कर दिया गया था। इस बात से उस समय में लोकतंत्र का अनुमान लगाया जा सकता है । लोक सेवा आयोग के भ्रष्टाचार को करीब से समझने और लिखने वाले इलाहाबाद के वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश मिश्रा कहते हैं, आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था जब लागू हुआ तो छात्रों ने इसके खिलाफ आंदोलन किया बाद में आयोग ने इसे बदला तो भ्रष्टाचार खुलकर सामने आया।

बहरहाल, अनिल यादव के बदले गये, और उनकी जगह अनिरूद्ध बैठे। उसके बाद निष्क्रियता की भयावह हालत पैदा हो गयी। हैरत की बात है कि योगी के मुख्‍यमंत्री बनने के सवा बरस बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस आयोग पर कोई भी ध्‍यान नहीं दिया। एक बार भी सरकार ने यह नहीं सोचा कि यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली इस फैक्‍ट्री यानी यूपी लोक सेवा आयोग को चुस्‍त-दुरूस्‍त करना ही नहीं, बल्कि युवाओं में बढ़ती जा रही हताशा को दूर करने के लिए भी आयोग को सुधारना जरूरी है।

हालत यह है कि अपने भविष्‍य से भयभीत इन अभ्‍यर्थियों ने योगी सरकार पर ही लानत भेजना शुरू कर दिया है।

सोशल साइट्स? हा हा हा, योगीजी बहुत मजाक करते हैं

: दो दिन बचे हैं यूपी लोकसेवा आयोग की परीक्षाएं शुरू होने को, लेकिन सरकार खामोश : सवा दो लाख से ज्‍यादा अभ्‍यर्थियों ने अपनी पीड़ा मुख्‍यमंत्री तक ट्विेटर पर भेजी थी, जवाब धेला भर न आया : तनिक देखिये तो कि मेरी एक पोस्‍ट पर कितना विह्वल हो पड़े अभ्‍यर्थी :

कुमार सौवीर

लखनऊ : उप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं 18 जून से शुरू हो रही हैं। दावा किया जा रहा है कि सेवा आयोग प्रशासन इन परीक्षाओं को सुचारू संचालित कराने के लिए कमर कसे बैठा है। दावे हैं कि दिन रात काम चल रहा है। लेकिन ज्‍यों-ज्‍यों परीक्षाओं के दिन समीप आने लगे हैं, लाखों प्रत्‍याशियों के दिल त्‍यों-त्‍यों बुरी तरह धड़कने लगे हैं। वजह है लोकसेवा आयोग की पिछली पांच-छह बरसों में की गयीं जघन्‍य आपराधिक करतूतें, जिन्‍होंने लाखों परीक्षार्थियों का जीवन तबाह कर दिया।

हैरत की बात है कि सन-16 के पीसीएस की मुख्‍य परीक्षा का अब तक परिणाम सार्वजनिक कर पाने में लोक सेवा आयोग की अक्षमता। इतना ही नहीं, आयोग ने सन-17 की पीसीएस प्राथमिक परीक्षा में हुई गड़बडि़यों को दूर पाने में अपने हाथ खड़े कर दिये हैं। और इसके बावजूद आयोग ने पीसीएस की मुख्‍य परीक्षा की तारीख इकतरफा घोषित कर डाली। जाहिर है कि इससे अभ्‍यर्थियों में गुस्‍सा है। इसकी शिकायत इन परीक्षार्थियों ने हर मंच पर की है। लोक सेवा आयोग से लेकर राष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री तक को इसकी खबर दी गयी। मगर कोई भी परिणाम नहीं निकला। शिकायतों पर कभी कान ही नहीं दिया गया।

मगर सबसे ज्‍यादा नाराजगी तो मुख्‍यमंत्री से है इन अ‍भ्‍यर्थियों को, जिन्‍होंने अब तक सवा दो लाख से ज्‍यादा शिकायतें मुख्‍यमंत्री के ट्विटर पर दर्ज की, लेकिन एक भी शिकायत का कोई भी जवाब मुख्‍यमंत्री कार्यालय से नहीं आया। न हां, न ही ना। न तो कोई आश्‍वासन मिला और न ही कोई दो-टूक जवाब। बुरी तरह आहत हैं यह युवक-युवतियां, जो सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए अपनी मेधा की परीक्षा देने पर तत्‍पर हैं। हमने देहरादून के एक पुलिस थाने पर पुलिस वालों की गुंडागर्दी की एक खबर लिखी, जिसमें उन्‍नाव की अपर जिला एवं सेशंस जज जया पाठक को भी पुलिसवालों ने प्रताडि़त किया था।

मी लॉर्ड! चो‍टहिल मातृत्‍व की पीड़ा देखो, छक्के छूट जाएंगे

हमने उस खबर का लिंक कई समूहों में डाला, तो प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति समूह के सदस्‍यों की पीड़ा बह निकली।

CHHATRA SANGHRSH SAMITI. : सर इस ग्रुप के छात्रों की पीड़ा मुख्यमंत्री तक पहुचाने में मदद करें , अब सिर्फ कुछ दिन शेष है ...18 जून से परीक्षा

Dhirendra Pratap Singh : तुम परीक्षा दो काहे इतना दिमाग लगा रहे हो

Dhirendra Pratap Singh : और सपोर्ट करो यौगिक को

Dhirendra Pratap Singh : सर प्रणाम , सपोर्ट तो अब नही होगा , सारी पार्टियां एक समान हैं ...

Mahendra Pratap Singh : मामा जी प्रणाम आप विगत दिनों की घटनाओं से अवगत होते हुए ऐसा कह रहे हैं परीक्षा तो हम लोग देना ही चाहते हैं पर इस प्रकार से नहीं आप जुलाई में कह कर जून में करा रहे हैं

Dhirendra Pratap Singh : सभी पार्टियां चोर हैं

Dhirendra Pratap Singh : हम तो पीड़ा समझ ही रहे हैं इसीलिए ना कह रहे हैं कि सब ध्यान हटा कर पढ़ाई पर मन लगाओ 4 दिन और बचा है बस

Mahendra Pratap Singh : सोशल मीडिया हब का उद्घाटन बड़े धूमधाम से सरकार कर रही है पर सोशल मीडिया हब पर लगभग सवा दो लाख ट्विटर प्रतियोगी छात्रों ने किए हैं पर सरकार की तरफ से एक भी जवाब नहीं आया ऐसे ही रहा तो हो गया इनका कल्याण

Dhirendra Pratap Singh : कल्याण तो होना ही है

Mahendra Pratap Singh : यही तो हम लोगों का दुर्भाग्य है

Pankaj Singh : सरजी प्रणाम। पी सी एस प्रतियोगीयो की मदद करें

Sandeep Dubey : सर अब तो लग रहा कोई रास्ता ही नही बचा है शासन के सभी स्तंम्भो तक ये बात पहुंच चुकी है न्यायपालिका की मर्जी का आभास तो हो ही गया है अब जो हो सकता है या होना है वह शासन स्तर से ही सम्भव है

Aditya Mohan Gupta : मदद करें श्रीमान।

Ravi SrivastavaRavi : We need your help Sir...

बधाई हो। तुम्हारे घर बाबू पैदा हुआ, इंसान नहीं

यूपी लोकसेवा आयोग अध्‍यक्ष पर लटकी इस्‍तीफे की तलवार, कुर्सी के लिए झौं-झौं शुरू

आयोग और उसके रिजल्‍ट का भरोसा नहीं, चली है अफसर बनने

प्रतिभागियों की लॉटरी निकालने वाले उप्र लोकसेवा आयोग पर शनि की साढ़े-साती

सिंहासन खाली करो, कि सीबीआई आती है

सेवा आयोग तक पहुंची सीबीआई, अनिल यादव की खैर नहीं

लोकसेवा आयोग में चौथे बर्खास्‍त अध्‍यक्ष हैं अनिल यादव

उप्र लोकसेवा आयोग: तीन सत्र शून्‍य, परीक्षा फिर टली

कुड़ुक हो गया है लोकसेवा आयोग, नौकरी नहीं देता

सलाम तुमको अवनीश पांडे, तुमको पीढ़ियां याद करेंगीं

सेवा आयोग: 40 हजार सीधी भर्तियों में खुली बेईमानी

सेवा आयोग: 40 हजार सीधी भर्तियों में खुली बेईमानी

सेवा आयोग: सीबीआई लाने वाले युवाओं के सपने भस्‍म

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