Meri Bitiya

Thursday, May 24th

Last update05:24:48 PM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

सैड सांग

नहीं रहीं दो पत्रकारों की मां, शाहगंज में शोक की लहर

: शाहगंज में दैनिक हिन्‍दुस्‍तान के तहसील पत्रकार विनोद साहू की मां कमला साहू जी का पार्थिव अवसान, तेरहवीं तीन को होगी : खेतासराय के नौशाद अहमद की मां ने भी प्राण त्‍यागे, बड़ी मस्जिद में शव को सुपर्देखाक किया गया :

मेरी बिटिया संवाददाता

शाहगंज : नवरात्रि के सम्‍पन्‍न होते ही जौनपुर में मानो कोई पहाड़ टूट गया। यहां के दो पत्रकारों की मांओं ने अपना आंचल इस पूरे क्षेत्र से हटा लेने से पूरा इलाका दुख के सागर में डूब गया है। इनमें से एक पत्रकार विनोद साहू की माता का देहांत की खबर अभी पहुंची ही थी, कि अचानक एक दूसरे पत्रकार नौशाद अहमद की मां का भी इंतकाल हो गया।

मिली खबरों के मुताबिक यहां हिन्दुस्तान शाहगंज के तहसील प्रतिनिधि विनोद साहू की माता श्रीमती कमला देवी (80) पत्नी स्व राम विलास का पश्चिमी कौडिया मोहल्ला स्थित आवास पर वृहस्पतिवार की सांय 6 बजे असामयिक निधन हो गया। क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। विनोद साहू के आवास पर शोक संवेदना प्रकट करने वालों का तांता लगा। दाह संस्कार वृहस्पतिवार देर रात जौनपुर स्थित रामघाट पर किया गया। मुखाग्नि छोटे बेटे सुनील साहू ने दिया। तेरहवीं 3 अप्रैल को निज निवास पर सम्पन्न होगा।

उधर खेतासराय के युवा पत्रकार नौशाद अहमद की माता का बुधवार की शाम निधन हो गया। सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी। उनके आवास पर शोक जताने के लिए ताता लगा रहा।आज दोपहर शव को बड़ी मस्जिद स्तिथ कब्रिस्तान में सुप्रदेखाक कर दिया गया।

बताया जाता है कि पत्रकार की माता का अचानक बुधवार की शाम देहान्त हो गया। सूचना मिलते ही इलाके मे शोक की लहर दौड़ गयी। शाम से ही उनके आवास पर शोक जताने वालो का ताता लगा रहा। वरिष्ट पत्रकार विक्रम सिंह की अध्यक्षता में शोक सभा कर श्रद्धाजंलि अर्पित किया। इस अवसर पर एखलाक खान,गुलाम साबिर, प्रीतम सिंह, विवेक गुप्ता, श्री प्रकाश वर्मा, फहद खान,शोएब इदरीसी,शैलेश नाग सहित तमाम लोग मौजूद थे। उधर खेतासराय में पत्रकार यूसुफ खान की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित कर गहरी दुख प्रकट किया गया। और उनकी माताको श्रद्धाजंलि अर्पित कर ईशवर से प्रार्थना किया कि इस दुखकी घड़ी में उनके परिवार को सहनशीलता प्रदान करे। इस मौके पर प्रमुख रूप से अजीम सिद्दीकी, रिन्कू श्रीवास्तव, राममूर्ति यादव, आनन्द सिंह,सैय्यद तारिक, श्याम चन्द यादव, सुरेश पत्रकार सहित तमाम लोग मौजूद रहे। यह जानकारी भारत टाइम्‍स के पत्रकार यूसुफ खान ने दी है।

माशाअल्लाह ! जौनपुर में पकड़ा गया "पीसीएस"

: यह वह पीसीएस नहीं, जिसे देखते ही लोगों में सम्मान भर जाए, बल्कि यह सुनते ही जौनपुरी लोग खिल्‍ल से हंस पड़ते हैं : अपनी पुत्रवधू से कई महीनों से दुराचार करने वाले नराधम श्‍वसुर को पुलिस ने जेल भेजा : बाप की करतूतों को जानबूझ कर अनदेखा कर रहा था पति :

कुमार सौवीर

जौनपुर : शिराज-ए-हिन्‍द, यानी जौनपुर के रहने वाले या जौनपुर के बारे में थोड़ी गहरी जानकारी रखने वालों को इस जिले की रग-रग का अहसास होता है। वे खूब जानते हैं कि शर्की डायनेस्टी और

शिराजे हिंद का क्‍या अर्थ है, इमरती के अलावा मूली, मक्का और मक्कारी की बहुतायत पर खूब चर्चा करते हैं ऐसे लोग। और खास तौर पर जौनपुर में प्रचलित गोपनीय कूट-भाषा को तो यहां का बच्‍चा-बच्‍चा जानता-पहचानता है। मसलन, पीसीएस। आप किसी से भी पीसीएस के बारे में पूछिये, वह खिल्‍ल से हंस पड़ेगा।

पीसीएस शब्द का उच्चारण कर मंद-मंद मुस्कुरा पड़ने वालों से अगर उनकी यह रहस्‍यमयी मुस्‍कान का सबब पूछिये, तो अपने होंठ, भौंहें और माथे पर विभिन्‍न आकार वाली इशारा जैसी लकीरें तो खींच देंगे, मगर जुबान से कुछ नहीं बोलेंगे। कुछ भी हो, कम से कम इतना तो तय ही है कि यहां प्रचलित इस पीसीएस शब्द का अर्थ जौनपुर को जानने वाले लोगों में वह तो हर्गिज नहीं है, जो प्रशासनिक सरकारी कुर्सी पर बैठे आसीन अधिकारी को लेकर समझा जाता है। फिर भी यहां के लोगों का इस शब्‍द की प्रतिक्रिया में मंद-मंद मुस्कुराते हुए चेहरे का आशय अपनी बहू पर ससुर की गंदी-कुत्सित निगाह से लगाया जाता है।

कुछ भी हो, अभी हाल ही जौनपुर में एक पीसीएस पकड़ा गया है, जो पुत्रवधू और ससुर के पवित्र रिश्तों को कलंकित कर रहा था। पुलिस ने इस श्‍वसुर को गहरी पूछतांछ के बाद पकड़ा और अदालत में पेश कर उसे जेल भिजवा दिया है। इस हादस से पूरा शहर सन्‍न हो गया है। लेकिन हैरत की बात है कि इस घटना की गहरी खबर यहां के किसी भी अखबार ने नहीं छापी है। यहां के पत्रकारों के चरित्र में आये ऐसे बेहद शर्मनाक स्‍खलन अपने आप में बेहद दुख और शर्मनाक भी है।

घटना के अनुसार पड़ोस के बड़े कस्‍बे जफराबाद की रहने वाली एक युवती का विवाह जौनपुर कोतवाली क्षेत्र के युवक से हुआ था। कुछ महीने बाद इस युवती ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसके ससुर उसके साथ बेजा हरकतें और छेड़खानी करते हैं। पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई शुरू की। छानबीन तथा पूछताछ का दौर प्रारंभ हो गया। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने उस युवती के ससुराल पहुंच कर सभी लोगों को आमने-सामने किया और सवालों की झड़ी लगा दी।

युवती से पूछताछ शुरू करते ही युवती ने अपने आरोपों की पुष्टि करते हुए मान लिया कि उसके ससुर उसके साथ छेड़खानी करते हैं। इस पर पुलिस ने उस ससुर से बातचीत की तो उसने कहा की क्योंकि वह काफी उम्रदराज है इसलिए उनके बदन में दर्द बना रहता है। इसी का समाधान करने के लिए उसने अपनी बहू से अपने बदन में तेल लगाने की गुजारिश की थी। और इसी बीच में शायद उस युवती को कुछ गलतफहमी हो गई। पुलिस ने उस युवती से फिर पूछा तो उसने आखिरकार बता दिया कि तेल लगवाने के बहाने कई महीनों से उनका ससुर उनके साथ नाजायज जिस्मानी रिश्ते कायम कर रहा था। इसकी शिकायत युवती ने शुरुआत में कई बार उसने अपने पति से किया था लेकिन पति ने उस पर कोई भी ऐतराज नहीं किया। इससे ससुर का मन बढ़ गया और उसने बार-बार अपनी हवस का शिकार बनाना शुरु कर दिया।

पुलिस ने इस बारे में सामने बैठे युवती के पति से सवाल किया तो पति ने कुबूल किया कि उसने अपने पति से अपने ससुर की शिकायत की थी, लेकिन वह अपने बाप पर कोई कार्यवाही नहीं करना चाहता था। जाहिर है कि वहां मौजूद सारे लोग इस युवती, उसके ससुर और उसके पति की बातचीत सुनकर बिल्कुल सन्न रह गए। उन्होंने पति और ससुर लानत भेजना शुरू कर दिया। पुलिस ने फिर उस ससुर से उसी युवती के आरोप की पुष्टि के लिए पूछा तो आखिरकार ससुर ने यह कबूल कर ही लिया कि उसने ऐसा कुकर्म किया है और यह भी एक बार नहीं बल्कि बार बार हुआ है। पिछले कई महीनों से उस युवती के साथ उसका ससुर लगातार बलात्कार कर रहा था। और जुबान खोलने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी भी दे रहा था।

बहरहाल, पुलिस ने इस मामले को सुलझाया और यौन शोषण के आरोप में ससुर को जेल भेज दिया है।

अब जिम्मेदारी तो नागरिकों की है, कि जौनपुर के जिम्मेदार लोग और अग्रगण्य सामाजिक कार्यकर्ता यह तय करें कि जौनपुर पर कलंक बन चुके ऐसे चंद ससुर लोगों की हरकतों का खुलासा किया जाए, उन ससुर लोगों को शारीरिक रूप से नंगा किया जाए।

लेकिन पहला सवाल तो यह स्पष्ट होना ही चाहिए यह पीसीएस शब्‍द का असली अर्थ क्या जिसका हल्ला जौनपुर के चरित्र को दागदार करता जा रहा है, और क्‍यों इसका उच्‍चारण होते हुए लोग खिल्‍ल से हंस पड़ते हैं।

पत्रकार का स्‍तन दबा दिया, हजम नहीं हुई यह बात

: हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्टर अनुश्री को कवरेज के दौरान पुलिसवाले द्वारा की गयी ऐसी कथित हरकत पर हंगामा : लेकिन उस हंगामे में लड़कियों को सम्‍भालने के लिए तो महिला-पुलिस तैनात थी, फिर यह कैसे हो गया : लेकिन ऐसी इन खबरों में लोचा बहुत, बात पर तिल का ताड़ तो नहीं :

मेरीबिटिया संवाददाता

नई दिल्‍ली : छात्र आंदोलन के दिल्‍ली हुए ताजा ज्‍वार में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लगाया जा रहा है कि छात्रों के इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने दो महिला पत्रकारों के साथ अभद्रता का की सारी सीमाएं ही तोड़ डालीं, जब यह महिला पत्रकार उस आंदोलनकारियों से पुलिस से हो रही भिड़ंत का कवरेज कर रही हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि उसी दौरान पुलिसवाले ने एक पत्रकार को एक पुलिसवाले ने धक्का दिया और दूसरी महिला पत्रकार की छाती दबाई।

यह खबर सोशल साइट पर है। ऐसी ही खबर सुयश सुप्रभ ने अपनी वाल पर लिखी है। सुयश सुप्रभ लिखते हैं कि हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टर अनुश्री कल ज़मीन पर गिरे एक लड़के को पीट रहे पुलिसवालों की तस्वीर ले रही थीं। पास खड़े एक अफ़सर ने कहा, "इसका कैमरा तोड़ दो।" फिर अनुश्री का कैमरा छीन लिया गया। इसी दौरान एक दूसरी पत्रकार को एक पुलिसवाले ने धक्का दिया और ऐसा करते हुए उसकी छाती दबाई। बाद में पुलिस ने सफ़ाई दी कि उस पुलिसवाले ने महिला पत्रकार को छात्रा समझ लिया था।

अब सवाल यह है कि क्या छात्रा का स्तन दबाना अपराध नहीं है। अगर नहीं है तो सरकार इसकी घोषणा कर दे। पुलिस मैनुअल में इसे शामिल तो नहीं कर दिया गया है? फ़र्स्टपोस्ट के पत्रकार प्रवीण सिंह को हाथ में गहरी चोट लगी। दूसरे पत्रकारों के साथ भी बहुत कुछ हुआ। ये कैमरे फ़ोटोजर्नलिस्टों ने पुलिस मुख्यालय के सामने रखे हैं। विरोध जताते हुए। कुछ तस्वीरें बहुत बड़ी कहानी कह देती हैं। यह उन्हीं तस्वीरों में से एक है।

लेकिन ऐसी इन खबरों में लोचा बहुत है। इस दौरान महिला पुलिस की भारी तैनाती थी। और छात्राओं को काबू में रखने के लिए केवल महिला पुलिसकर्मी ही तैनात थीं। फिर यह घटना किसने की। क्‍या किसी महिला पुलिस कर्मी ने ही इस महिला पत्रकार के साथ ऐसा कर दिया। और अगर ऐसा हुआ तो क्‍या वह साजिश के तहत हुआ, विकृत रोगी महिला पुलिसकर्मी ने किया, या फिर भीड़ नियंत्रण के दौरान सहज ही उस महिला का हाथ उस पत्रकार के स्‍तनों तक पहुंच गया। क्‍यों कि उस कवायद के दौरान जो फोटो अखबारों में छपी हैं, उसमें एक छात्रा को सम्‍भालने के लिए करीब आधा दर्जन महिला पुलिसकर्मी जुटे हैं। फिर यह हरकत किसने की, यह समझ से परे हो जा रहा है।

गाजीपुर में खबर छापी, तो दबंगों ने पत्रकार को पीटा

: गहमर क्षेत्र में घटिया शौचालय निर्माण पर जारी घोटालों की खबर शैलेंद्र चौधरी ने छापी थी : अदालत ने पत्रकार की अर्जी पर जांच का आदेश दिया : गांव के बाहर दबंगों ने किया था पत्रकार पर जानलेवा हमला, पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की :

संतोष पाण्‍डेय

गाजीपुर : इस मामले की प्रखर सच्चाई यहीं है कि हमारे मित्र और पत्रकार प्रेस परिषद के जिला सचिव श्री शैलेन्द्र चौधरी ने अपने क्षेत्र के एक गांव में घटिया शौचालय के निर्माण पर खबर छापी।इस पर नाराज होकर कुछ लोगों ने उन्हे रास्ते में रोका और उनके साथ मारपीट की।जिसका नामजद मुकदमा गहमर थाने में दर्ज है।दूसरे पक्ष ने भी आदरणीय कोर्ट के माध्यम से शैलेन्द्र चौधरी पर मुकदमा कायम करने की योजना बनाई हुई है। विपक्षी की शिकायत पर कोर्ट ने गहमर थाना पुलिस से शिकायत की सच्चाई जानने के प्रयास में आख्या मांगी है।

नम्बर1:-तो क्या चोरों और घटियागिरि करने वालों के खिलाफ हम समाचार लिखना बन्द कर दें-?

नम्बर 2:-तो गहमर पुलिस से हमें सिर्फ सच्चाई की अपेक्षा है और एसओ श्री सुरेन्द्र पाण्डेय जी से हम लोग यहीं कह रहे हैं कि आप सच्चाई का ही साथ दें।

नम्बर3:-एसओ साहब--!चोर और लुटेरे अब कोर्ट के जरिये भी हमें प्रताड़ित करने के प्रयास में हैं। आप सही का साथ दिजीये और साबित करिये कि पुलिस चोर और लुटेरों के सहयोग के लिये नहीं बनी हुई है।

स्‍थानीय पत्रकार अशोक ने इस प्रकरण पर कहा है कि चोर, अपराधी और प्रशासनिक अधिकारी सब मिलकर जनता को लूट रहे हैं किसी ईमानदार ने आंख दिखाई तो उसकी खैर नही है।

एक अन्‍य पत्रकार रवींद्र सिंह ने लिखा है कि पाण्डेय जी बात केवल ग्राम प्रधान की नही है इसमे पंचायत सचिव जेइ बी.डी.ओ. सी.डी.ओ.तक आँच पहुँच सकती है पत्रकार के समक्ष यह तिकड़ी मजबूत है। थानाध्यक्ष के निष्पक्ष आख्या न देने पर क्षेत्राधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से संपर्क करें।

Page 7 of 231