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सैड सांग

दाती महराज पर सनिच्‍चर की साढ़े-साती, जेल जाएंगे

: दाती महाराज के खिलाफ महिला ने लगाया आरोप, बरसों तक करते रहे बलात्‍कार : राजस्‍थान की युवती ने दाती के कई चेलों पर भी रेप का आरोप जड़ा : महरौली में है दाती महराज का विशाल आश्रम, फतेहपुर बेरी में मुकदमा दर्ज :

मेरी बिटिया संवाददाता

लखनऊ : स्‍वयं को शनि भगवान का सर्वोच्‍च भक्‍त कहलाने वाले दाती महराज पर आज खुद ही सनिच्‍चर महराज उचक कर चढ़ गये। उनकी एक शिष्या ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं, इस युवती ने दाती महराज के साथ ही साथ उनके कई चेलों-चापड़ों पर भी लगातार यौन-उत्‍पीड़न के आरोप जड़ दिये हैं। इस युवती ने दिल्‍ली महिला आयोग पर इस बाबत शिकायत दर्ज की थी। उसके बाद ही दक्षिणी दिल्‍ली के फतेहपुर बेरी थाने ने युवती के खिलाफ यौन उत्‍पीड़न का आरोप दर्ज कर लिया। यह युवती राजस्‍थान की रहने वाली बतायी जाती है। करीब 70 बरस के दाती महराज का जन्‍मदिन अगली 10 जुलाई को भव्‍य तरीके से आयोजित करने की तैयारियां चल रही हैं।

करीब पचीस बरस की इस युवती ने पुलिस को बताया कि वह करीब एक दशक से महाराज की अनुयायी थी। लेकिन महाराज और चेलों द्वारा बार-बार बलात्कार किए जाने के बाद वह अपने घर राजस्थान लौट गई थी। युवती ने आरोप लगाया है कि बाबा की एक अन्य महिला अनुयायी उसे महाराज के कमरे में जबरन भेजती थी। मना करने पर धमकाती थी कि वह सभी से कहेगी कि पीड़िता अन्य चेलों के साथ भी यौन संबंध बनाती है। वह करीब दो साल पहले आश्रम से भाग गई थी और लंबे समय से अवसाद में थी. अवसाद से उबरकर उसने अपने माता-पिता को पूरी बात बताई और उनके साथ पुलिस को शिकायत दी है।

दाती महाराज ‘शनि शत्रु नहीं मित्र है’ कार्यक्रम करके चर्चा में आए थे. मालूम हो कि दाती महाराज देशभर में हिंदू देवता शनिदेव के दुष्प्रभाव से जुड़े उपाय सुझाने और कर्मकांडों के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा अक्सर वह विभिन्न चैनलों पर ज्योतिष से संबंधित कार्यक्रम पेश करते हुए नज़र आते हैं। महिला ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि दाती महाराज के आश्रम में अन्य कई महिलाओं का भी यौन शोषण हुआ है। महिला का कहना है कि दाती महाराज की प्रसिद्धि से वह डरी हुई थी, इस वजह से उसने दो साल तक शिकायत दर्ज नहीं करवाई। दाती महाराज के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 376, 377, 354 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने बताया है कि दाती महाराज द्वारा कथित रूप से बलात्कार की शिकार हुई युवती की कहानी बेहद डरावनी है। ऐसा लगता है कि वह भीषण प्रताड़ना से गुजरी है। उसकी जान को खतरा है। स्‍वाति का अनुरोध है कि दिल्ली पुलिस को उसे तुरंत सुरक्षा प्रदान करने के लिए कहा है. दाती महाराज को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। महिला का आरोप है कि दो साल पहले दाती महाराज ने शनिधाम में उनके साथ केर किया था लेकिन डर की वजह से वह इतने दिनों तक चुप रहीं और कोई शिकायत नहीं की। दाती महाराज दिल्ली के शनिधाम के संस्थापक हैं और कई टीवी चैनलों पर नियमित रूप से राशिफल प्रस्तुत करते हैं। दक्षिणी दिल्ली में उनका एक विशाल फार्म हाउस है।

आसाराम और गुरमीत राम रहीम के बाद एक और स्वयंभू संत दाती महाराज पर बलात्कार का मामला दर्ज हुआ है. स्वयंभू संत दाती महाराज पर उनकी शिष्या ने ही बलात्कार का आरोप लगाया है. पुलिस ने बलात्कार और शोषण से जुड़ी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज़ कर लिया है। अब स्वयंभू संत दाती महाराज के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 376, 377, 354 और 34 के तहत केस दर्ज हुआ है। दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी में स्थित शनिधाम मंदिर के साथ उनका आश्रम है.

अपनी शिकायत में शिष्या ने आरोप लगाया गया था कि शनि धाम मंदिर के अंदर दाती महाराज ने दो साल पहले उसके साथ बलात्कार किया था और इसके बारे में किसी को भी न बताने की धमकी दी थी।

संपादक के घर कहर बरपा गया एसटीएफ का दारोगा

: किसी बड़े माफिया की तरह पूरा गैंग लेकर वरिष्‍ठ सम्‍पादक के घर घुस गया एसटीएफ का दारोगा : मैं एसटीएफ से रणजीत राय हूँ, जो उखाड़ना हो, उखाड़ लो : दर्जन एसटीएफ के लोगों के साथ धड़धड़ा कर सम्‍पादक के घर घुस गया एसटीएफ का गुण्‍डा :

मेरी बिटिया संवाददाता

लखनऊ : आप अगर लखनऊ जैसे महानगर में रहने वाले एक शांतिपूर्वक रहने वाले व्‍यक्ति हैं, तो फिर आपको इस मवाली गुण्‍डा के बारे में जानकारी रखनी ही चाहिए होगी। यही वे लोग हैं जो आम आदमी का जीना हराम कर देते हैं। किसी भी आम शहरी पर किसी माफिया अपराधी के गिरोह की तरह वे टूट पड़ सकते हैं। आपके घर में धड़धड़ाते हुए घुस जा सकते हैं, आपके घर मौजूद बच्‍चों और महिलाओं के साथ  किसी भी सीमा तक अभद्रता कर सकते हैं। धमकी दे सकते हैं, किसी की भी इज्‍जत को पूरे मोहल्‍ले में तहस-नहस कर सकते हैं। ऐलान कर सकते हैं कि तुम्‍हें कोई भी नहीं बचा सकता है अब।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वे गुण्‍डे सड़क छाप हैं, या गिरोबंद। इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे यूपी पुलिस की एसटीएफ के कारकून हैं जिन्‍हें यूपी पुलिस अपने गर्व बताती घूमती है। उस जब पुलिस और एस टी एफ के लोग इस तरह क़ानून तोड़ने वाले, अराजक और अपराधी क़िस्म के मित्रों और रिश्तेदारों की मदद में आम जीवन जीने वालों का जीना हराम करने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए, बिना किसी असाइनमेंट के गुंडों की तरह कहीं भी हमला करने लगेंगे तो हम जैसे आम और साधारण लोगों का जीवन कभी भी संकट में पड़ सकता है। चिंतनीय बात तो यह कि जब एसटीएफ के पुलिसवाले लखनऊ में ऐसी गुण्‍डागर्दी कर सकते हैं, तो वे यूपी के बाकी जिलों में क्‍या-क्‍या कहर नहीं ढाते होंगे।

यह धमकी दी है यूपी एसटीएफ के एक दारोगा रणजीत राय ने, आज दैनिक जन संदेश टाइम्‍स अखबार के प्रधान सम्‍पादक सुभाष राय को रणजीत ने करीब दर्जन भर पुलिसवालों के घर धमक कर पूरे मोहल्‍ले को आतंकित कर दिया। इस बारे में पूरा ब्‍योरा सुभाष राय ने अपनी वाल पर दर्ज कर दिया है:-

‘अब तुम किसी पुलिस वाले को, किसी दरोग़ा को, एस पी को, जिसको चाहो बुला लो. देखता हूँ तुम्हारी औक़ात क्या है. ये देखने से ही गुंडा लगता है, पत्रकार है, गुंडई करता है. अब बता कौन आएगा तुझे बचाने, बोल कौन है बुला. नम्बर दे मैं बुलाता हूँ, ‘ एक गुस्साया हुआ आदमी दर्जन भर लोगों के साथ रविवार शाम तीन से चार के बीच मेरे विराज खंड स्थित आवास पर आ धमका. तब मैं और मेरी पत्नी केवल हम दो ही घर पर थे. उनमें से कई हथियारों से लैस थे. वे सब धड़ाधड़ रैम्प फलाँगते हुए मेरे दरवाज़े के अंदर आ गए. चीख़ते, चिल्लाते और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए. हमलावर अन्दाज़. एक झटके में डरा देने की कोशिश. हम अवाक थे. लगा कि वह किसी भी क्षण मुझे थप्पड़ जड़ देगा, मेरी पत्नी पर हमले कर देगा.

मैं एकबारगी डर गया लेकिन अपने डर से बाहर आते हुए मैंने उससे कहा, आप बाहर जाइए, दरवाज़े से हटिए, मैं आप से बात नहीं कर रहा हूँ. वह खौखियाते हुए बोला, तुम्हें मुझसे बात करनी पड़ेगी, क्यों नहीं बात करेगा? बोल कौन पुलिसवाला है जो तुम्हारी मदद करेगा. बुला, फ़ोन कर. मैंने पूछा, आप हैं कौन? वह मुझे डपटते हुए चीख़ा, मैं एस टी एफ से हूँ, रणजीत राय. क्या उखाड़ लेगा. लग रहा था कि वह कभी भी मुझे घसीट लेगा, मार देगा. उसकी भाषा में खिसियाहट, उग्रता, आक्रामकता और गंदगी भरी हुई थी. चिल्लाते हुए उसके हाथ बिलकुल मेरे सिर के पास तक लहरा रहे थे. मेरी पत्नी डर गयीं थीं, वे मुझे अंदर खींचने का प्रयास कर रहीं थीं. मैं जितना पीछे हट रहा था, वह उतना आगे बढ़ रहा था. लगभग आधे घंटे तक वह और उसके मवाली साथी मेरे घर पर हंगामा करते रहे.

मुझे नहीं पता कि कोई भी एस टी एफ वाला इस तरह सादी वर्दी में कैसे किसी भी आम नागरिक को डरा-धमका सकता है. मुझे यह भी नहीं पता कि वह किसी असाइनमेंट पर था या अपने अधिकारियों को सूचित करके आया था या निजी तौर पर ही अपने रिश्तेदारों, मित्रों की ग़ैरक़ानूनी मदद करने आया था. इस तरह किसी फ़ोर्स का कोई आदमी रंगबाज़ी और सरासर गुंडई की मुद्रा में किसी सभ्य नागरिक के घर धावा बोलकर केवल एस टी एफ की छवि को ही बट्टा लगाएगा और उसने ऐसा ही किया.

मामला क्या था, यह बताऊँ तो आप आसानी से समझ जाएँगे कि किस तरह पुलिस संगठनों के कुछ लोग अपने पद की धौंस दिखाकर क़ानून का दायरा लाँघते हुए अपने अराजक, रंगबाज़ और दलाल सम्बन्धियों की मदद कर रहे हैं. मैं और मेरी पत्नी, दोनों एक जून को बाहर चले गए थे, जब आठ की रात दो बजे वापस लौटे तो यह देखकर सन्न रह गए कि किसी ने घर के सामने कई ट्रक मोरंग इस तरह गिरवा दिया था कि मैं अपनी गाड़ी बाहर नहीं निकाल सकता था. पता करने पर मालूम हुआ कि मोरंग मिस्टर राकेश तिवारी ने डलवाया था. अगले दिन नौ को मैंने उनसे कहा कि भाई घर के सामने से सिर्फ़ इतना मोरंग हटा लें कि मैं गाड़ी निकाल सकूँ और कार्यालय जा सकूँ. उसने कहा, जी बिलकुल अभी करवा दूँगा. जब दस बज गया और कोई हलचल नहीं हुई तो मेरी पत्नी उसके घर गयीं और वही आग्रह दुहराया. राकेश और उसकी पत्नी दोनों ने आश्वस्त किया की बहुत जल्द वे मोरंग हटा लेंगे पर शाम तक कुछ नहीं हुआ. मैं कार्यालय नहीं जा सका और हम अपने घर में लगभग क़ैद हो गए. मेरे पास अपने हर काम के लिए पैदल निकलने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा. मेरे लिए इस उम्र में यह सम्भव नहीं था.

शाम को मैंने राकेश तिवारी से कहा कि आप यहाँ से मोरंग हटा लें अन्यथा मुझे क़ानून की मदद लेनी पड़ेगी. पहले तो वह सामान्य ढंग से बात करता रहा और कहता रहा कि अब आप ही बताइए इसे कहाँ ले जाऊँ. मैं जानता हूँ कि आप को तकलीफ़ हो रही है लेकिन मेरे पास कोई और चारा नहीं है. वह मेरी मुश्किल समझने को कतई तैयार नहीं था. बात करते -करते अचानक उसकी भोंहें तन गयीं और भाषा बदल गयी. वैसे भी वह मुहल्ले में अकारण लोगों से झगड़ता रहता है. वह बंदूक़ भी रखता है. वह ग़ुस्से में बोला, अब मोरंग यहीं रहेगा, आप को जो उखाड़ना हो, उखाड़ लीजिए. मजबूरन मुझे 100 पर पुलिस को ख़बर करनी पड़ी. पुलिस आती, इसके पहले तिवारी ने अपने कुछ लोगों बुला लिया. वे आए, मेरी घंटी बजायी और धमकाने वाली भाषा में बात करने की कोशिश की. मैंने किसी से बात करने से इनकार किया और दरवाज़ा बंद करके घर में चला गया. मैंने पुलिस के उच्च अधिकारियों को भी सूचना दे दी थी. रात आठ बजे के आस-पास एक पुलिस अधिकारी आए, उन्होंने सब देखा, राकेश तिवारी को बुलवाया और उनसे कहा, आप इस तरह सड़क बंद नहीं कर सकते. कल सुबह जे सी बी मंगवाइए और यहाँ से मोरंग हटवाइए. तिवारी ने सहमति जतायी और पुलिस अफ़सर को आश्वस्त किया कि सवेरे काम हो जाएगा.

अगला दिन 10 जून. सवेरा हुआ. दस बजा, बारह बजा. सब ख़ामोश. वहाँ एक चुटियावाला आदमी तिवारी का काम करा रहा था. मैंने उससे कहा तो उसने रूखा जवाब दिया, अभी सुबह नहीं हुई है, कर रहे हैं, कर देंगे. हटा देंगे, ज़्यादा हाइपर न होईए. दोपहर गुज़र गयी मगर उनकी सुबह नहीं आयी. मैंने फिर पुलिस अधिकारी से सम्पर्क किया तो पता चला कि मिस्टर तिवारी को जे सी बी नहीं मिल पा रही है. मैंने कहा कि अगर मैं जे सी बी मँगवा दूँ तो..अधिकारी ने कहा, आप को मिल जाय तो मँगा लीजिए और जब जे सी बी आ जाए तो मुझे फ़ोन कर दीजिएगा, मैं फ़ोर्स भेज दूँगा, आप मोरंग हटवा दीजिएगा. मैंने जे सी बी मंगा ली. उसके आते ही मिस्टर तिवारी आए, उन्होंने मुझे बताया कि खाली प्लॉट में डलवा दीजिए. मैंने उनको बताया कि इसे तीन हज़ार रुपए भी देने हैं. मिस्टर तिवारी ने कहा, कोई बात नहीं, हो जाएगा. मुझे लगा, समस्या हल हो गयी लेकिन जे सी बी ने अभी एक तिहाई भी मोरंग नहीं उठायी होगी कि तिवारी की पत्नी आकर मशीन के सामने खड़ी हो गयी और गाली देने लगी, चिल्लाने लगी. तिवारी के तेवर भी अचानक बदल गए, वह भी अनाप-शनाप बोलने लगा. जे सी बी वाला डर कर भाग गया.मैंने सुना, तिवारी की पत्नी ने किसी को फ़ोन किया और कुछ ही पलों में एक गाड़ी से दनदनाते हुए एक दर्जन हथियारबंद लोग आ गए. आते ही उन्होंने मेरे घर पर धावा बोल दिया, गरियाते हुए, औक़ात पूछते हुए और धमकाते हुए. शोर सुनकर मेरे एक पत्रकर साथी भी आए, उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश की लेकिन हमलावर किसी की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. इस बीच मैंने पुलिस अधिकारी को कई बार फ़ोन करने की कोशिश की मगर नाकाम रहा. उनका जब तक फ़ोन आया, तब तक मिस्टर तिवारी के बुलावे पर आए लोगों ने मुझे, मेरी पत्नी को झुकाने, डराने, धमकाने और मैनहैंडलिंग के हर सम्भव जतन कर लिए. जब हम नहीं डरे तो वे सब बाहर निकलकर खड़े हो गए और तिवारी दम्पती चीख़-चीख़ कर चुनौती देने लगे, अब जिसे बुलाना हो बुला लो और एक इंच भी मोरंग हटवा कर दिखा दो.

मैं पसोपेश में था. समझ में नहीं आ रहा था क्या करूँ. इसी बीच पुलिस अधिकारी का फ़ोन आया. मैंने उन्हें सारी बात बतायी, अपमानजनक घटना का पूरा ब्योरा दिया. तब तक मेरे मित्र अरुण सिंह और रामबाबू भी आ गए थे. आधे घंटे बाद पुलिस आयी. जे सी बी बुलाने की बहुत कोशिश हुई पर वह भाग चुका था, मिला नहीं. फिर पुलिस ने आस-पास काम कर रहे मज़दूरों को लगाकर मोरंग हटवायी.

वैसे तो मैं क़ानून के अलावा किसी से डरता नहीं हूँ , और अन्यायी, अपराधी और गुंडे मवालियों से तो बिलकुल ही नहीं लेकिन सोचता हूँ कि जब पुलिस और एस टी एफ के लोग इस तरह क़ानून तोड़ने वाले, अराजक और अपराधी क़िस्म के मित्रों और रिश्तेदारों की मदद में आम जीवन जीने वालों का जीना हराम करने के लिए बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए, बिना किसी असाइनमेंट के गुंडों की तरह कहीं भी हमला करने लगेंगे तो हम जैसे आम और साधारण लोगों का जीवन कभी भी संकट में पड़ सकता है. (बाद में मैंने जानना चाहा कि वह सचमुच एस टी एफ वाला था या नहीं. फ़ेसबुक पर ढूँढा तो उसका प्रोफ़ाइल मिला, वह एस टी एफ से ही है, दो चित्र उस समय के हैं जब मेरे घर के सामने मोरंग पटा था और दो चित्र एस टी एफ वाले रणजीत राय के )

इस घटना के तुरंत बाद मैंने एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश को एक पत्र भी भेजा, जो यहां दे रहा हूँ

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Dear Amitabh Ji

Namskar,

I want to convey you an incident happened today on 10th June. We were out on tour and came back on 8rth night. I was wonderstruck to see that someone poured a truck of sand in front of my house. It was placed in such a way that I could not move out of my house. I enquired and knew that it belongs to Mr Rakesh Tiwari. I told my problem to Mr Tiwari and asked him to remove sand in such a way that I can take my car out. When I saw him reluctant to do anything I complained police, police intervened and Rakesh Tiwari agreed to do the needful. But today he again showed no interest, I contacted police and police said me to use JCB to remove the sand. I was told to call police if needed.

I called JCB and when work started, Mr Tiwari's wife stood before JCB calling my names. She also phoned somewhere and dozen of hooligan looking people came, abused us, threatened and tried to manhandle me and my wife. There was an young man very furiously misbehaving and using threatening language. When I asked him who he is, almost challenging me to do whatever I can, he scolded me telling him an STF Inspector. He was using filthy and humiliating language incessently. I asked his name and he told me in scolding voice, main Ranjeet Rai hoon, STF men, Jo chaho kar lo. Really I felt fearful being a senior journalist, an editor and a senior citizen. I do not know in what capacity he came on D-1/109, Viraj Khand, Gomatinagar on 10th June 2018 between 3.15 to 4PM. Was he deputed or assigned any job or he was free to settle scores for his relatives anyway.

I have regards for upstf in my mind but Mr Ranjeet Rai like persons broke that. Please do the needful so that I feel better about your organisation.

Thanking u.

Subhash Rai

Editor, Jansandesh Times

D-1/109, Viraj Khand, Gomatinagar

Lucknow, 226010

Mo 8840427896

(I retrived Mr Ranjeet Rai photo from Facebook for easy to recognise him, photo attached)

जोगेन्‍द्र सिंह ! तुम कायर नहीं, बाकायदा शहीद हो

: तीन बरस पहले शाहजहांपुर में पुलिसवालों ने पेट्रोल डाल कर जांबाज पत्रकार जागेंद्र को जिन्‍दा फूंक दिया था : एक बड़े पत्रकार-नेता ने की बड़ी दलाली, बोले थे कि यूनियन को बीच में डालोगे तो नुकसान हो जाएगा : मुंह बंद कराने के लिए अखिलेश यादव ने दिया था 20 लाख, तो अपराधियों ने 30 :

कुमार सौवीर

शाहजहांपुर : जागेंद्र सिंह एक ऐसा कलम-सेनानी था जिसने अपने दायित्‍वों के साथ पत्रकारिता की, और मौत के फंदे तक पहुंच कर अपना प्राण-त्‍याग दिया। यूपी की वास्‍तविक पत्रकारिता में जागेंद्र सिंह एक अमिट स्‍वर्णखचित नाम है। आम आदमी के लिए अपना जीवन न्‍यौछावर कर देने वाले जागेंद्र सिंह ने मौत के सामने भी अपने घुटने नहीं टेके। आज उसकी मौत को पूरे तीन बरस हो गये हैं। जागेंद्र ने संघर्ष किया, और न्‍याय के लिए जुझारू तथा जीवट का प्रदर्शन किया।

दोस्‍तों, जागेन्‍द्र सिंह ने आत्‍मदाह नहीं किया था, बल्कि उसे पेट्रोल डाल कर जलाया गया था। और यह जघन्‍य कुकृत्‍य किया शाहजहांपुर के पुलिस कोतवाल प्रकाश राय और उसके साथी पुलिसवालों ने। इन्‍हीं लोगों ने जोगेन्‍द्र सिंह को जिन्‍दा फूंक डाला था। इस काण्‍ड के वक्‍त पुलिस टीम के साथ गुफरान नाम का भी एक अपराधी मौजूद था, जिस पर एक महिला ने उप्र सरकार के मंत्री राममूर्ति वर्मा समेत तीन अन्‍य लोगों पर बलात्‍कार का आरोप लगाया था। राममूर्ति बुरी तरह फंसने लगा था, और जागेंद्र सिंह ने अपने मृत्‍यु-पूर्व बयान में इस हादसे के लिए राममूर्ति वर्मा पर आरोप लगाया था कि उसने ही कोतवाल समेत पुलिस-दल के साथ मिल कर साजिश की थी।

कहने ही जरूरत नहीं कि जागेन्‍द्र सिंह ही वह शख्‍स था जो इस मंत्री और गुफरान वगैरह बलात्‍कारियों के खिलाफ अदालत से लेकर पुलिस तक में कार्रवाई की भरसक कोशिशें कर रहा था। जानकारों का कहना है कि गुफरान ने प्रकाश राय और पुलिसवालों को जोगेंद्र सिंह को जिन्‍दा फूंकने के लिए पेट्रोल मुहैया कराया और प्रकाश सिंह व पुलिसवालों ने उसे फूंक डाला। शाहजहांपुर के अनेक संवाददाताओं ने बताया है कि दोपहर 3 बजे के करीब जब यह हादसा हुआ तो उसके बाद जिले के एडीएम एफआर प्रमोद श्रीवास्‍तव ने जोगेन्‍द्र सिंह का बयान लिया था। इस बयान में जोगेन्‍द्र सिंह ने साफ-साफ कह दिया कि उसे गुफरान और प्रकाश राय समेत अनेक पुलिसवालों को जिन्‍दा फूंका।

प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम के पास आज भी सुरक्षित है एक निर्भीक पत्रकार को जिन्‍दा फूंकने के लिए हत्‍यारे मंत्री-माफिया-पुलिस और पत्रकारों की चौकड़ी का जिन्‍दा सुबूत। यह सुबूत है कि कैसे जागेन्‍द्र सिंह को मंत्री और पुलिसवालों ने अंतहीन उत्‍पीड़न और मारक तनाव दिये, बल्कि यूपी सरकार में सच बोलने वालों को हश्र क्‍या होता है। मैं तब की अखिलेश यादव सरकार के मंत्री, सरकार की निर्मम-निष्‍ठुर-अमानवीय पुलिस, दलाल पत्रकार चौकड़ी की भर्त्‍सना और कड़ी निंदा करता हूं जो बिलकुल संगठित अपराध-गिरोहों की शैली अपनाये हुए।

आपको बता दें दस मई को एक हल्‍की झड़प के बाद अमित भदौरिया ने जागेन्‍द्र समेत कई लोगों पर मारपीट की तहरीर पुलिस को दी थी, जिसे बरेली मोड़ अजीजगंज पुलिस चौकी के प्रभारी ने 11 मई की सुबह बाकायदा रिसीव किया था, लेकिन इसकी एफआईआर 12 मई को दर्ज की गयी।

लेकिन इस एफआर्इआर में वह सारी सूचनाएं बुरी तरह तोड़-मरोड़ दी गयीं जो पहली तहरीर में दर्ज की गयी थीं। और जो नयी एफआईआर दर्ज करायी गयी, उसमें जागेन्‍द्र और उसके दोस्‍तों पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया गया। इतना तोड़ा कि आखिरकार जागेन्‍द्र सिंह को जिन्‍दा फूंक डाला गया।

दोस्‍तों, अब तो पुलिस के नाम पर उबकाई आने लगी है।

खामोश मौत: सल्‍फास खा कर सो गया पूरा परिवार

: बस्‍ती में हुआ रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना, पूरे शहर में सनसनी : पति ने पत्नी और बच्चों संग खाया जहर, सभी की मौत : पुलिस का दावा कि कर्ज की बेहाली में हुआ यह दर्दनाक हादसा :

बीएन मिश्र

बस्‍ती: बस्‍ती शहर कोतवाली के भुवर निरंजनपुर में सोमवार की देर रात कर्ज में डूबे एक व्यक्ति ने पत्नी व दो बच्चों के साथ सल्फास खा लिया। हालत बिगड़ने पर पड़ोसियों की सूचना पर पुलिस व एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। मृतक घी और बेसन का कारोबारी था। चारों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां शिवकुमार की पत्नी मीना जायसवाल (40) को मृत घोषित कर दिया गया। इलाज के दौरान शिवकुमार जायसवाल (45) और उसके बेटे आयुष उर्फ प्रांशु जायसवाल (17) ने भी दम तोड़ दिया। बड़ी बेटी मुस्कान जायसवाल (19) को गंभीर हालत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया था जहां शाम को उसने भी दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलते ही एसपी दिलीप कुमार, एएसपी पंकज, एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ला, सीओ सिटी आलोक कुमार सिंह, कोतवाल विजयेन्द्र सिंह के साथ फारेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। शिवकुमार के कमरे से सल्फास की तीन खाली शीशी बरामद हुई है। कोतवाल विजयेन्द्र सिंह ने अनुसार कि गोरखपुर रेफर होने से पहले मुस्कान ने बताया कि पिताजी ने बैंक से बीस लाख रुपए का कर्जा ले रखा था। इसे चुका पाने के कारण काफी परेशान थे। माना जा रहा है कि इसी कारण शिवकुमार ने खुद जहर खाने के साथ अपनी पत्नी और दोनों बच्चों को भी जहर खाने को दे दिया। शिवकुमार मूलरूप से गोंडा नवाबगंज का रहने वाला था। खुले बाजार से घी और बेसन खरीद कर उसे डिब्बे में पैकर कर बाजार में सप्लाई करता था।

शहर के भुवर निरंजनपुर में किराए पर रहने वाले शिवकुमार जायसवाल के घर हुई घटना से पड़ोसी भी अवाक हैं। पड़ोसियों की मानें तो परिवार में कभी झगड़ा या विवाद की बात सामने नहीं आई और न ही ऐसी बात सोमवार की रात हुई। बल्कि सोमवार की शाम शिवकुमार की पत्नी मीना अपने घर के बाहर बैठकर अन्य महिलाओं से बातचीत कर रही थी और परिवारीजन सामान्य नजर आ रहे थे। हालांकि कुछ पड़ोसी यह भी कहते नजर आए कि शिवकुमार का परिवार मोहल्ले में किसी से खास मतलब नहीं रखता था। लिहाजा घर में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं हो पाती थी।

शहर के भुवर निरंजनपुर के सबलू श्रीवास्तव के मकान में करीब आठ माह से शिवकुमार किराए पर रहता था। इससे पहले वह शहर के खोराखार व मड़वानगर में किराए पर था। मूलरूप से गोंडा नवाबगंज के रहने वाले शिवकुमार बेसन व घी की पैकिंग कर दुकानों पर सप्लाई का बिजनेस करता था। पड़ोसी प्रभाकर ने बताया कि सोमवार की रात करीब दो बजे शिवकुमार तेज-तेज से उनका दरवाजा खटखटाने लगा। दरवाजा खोला तो वह बेसुध दिखा। बोला हम लोगों को अस्पताल पहुंचा दो।

पड़ोसी प्रभाकर कमरे में पहुंचा और देखा तो अंदर सब तड़प रहे थे और पानी मांग रहे थे। कमरे में सल्फास की तीन शीशी पड़ी देख प्रभाकर ने सबसे पहले सूचना अन्य पड़ोसियों को देने के साथ 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। थोड़ी ही देर में कोतवाल विजयेन्द्र सिंह व चौकी प्रभारी गांधीनगर मीरा चौहान के साथ फोर्स मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस से सभी को जिला अस्पताल भेजा।

जिला अस्पताल पहुंचने पर करीब तीन बजे शिवकुमार जायसवाल की पत्नी की मीना को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि शिवकुमार, उसके बेटे आयुष और बेटी मुस्कान का इलाज शुरू हुआ। थोड़ी देर बाद उन दोनों की भी सांसें भी थम गईं। गंभीर हालत में बेटी मुस्कान को बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, जहां शाम तक जिन्दगी के लिए संघर्ष करने केे बाद आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना के बाद आला अफसरों के साथ फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। कमरे से सल्फास की शीशी व अन्य साक्ष्य एकत्र किया। शिवकुमार व उसके परिजनों को जिला अस्पताल भेजने के साथ ही पुलिस ने कमरे पर ताला लगा दिया। इधर एसपी दिलीप कुमार व अन्य आला अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे और चिकित्सकों से मुस्कान की हालत की जानकारी ली।

पुलिस की प्रारंभिक छानबीन के अनुसार शिवकुमार जायसवाल चने के बेसन व घी की पैकिंग कर बेचने का काम करता था। उसने बैंक से बीस लाख रुपए का कर्ज ले रखा था। कर्ज चुकाने में नाकाम शिवकुमार काफी परेशान रहता था। इस बात से घर के लोग भी दुखी थी। यही वजह बनी कि पूरे परिवार ने एक साथ जहर खाकर जान देने का फैसला कर लिया।

शहर के भुवर निरंजनपुर में किराए पर रहने वाले शिवकुमार जायसवाल के घर हुई घटना से पड़ोसी भी अवाक हैं। पड़ोसियों की मानें तो परिवार में कभी झगड़ा या विवाद की बात सामने नहीं आई और न ही ऐसी बात सोमवार की रात हुई। बल्कि सोमवार की शाम शिवकुमार की पत्नी मीना अपने घर के बाहर बैठकर अन्य महिलाओं से बातचीत कर रही थी और परिवारीजन सामान्य नजर आ रहे थे। हालांकि कुछ पड़ोसी यह भी कहते नजर आए कि शिवकुमार का परिवार मोहल्ले में किसी से खास मतलब नहीं रखता था। लिहाजा घर में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं हो पाती थी।

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