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कुम्‍भ-पर्व: कहीं पे निगाहें,कहीं पे निशाना

: लक्ष्य है चुनाव-चुनाव, माध्यम है कुंभ और खजाना है सरकार का : अफसरों ने अभूतपूर्व कमर कस ली, खबरों की बात भूल जाइये : प्रसून जोशी की कंपनी को दिया गया रेवड़ियां बांटने का काम, जितना मुंह होगा, विज्ञापन ठूंस दिये जाएंगे :

कुमार सौवीर

लखनऊ : शतरंज का खेल। जिसके नाम पर बाकायदा एक फिल्म तक बॉलीवुड बनाई जा चुकी है, लखनऊ में लोकेशन थी और गोमती नदी के किनारे से लेकर चौक के इलाके तक फिल्माए गए थे। कलाकार थे संजीव कुमार और अमजद खान। लेकिन यह तो सिर्फ कहानी थी, मगर उसके पीछे जो चालें बिखेरी और चली गई थीं उसने ही इस फिल्म को कामयाब करा दिया था।

ठीक ऐसी कहानी अब कुंभ पर्व को लेकर रची जा रही है। अलग-अलग निशाने हैं, अलग-अलग निगाहें हैं। अलग-अलग लक्ष्‍य है, अलग-अलग बाण हैं। अलग-अलग माध्यम हैं, अलग-अलग पात्र हैं। लेकिन इसमें आत्मा के तौर पर जिस चीज को चिन्हित किया गया है उसका नाम है सरकारी खजाना। यह सरकारी खजाना ही तो वह साधन है, जो भाजपा का डंका बजा सकता है, अगर निशाना सटीक पड़ा, तो।

जी हां, इलाहाबाद में होने वाले कुंभ पर्व वहां आयोजित होने वाले  विश्व विख्यात मेला और उसकी तैयारियों को लेकर जो सरकारी कवायद चल रही है, उसमें बेशुमार रकम फूंकने की कोशिश हो रही है। सूत्र बताते हैं कि इस मेला के प्रचार में इतनी रकम फूंक डाली जाएगी, कि पिछली अखिलेश सरकार के आंकड़े फेल हो जाएंगे।

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि यह पूरा आयोजन कहने को तो कुंभ पर्व और उसके मेला को लेकर खर्च किया जाएगा। लेकिन इसके माध्यम से सरकार सीधे सन 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी मजबूत हैसियत बनाने की जुगत में है। क्योंकि यह पूरा आयोजन ठीक उसी वक्त पर हो रहा होगा जब लोकसभा चुनाव में चल रहे होंगे। ऐसी हालत में सरकारी खजाने से खर्च होने वाली रकम का लाभ भाजपा को चुनाव में मजबूती दिला सके, इसके लिए कुंभ पर्व की रणनीति प्रशासनिक तौर पर बनाई जाने की जोर-शोर कवायद चल रही हैं।

दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया किया कि कुम्‍भ पर्व में पूरी प्रचार कैंपेन की बागडोर एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी को थमा दे दी गई है जिसका नाम है 'मैकऐन इरिक्सन'। फैसले के तहत यह कंपनी ही इस पूरे मेला और पर्व क्षेत्र में न्यूज़ चैनल, टीवी चैनल, अखबार, आउटडोर और बैनर होर्डिंग का काम करेगी। यही कम्‍पनी क्रिएटिव, फोटो सेशन, चलाएगी आउटडोर शूटिंग करायेगी, और इसके अलावा जो भी उसके मन में आएगा, करेगी। यूपी सरकार के अफसर इस कंपनी के सामने हाथ जोड़े खड़े रहेंगे।

तो आइये, जरा समझ लिया जाए कि यह 'मैकऐन इरिक्सन' नामक कंपनी का आधार क्या है। कोई भी खास आधार नहीं है जनाब, कुछ भी नहीं। सिवाय इसके कि कंपनी के अध्यक्ष प्रसून जोशी हैं जो सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। और हाल ही नरेंद्र मोदी के करीबी बन चुके हैं। उसके बाद से ही उनकी पहुंच देश व यूपी के सभी बड़े भाजपा नेताओं तक हो गयी। फिर क्‍या था, प्रसून की इस कम्‍पनी की तूती कुम्‍भ पर्व में भी बजने लगी। सूत्र बताते हैं कि सूचना विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय के बड़े-बड़े अफसर इस कम्‍पनी के इस दायित्व को पूरा करने के लिए हाथ जोड़े खड़े रहते हैं। सभी माध्यम मीडिया में विज्ञापन वाले लोग प्रसून जोशी के दरवाजे पर अरदास लगाते हैं।

बताते हैं कि अखबारों और चैनलों को उनकी मांग से ज्यादा पैसा उनके मुंह में ठूंसा जा चुका है। ऐसे में अब यह उम्मीद पालना बंद कर दीजिएगा कि आपको आम आदमी को जोड़ने वाली खबर मिलेगी। सच बात तो यही रहेगी कि अब जो भी परोसा जाएगा चैनल और अखबारों में, वह वही मिलेगा जो सरकार चाहती है और जिसे अफसर उनके मुंह पर फेंकेंगे।

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