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दो वकीलों को जज बनाने पर केंद्र का रोड़ा, लिस्‍ट वापस

: केएम जोसफ की प्रोन्‍नति के लफड़े के बाद अब यूपी न्‍याय-क्षेत्र पर हस्‍तक्षेप : कोलिजियम से भेजी गयी लिस्‍ट में से यूपी के दो नामों पर केंद्र सरकार ने नहीं दी मंजूरी : कानून मंत्रालय ने लखनऊ बेंच के मोहम्मद मसूर और इलाहाबाद पीठ के बशारत अली खान के नाम पुनर्विचार के लिये वापस भेजे :

मेरी बिटिया संवाददाता

नई दिल्‍ली : अभी उतराखंड के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसफ के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नित की फाइल वापस भेजने का मामला ठंडा भी नही हुआ था कि केंद्र सरकार ने एक नया बवाल कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज बनाने के लिये भेजे गये दो नाम मोहम्मद मंसूर और बशारत अली खान के नाम को कानून मंत्रालय ने फिर से वापस कर दिया है। दलील दी गई है कि इन दोनों के खिलाफ कुछ शिकायते हैं।

आपको बता दें कि यह दूसरी बार हुआ है जब इन दोनों के नामों को कानून मंत्रालय ने पुनर्विचार के लिये वापस किया है। इससे पूर्व में भी 2016 में इन दोनों के नाम सरकार ने पुनर्विचार के लिये वापस भेजे थे परंतु सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए इन दोनों नामों की सिफारिश कर दी थी कि दोनों के खिलाफ की गई शिकायतें फर्जी हैं। पर सुप्रीम कोर्ट ने लगभग डेढ़ साल तक फाइल को दबाये रखा और अब फिर से दोनों नामों को वापस भेज दिया। कानून के जानकार बताते हैं कि ये कानूनी रूप से गलत है। क्यूंकि अगर किसी नाम की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट दुबारा कर देती है तो उस नाम को जज बनाना सरकार के ऊपर बाध्यकारी हो जाता है। परंतु सरकार ने फिर भी दोनों नामों को वापस भेज दिया।

इन दोनों में से ज्यादा चर्चित नाम मोहम्मद मंसूर का है। मंसूर लखनऊ हाईकोर्ट में लगभग बीस सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं और सपा सरकार में मुख्य स्थायी अधिवक्ता भी रहे हैं। वे फौजदारी मामलों के जानकार बताये जाते हैं। इनके पिता स्वर्गीय जस्टिस सगीर अहमद सुप्रीम कोर्ट के जज रहे हैं। कहा जाता है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान जस्टिस सगीर को कश्मीर के मुद्दे पर बनी एक कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया था। उस कमिटी ने कश्मीर में शांती के लिये कश्मीर को आज़ादी देने की पैरवी की थी। जब ये रिपोर्ट बाहर आई थी तब इस पर काफी हल्ला भी हुआ था और भाजपा ने खुले तौर पर इस रिपोर्ट का विरोध भी किया था।

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