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दो-कौड़ी का लोकसेवा आयोग: पर्चा आउट, परीक्षा कैंसिल

: परीक्षा किसी विषय की, प्रश्‍नपत्र दूसरे विषय का खोल दिया आयोग ने : 18 जून से परीक्षा कराने की रट लगाते आयोग में परीक्षा कराने की तैयारी तक नहीं की थी : इलाहाबाद स्थित आयोग मुख्‍यालय के चंद कदमों दूर परीक्षाकेंद्र पर छात्रों ने किया हंगामा :

विनोद पांडेय

इलाहाबाद : इलाहाबाद के राजकीय इंटर कालेज में लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा में लोकसेवा आयोग की घोर लापरवाही सामने आई है। पहले तो परीक्षा प्रारंभ होने के समय तक सेंटर पर प्रश्नपत्र ही नहीं पहुंचा, फिर लगभग एक घंटे बाद पुलिस फोर्स के साथ आयोग द्वारा प्रश्नपत्र भेजा गया, हद तो तब हो गई जब पेपर की सील खोली गई उक्त लिफाफे में सामान्य हिंदी के बजाय निबंध का पेपर निकला इसपर अभ्यर्थियों ने विरोध करना शुरू किया। प्रशासन और आयोग के अधिकारियों द्वारा अभ्यर्थियों के ऊपर निबंध लिखने का दबाव डाला गया । चुंकि निबंध का पेपर दूसरी पाली में था इसलिए अभ्यर्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया। दबाव में आकर अब आयोग ने दोनों पाली की परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसकी विज्ञप्ति भी जारी की गई है।

यह उल्लेख करना आवश्यक है कि लोकसेवा आयोग इस परीक्षा को 18जून से कराने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमेबाजी कर चुका है। प्रतियोगी छात्रों द्वारा परीक्षा की तैयारी के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा गया था ,इसके लिए छात्रों ने आयोग से लेकर सरकार तक और हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया लेकिन हर जगह से उनको निराश होना पड़ा और आयोग ने अपनी योजना के मुताबिक 18 जून से परीक्षा का आयोजन कर दिया।

यहां गौर करने लायक तथ्य यह भी है कि दिनांक 18और 19 जून को प्रदेश के 56 जिलों में स्थित 860 केंद्रों पर पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा सिपाही भर्ती की परीक्षा का भी आयोजन पूर्व निर्धारित था जिसमें लगभग 20 लाख अभ्यर्थी भाग ले रहे हैं । परीक्षा केंद्रों में इलाहाबाद और लखनऊ भी शामिल हैं जहां लोकसेवा आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा का आयोजन किया जाता है। ऐसे में परीक्षार्थियों की भारी भीड़ के कारण यातायात की भी गंभीर समस्या होना लाजिमी था । इन सब तथ्यों से अवगत होने के बावजूद भी लोकसेवा आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा का आयोजन उसी तिथि पर कराना कई सवालों को जन्म देता है। सबसे पहले तो यह कि आयोग को आखिर इतनी जल्दी क्यों थी ?

फिर इसके बाद यदि आयोग पूरी तरह से तैयार था तो इतनी घोर लापरवाही कैसे हुई ? जिस परीक्षा केंद्र में यह गड़बड़ी सामने आई है आयोग से उसकी दूरी बमुश्किल 2-3 किमी शहर में ही है। फिर भी आयोग वहां समय से प्रश्नपत्र तक नहीं पहुंचा पाया और जब पहुंचाया भी तो दूसरी पाली का ।

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बदहाल है यूपी को अफसरों की आपूर्ति करने वाली फैक्‍ट्री

( लेखक विनोद पांडेय स्‍वयं प्रतियोगी हैं और पिछले कई बरसों से लोकसेवा आयोग की करतूतों का खुलासा और प्रतिभागियों की समस्‍या को लेकर जूझते रहे हैं। )

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