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होम्‍योकॉलेज प्राचार्य के लिए फर्जी प्रमाणपत्र जरूरी

: लखनऊ के राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्रधानाचार्य की नियुक्ति पर विवाद भड़का : बिना मुख्यमंत्री की संस्तुति के बना दिया दागी को प्रधानाचार्य : यह सीधी भर्ती का पद था, पदोन्नति के आधार पर भर दिया गया आयुष विभाग में :

कुमार सौवीर

लखनऊ : विश्वसनीयता और घोटालों का पर्याय बनते जा रहे है उत्तर प्रदेश के होम्योपैथिक विभाग में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद पर  पदोन्‍नति पर बवाल खड़ा हो गया है। आरोप है कि रेवडि़यों की तरह बांटे गये ऐसे पदों पर उसको कुर्सी थमा दी गयी, जिसका अनुभव प्रमाणपत्र ही फर्जी करार हो चुका है। मगर विभाग वालों ने एक गलत विज्ञापन निकाला और अपने खास लोगों को खपाने के लिए एक ऐसे शख्स को प्रधानाचार्य की कुर्सी थमा दी। इतना ही नहीं, ऐसे शख्‍स की सचिव स्‍तरीय जांच भी चल रही है, लेकिन इसके बावजूद इस नियुक्ति के लिए मुख्‍यमंत्री की अनिवार्य अनुमोदन की शर्त भी दरकिनार कर दी गयी।

इतना ही नहीं आयुष विभाग में घोंटी गयी भांग का असर यहां के कामकाज पर किस तरह हावी हो चुका है उसका नजीर है यह नियुक्ति। सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला विभाग में आला हाकिमों की ख्‍वाहिशों के मुताबिक ही किया गया है। हैरत की बात है कि जिसे नियुक्ति दी गई उसकी जांच चल रही है लेकिन विभाग ने उसे प्रधानाचार्य बना दिया और तो और इस नियुक्ति के लिए विभाग के लोगों ने मुख्यमंत्री से अनुमोदन तक नहीं कराया। सूत्र इसे अनियमित प्रक्रिया मानते हैं, उनका तर्क है कि यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसका दरकिनार कर दिया गया था।  हालत यह है कि इस नियुक्ति को लेकर आरोपों के घाव धड़कने लगे हैं कि इस मामले में जातिवाद का डमरू भी बज रहा है।

होम्‍योपैथिक विभाग से लेकर शिक्षकों तक में यह आरोप गूंज रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने मेरी बिटिया संवाददाता को इस नियुक्ति पर एतराज जताते हुए बताया कि जब क्षैतिज आरक्षण की स्थिति है तो दो पद में 1 पद आरक्षित नहीं हो सकता। शिक्षकगण ने शासनादेश की संख्या 18-199 सा-दो 99- दिनांक 26 फरवरी 1999 का जिक्र करते हुए इस पदोन्नति को अवैधानिक मान रहे हैं।

आपको बता दें कि मूल शैक्षिक अनुभव प्रमाण पत्र ही ऐसे कुर्सी के लिए अनिवार्य होता है और जिस व्यक्ति को यस मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बताया गया है उसका अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी है। इसका जिक्र होम्योपैथिक अधिकारी डॉ जयराम राय की रिपोर्ट में पहले ही स्पष्ट हो चुका है। इतना ही नहीं, इस मामले पर आश्वासन समिति के निर्देश पर एक जांच भी चल रही है जो विभाग के विशेष सचिव यतींद्र मोहन कर रहे हैं और इसमें जिस जिन जिन लोगों का नाम जांच के दायरे में है इस व्यक्ति का नंबर 22 बताया जाता है।

Comments (3)Add Comment
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written by Dr.R K Singh, June 14, 2018
होमियोपैथी की शिक्षा का बंटाधार करने के लिए ये फ़र्जी अनुभव प्रमाण पत्र वाले शिक्षक काफी हैं . इनमे से कई ऐसे हैं जिनकी स्वयं की शिक्षा ही संदेहास्पद है .ज्यादातर फ़र्जी अनुभव प्रमाण पत्र वाले हैं. यु पी से सी पी एम् टी से पास डॉ के लिए इस तंत्र में कोई जगह नहीं . और फ़र्जी लोग मलाई काट रहे हैं .जो लगातार फेल होते रहे वे होमियोपैथी की शिक्षा के कर्णधार हैं .आपने बिलकुल सही उद्दा उठाया .आपकी कलम को प्रणाम
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written by Dr Smita, June 11, 2018
Bogus hai
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written by Renu mahendra, June 11, 2018
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