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कप्‍तान की प्रेसकांफ्रेंस में वकीलों-पत्रकारों में झंझट

: प्रेस-कांफ्रेंस में जुट गये वकील, पत्रकारों ने ऐतराज किया तो हुआ हंगामा : दलाली को लेकर एक-दूसरे ने खूब की परस्‍पर आरोपों की बौछार, और गालियां बेहिसाब : इन्‍हीं दोनों गुटों ने ही पुराने कप्‍तान राकेश शंकर के इशारे पर बुनी थी साजिशें :

मेरी बिटिया संवाददाता

देवरिया : 50 हजार का इनामी जिला पंचायत अध्यक्ष के सम्बन्ध में एसपी रोहन पी कनय द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता के अंत मे पत्रकरो और वकीलों में जमकर जुबानी तीर तलवारें चली। पत्रकरो का रोष प्रेस वार्ता में आये दो वकीलों से था जो पत्रकारों का काम धाम छिनने में लगे थे। एसपी के प्रेस वार्ता में एक वकील ने सवाल पूछना शुरू किया ही कि एक पत्रकार ने इस पर खेद प्रकट किया की प्रेस वार्ता पत्रकारो के लिए हैं। जिस पर वकील प्रीतम मिश्रा आगबुला हो गया और प्रेस वार्ता स्थल पर हुआँ हुआँ शुरू होने लगा।जिसको देख एसपी ने खुद पत्रकारों को शांत रहने का इशारा किया।प्रेस वार्ता खतम होते ही वहां बंगाल का काला जादू नजर आने लगा।बहसबाजी तेज होने लगी इसी बीच दूसरे वकील विनय श्रीवास्तव ने पत्रकारों पर दलाली से सम्बंधित टिप्पणी कर दी। ऐसा सुनते ही पत्रकारिता को कर्म समझने वाले कुछ पत्रकारों ने वकीलों को गलियों से नवाजा।वकीलों की जमकर जुबानी जुताई की गई।

फिर क्या था एक वरिष्ठ पत्रकार वो दिन भी याद दिला दिया जब मतगणना के दौरान वरिष्ठ पत्रकार चंद्र प्रकाश पांडेय का लाठीचार्ज में पुलिस द्वारा मार कर सर फोड़ने तथा पॉकेट से पैसा निकालने की घटना के बाद पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त हो गया था जबकि पुलिस अधीक्षक द्वारा आयोजित रात्रि भोज में जाने को लेकर वाट्सऐप पर चलाए गए वाद विवाद मैसेज और डिनर में खाना ना खा पाने से अपमानित 24 ब्रांडेड एवम ओरिजनल पत्रकारों ने कुछ अज्ञात पत्रकारों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। दर्ज प्राथमिकी के बाद कोतवाली पुलिस जो पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पत्रकारों को विरोध करने से रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने में लगी थी। जिस हथकंडे में पुलिस द्वारा बेकसूर पत्रकारों के घर दबिश देकर दुर्व्यवहार करना भी शामिल था। परंतु पीड़ित पत्रकार पक्ष ने अपना रास्ता नहीं बदला कुछ दलाल प्रवृत्ति के पत्रकार पुलिस अधीक्षक के खास बनने की चाह में अपने ही वर्ग का विरोध करना शुरू कर दिया।

आपको बताते चलें कि विगत दिनों पुलिस अधीक्षक का स्थानांतरण होने के बाद नए पुलिस अधीक्षक ने जब कार्यभार संभाला तो पत्रकारों के विरोध करने वाला ग्रुप उन का खासमखास बनने की चाह रखते हुए पुनः पुरानी प्रवृत्ति को जीवित करना चाहा, परंतु नजारा ही दिनांक 27 मई को बदल गया जब पुलिस अधीक्षक ने जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव की गिरफ्तारी पर प्रेस वार्ता का आयोजन किया तो उस पत्रकार वार्ता के दौरान उपस्थित वकील को देख पत्रकारों ने जनपद के सबसे बड़े दलाल समझकर टीका टिप्पणी करना शुरु की। उसी बीच वकील के साथ आए हुए एक व्यक्ति ने 1 दिसंबर की घटना का याद दिलाते हुए सरेआम भोज में जाने वाले पत्रकारों को दर्ज प्राथमिकी में वादी बने 24 पत्रकारों को सरेआम दलाल कहना जब शुरू कर दिया। इस पर ईमानदार छवि के पत्रकारों के सम्मान को ठेस पहुंची जिस का विरोध ईमानदार छवि के पत्रकारों ने तो किया वही 24 पत्रकार जो प्राथमिकी दर्ज करा कर दलाल साबित हुए मुंह छुपाते हुए भाग खड़े हुए एक कहावत है कि "आसमान पर थूकने तो अपने ही ऊपर छींटे पड़ेंगे " आखिर पड़ ही गया।

(एक पत्रकार द्वारा भेजे गये पत्र के अनुसार )

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