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फर्जी होम्‍यो-टीचर को सरकार प्रिंसिपल बनाएगी ?

: फर्जीवाड़ा कर अहम ओहदों पर काबिज लोगों के कांधों पर होम्‍यापैथी की शवयात्रा की तैयारी : राजकीय होम्यो मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के पद पर नए चयन का षड्यंत्र : पात्र वह चुना गया जो बिहार के फर्जी मेडिकल कालेज से शैक्षणिक अनुभव का सार्टिफिकेट झटक लाया :

कुमार सौवीर

लखनऊ : लखनऊ के बेहद प्रतिष्ठित होम्‍योपैथिक मेडिकल कालेज में अब बर्बादी के थपेड़े आने शुरू हो गये हैं। एक तरफ तो सरकारी उपेक्षा, और दूसरी ओर ऐलोपैथिक खेमे की मजबूत लॉबिंग ने होम्‍यो-शिक्षा की चूलें हिला दी हैं। अब उस पर पलीता लगाना का काम कर रहे हैं सरकार के मंत्री और अफसर। हालत यह है कि जिस शख्स को बिहार के एक विवादित मेडिकल कॉलेज ने टीचर के तौर पर शैक्षिणिक-अनुभव प्रमाण पत्र जारी कर दिया था, उसे यूपी सरकार अपने सबसे अहम नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बनाने जा रही है। खबर है अगले दो- एक दिन में ही इस बारे में आदेश जारी कर दिए जाएंगे

यह मामला है राजधानी लखनऊ स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का यहां पिछले कई दिनों प्रिंसिपल का पद केवल इसलिए खाली रखा गया ताकि उसे मन चाहे पर मेहरबानी की जा सके अब खबर है कि इस मेडिकल कॉलेज के लिए प्रिंसिपल के मामले पर फैसला हो चुका है केवल औपचारिक आदेश जारी करने ही बचे हैं जो संभवत 21 दिनों में ही जारी कर दिए जाएंगे सरकार के इस फैसले को लेकर 35 शिक्षा से जुड़े लोगों में खासा आक्रोश बताया जाता है

पूरा मामला कुछ इस तरह है। छह जून-07 को यूपी के होम्योपैथिक शिक्षा अधिकारी डॉक्‍टर जयराम राय ने एक विस्‍तृत जांच की थी। डॉ राय ने अपनी जांच में पाया  था कि उत्तर प्रदेश होम्योपैथी में शिक्षक पद पर कार्यरत कुछेक लोगों के प्रमाण पत्र पूरी तरह फर्जी और फैब्रीकेटेड थे। जांच के मुताबिक ऐसे प्रमाणपत्र उन कॉलेजों द्वारा जारी किए गए जिन्हें न तो मेडिकल संचालित करने की अनुमति थी और न ही ऐसे लोगों को तत्संबंधी विभागों का कोई अनुभव। हैरत की बात यह थी कि जांच अधिकारी को दी गई सूची में उन लोगों का का नाम ही नहीं पाया गया जिन्हें मेडिकल कॉलेज में अपना बरसों पुराना शिक्षक मानते हुए प्रमाण पत्र जारी कर दिया था

जांच में पाया गया कि यूपी की होम्योपैथी शिक्षा में शिक्षक पद के अभ्‍यर्थियों में से अधिकांश आवेदनकर्ताओं ने दूसरे प्रदेशों से फर्जी शैक्षणिक अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में साक्षात्कार दिया था। और इतना ही नहीं, उन को नियुक्त भी कर लिया गया लेकिन जब जांच हुई तो पाया गया कि उनके प्रमाण पत्र बिल्कुल फर्जी थे। इस संबंध में डॉक्टर हेमलता का मामला सबसे गरम था जिसे बिहार के मंगला कमला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज सिवान ने जारी किया था कि वह कॉलेजों में 4 से 5 वर्ष तक शिक्षक के तौर पर कार्य कर चुके हैं। लेकिन उस कॉलेज के प्रधानाचार्य ने जो शिक्षकों की सूची जांच अधिकारी को दी उसमें इन दोनों का कोई जिक्र ही नहीं था। जांच अधिकारी के अनुसार इन सभी लोगों का अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी और फैब्रीकेटेड थे।

हैरत की बात यह है कितने बड़े घोटाले के बाद भी सरकार ने पर कोई भी कार्रवाई नहीं की। बल्कि अब इनमें से सभी लोगों को सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के पद पर पदोन्नति या चयन की प्रक्रिया संपन्न कर दी गई है। डॉ हेमलता का नाम इस मामले में अव्वल बताया जाता है। बताते हैं कि डॉक्‍टर हेमलता को राजकीय होम्‍योपैथी मेडिकल कालेज में प्रिंसिपल के पद पर चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है और इस मामले में सारे कानून-नियम को धता बता दिया गया है। सत्‍ता और शासन के गलियारों में खासा दखल रखने वालों की शह पर अब इन लोगों को प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर लब्धप्रतिष्ठ राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की यह कुर्सी थमाने की कोशिशें पूरी हो चुकी हैं।

इस मामले में होम्‍योपैथिक मेडिकल कालेज, निदेशालय का हर अधिकारी कोई भी टिप्‍पणी करने से बचता रहा है। डॉ हेमलता का फोन नम्‍बर कवरेज एरिया से बाहर था।

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