Meri Bitiya

Thursday, Jun 21st

Last update12:38:55 PM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

तेलू-चिंटू ने उस्‍तरा लेकर "आका" की नाक काट डाली

: पत्रकारों की भाषा और संवेदनाओं का खुलासा करती इस पोस्‍ट को निहारिये तनिक : अपनी ही कार्यकारिणी सदस्‍य को भिखमंगा साबित कर दिया हेमंत तिवारी के तेल-लगाऊ चंटू ने : अल्लाह आपको फिर पहले वाला बिंदास संजोग वाल्टर बना दे :

कुमार सौवीर

लखनऊ : जिन लोगों को क्षेत्रीय या ग्रामीण पत्रकारों की भाषा पर ऐतराज होता है, उनके लिए एक हकीकत आपके सामने है। इस हकीकत से साबित होता है कि राजधानी में सत्‍ता की दलाली के चक्‍कर में धमाचौकड़ी मचाने वाले पत्रकारों की असलियत क्‍या होती है। खुद को राज्‍य मुख्‍यालय पर मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकार का बिल्‍ला चिपकाये लोगों ने एक वरिष्‍ठ पत्रकार के प्रति जिस तरह की संवेदनहीनता का प्रदर्शन किया है, वह घटिया तो है ही, साथ ही भाषा की ऐसी की तैसी करते हुए उनके पत्रकारीय दावों की छुच्‍छी भी निकाल कर फेंके दे रहा है।

मामला है एक पत्रकार संजोग वॉल्‍टर का। संजोग उप्र राज्‍य मुख्‍यालय पत्रकार समिति के कार्यकारिणी सदस्‍य हैं। संजोग पिछले कई बरसों से मुख कैंसर से पीडि़त हैं। दो साल पहले उनका एक बड़ा ऑपरेशन दिल्‍ली में हुआ था, जिसमें उनके जबड़े का एक बड़ा हिस्‍सा काट कर फेंक दिया गया था। उसके बाद एक अन्‍य ऑपरेशन की सलाह डॉक्‍टरों ने की थी, मगर उसमें आने वाले खर्च का वहन कर पाने में असमर्थ संजोग ने सरकार से अर्जी लगायी थी और मुख्‍यमंत्री सहायता कोष से तकरीबन चार लाख रूपयों की रकम जारी करने का अनुरोध किया था। हाल ही संजोग को सरकार की ओर से इस इलाज के फीसदी हिस्‍से का भुगतान मिल गया था। लेकिन इसके बीच अचानक समिति के अध्‍यक्ष हेमंत तिवारी के एक चेले ने हेमंत को मक्‍खन-पॉलिश के लिए एक कमेंट कुछ वाट्सऐप समूहों में प्रचारित-प्रसारित कर दिया, जिसकी भाषा और अभिव्‍यक्ति की शैली निहायत गंवारू, अभद्र, घटिया और संवेदनहीन और अपमानजनक भी थी। इस पर बेहद शालीनता के साथ संजोग ने एक पोस्‍ट अपनी फेसबुक वाल पर की है, जिस पर अब ऐसे कमेंट करने वाले पत्रकार की थूथू हो रही है।

यह पोस्‍ट डाली है एक शाश्‍वत नामक पत्रकार ने, जो हेमंत तिवारी के खेमे का खासमखास माना जाता है। इस पत्रकार ने लिखा कि :- "हेमंत जी को बहुत बधाई। उनके सफल प्रयासों से संजोग वॉल्‍टर को 196000 रूपयों की एक बड़ी रकम इलाज के लिए मिली गयी है। ( सभी जानते हैं कि संजोग काफी समय से माउथ कैंसर से जूझ रहा है। वह लम्‍बे समय से पैसे के लिए इधर-उधर भटक रहा था। "

जाहिर है कि इस अपमानजनक भाषा-शैली से संजोग का काफी दुख हुआ, लेकिन इसके बावजूद संजोग वाल्‍टर  ने बेहद संयमित तरीके से अपना रोष व्‍यक्‍त किया। संजोग ने लिखा था कि:- "भाई अध्यक्ष जी को 24 मई को ही धन्यवाद् दे दिया । पर यह भाषा उचित नहीं है हम लोग अपने नौकरों से भी इस शब्दवाली का प्रयोग नहीं करते हैं."भटक रहा था"वक्त सबका एक सा नहीं रहता है। भाषा पर ध्यान दें। इस कार्य के मिठाई नहीं बाटी जा सकती है। बुरे वक्त में सरकार के सहयोग की सराहना की जा सकती है। लेकिन धन राशि मेरे इलाज के लिए नहीं थी। यह राशि बहुत बड़ी नहीं 50 फीसदी है। रातों के राजा के लिए यह शब्दवाली ठीक नहीं हैं। अच्छा बुरा वक्त सबके साथ होता है।"

पत्रकारिता से जुड़ी खबरों को देखने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

पत्रकार पत्रकारिता

Ajay Kumar Maurya : Din aur samay ek se ni rhte hain

Rajesh Singh : संजोग भाई आपने बिल्कुल सही कहा। रात के बाद सुबह होती है

Shafaeen Quraishi Shafaeen : Kuch log pade likhe jahil hote hai...

Obaid Nasir : अपना जर्फ़ दिखा रहे हैं

Tauqeer Siddiqui : sanjog bhai agar aapko koi madad mili hai to jayaz mili hai. baqi baton pr dhyan mat deejiye. dunia mein har tarah ke log hote hain.

Sheebu Nigam : सही कहा बिल्कुल गलत है

Shabahat Vijeta : संजोग भाई, दिल पर मत लें, जब अच्छा वक्त नहीं रहता तो बुरा भी नहीं रहेगा. इस बीमारी में आपने बहुत तकलीफ सही है. अल्लाह आपको फिर पहले वाला बिंदास संजोग वाल्टर बना दे.

Muhammad Parwaan Ansari : Agree with you Sanjog bhai.....

Tauqeer Siddiqui : sanjog bhai tum to hamesha raton ke raja raje ho, 25 saal se to main hi jaanta hoon. waise shabd achchhe hon to buri baat bhi buri nahin lagti, par shabdon ke chayan kala sabko nahin aati.

Naved Naqvi : बीमारी अौर गरीबी वक़्त देख कर नही आती

Rizwan Khan : कमीने पन की भाषा , घमण्ड इंसान के अंदर है अल्लाह न करे इसको कभी कुछ हो , बस वर्ना ये तो कहि का नही रहेगा। अखिलेश चन्द्रा शब्दों का चयन उनकी पत्रकारिता का स्तर दिखा रहा है मित्र.... अन्यथा न लें और कार्य पर ध्यान दे

Ikrar Husain : आप पत्रकार कह रहे हैं मुझे तो पत्रकार के रूप में दलाल प्रतीत होता है यह शख्स इसकी भाषा शैली का अध्यन करने के बाद।

Neena Alini : yeh to sansakar hai jo ma bap daetae hai jaisa sikha waisa hi to bolega

Neeraj Mishra : निम्न स्तरीय भाषा

कुकुरमुत्‍ते पत्रकारिता के

Journalist Ajay Srivastava Ajeya : दोस्तों..सभी को अपने से वरिष्ठों और बड़ों का सम्मान करना चाहिए। दर्द संजोग जी का केवल इतना है जो लाज़मी है। वो हर हाल में मिलना ही चाहिए

Ashish K Yadav : सही कहा बिल्कुल गलत है जर्फ़ दिखा रहे हैं।

Saira Banu : Ghatiya soach

Zishan Haider Rizvi : अत्यन्त निन्दनीय

Ahmad Jafar : Sahi kaha Sanjog Walter bhai. Kabhi ke din bade kabhi ki raatain

R.S. Sharma : ye bhasa ghatia mansikta ka prateek hai.

Afroz Agha : Kya saashwat bhi ab journalist ho Gaya ?

Nayi Pehchaan : Afsos ke jo log dusro ko Rasta batate hain unko bhatka hua kon kah sakta haie sanjog Bhaie ap ne Accha kea jo bhatke hue ko Rasta Bata diea

Kumar Sauvir : इसमें बुरा क्या है संजोग जी? बुरा मत मानिए। राजा-महाराजों के इशारे पर जीने-सोचने-बोलने वाले लोग हमेशा अशिष्ट ही होते हैं। कोसना हो तो रिंग-मास्टर को तलब कीजिये न। सरेआम।

Kumar Sauvir : वैसे इस सहायता का श्रेय किस को जाता है। अध्यक्ष अथवा आपके प्रयास को?

और जहां तक मेरी जानकारी है कि इस बारे में असल अर्जी तो आपने खुद ही सरकार को भेजी थी

Touqir Qidwai : कुछ लोग ज़मीन पर अमृत पीकर आये है ना वो बीमार होंगे और न ही,,,

Sanjay Azad : गुस्ताख़ी माफ करें इसके पहले अध्यक्ष कौन थे ??????????? संजोग भईया ये आप के अथक प्रयासों का ही नतीजा है।  एक बात कहना चाहूंगा वो ये कि जब देना ही था तो मेरे हिसाब से 100% देकर खत्म कर देते ।

Amir Ali जिसकी जैसी सोंच थी, उसने उतना जाना मुझे।।।

बुरा वक़्त देख कर नहीं आता मियाँ, वक्त ही मारता है ज़ालिम के मुँह पर ज़ननाटे दार थप्पड़

Comments (0)Add Comment

Write comment

busy