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60 % झुलसे बदन में तब्‍दील है गैंगरेप पीडि़त किशोरी

: किसी भी सामान्‍य किशोरी बच्‍ची की तरह इस बच्‍ची में भी थे अनगिनत सपने, लेकिन अब झुलसे मांस में तब्‍दील हो चुकी है यह जौनपुर की अल्‍हड़ बच्‍ची : हे भगवान। मेरी हालत के जिम्‍मेदारों के आश्रितों की हालत कभी भी मेरी दर्दनाक मौत जैसी न करना देना मेरे प्रभु :

कुमार सौवीर

जौनपुर : यह करीब एक बरस पहले की बात है, जब किसी भी सामान्‍य बच्‍ची की तरह इस किशोरी की कल्‍पनाओं में भी आकर्षक सुनहले-रूपहले सपने हुआ करते हुए होंगे। घरों में झाड़ू-पोंछा लगाने वाली अपनी मां की बड़ी दुलारी इस बच्‍ची को तब दिन में भी गजब सपने जरूर आते रहते होंगे। बैठे-बैठे भी उस अनाथ बच्‍ची को दूसरे सम्‍पन्‍न परिवार के बच्‍चों की किलकारियां, खेल-कूद, और मौज-मस्‍ती की हिलोरें उमड़ती रही होगी। सोचती रही होगी कि उसके पास भी अच्‍छे कपड़ों का ढेर होगा। लकदक स्‍कूली ड्रेस होगी, जूते चमचम करते रहते होंगे। स्‍कूली बस में आना-जाना होगा। किताब-कॉपियों का बैग, और बेहिसाब सहेलियां होंगी। हर दिन होली, रात दिवाली मनायी जाएगी। भरपेट और स्‍वादिष्‍ट भोजन का ढेर होगा। बड़ा मकान, हर सुख-सुविधा, और और और। सिर्फ आनंद ही आनंद होगा।

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जुल्‍फी प्रशासन

क्‍या क्‍या नहीं सोचती रही होगी वह किशोर वय की बच्‍ची। लेकिन इस बच्‍ची की कल्‍पनाओं में अब ऐसी खुशियां हमेशा-हमेशा के लिए दम तोड़ गयी हैं, जहां कल्‍पनाओं का कोई अस्तित्‍व तक नहीं हो सकता। वजह यह है कि इस बच्‍ची के पास अपनी छटपटाहती असह्य पीड़ा और अपने झुलसे-संड़ाध मारते मांस की बदबू के बीच सुखद कल्‍पनाओं की गुंजाइश ही नहीं रह बची होगी। अपने छोटे से शहर में अपने सपने संजोने वाली बात को दोबारा दुहरा पाने की ताकत ही उसके दिमाग में नहीं आ सकती। कोई अगर कोई उसे उसकी कल्‍पनाओं का जिक्र भी करना चाहे, तो वह उन्‍हें सुन पाने तक की क्षमता खो चुकी है। वह केवल दर्द से छटपटाती है, बस। और इसके अलावा कुछ भी नहीं।

दरअसल, यह बच्‍ची पिछले करीब 20 दिनों से हिन्‍दू काशी विश्‍वविद्यालय के मेडिकल कालेज के बर्न-वार्ड में भर्ती है। उसका पूरा बदन पूरी तरह जल चुका है, चमड़ी उधड़ चुकी है, पूरा बदन फूल गया है। वह अब न कुछ सोच सकती है, न कर सकती है, और न ही कुछ बोल पाने की ताकत ही बची है उसमें। दवाओं का असर जब तक रहता है, वह बेहोश पड़ी रहती है, लेकिन अधिकांश वक्‍त तक तो वह केवल अपनी दर्दनाक चीखों को ही निकालती रहती है, जिसे आसपास के मरीज और उनके तीमारदार भी दहलते रहते हैं।

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हर सू जौनपुर

काशी हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय के मेडिकल कालेज में भर्ती इस बच्‍ची की देखभाल में जुटे डॉक्‍टरों का कहना है कि वह बच्‍ची 60 फीसदी तक जल चुकी थी। हालांकि डाक्‍टर लोग उसकी देखभाल में कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं, लेकिन सच बात तो यही है कि आज भी उसकी हालत बिगड़ती ही जा रही है। उसके भविष्‍य के बारे में पूछने पर उसके डॉक्‍टर केवल अपने हाथ आसमान की ओर देख कर इशारा करते हैं कि अब जो कुछ भी होगा, ऊपर वाला ही करेगा।

हैरत की बात यह है कि जिला प्रशासन और पुलिस कप्‍तान की करतूतों का खामियाजा अपनी दर्दनाक मौत की दहलीज तक पहुंच चुकी इस बच्‍ची को अब इस बात तक की समझ नहीं बची है कि वह अपने साथ हो चुके गैंगरेप और पुलिस-प्रशासन के व्‍यवहार पर लानत तक भेज सके। हां, यह जरूर हो सकता है कि अपनी तेज मगर अस्‍पष्‍ट चीखों को अगर कोई समझ सके, तो वह इतना जरूर कहना चाहती होगा कि:- हे भगवान। मुझे ऐसी सरकार, ऐसे जिलाधिकारी, पुलिस कप्‍तान और दलालों को इतना जरूर समझा देना कि किसी बच्‍ची के साथ के साथ ऐसा अन्‍याय नहीं किया जाना चाहिए, जहां तड़पते-बिलखते जीवन की हालत मौत से भी बदतर हो जाए। ( क्रमश: )

प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम ने इस सूचना के आधार पर अपनी पड़ताल शुरू की, तो कई डरावने सच सामने आ गये। यह मामला अब श्रंखलाबद्ध प्रकाशित किया जाएगा। इस शर्मनाक हादसे से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए आप से अनुरोध है कि आप से लगातार जुड़े ही रहें। और इस खबर की अन्‍य कडि़यों-खबरों को पढ़ने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

बदलापुर-हादसा

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