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पहले गैंगरेप, फिर एबॉर्शन। अब बच्‍ची को जिन्‍दा फूंका

: अब बीएचयू में अंतिम सांसें ले रही है यह अनाथ बच्‍ची : एक बरस से न्‍याय के लिए भटक रही इस बच्‍ची को अब इलाज के भी लाले : जौनपुर का मामला दबाने को प्रशासन-पुलिस, दलाल और पत्रकारों ने भी खूब रकम ऐंठी : बच्‍ची मौत की कगार पर पहुंची, तब दुराचारी पकड़े गये :

कुमार सौवीर

जौनपुर : बधाई हो योगी जी, आपकी ओपी-पुलिस अपने मिशन में बिलकुल खरी उतरी है।  जो बच्‍ची आपकी सरकार, आपके प्रशासन, आपकी पुलिस और पुलिस के चहेतों की प्रतिष्‍ठा पर बाकायदा एक बेहद पीड़ाजनक फांस बनी हुई थी, अब उसे हमेशा-हमेशा के लिए राह से हटाने का रास्‍ता साफ कर दिया गया है। पुलिस की शह पर दबंगों ने जिन्‍दा फूंक डाला है। बीएचयू के मेडिकल कालेज में बर्न-वार्ड में तड़प रही यह बच्‍ची की जुबान अब बोलने लायक तक नहीं बची है। घर-घर चूल्‍हा-चौका करने वाली उस बच्‍ची की मां की समझ में नहीं आ रहा है कि वह अपने बाकी तीन मासूमों का पेट पाले, या फिर अस्‍पताल में भर्ती अपनी इस बच्‍ची की सेवा करे। उसके पास पैसा भी तो नहीं है। जबकि अभियुक्‍तों को बचाने के लिए पुलिस-प्रशासन से लेकर पत्रकार और दलालों तक की पौ-बारह हो गयी।

यह हादसा है जौनपुर का। बड़े घरों में झाड़ू-पोंछा का काम कर अपने परिवार की दाल-रोटी का जुगाड़ करने वाले वाली उर्मिला की करीब पौने 15 बरस की बच्‍ची को एक दोपहर तीन बिगड़े नवाबों ने दबोचा था।उन तीनों ने उस बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार किया। बाद में उसे एक सौ रूपया थमा कर धमकी दी, कि घरवालों को मत बताना। यह घटना है अप्रैल के मध्‍य की किसी तारीख की। और घटना स्‍थल है जौनपुर के बदलापुर तहसील कस्‍बा नुमा बाजार का।

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जुल्‍फी प्रशासन

नतीजा यह हुआ कि यह बच्ची गर्भवती हो गई। डेढ़ महीने बाद मां को पता चला तो वह सीधे थाने पर पहुंची। कुछ दिनों तक पुलिस ने मामला गोल-गोल नचाया। अभियुक्‍तों पर दबाव बनाने के लिए उसके घरवालों को खबर दी। पूरी कोशिश हुई कि ले-दे कर निपटा दिया जाए। बिचौलिया के तौर पर पुलिस ने अपनी सेंधमारी की पूरी गुंजाइश पैदा की। लेकिन मामले पर जब राजनीतिक रंग चढ़ना शुरू हुआ तो पुलिस ने मामला दर्ज किया, मगर गिरफ्तारी नहीं की। लेकिन पाक्‍सो का मामला होने के बावजूद अभियुक्‍तों को सुरक्षित भाग निकालने के लिए पुलिस ने रेड-कार्पेट बिछा दिया।

यह दबाव बनाये रखा कि किसी भी तरह दबाया जाए और बच्ची अपना बयान बदल दे। इसके लिए कुछ लोग सक्रिय हो गए। इनमें से कुछ लोग तो स्‍थानीय वकील थी, कोई वैद्य थे, कोई दलाल थे, तो कोई बहती गंगा में हाथ धोने को लालायित थे। सूत्रों के अनुसार इन दलालों ने इस बच्ची का गर्भ गिराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने का पूरा नाटक किया। यह भी भय दिखाया गया कि अगर यह गर्भ नहीं गिराया गया तो इन अभियुक्तों को बचाने से कोई नहीं तरीका होगा। पुलिस तो उन दुराचारियों की अभिभावकों की भूमिका में थी, इसलिए उन्‍हें खुला छुट्टा ही रखा गया। इतना ही नहीं, पिछली दीपावली की रात में इन दुराचारियों ने उस पीडि़ता के घर के सामने बम-पटाखे और छुड़छुडियां-फुलझडि़यों भी फूंकी थीं।

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हर सू जौनपुर

इसी बीच मौका मिलते ही दुराचारियों ने उस बच्‍ची का गर्भ भी गिरा दिया। बताते हैं कि एक दिन बच्‍ची जब बीमार थी, तो धोखे से ऐसी दवा दे दी गयी कि उसका एबॉर्शन हो गया। गौर तलब है कि मामले की रिपार्ट दर्ज होने के दौरान पुलिस ने उस बच्‍ची को जब जिला अस्‍पताल ले जाकर उसका मेडिकल कराया था, उसमें डॉक्‍टरों ने उस किशोरी के पेट में दो महीने के गर्भ होने की तस्‍दीक की थी। इस पर वह बच्‍ची और उसकी मां ने फिर दौड़-भाग की, लेकिन पुलिस और स्‍थानीय लोगों ने उसकी आवाज को दबोचने के लिए हरचंद कोशिशें-साजिशें कीं।

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राग-जौनपुरी

और अब इस बच्‍ची को ही मौत के हवाले करने की साजिशें कर दी गयीं। हमारे संवाददाता को काफी विलम्‍ब से मिली खबर के अनुसार बीती 26 अप्रैल-18 को यह बच्‍ची अपने घर बुरी तरह जली मिली थी। जिला अस्‍पताल से भी उसे बीएचयू रेफर कर दिया गया था, क्‍योंकि बच्‍ची की हालत खासी नाजुक थी। उस बच्‍ची की देखभाल करने वाला अब कोई नहीं है, घर का काम करने वाली उसकी मां अगर यह काम छोड़ कर अस्‍पताल चली जाए, तो उसके बाकी मासूम बच्‍चों का क्‍या होगा। उधर वह बच्‍ची केवल डॉक्‍टरों की कृपा के बीच केवल चीख-चीत्‍कार कर पर मजबूर है। डॉक्‍टर बताते हैं कि इस बच्‍ची इस तरह जली है कि उसके शब्‍द साफ नहीं निकल पा रहे हैं। (क्रमश:)

प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम ने इस सूचना के आधार पर अपनी पड़ताल शुरू की, तो कई डरावने सच सामने आ गये। यह मामला अब श्रंखलाबद्ध प्रकाशित किया जाएगा। इस शर्मनाक हादसे से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए आप से अनुरोध है कि आप  से लगातार जुड़े ही रहें। और इस खबर की अन्‍य कडि़यों-खबरों को पढ़ने के लिए निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

बदलापुर-हादसा

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