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साईं-भक्‍तों पर दंडी-स्‍वामियों ने छेड़ा धर्मयुद्ध

: हम शास्‍त्र-सम्‍मत देवता को ही मान्‍यता देंगे, कोई व्‍यक्ति अथवा मू्र्तिपूजा नहीं : साईं वैदिक धर्म के विरुद्ध भयानक षड्यंत्र, इससे वैदिक पौराणिक मन्त्रों-शास्त्रों को विकृत कर धर्म क्षति : धर्मक्षेत्र में होती हलचल देखने का हमें पूरा अधिकार : उपदेश का अधिकार हमारा ही है। हम धर्म भी जानते हैं, कानून भी :

कुमार सौवीर

लखनऊ : भले ही सांईं पूजक समुदाय अपना आकार किसी बड़े सम्‍प्रदाय के स्‍तर तक पहुंचा चुका हो, लेकिन सनातन विद्वान उन्‍हें शास्‍त्र-सम्‍मत नहीं मानते। उनका साफ मानना है कि धर्म वही है जो शास्त्र में विहित है। केवल शास्त्र वर्णित देवता ही पूज्य हैं। और इसमें शास्त्र ही प्रमाण हैं। धर्म में आस्था सम्बन्धी कल्पना की स्वतंत्रता नहीं। और यदि कोई इन शास्‍त्रों से इतर कोई कार्य-कर्म करता है, तो वह शास्‍त्र विरोधी ही माना जाएगा। ऐसे में उसका बहिष्‍कार किया जाना ही उचित और शास्त्र-सम्‍मत है।

हालांकि दंडी-समुदाय अपने शास्‍त्रीय मान्‍यताओं के अनुसार उससे अलग किसी पूज्‍य को शास्‍त्र-सम्‍मत नहीं मानते रहे हैं। लेकिन एक प्रख्‍यात न्‍याय-विधि वेत्‍ता स्‍वामी सदाशिव ब्रहम्नेंद्र सरस्‍वती ने अपने फेसबुक पर एक ताजा अपडेट कर इस बात को नये तरीके से प्रस्‍तुत कर दिया है। उन्‍होंने साफ लिखा है कि :- कृपया ध्यान दें! साईंपूजक हमारी मित्रसूची से हट जायें। जो कोई साईं का नाम लेता या प्रचार करता दिखेगा उसे हम तत्काल अनफ्रेन्ड और ब्लाक करेंगे।

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा सर्वोच्‍च न्‍यायालय में प्रमुख अधिवक्‍ता होने के साथ ही विधिवेत्‍ता के तौर पर एक खासी शोहरत जुटा चुके डॉ वीएन त्रिपाठी ने अपने अधिवक्‍ता जीवन की शुरूआत इलाहाबाद हाईकोर्ट से ही की थी। करीब तीन बरस पहले ही डॉ वीएन त्रिपाठी ने संन्‍यास ग्रहण कर लिया और वे दंडी-स्‍वामी हो गये हैं। अपने विचारों को लेकर बेहद स्‍पष्‍ट और बेधड़क स्‍वामी सरस्‍वती ने अभी अपना ताजा अपडेट दर्ज किया है कि :- यदि तुमको कपटी मित्र और स्पष्ट शत्रु में से एक को चुनना हो तो हम कहेंगे, शत्रुका चयन करो। धर्मको किस पार्टी से अधिक खतरा है, इस विन्दु पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।

स्‍वामी सदाशिव ब्रहम्नेंद्र सरस्‍वती ने सांई प्रकरण पर अपनी बात स्‍पष्‍ट की है, और उस पर आयी शंकाओं का उत्‍तर भी दिया है। उन्‍होंने साफ लिखा है कि सामान्य दृष्टांत ले सकते हैं वर्तमान न्यायिक प्रक्रिया का। पक्षकार सारवान् विधि (substantive law) के अन्तर्गत अधिकार कर्तव्यों को न्यायालय के समक्ष स्थापित करते हैं। उन अधिकार कर्तव्यों को स्थापित करने के लिए कौन सा साक्ष्य ग्राह्य है कौन नहीं, यह साक्ष्य अधिनियम से निर्धारित होता है। मनमाना साक्ष्य तो नहीं दे सकते न! इसीलिए अनेक बार सामान्यजन की धारणाओं और न्यायिक निर्णय में अन्तर भी देखा जाता है।

पुनश्च , क्या आप किसी भी विवाद या प्रशासनिक समस्या का निर्णय अपने मन से कहीं भी करा सकते हैं?

इसी प्रकार धर्म वही है जो शास्त्र में विहित है। केवल शास्त्र वर्णित देवता ही पूज्य हैं। और इसमें शास्त्र ही प्रमाण हैं। धर्म में आस्था सम्बन्धी कल्पना की स्वतंत्रता नहीं।

धर्म सम्बन्धी प्रश्न पर तीन प्रकार के प्रमाण मान्य होते है- प्रत्यक्ष, अनुमान, आगम (शास्त्र)। इनमें भी आगम ही सर्वोपरि है। अनुमान पूर्ववर्तीप्रत्यक्ष पर ही आधारित होता है । प्रत्यक्ष और अनुमान दोषयुक्त हो सकते हैं, आगम में दोष की कल्पना नहीं।

अतः जो बात शास्त्र विरुद्ध हो, वह धर्म विरुद्ध है। हम उस समाज को धार्मिक नहीं कह सकते जो वेद शास्त्र को न मानता हो अथवा इनकी निन्दा करता हो।

आप संविधान और कानून को अस्वीकार करते हुए न्यायालय से अधिकार पा सकते हैं क्या?

Akshat Sinha : Guru ji pranam.. Aap mere guru bhi rahe.. Phir mere senior bhi.. Parantu is post se main bahut aahat hun.. Maine hamesha aapme ek guru hi dekha hai.. Isliye shayad dukh hua.. Main SAI BHAKT hun.. Unpe vishwas hai.. Isliye sabse pehle mujhe hi block karen! Pranam evam charan sparsh

Swami Sadashiva Brahmendranand Saraswati ठीक बात वत्स! उस समय हम केवल शैक्षिक गुरु थे, अब धर्मगुरु भी हैं। किन्तु हम साईंभक्त का प्रणाम स्वीकार नहीं करेंगे। हमें विश्वास है शीघ्र तुम्हारी चित्तशुद्धि होगी और साईं ही नहीं, अपितु सभी अशास्त्रीय काल्पनिक विचारों का त्याग करोगे जो सनातन धर्म को विकृत करते हुए नष्ट करने में लगे हैं।

Ramesh Chandra Deora : !!.NAMO NAMAH.!!

अति सुंदर. एसे दृष्टांत की आवश्यक्ता थी, सही भगवन् से मिल गया. कोटी कोटी नमन भगवन्.

Diwakar Tiwari : कृपया कर हमें अनफ्रेंड कर दे क्योंकि हमें साई से ज्यादा आप में पाखंड नजर आ रहा है चर्चा में बने रहने की अच्छी पहल है महोदय कृपया कर कोई क्या कर रहा क्या नहीं इसपे ध्यान न देते हुए आप अपने को स्वामी कहते तो भगवन में लीनं रहने का काम करे किसी को उपदेश न दे कौन किसकी पूजा किसकी नहीं धर्म के ठेकेदार नहीं है आप आप से ऐसी आशा नहीं थी

Swami Sadashiva Brahmendranand Saraswati : हमें यह आशा थी कि आप ब्राह्मण ही होंगे और वेद शास्त्र का सम्मान करते होंगे। किन्तु आपका कमेन्ट सिद्ध करता है कि आप छद्मवेशी हैं, जन्म कर्म विचार प्रत्येक दृष्टि से अब्राह्मण और धर्मद्रोही हैं ।

Swami Sadashiva Brahmendranand Saraswati : हम घोषित रूपसे धर्म के ठेकेदार हैं। इसमें कोई दो राय नहीं। धर्मक्षेत्र में कौन क्या कर रहा है, यह देखने का हमें पूरा अधिकार है। उपदेश देने का भी अधिकार हमारा ही है, आपका नहीं। हम धर्म भी जानते हैं, कानून भी। आप दोनों में से एक भी नहीं जानते। धर्म को नष्ट करने वाली अपनी एजेन्सी बन्द कीजिए। सन्त समाज में अब हमारे जैसे न्यायवेत्ता भी हैं।

दण्डी स्वामी : साईं वैदिक धर्म के विरुद्ध भयानक षड्यंत्र है। इसके माध्यम से वैदिक पौराणिक मन्त्रों और शास्त्रों को विकृत कर धर्म को जितनी क्षति पहुंचाई जा रही है, उतनी कभी किसी अन्य प्रकार से नहीं हुयी।

Basant Mahoday : नमो नारायण मेरी मित्र सुची में भी चाँद भगत हैं मेरी पोस्ट और शेयर पढ़ कर चुपचाप साई को विसजर्न कर आये

Rakesh Dubey : सनातन हिन्दु धर्म में जब कुरीतियाँ जकड़ने लगी तब इन जैसी संस्थाओं का जन्म हुवा जो स्वयं को स्वयंभू समझने लगे ।वास्तव में इनका सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं बल्कि ये तो स्वयम् आज धनार्जन के साधन बन गए है इसलिए इनसे जुड़े हुवे लोग मत भिन्नता रखने वालों का विरोध करने लगते है ।

Avnish Shukla : जय श्री राम।स्वामी जी धन्य हुए हम जब आपने इस साईं के पाखंड को उजागर करती ये पोस्ट डाली।नमन प्रभु।

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