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लखनऊ का बड़ा दारोगा सोता नहीं, मनन करता है

: समारोह में सोते हुए देखे गए बड़े दरोगा, पोल खुली तो महकमा को हलकान कर दिया : बनियों-व्यवसाइयों ने बड़े दरोगा को मक्खन लगाने को कराया था सम्मेलन : सम्मान से पहले ही कई दरोगा समेत कुछ लोग खर्राटे भरने लगे :

कुमार सौवीर
लखनऊ :
बड़े दारोगा को शौक है खुद को चुस्त-चौकस होने का ढिंढोरा सुनने का। अक्सर ऐसे लोगों का जुमला होता है कि वे 24 घंटों में 36 घंटों तक का काम करते हैं। लेकिन जब कोई आपके किसी ऐसे दमन पर छींट खोज लाये तो क्या होगा?
जी हां, वही होगा, जो जुहेर का हुआ। मामला था बड़े दरोगा का। सल्तनत उसी की थी, एमजीआर उस जुहेर ने नुक्ता खोज लिया। बात बिगड़ गई। मचा हल्ला और हंगामा। तलब किया गया जुहेर। कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, छीछालेदर की धमकियां दी गईं। माफी मंगवाई गयी। उसके बाद ही बड़ा दारोगा खुश हो पाया।
तो पहले किस्सा संक्षेप में समझ लीजिए। एक पत्रकार हैं, जो जोशीले हैं, संघर्षशील है, खबर की तमीज है, खबर सूघने का शऊर है, लिखने का तरीका है, खबर सुनने का सलीका है और मेहनत बेहिसाब। किसी से डरते और झुकते नहीं, खबर चाहे किसी की हो लिखेंगे जरूर।
उनकी यही बदतमीजी उन पर पिछले दिनों काफी भारी पड़ गई है। उनकी इसी बदतमीजी के चक्कर में उन्हें न्यूज़ संस्थान से भी हटा दिया गया। कहा तो यहां तक गया था कि बड़ा दरोगा ही उसके पीछे पड़ा था। नतीजा यह हुआ कि उस चैनल के ब्यूरो चीफ के पास फोन आया। फोन आया तो उसने खुद ही वह ब्यूरो चीफ पकैया-पकैया चलकर बड़े दरोगा के घर पहुंचा और फर्शी  कोर्निश करके बोला:-हुजूर, क्या गड़बड़ हो गई ? हुकुम करो?
बड़े दारोगा ने ब्यूरो चीफ से हुकुम दिया कि: उस रिपोर्टर को फौरन से पेश्तर अपने दफ्तर से लात मार कर ऐसे बाहर निकाल करो, जो जिल्लेजिलाही तक आवाज बा बुलंद पहुंचे। नतीजा इस रिपोर्टर के पिछवाड़े पर जो गजब लात पड़ी कि बड़ा दरोगा अलमस्त हो गया।
जी हां, वह गरीब , मेहनती, जुझारू रिपोर्टर उसी वक्त निकाल दिया गया चैनल से।
तो कल अमीनाबाद में अमीनाबाद के व्यापारियों ने एक सम्मेलन आयोजित किया था यह सम्मान सम्मेलन था सम्मान होना था लखनऊ के बड़े दरोगा यानी SSP दीपक कुमार का अलग या कोई भी नहीं समझ पा रहा है यह सम्मान किस बात पर हुआ ऐसा कौन सा काम पुलिस ने कर दिया अमीनाबाद में जिसके लिए व्यापारियों ने दीपक को सम्मान कर दिया जाहिर है कि मामला तेल मालिश कर खुशामद का।
एक सूत्र बताते हैं कि अमीनाबाद के इस्पेक्टर साहब ने दीपक कुमार को खुश करने के लिए अमीनाबाद के धंधेबाजों को बुलाया था और कहा कि बड़े दरोगा को सम्मानित कर दो तो वह खुश हो जाएंगे। और जब खुश हो जाएंगे, तो चूँकि यह मेरा हल्का है इसलिए वह मुझसे भी खुश हो जाएंगे। और जब मैं खुश हो जाऊंगा तो मैं तुम व्यापारियों को खुश कर दूंगा। एक धांसू खबर बन जाएगी दुनिया-जहान में तारीफ की। तुम मेरी पीठ खुजला देना, और मैं तुम्हारी पीठ खुजला दूंगा।
व्यापारियों की समझ में आ गया और बड़े दरोगा को सम्मानित करने के लिए यह समारोह आयोजित कर लिया
समारोह में बड़े दरोगा आए। माला-शाला पहना, गुलदस्ता पकड़ा, इधर-उधर बोतल से पानी निकाल पर पानी पिया, कुतरा कुछ बिस्कुट-काजू, मोबाइल पर सर्फिंग की। इसी बीच सरकार-बहादुर को नींद आ गयी, और लगे खर्राटे लेना। एक पत्रकार ने उनके सोते वक्त की फोटो खींच ली। फोटो मिली तो पत्रकार ने उस पर खबर लिख दी। तो बस तहलका मच गया।

मैं आंख बंद कर मनन करता हूँ, बोले लखनऊ के बड़े दारोगा

Comments (1)Add Comment
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written by omkar shukla , May 07, 2018
न कोई बड़ा न छोटा ये सारे अफसर चाहते हे कि उनकी हाँ ह्जुरी में लगे रहो तो सब ठीक हे पत्रकारों ने ही तेज तर्रार कह कर उनका दिमाग सातवें आसमान पर कर रखा हे जब तक ये चाटुकार पत्रकार रहेंगे तब तक मेहनती और सच्चाई पर चलने वाले बेइज्जत होते रहेंगे ....

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