Meri Bitiya

Friday, May 25th

Last update01:45:24 AM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

दूसरे की बीवी हड़पने के चक्‍कर में है "जोशीला" विधायक

: अमनम‍णि त्रिपाठी पर चल रहा है अपनी ही बीवी की हत्‍या का संगीन आरोप, उसके बावजूद उन्‍हें अब दूसरे की बीवी भी चाहिए : मधुमिता शुक्‍ला और सारा हत्‍याकाण्‍ड से कलंकित है यह त्रिपाठी-खानदान : बांगरमऊ में अपनी करतूतों को झंडा बुलंद कर रखा था कुलदीप सेंगर ने : जोगीजी आह-आह दो :

कुमार सौवीर

लखनऊ : यूपी के पूर्वांचल में ऐसे ही अपराधी छवि वाले एक माननीय विधायक जी, जो नेपाल से सटे विधानसभा से चुनाव जीत गये। इस विधायक ने एक दूसरे युवक की पत्नी को अपनी पत्नी करार दे दिया है। वह भी एकतरफा इश्‍क में। नारा यह है कि दूसरे का माल अब मेरा ही होगा, किसी ने छुआ या नजरें तरेंरीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा। विधायक जी ने उस युवक को इतना तक धमका दिया कि अगर उसने अपनी इस नई नवेली प्रेमिका से बातचीत करने की कोशिश तक की तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। बातचीत पर जब युवक ने अपना प्रतिरोध दर्ज करना चाहा तो इस माननीय जी ने गालियों की बौछार फेंकीं, और धमकियों का कींचड़ डालने की चेतावनी तक दे डाली। बोले कि:- मादर----, मैं तुम्‍हारा जीना मुहाल कर दूंगा। इस विधायक की एक फोन-कॉल की ऑडियो-क्लिप आजकल वायरल हो चुकी है, जिसमें इस "जोशीले" विधायक ने इस युवक से को धमकी दी है कि वह उसकी पत्नी से भूलकर भी न तो फोन करें और ना ही बातचीत करें। विधायक ने यह धमकी दी है कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। इस विधायक का कहना था वे उस महिला के पति बन चुके है और अब उससे कोई रिश्ता कत्‍तई न रखे।

यह किस्सा अमरमणि त्रिपाठी है उसकी पत्नी का नहीं है बल्कि या गुल खिलाया है इस दंपत्ति के चिराग अमनमणि त्रिपाठी ने आपको याद होगा सिर्फ डेढ़ साल पहले सारा नाम की युवती की हत्या हुई थी अमनमणि त्रिपाठी उसी सारा का पति था और दिल्ली से कार में लौटते समय एक दुर्घटना में सारा की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले की जांच की तो पाया कि सारा की मौत दुर्घटना में नहीं बल्कि बाकायदा हत्या थी और यह हत्या अमन त्रिपाठी ने की थी। यह खुलासा होने के बाद पुलिस ने अमन मणि त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था लेकिन नौतनवा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय एमएलए जीतने के बावजूद अमनमणि त्रिपाठी किसी छुट्टा सांड की तरह अपने अपराध में लिप्त हैं। बेखौफ।

अब जरा इस विधायक का चेहरा भी देख लीजिए। यह विधायक उस खानदान का है जहां अपनी प्रेमिकाओं का देह-शोषण के बाद उनकी हत्या की जाती है। वह भी किसी पारिवारिक परंपरा की तहत। इतना ही नहीं, इस परिवार की ख्याति पूर्वांचल के त्रिपाठी खानदान से है जिसका मुखिया है अमरमणि त्रिपाठी। अमरमणि त्रिपाठी कई पार्टियों से विधायक रह चुका है और राजनीति में उसकी छवि एक अय्याश, दलाल और प्रोफेशनल हत्यारे की है। आपको बता दें प्रतिभाशाली कवियत्री मधुमिता शुक्ला को अपने प्रेम में फंसाने के बाद अमरमणि त्रिपाठी में उसकी हत्या कर दी थी। यह हत्या तब हुई जब मधुमिता शुक्ला 5 महीने की गर्भवती थी। इस मामले की सुनवाई के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के बजाय उत्तराखंड हाई कोर्ट में कराने का फैसला किया था ताकि किसी भी मामले में अमरमणि किसी कोई भी अडंगे बाजी न कर पाए और ना ही न्यायिक प्रक्रिया को बाधित कर सकें। इस मामले में अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी भी शामिल थी और अदालत में इन दोनों को मधुमिता शुक्ला और उसके गर्भस्थ बच्चे की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दे रखी है। फिलहाल यह दोनों ही पति-पत्नी जेल मैं चक्की पीस रहे है।

अब जरा आइए यूपी के बाकी विधायकों और उनके रिश्तेदारों की करतूत का खुलासा दिखा दिया जाए। उन्नाव के बांगरमऊ विधायक कुलदीप सिंगर ने जिस तरह एक व्यक्ति को पूरी तरह मार कर अधमरा कर दिया और उसे को जेल ठूंस दिया वह अपने आप में यूपी सरकार की असफलताओं का सबसे बड़ा झंडा है। जिसमें पुलिस और प्रशासन के साथ ही साथ डॉक्टर भी शामिल थे। लेकिन उस मृत व्यक्ति के बदन में आयीं चोटों पर कोई भी चर्चा करने की जरूरत ही नहीं समझी गई। नतीजा यह हुआ कि जेल में इलाज ही नहीं कराया गया। जबकि उसके पेट की आतें पिटाई से बुरी तरह चोटिल हो गई थीं। शरीर में बाहर और भीतर भारी लगातार रक्त स्राव हो रहा था। पीड़ा से तड़प-तड़प कर इस युवक ने 5 दिन बाद ही जेल में दम तोड़ दिया। (क्रमश:)

एक बरस में ही यूपी सरकार की कलई उतरने लगी है। समाजवादियों की सरकार की भीषण गुण्‍डागर्दी से त्रस्‍त होकर जनता ने लपक कर अपने वोट भगवा-कटोरे में झरझरा कर उड़े लिया था, कि चाहे कुछ भी हो जाए, दमघोंटू अखिलेश सरकार से पिंड छूट जाए। लेकिन एक बरस होते-होते ही भाजपा सरकार ने सपा-सरकार के रिकार्ड तक चकनाचूकर कर दिये। फिलहाल तो बलात्‍कारों और हत्‍याओं की बाढ़ से यूपी सुलग रहा है, तो अराजकता का माहौल से जनता त्राहि-माम त्राहि-माम चिल्‍ला रही है। उधर सत्‍ता से जुड़े जनप्रतिनिधियों की गुण्‍डागर्दी ने यूपी का कमल सुखा डालने की साजिश बुन दी है। यह एक श्रंखलाबद्ध आलेख है, जिसको हम लगातार क्रमश: प्रकाशित करने जा रहे हैं।

इस की अगली कडि़यों को देखने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

जोगीजी आह-आह

Comments (0)Add Comment

Write comment

busy