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शायद मर्दाना दवा ले रहे हैं यूपी के जनप्रतिनिधि

: कहीं विधायक, तो कहीं उनके प्रतिनिधियों ने यूपी की जनता का जीना मुहाल कर डाला : एक माननीय पर चढ़ा एक विवाहिता से इश्‍क का भूत, जुनून में उसके पति को बर्बाद करने की धमकी दे डाली : बहराइच से लेकर बांदा, गोंडा से मेरठ और जौनपुर तक हर जगह जनप्रतिनिधियों का हंगामा : जोगीजी आह-आह एक :

कुमार सौवीर

लखनऊ : कभी यह लोग बेवजह हूटर बजा कर आम आदमी का जीना हराम कर देते हैं, तो कभी लाठियां लेकर किसी न किसी की हड्डियां चटका देते हैं। अपने खिलाफ उठने वाली किसी भी आवाज को हमेशा-हमेशा के लिए खामोश करने के लिए यह लोग किसी की भी मौत का सौदागर बन सकते हैं, तो कभी किसी को इतना पीट देते हैं कि दो-चार दिनों में उसकी दर्दनाक मौत हो जाए। हैरत की बात है कि इन लोगों का लखनऊ से लेकर अपने डीएम-एसपी और थाने तक जबर्दस्‍त धमक है। प्रशासन और पुलिस पर उनकी धमक है, इसलिए किसी को भी दो-चार दर्जन गंभीर मुकदमों में फंसा कर उसे जेल में ठूंस देना उनके बांये हाथ का काम है। किसी को एक व्‍यक्ति की विवाहित बीवी की दरकार है, और इसके लिए वह किसी भी कीमत अदा करने पर आमादा है। कोई एसपी तक को दुष्‍चरित्र साबित होने का सार्टिफिकेट बांट रहा है, तो कोई बड़े ओहदेदार अफसर को उसके दफ्तर में नोटों का हार थमा कर उसे महाभ्रष्‍ट साबित करने की कवायद में जुटा है। ऐसे लोग अपनी राह पर कंकड़ तक को बर्दाश्‍त करने को तैयार नहीं, बात-बात पर बेशुमार गालियां देते हैं, तो कभी सरेआम अपनी गुंडागर्दी का बेखौफ और बेशर्म प्रदर्शन करते हैं।

सरकार तब तक खामोश रहती है, जब मामला खुद सरकार की गर्दन का फंदा न बन जाए। जी हां, यह बेलगाम हरकतें कोई सड़कछाप गुण्‍डा, मवाली या अपराधी ही नहीं, बल्कि समाज में संवैधानिक हैसियत हासिल किये जनप्रतिनिधियों की करतूतें हैं। सच बात तो यह है कि इनकी हरकतों को देख-सुन कर शातिर-घुटे अपराधियों के भी छक्‍के छूट जाते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि इनमें से अधिकांश लोग या तो विधायक हैं, या फिर उनके पति हैं। ऐसे करीबी रिश्‍तेदारों में वे लोग हैं जो किन्‍हीं न किन्‍हीं कारणों से चुनाव नहीं लड़ पाये, लेकिन जनता की कसर निकालने के लिए उन्‍होंने अपनी पत्‍नी को चुनाव लड़ा कर विधायक बनाया। आजकल राजधानी लखनऊ स्थित सचिवालय और सत्‍ता के गलियारों में यूपी के जनप्रतिनिधियों के किस्‍सों के चटखारे लिये जा रहे हैं।

हालत यह है कि प्रदेश के कई विधायक या तो आम आदमी को धमकी देने पर आमादा है या लाठियों को लेकर मैदान पर आ गए हैं। कुछ ऐसे विधायक भी हैं जिनकी खासी खानदानी आपराधिक पृष्ठभूमि  है। आम आदमी को लोगों को जानलेवा धमकियां देना और फोन पर भद्दी गालियां देने की गतिविधियों में लिप्त फिलहाल तो ऐसी-ऐसी हरकत करने पर आमादा हैं, जिन्‍हें सुन कर लोग शर्म से गड़ जाएं। ऐसे लोगों से अपनी जानमाल की मांग करने के लिए जब त्रस्‍त लोग सत्‍ता, शासन या स्‍थानीय प्रशासनिक अफसरों तक जाने की हिमाकत करते हैं, तो उन्‍हें उसकी खासी कीमत भी चुकानी पड़ती है।

प्रदेश के कई इलाकों में कई ऐसी भी घटनाएं हुई हैं जहां विधायकों ने अपनी हैसियत से बाहर अपनी हरकतों का प्रदर्शन किया है। इन लोगों ने प्रशासन तक को धमकी देते हुए चेतावनी दी है कि उनके इलाके में आपराधिक गतिविधियों के जिम्मेदार तो वहां के खुद अफसर ही हैं। एक विधायक ने तो सरेआम एक बड़े अफसर के ऑफिस में घुसकर नोटों की एक माला तक गले में डाल दी और कहा यह अफसर बहुत खुश मांगता है इसलिए उसे घूस की माला थमा दी गई है। एक अन्य विधायक पति ने एक फैक्ट्री में लाठी लेकर अफसरों को जमकर पीटा और अन्य एक इंजीनियर को हाथ-पैर तोड़ देने की कोशिश की। (क्रमश:)

एक बरस में ही यूपी सरकार की कलई उतरने लगी है। समाजवादियों की सरकार की भीषण गुण्‍डागर्दी से त्रस्‍त होकर जनता ने लपक कर अपने वोट भगवा-कटोरे में झरझरा कर उड़े लिया था, कि चाहे कुछ भी हो जाए, दमघोंटू अखिलेश सरकार से पिंड छूट जाए। लेकिन एक बरस होते-होते ही भाजपा सरकार ने सपा-सरकार के रिकार्ड तक चकनाचूकर कर दिये। फिलहाल तो बलात्‍कारों और हत्‍याओं की बाढ़ से यूपी सुलग रहा है, तो अराजकता का माहौल से जनता त्राहि-माम त्राहि-माम चिल्‍ला रही है। उधर सत्‍ता से जुड़े जनप्रतिनिधियों की गुण्‍डागर्दी ने यूपी का कमल सुखा डालने की साजिश बुन दी है। यह एक श्रंखलाबद्ध आलेख है, जिसको हम लगातार क्रमश: प्रकाशित करने जा रहे हैं।

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जोगीजी आह-आह

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