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असली रेपिस्‍ट तो अफसर हैं, उनको फांसी दो

: संविधान, कानून और जनभावनाओं से दुराचार करने वाले अफसर फांसी के असली हकदार : नन्ही बच्चियों से सामूहिक बलात्कार के हादसों को कभी डीएम, कप्तान और दरोगा ने बेचा, तो कभी नेता, समाजसेवी और पत्रकार तक ने : ताजा अपराधी तो उन्‍नाव का प्रशासन है, जिसकी करतूतों से जेल में घायल की मौत हुई :

कुमार सौवीर

लखनऊ : मासूम बच्चिचों, किशोरियों और महिलाओं के साथ बलात्‍कार केवल दुराचारी ही नहीं करता है। सच बात तो यह है कि ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदातों के असल मुजरिम वे होते हैं, जो अपने ओछे-टुच्‍चे स्‍वार्थों के लिए ऐसे अपराधों पर राख डाल कर उसे रफा-दफा करने की साजिशें बुनते हैं। कहने की जरूरत नहीं कि ऐसे शर्मनाक मुजरिमों में पहला नम्‍बर तो होता है खुद उन लोगों का, जो सरकारी अफसर-कर्मचारी होते हैं, लेकिन मलाईदार ओहदे की लालच में किसी भी नीचे स्‍तर तक उतर जाने पर आमादा होते हैं। अपने राजीनीतिक हुक्‍मरानों को खुश करने के लिए वे उस हद तक पहुंच जाते हैं कि आम आदमी शर्म से गड़ जाए। इनमें जिलों से लेकर लखनऊ तक आला कुर्सियों पर बैठे अफसरों के साथ ही साथ पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की लम्‍बी फेहरिस्‍त है।

मेरे पास चंद हादसों का ब्‍योरा है, जिनको जान-सुन कर आपको साफ पता चल जाएगा कि आखिर यह अफसर कितना गिर सकते हैं। हैरत की बात तो यह है कि इन बेशर्म हरकतों में उस समुदाय के चंद लोग भी आगे बढ़चढ़ कर अपनी घटिया हरकतें करते हैं जिन्‍हें अदालतों में न्‍याय दिलाने की जिम्‍मेदारी होती है, यानी वकील समुदाय।

4 साल पहले लखनऊ के मोहनलालगंज के सरकारी स्कूल में एक युवती के साथ हुआ था। सामूहिक दुराचार बर्बरता की हालत यह थी कि इन दुराचारियों ने उसे तड़पा-तड़पा कर मार डाला था। करीब 34 बरस की इस युवती की रक्तरंजित लाश स्कूल में नंगी पड़ी रही। तब लखनऊ के एसएसपी थे नवनीत सिकेरा। तब की एक अपर पुलिस महानिदेशक सुतापा सान्‍याल तक को नवनीत सिकेरा ने इस मामले में लपेट कर मामला रफादफा करने की कोशिश की, और सुतापा सान्‍याल के नेतृत्‍व में एक फर्जी तरीके से जांच का नाटक किया गया। आज तक उप्र शासन के गृह विभाग तक ने इस बात का जवाब हमारे प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम को नहीं दिया है कि आखिर सुतापा सान्‍याल को इस मामले में क्‍यों जोड़ा गया और उसकी जांच का नतीजा क्‍या निकला था। साफ था कि इस मामले में सत्‍ता के करीब लोगों की रूचि का पूरा ध्‍यान दिया गया, न कि मामले का खुलासा करना। नतीजा यही निकला, कि पूरी फर्जी कारवाई करके एक व्यक्ति को सजा दे दी गई। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले को इसलिए दबाया गया क्योंकि उसकी असली अपराधी ऊंचे बड़े व्यावसायिक और राजनीतिक परिवार से जुड़े हुए

लखनऊ के आशियाना कालोनी में करीब 15 बरस पहले हुए उस हादसे की याद तो आपकी स्‍मृति-पटल पर शायद अब तक दर्ज होगी, जब एक एक नन्ही मजदूर बच्‍ची के साथ चंद बड़े और असरदार लोगों की निरंकुश औलादों ने दुराचार कर उसे मरणासन्‍न हालत तक पहुंचा दिया था। यह पूरा हौलनाक हादसा आज भी आशियाना बलात्‍कार-काण्‍ड के तौर पर जाना-पहचाना जाता है। शाम के धुंधलके में शहर के एक बड़े दबंग और राजनीति लखनऊ के आशियाना में हुआ था। अदालत में इस मामले की धज्जियां तो खूब उधेड़ने की तैयारियां थीं, लेकिन उस सामूहिक दुराचारी लोगों में से एक व्‍यक्ति भी शामिल था, जिसके चाचा समाजवादी पार्टी के बड़े असरदार नेता था।

फिर क्‍या था। लखनऊ के चंद बड़े वकीलों ने मिलकर इस मामले को संवेदनशीलता की जमीन पर नहीं, बल्कि अपने मुअक्किल के रसूख और उनकी खनखनाती रूपहली थैली की भौतिकता के सामने घुटने टेक दिये। कितने शर्म की बात है कि इन वकीलों ने इस मामले को करीब 10 बरसों तक केवल इसी मुद्दे पर लटकाये ही रखा, कि उस सामूहिक दुराचार-काण्‍ड का मुख्‍य अभियुक्‍त हादसे के वक्‍त नाबालिग था। हैरत की बात है कि इन वकीलों की दलीलों का सिक्‍का अदालतों में लगातार पूरी बेशर्मी की धमक के साथ चलता ही रहा। जबकि किसी भी व्‍यक्ति के नाबालिग होने की बात साबित करने के लिए केवल एक डॉक्‍टरी-जांच से ही पर्याप्‍त थी, जिसे अधिकतम एक घंटे में निपटाया जा सकता था। इतना ही नहीं, उन वकीलों ने उस दुराचारी के उम्र को छुपाने की सारी कोशिशें कीं, लेकिन आखिरकार उस दुराचारी की हाईस्‍कूल का प्रमाणपत्र ही इस तथ्‍य को साबित करने के लिए पर्याप्‍त था, जिसमें वह दुराचारी पूरी तरह बालिग था।

जौनपुर के भंडारी रेलवे स्‍टेशन के पास तीन बरस पहले देर रात नाली किनारे बरामद हुई थी एक 17 साल की किशोरी बेहोश बरामद हुई थी। अस्‍पताल में तैनात कर्मचारियों का बयान था कि उस किशोरी से बर्बर सामूहिक दुराचार हुआ था। लेकिन तब के जुल्फी-प्रशासन ने उस जघन्‍य हादसे को गटक लिया और पूरा मामला ही रफा-दफा कर दिया। आपको बता दें कि तब के डीएम चंद्रभानु गोस्‍वामी ने इस बच्‍ची की बरामदगी कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं कराया, बल्कि बाद में जब प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम ने उस बच्‍ची से जुड़ी खबरों को उजागर करने का अभियान डछेड़ा तो जुल्‍फी-प्रशासन के अगुआ गोस्‍वामी ने उस बेबस किशोरी को बनारस पागलखाने में भर्ती करने की कवायद छेड़ दी। लेकिन पागलखाना के डॉक्‍टरों ने साफ कर दिया कि वे बिना अदालत के आदेश के उस बच्‍ची को पागलखाने में भर्ती नहीं करेंगे। गोस्‍वामी क्‍या करते, क्‍योंकि उस मामले की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं थी। फिर एक रास्‍ता खोजा गया कि इस बच्‍ची को नारी निकेतन भेज दिया जाए। और इस तरह पूरे मामले को दफ्न कर दिया गया।

जौनपुर में ही बदलापुर में कोतवाली के पास रहने वाली पौने 15 बरस की एक गरीब किशोरी के साथ तीन रईसजादों ने किया था दुराचार। यह घटना ठीक एक बरस पहले की है, जिसमें वह बच्‍ची गर्भवती भी हो गई। मामला पुलिस में पहुंचा, मेडिकल जांच में उसके नाबालिग और गर्भवती होने की बात साबित हुई। लेकिन इसके बाद नोटों की बारिश हुई और पुलिस, प्रशासन, पत्रकार, वकील और दलालों तक पौ-बारह हो गयी। खुद को क्षेत्र के सम्‍भ्रांत और सम्‍मानित नेता, लेखक, पत्रकार, चिंतक तक इस मामले में किनारा कर अपनी लंगोट छोड़ कर भाग निकले। नतीजा यह हुआ कि अपराधियों ने किशोरी का गर्भ गिरा दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने कोई भी कार्यवाही नहीं की और अपराधी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।

इतना ही नहीं, हमारे पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम को पुख्‍ता खबर मिली थी कि चंदवक के एक निजी अस्‍पताल में एक महिला का कन्‍या-भ्रूण हत्‍या की तैयारी चल रही है। उस महिला को अस्‍पताल में भर्ती कर लिया गया है। यह खबर मुझे रात में मिली, और सुबह दस बजे यह गर्भपात होना था। मैंने डीएम सर्वज्ञराम मिश्र को मोबाइल किया, मगर फोन नहीं उठा। डीएम के घर के फोन मिलाया, तो पता चला कि डीएम किसी पार्टी में व्‍यस्‍त हैं। मैंने यह खबर फोन करने वाले को कर दिया कि अस्‍पताल में कन्‍या-भ्रूण की हत्‍या होगी। मगर प्रशासन ने कोई भी कदम नहीं उठाया। आज वही डीएम सर्वज्ञराम मिश्र आज मथुरा का डीएम बना बैठा है। सूत्र बताते हैं कि कि अपने परिवार के किसी दिवंगत शख्‍स की चर्चा सुनते ही यह डीएम बिलख कर रो पड़ता है।

उन्नाव में भी यही हुआ। बांगरमऊ में हुए तथाकथित बलात्कार में भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर की संलिप्‍तता थी अथवा नहीं, यह सवाल अभी भी लोगों के गले से नहीं उतर रहा है। मगर इतना जरूर है उन्नाव की पुलिस कप्तान पुष्पांजलि और उनकी पुलिस ने कुलदीप सेंगर के इशारे पर उस व्यक्ति को बुरी तरह पीटकर जेल भेज दिया था जिसकी बेटी पर बलात्कार का आरोप है। इतना ही नहीं, कुलदीप सेंगर के इशारे पर ही पुलिस ने उस व्यक्ति पर आनन-फानन 22 से ज्यादा मुकदमे दर्ज कर उसे जेल में सड़ा डालने की साजिश की थी। जेल भेजने से पहले उस बुरी तरह घायल व्‍यक्ति का मेडिकल जरूर कराया गया, लेकिन उसका इलाज की जरूरत पुलिस ने नहीं समझी। इतना ही नहीं, यह भी वजह जांचने की जरूरत नहीं समझी पुलिस ने कि उस व्‍यक्ति को किस शख्‍स ने बर्बरता के साथ पीटा था। बहरहाल, बुरी तरह घायल उस व्यक्ति की मौत 5 दिन बाद ही जेल में हो गई। अब पुष्पांजलि इस मामले में अपनी तत्परता कर दिखाने का पाखंड करती दिख रही हैं, और पूरी सरकार तथा उसके अफसर मामले पर राख डालने की कवायद कर रहे हैं।

फांसी की सजा तो इन लोगों पर आयद होनी चाहिए। बोलिए, है कि नहीं ? (क्रमश:)

इधर नन्‍हीं बच्चियों के साथ हुईं बलात्‍कार के बाद हत्‍याओं की आंधियों ने साबित करने की यह मजबूत पैरवी शुरू कर दी है कि हमारा देश एक अराजक समाज की शक्‍ल अख्तियार करता रहा है। लेकिन इसके पहले कि इस मामले पर कोई सार्थक राष्‍ट्रीय बहस हो पाती, सरकार ने उन हादसों से भड़कीं जन-भावनाओं पर जो फैसला किया, वह किसी भी सभ्‍य देश को सवालों के कठघरे में खड़ा कर देता है। बहरहाल, इस पर हम एक श्रंखलाबद्ध लेख प्रकाशित करने जा रहे हैं। आपसे अनुरोध है कि हमारे इस अभियान पर आप भी जुड़ें और खुद भी अपनी राय व्‍यक्‍ त करें। आपकी भावनाओं को हम पूरे सम्‍मान के साथ अपने प्रख्‍यात न्‍यूज पोर्टल www.meribitiya.com पर प्रकाशित करेंगे। अपनी राय आप हमारे ईमेल  This e-mail address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it पर भेज सकते हैं।

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रेप पर रेप्‍चर्ड फैसला

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