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बधाई हिन्‍दू-सेनानियों, तुमने इंसानियत का कत्‍ल कर डाला

: दंगाइयों में तब्‍दील हो गयी बिहार वाले औरंगाबाद की राजनीति : इमरोज मियां का घोंसला उजाड़ डाला मर्यादा पुरूषोत्‍तम के नाम पर हुंकार भरने वालों ने : दंगाइयों ने आगजनी, लूटपाट की। एसपी ने फोन तक नहीं रिसीव किया : कैराना में पलायन की बात तो पक्‍की नहीं है, लेकिन इमरोज अब हांगकांग जा रहा है :

कुमार सौवीर

लखनऊ : क्‍या आप बिहार के औरंगाबाद के एक व्‍यवसायी का रोना-बिलखना पसंद करेंगे बुरी तरह छटपटाती हुई आवाज, दिल चीर कर देने वाला आर्त-स्‍वर, जिसमें प्रशासन के प्रति शिकायत भी है, और हिन्‍दुओं के प्रति सहज स्‍नेह-प्‍यार। लेकिन एक बार भी इस आवाज में घृणा का अंदाज नहीं है। इसके बावजूद इस दंगे में उसका सारा कुछ भस्‍म हो गया, लुट गया और बर्बाद हो गया।

जिस तरह एक चिडि़या अपने बच्‍चों को पालने-सम्‍भालने के लिए अपना घोंसला बेहद सुरक्षित ठिकाने पर बनाती है, ताकि उसके बच्‍चे हिफाजत से रहें, उन्‍हें कोई नुकसान न हो पाये। इमरान ने भी यही सोच कर औरंगाबाद में अपना ठिकाना बनाया था, सोचा था कि औरंगाबाद के हिन्‍दू-मुसलमान एकसाथ रहेंगे, तो तसल्‍ली रहेगी। मगर उनका यह फैसला उनकी जिन्‍दगी को बर्बाद कर गया। इमरान के पास अब कुछ नहीं है। पश्चिम यूपी के कैराना में मुसलमानों की करतूतों से त्रस्‍त होकर वहां हिन्‍दुओं के पलायन की बात तो अभी जांच-पड़ताल तक ही सिमटी है, मगर औरंगाबाद के इमरान ने फैसला कर लिया है कि अब चाहे कुछ भी हो जाए, वह औरंगाबाद में नहीं रहेगा। खुद को समेट कर उसने फिलहाल हॉगकॉंग जाने का फैसला क‍र लिया है।

आप अगर इमरान पर बीती पहाड़ जैसी सिसकियों को सुनना चाहें, तो नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक कर सुन सकते हैं:-

दंगा और इमरान

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