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मिश्रिख मेला में अवैध उगाही पर फंसे पत्रकार जी, हंगामा

: दूकानदारों ने किया मेला का बहिष्‍कार, सूनी हो गयीं मिश्रिख की सड़कें : आरोप कि हिन्‍दुस्‍तान अखबार के कई पत्रकारों ने मिल कर किया था लूट का धंधा : मामला पुलिस में, नगर पालिका पर प्रदर्शन : दूकानदारों ने दी धमकी, कि भविष्‍य में न आयेंगे मिश्रिख : मेलाधिकारी पर मिलीभगत का आरोप :

मेरी बिटिया संवाददाता

सीतापुर : मिश्रिख के धार्मिक मेले में एक प्रतिष्ठित अखबार के कुछ तथाकथित पत्रकारों ने सहयोग के नाम पर दुकानदारों से की अवैध वसूली पर आज यहां जमकर हंगामा हुआ। दूकानदारों का आरोप है कि इस अवैध उगाही में हिन्‍दुस्‍तान अखबार के कुछ पत्रकार शामिल हैं। खफा दूकानदारों ने आज इसी मसले पर अपनी दूकानें उखाड़ लीं, और उसके बाद नगर पालिका कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। बाद में यह लोग कोतवाली पर भी अपनी शिकायत करने पहुंचे। पुलिस ने मामले को दर्ज तो नहीं किया है अभी तक, लेकिन यह आश्‍वासन दिया है कि जांच की जाएगी। लेकिन इस आश्‍वासन से असहमत और क्षुब्‍ध दूकानदारों का फैसला है कि भविष्‍य में यहां होने वाले मेले पर शिरकत नहीं करेंगे।

मिश्रित होली परिक्रमा मेले में नगर पालिका परिषद के कर्मदुकानदार कपिल दीक्षिक , कृष्ण कुमार , मो . इलियास , मो. जावेद , प्रदीप कुमार , गोपीलाल, शिवशंकर , हनीफ, शिवकुमार, शकील, दीनानाथ आदि सैकड़ो दुकानदारो ने एक प्रतिष्ठित अखबार के कई पत्रकारों को खुलकर कराई गयी अवैध वसूली में आज एकजुट होकर अपनी दुकानों के परदे गिरा दिए। नगरपालिका गेट पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। मेला प्रशासन की चिरौरी भी दुकानदारों के आगे बौनी ही साबित हुई।  अंततः किसी तरह दिन के तीन बजे मेला प्रशासन की तरफ से मेला सचिव दुकानदारों को मनाने में कामयाब हो पाए तब जाकर दुकानें खुली। इन दुकानदारों ने मेला के दो कर्मचारियों के साथ ही अवैध वसूली करने वाले एक ही अखबार के कई पत्रकारों के विरुद्ध कोतवाली में तहरीर दी है, इस मामले की जांच दरोगा कृष्ण मोहन सिंह को सौंपी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि से 84 कोसीय धार्मिक मेला परिक्रमा शुरु होता है जिसमें देश विदेश के लाखों परिक्रमार्थी भाग लेने आते है। इस परिक्रमा का समांपन पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन के साथ हो जाता है।  फिर यह मेला सामाजिक मेले के रूप में परिवर्तित होकर लगभग एक माह तक चलता रहता है जिसमें प्रदेश के अनेक स्थानों से आए सैकड़ों दुकानदार एवं खेल तमाशा आदि की दकाने मेले की रौनक बढ़ाती हैं। इस सामाजिक मेले में मेला अधिकारी प्रभाकांत अवस्थी की शह पर मेला सचिव आर.पी.सिंह ने अपने अधीनस्थ कर्मचारी शालिकराम मौर्य और विजय पाण्डेय को भेजकर लखनऊ से प्रकाशित प्रतिष्ठित अखबार हिंदुस्तान के कुछ कथित संवाददाताओं का सहयोग करने के लिए प्रति बड़े दुकानदार 1000 रुपये तथा मझोले दुकानदार से 500 रुपये और छोटे दुकानदार से 200 रुपये खुलेआम वसूली करा रहे थे।

मेले के दुकानदार बताते हैं कि लगभग 35 से 40 ,000 रुपये के मध्य यह अवैध वसूली उक्त अखबार के कथित संवाददाताओं का सहयोग करने के नाम पर कराई गई है लेकिन अवैध वसूली का यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा था जिससे मेले में आए सभी दुकानदार आज आक्रोशित हो उठे और गांधीनगर नौबस्ता कानपुर के कपड़े दरी कालान व कम्बल के व्यवसाई दीनानाथ शुक्ला पुत्र विशंभरनाथ शुक्ला की अगुवाई में सभी दुकानदारों ने अपनी दुकानों के पर्दे गिरा दिए और नगरपालिका गेट पर एकत्र होकर अवैध वसूली के विरुद्ध जमकर विरोध प्रदर्शन करने लगे जिससे दुकानदारों के आगे पूरा मेला प्रसाशन चिरौरी करता नजर आया।

लेकिन आक्रोशित दुकानदारों ने मेला प्रशासन की एक भी नही सुनी और कार्यवाही की मांग पर बराबर डटे रहे तो मेला प्रशासन के सभी अस्थि पंजर ढीले हो गये और पुलिस प्रशासन ने पीड़ित दुकानदारों से तहरी लेकर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कार्यवाही करने की बात कही है जिसकी विवेचना का दायित्व दरोगा कृषण मनमोहन सिंह को सौंपा गया है इस सिकायत की रसीद प्राप्ती सं. 14 0 36 पर है मेला प्रशासन व्दारा कार्यवाही के आश्वासन पर सायं 3 बजे के लग भग दुकानदार काफी मान मनौवल के बाद दुकान खोलने पर राजी हुए है वहीं जहां पर मेला प्रशासन ने इन दुकानदारों को अवैघ वसूली करने के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है वही दुकानदारों ने भी कार्यवाही के अभाव में अगले वर्ष इस धार्मिक मेले में न आने की कड़ी चेतावनी दे डाली है जिससे यह मामला क्षेत्र में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और शासन प्रशासन की क्षेत्र मे जमकर किरकिरी हो रही है।

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