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हाईकोर्ट: चुम्‍मन ने लेटर भेजा जुम्‍मन को, बांच रहे हैं लड़हू-जगधर

: अमां यार। क्‍या इसी को ज्‍यूडिसरी कहते हैं ? : इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा सर्वोच्‍च न्‍यायाधीश को भेजा गया गोपनीय पत्र मीडिया तक पहुंचा : नाबालिग से रेप में गायत्री प्रजापति ऐंड कम्‍पनी पर पॉक्‍सो जज ने दी थी जमानत : हाईकोर्ट ने दंडित किया था दो जिला जजों को :

कुमार सौवीर

लखनऊ : कहावतें तो बेहिसाब हैं, जो किसी भी मसले को बेहद खूबसूरती के साथ और अपने मन्‍तव्‍य को प्रभावशाली ढंग से प्रस्‍तुत कर सकती हैं। मसलन, बात करो ईरान की तो बोलेंगे तूरान की, गये गजोधर झांड़ा फिरने, ड्यूढै पहुंची बरात तो समधन लगै हगास, तब क्‍या पछतावे जब चिडि़या चुग गयी खेत। वगैरह-वगैरह। सच बात तो यही है कि किसी भी पूरे किस्‍से को एक छोटी सी लाइन में समझाने में पर्याप्‍त होती है सशक्‍त कहावतें। लेकिन ताजा मसले में जो कहावत मैं पेश करने जा रहा हूं, उससे बेहतर कोई भी कहावत नहीं हो सकती। कहावत है:- सत्‍ते ने लेटर भेजा फत्‍ते को, बांच रहे हैं लड़हू-जगधर।

मामला है यूपी की न्‍यायापालिका में पैसा उगाह कर फैसला देने को लेकर चल रही चर्चाओं का। इस पर सबसे भोंड़ा प्रदर्शन तब हुआ जब पूर्व समाजवादी पार्टी की सरकार में शामिल और अब तक के सबसे बड़े बेईमान खनन माफिया के तौर पर कुख्‍याति हासिल कर चुके पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति समेत तीन अभियुक्‍तों को लखनऊ के पॉक्‍सो कोर्ट के जज ने जमानत दे दी गयी। गजब बात यह है कि इससे पहले गायत्री ऐण्‍ड कम्‍पनी ने अपनी गिरफ्तारी को लेकर सर्वोच्‍च न्‍यायालय में एक याचिका लगायी थी, जिसमें कहा गया था कि उन्‍हें गिरफ्तार नहीं किया जाए। लेकिन सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने इस याचिका को खारिज किया था। गायत्री और उसके इन साथियों पर आरोप है कि उन्‍होंने एक नाबालिग बच्‍ची के साथ दुराचार किया।

आपको बता दें कि इस मामले में इलाहाबाद उच्‍चन्‍यायालय के चीफ जस्टिस दिलीप बी भोंसले ने गायत्री प्रजापति को गैर-कानूनी तरीके से जमानत देने वाले पॉक्‍सो कोर्ट के एडीजे ओपी मिश्र को मुअत्‍तल कर दिया था, जबकि लखनऊ जिला एवं सेशंस जज राजेंद्र सिंह को हटा कर उन्‍हें चंदौली भेज दिया गया था। माना गया कि हाईकोर्ट प्रशासन ने इस मामले में भारी गड़बड़ और मोटी रकम का लेनदेन की बात मानी थी।

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जस्टिस और न्‍यायपालिका

हाईकोर्ट के इस फैसले से जिस ओपी मिश्र पर जो गाज गिरी, उन्‍हें 16 दिन पहले ही यह कुर्सी मिली थी। लेकिन सबसे ज्‍यादा नुकसान तो राजेंद्र सिंह को हुआ था। उन्‍हें राजधानी के जिला व सेशंस जज की कुर्सी से तो हटाया गया ही, हाईकोर्ट ने कोलोजियम को भेजे गये उस प्रस्‍ताव को भी खारिज कर दिया जिसमें राजेंद्र सिंह को हाईकोर्ट में जस्टिस के पद पर पदोन्‍नत किया जाना था। कहने की जरूरत नहीं कि किसी भी शख्‍स को अपने जीवन में इससे बड़ा कोई भी धक्‍का नहीं हो सकता है, कि उसे हाईकोर्ट कुर्सी पर बिठाने की प्रक्रिया को रद कर दिया जाए।

बहरहाल, जस्टिस दिलीप बी भोंसले ने इसी मामले पर एक गोपनीय पत्र देश के तब के सर्वोच्‍च न्‍यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर को भेजा था। इसमें गायत्री ऐंड कंपनी को जमानत देने के पूरे प्रकरण का जिक्र किया गया था, साथ ही इसमें इन दोनों जजों पर दायित्‍व भी निर्धारित किये गये थे। खास बात यह है कि यह पत्र पूरी तरह गोपनीय था। और ऐसे प्रवृत्ति के पत्र को सुरक्षा की परम्‍पराओं के तहत चीफ जस्टिस द्वारा सील बंद कर विशेष पत्रवाहक द्वारा सीधे सर्वोच्‍च न्‍यायाधीश के हाथों में ही थमाया जाता है।

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लर्नेड वकील साहब

अब हालत यह है कि यह तो अब तक नहीं पता चला है कि दिलीप बी भोंसले का यह गोपनीय पत्र जेएस खेहर के हाथों तक पहुंचा भी या नहीं। लेकिन अब यह पत्र मीडिया के हाथों में है, जो उसकी प्रतियां बना कर कभी पानी में जहाज बना रही है, या फिर उसकी बत्‍ती बना कर जहां-तहां बुन-सिल कर प्रयोग कर रही है। इससे बड़ा मजाक और क्‍या होगा, जब  इस तथाकथित पत्र की कॉपी प्रतिवादी टाइम्‍स ऑफ इंडिया के वकील ने इस मामले में भरी अदालत में मामले के वादी के हाथों में थमा दी। इस पत्र में जो कुछ भी भोंसले द्वारा लिखा गया बताया जाता है, उस पर अब कड़ी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गयी हैं। क्‍योंकि इस कथित पत्र का हवाला देते हुए विभिन्‍न मीडिया संस्‍थानों ने जो खबरें प्‍लांट की हैं, उसमें का‍फी विवाद खड़ा हो गया है। इतना ही नहीं, आरोप तो यहां तक लगाये जा रहे हैं कि यह एक साजिश के तौर पर पत्र लीक किया गया है, ताकि एक जज को हाईकोर्ट में प्रोन्‍नत करने की प्रक्रिया को रद कराया जा सके। कुछ भी हो, सवाल तो यह है कि इन दोनों शीर्ष जस्टिस के बीच होने वाले इस पत्रचार का खुलासा मीडिया में हो जाना खासा संवेदनशील मसला बताया जा रहा है।

अब जरा देखिये तो तनिक, कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के उस गोपनीय पत्र को किस-किस बड़े मीडिया समूहों ने अपनी सुर्खियां बना कर पेश किया था:- टाइम्‍स ऑफ इंडिया, नवभारत टाइम्‍स यानी एनबीटी, जागरण डॉट कॉम, आई नेक्‍स्‍ट, हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स, अमर उजाला, मेन स्‍ट्रीम, इंडिया टुडे, आजतक समेत दर्जनों आदि। सारा झंझट इसी कवायद को लेकर अब अदालत से लेकर सड़क तक फैलता जा रहा है।

है न हैरत की बात ?

इसी प्रकरण पर यह कहावत समीचीन है कि:- चुम्‍मन ने लेटर भेजा जुम्‍मन को, बांच रहे हैं लड़हू-जगधर

पुनश्‍च: खास बात यह है कि कहावतें हमेशा वक्‍त की लम्‍बी सान पर चढ़ा कर ही जन-सामान्‍य में अपनी मान्‍यता हासिल कर पाती है, जबकि मैं आपको जानकारी दे दूं कि यह कहावत मैंने बिलकुल ताजा तैयार की है।

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