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हंसिया-हथौड़ा नहीं कमल संभालो, जो सूखा तो फिर न खिलेगा

: इस वामपन्‍थी बूढ़े कामरेड का तर्क सुन कर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी :  हंसिया-हथौड़ा तो टूट गया है तुम्‍हारा, अब क्‍या करोगे : नया हत्‍थ बन जाएगा, धार ज्‍यादा पैनी हो जाएगी, मगर मुश्किल तो तब होगी अगर कमल मुरझाने लगा :

कुमार सौवीर

लखनऊ : एक बूढ़े कम्‍युनिस्‍ट की बात सुन लेंगे आप, तो कलेजा धक्‍क हो जाएगा।

हालांकि यह कोई कहानी है, या फिर हकीकत में हुई कोई गम्‍भीर बातचीत नुमा तर्क-वितर्क। लेकिन इसमें निकले जवाब बेहद खासे रोचक भी हैं, चेतावनी से भरे भी हैं।

अनिल जनमेजय ने किन्‍हीं इलाहाबादी दुर्गा के हवाले से पुरबिया बोली में इस बारे में लिखा है। आम आदमी की समझ के लिए मैं उसका खड़ी बोली में तर्जुमा यानी अनुवाद कर रहा हूं।

एक बूढ़े कामरेड और एक बूढ़े संघी में खासी पुरानी आत्‍मीयता और मित्रता है। हाल ही आपसी बातचीत के दौरान उस बूढ़े संघी ने देश के बदले ताजा राजनीतिक भगवा माहौल पर अपनी छाती फुला कर 56 इंची किया और बूढ़े कामरेड मित्र की ओर दर्प-भाव में देखते हुए सम्‍बोधित किया:- अब तो तुम्‍हारा हंसिया-हथौड़ा तो टूट गया है। तुम लोग अब क्‍या करोगे। उसी कांग्रेसियों के दरवाजों पर पानी भरने का पुराना धंधा ही करोगे न, हा हा हा।

बूढ़े कामरेड ने बहुत स्थिर भाव में जवाब दिया:- बेंट-हत्‍था ही तो टूटा है न, अरे नया बन जाएगा यार। और जो हंसिया की जो धार भोथरी हो गयी है न, उसे सान पर चढ़ा कर दोबारा धारदार करा लिया जाएगा यार। इससे उसकी धार पहले से भी ज्‍यादा पैनी हो जा सकेगी। ऐसे में हमारी चिंता छोड़ दो मेरे दोस्‍त। तुम लोग अपना कमल सम्‍भाल लो। क्‍योंकि अगर यह कमल कभी सूखा या मुरझाया, तो फिर कमल दुबारा नहीं खिल पायेगा।

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