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साथी की मौत पर मुआवजा मांगा मुस्‍कुरा कर पत्रकारों ने

: यादवेंद्र दुबे के परिजनों को 20 लाख की सहायता की मांग : प्रतिनिधि मंडल उपमुख्यमंत्री से मिला, शोकसभा की : यादवेंद्र दत्त दूबे को याद करते हुए कहा कि वह पत्रकारिता के लिए निश्वार्थ समर्पण भाव से काम करते थे : पीड़ाजनक माहौल में भी ठहाके लगाते हुए और मुस्कुराते हुए दिख गए तो मैं क्या करूँ? :

श्‍वेतपत्र संवाददाता

जौनपुर : जौनपुर पत्रकार संघ का प्रतिनिधि मंडल नेे आज उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा से मुलाकात की। संघ ने सोमवार को एक सड़क हादसे हुई अपने संगठन मंत्री यादवेंद्र दत्त दूबे मनोज के मौत की घटना पर उनके परिजनों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।उपमुख्यमंत्री डॉ शर्मा ने संघ के सदस्यों को आश्वस्त किया कि वह इस प्रकरण पर अतिशीघ्र कार्यवाही करेंगे। संघ की तरफ से दिए गए पत्रक पर उन्होंने प्रमुख सचिव सूचना को मामले पर अग्रिम कार्यवाही का निर्देश दिया।

उपमुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद जौनपुर पत्रकार संघ की एक शोकसभा डाकबंगला में हुई। शोकसभा की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने की। शोकसभा में पत्रकारों ने अपने साथी स्व. यादवेंद्र दत्त दूबे को याद करते हुए कहा कि वह पत्रकारिता के लिए निश्वार्थ समर्पण भाव से काम करते थे। मृदुभाषी और व्यवहार कुशल होने के साथ ही वह संगठन के लिए भी एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम करते थे। स्व. दूबे के अचानक निधन होने जौनपुर के पत्रकारिता जगत को गहरा आघात लगा है।

शोकसभा का संचालन महामंत्री डॉ. मधुकर तिवारी ने किया। शोकसभा में राजेंद्र सिंह, विनोद तिवारी, कपिल देव मौर्य,लोलारक दूबे,मनोज वत्स, शम्भू सिंह,मनोज उपाध्याय, मार्कण्डेय मिश्र, आशीष श्रीवास्तव, वीरेंद्र पांडेय सहित अनेक पत्रकार मौजूद थे। खास बात यह कि जब श्‍वेतपत्र संवाददाता ने यह खबर भेजने वाले पत्रकार से इस फोटो के बारे में बातचीत करते हुए सवाल उठाये, और पूछा कि उप मुख्‍यमंत्री से बातचीत के दौरान शोक का कोई माहौल तो दिख ही नहीं रहा था। पता ही नहीं चल पा रहा था कि इस बातचीत के दौरान कोई कामेडी-सर्कस चल रहा था, या फिर कोई गंभीर शोक सभा, इस सवाल पर इस पत्रकार का कहना था कि पत्रकार की मौत पर उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन देते समय संघ की फोटो मिली तो आपकी दे दी। अब वो उस पीड़ाजनक माहौल में भी ठहाके लगाते हुए और मुस्कुराते हुए दिख गए तो मैं क्या करूँ?

आपको बता दूं कि केवल जौनपुर नहीं, बल्कि ज्‍यादा तक जिलों में पत्रकारों के संगठनों पर अब धंधेबाजों का ही बोलबाला है। यह लोग या तो सरकारी नौकरी पर वेतन उगाह करके बावजूद पत्रकारिता की धौंस पर प्रशासन को ब्‍लैकमेल करते हैं या फिर बकैती का धंधा।

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