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गजब मोहतरमा अध्‍यक्ष: सरकारी विज्ञापन में अपनी शादी की तस्‍वीर

: बड़ी शौकीन निकलीं अंबेडकरनगर की अध्यक्ष जी, चर्चाएं अब सड़क से गली तक : सरकारी खजाने पर अपना निजी शौक पूरा करना वाकई बड़ी हिमाकत होती है : राज्‍य सरकार के सामूहिक विवाह आयोजन पर इल्तिफातगंज नगर पंचायत ने हद कर डाली :

कुमार सौवीर

लखनऊ : क्‍या आपने कभी ऐसा कोई सरकारी विज्ञापन देखा है, जब किसी विभाग के निर्वाचित मुखिया ने अपनी फोटो के बजाय अपनी शादी की फोटो लगा दी हो। कोई भी इस बात को कोरी कल्‍पना ही मानेगा। लेकिन सच बात यही है कि अम्‍बेदकर नगर की इल्तिफातगंज नगर पंचायत में हर सरकारी और निर्वाचित शख्‍स सरकारी खजाने से पंजीरी फांकने में बिजी है। कामधाम भले ही धेला भर का न होता हो, लेकिन इस नगर पंचायत में शिगूफे खूब होते हैं। सरकारी रकम को लुटाने मैं सरकारी विभाग अव्वल होते हैं लेकिन छोटी संसदों में भी यह भी होने लगा है मनमर्जी बेहिसाब जो चाहा, वह कर डाला। जाहिर है कि ऐसी मनमर्जी के खिलाफ बोल पाने की हिमाकत किसी में भी नहीं है।

तो ताजा खबर यह है कि सरकारी विज्ञापन में गजब हिमाकत कर दी है इल्तिफातगंज नगर पंचायत के अध्यक्ष शौकत जहां ने। इल्तिफातगंज शहर यूपी के अंबेडकर नगर जिले में है। यहां की अध्‍यक्ष की ताजा कवायदें अब पूरे इलाके में चर्चे आम हो चुकी हैं।

सवाल यह नहीं है कि किसी को किसी अपने किसी निजी कार्यक्रम की किसी फोटो पर ऐतराज है। आपके घर का कोई मामला हो तो आप चाहें दरवाजे पर अपनी फोटो लगाएं, या शौचालय में। आप अपने विवाह की फोटो अपने घर में लगाएं, या फिर सुहागरात की। आप अपने बच्चे की जन्मदिन की फोटो लगाएं, या फिर तिलक-खतना अथवा उपनयन संस्कार की। लेकिन आपको यह अधिकार कैसे हो सकता है कि आप जनप्रतिनिधि और मुखिया जैसी किसी जिम्मेदारी वाली कुर्सी पर बैठे हों, सरकारी खर्चे का नियंत्रण आपके हाथ में हो, और आप जो चाहे मेरी मर्जी करते रहें। इतना ही नहीं, सरकारी विज्ञापनों में अपनी फोटो के बजाय अपनी शादी की फोटो लगा दें।

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अम्‍बेदकरनगर

शौकत जहां का जहां भी मन होता है, मनमर्जी कर डालती हैं। चूंकि यह पूरी रकम सरकारी होती है, इसलिए उसे लूटने में या लुटाने में किसी का कोई भी कलेजा नहीं खरोचता है, उसका सारा माल मनमौजी से खर्च होता है। इसमें उस नगर पंचायत के अधिशासी अभियंता जैसे जिम्मेदार सरकारी अधिकारी भी पूरी तरह सातों रंगों में रंगे होते हैं। उंगलियां टेढ़ी होती हैं ताकि की ठीक से घी निकलता रहे, और सिर कड़ाही में घुसेड़ा रहता है।

शौकत जहां द्वारा पंचायत के खजाने को खूब लुटाया, उसकी चर्चाएं सड़क-गली तक में चल रही है या नहीं, उसकी जानकारी हमें नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री की सामूहिक विवाह योजना को लेकर पूरे पन्ने के एक चौथाई हिस्‍से में शौकत जहां ने अपनी शाहंशाह जैसी करतूत दर्ज करायी है, वह बेमिसाल है। सामूहिक विवाह योजना उत्तर प्रदेश सरकार की है, लेकिन उसका श्रेय शाहजहां से लेकर सारे नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत तक खूब डंका-ढिंढोरा गूंज रहा है।

एक स्‍थानीय इस बारे में प्रमुख न्‍यूज पोर्टल मेरीबिटिया डॉट कॉम पर अपनी आपत्ति जाहिर करते हुए कहा है कि शौकत जहां ने सारी हदें ही कर ली हैं। शौकत ने इस विज्ञापन में अपनी जो फोटो छपवा दी है, उसमें उन्‍होंने अपनी फोटो की जगह वरमाला वाले युगल की लगाई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं पा रहा है कि शौकत जहां ने इसमें नया फोटो अपनी शादी की लगा दी है या फिर किसी और की। लेकिन अगर ऐसा किया भी गया तो उसका औचित्य समझ में नहीं आ रहा है। सिवाय इसके कि यह एक अराजक प्रवृत्ति है।


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