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मृत्‍युंजय ने फिर दिखाया मौत को ठेंगा, अब खतरे से बाहर हैं शेखर त्रिपाठी

: लेकिन नींद बेहोशी में है मृत्युंजय वरिष्‍ठ पत्रकार शशांक शेखर त्रिपाठी : सेप्टीसीमिया का खतरा टला, तेजी से सुधर रहा है स्‍वास्‍थ्‍य : अस्‍पताल से बाहर निकलने में अभी कुछ हफ्ते और लगेंगे जरूर : दैनिक जागरण और हिन्‍दुस्‍तान अखबार के सम्‍पादक रह चुके हैं शेखर त्रिपाठी :

कुमार सौवीर

गाजियाबाद : जो साक्षात मृत्युंजय है, उसे मौत से क्या डर। किसी ऐसे-वैसे यमदूत के वश की बात नहीं होती है कि वह किसी मृत्‍युंजय को अपने पास जबरन ले जा पाये। मृत्यु तो उसकी बांदी है, उसे अपने बंधनों में बांधकर साथ नहीं ले जा सकती। तब तक नहीं, जब तक साक्षात परमात्‍मा उसे अपने पास बुलाने का आग्रह न कर ले। उसे साथ ले चलने के लिए सीधे परमेश्वर की इजाजत की जरूरत होती है, यमराज की नहीं।

हिन्‍दी पत्रकारिता-जगत में एक अप्रतिम और विशालकाय ग्रह थे शशांक शेखर त्रिपाठी। उनसे जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

शशांक शेखर त्रिपाठी

जी हां, वरिष्ठ पत्रकार शशांक शेखर त्रिपाठी ने अब मौत को भी हरा दिया है। साक्षात मृत्युंजय बन चुके हैं वह। वह मृत्युंजय जिसने मृत्यु को पराजित कर दिया। गाजियाबाद के अस्पताल यशोदा हॉस्पिटल में भर्ती शेखर त्रिपाठी अब खतरे से बाहर निकल चुके हैं। हालांकि वे अभी भी गहरी बेहोशी में हैं। लेकिन उन पर सारे संकट समाप्त हो चुके हैं। ऐसा उनकी निगरानी करने वाले डॉक्‍टर बताते हैं। आपको बता दें कि करीब एक सप्ताह पूर्व शशांक शेखर त्रिपाठी अपने बाथरूम में गिर पड़े थे। परिजनों उन्‍हें लेकर तत्काल गाजियाबाद के नर्सिंग होम पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत बेहद गंभीर बतायी।  घटना के बाद गाजियाबाद के कौशाम्‍बी स्थित यशोदा अस्पताल पहुंचे दैनिक ट्रिब्यून समाचार पत्र नेशनल ब्यूरो हेड डॉक्टर उपेंद्र पांडे ने प्रमुख न्यूज़ पोर्टल मेरी बिटिया डॉट कॉम के संवाददाता को बताया कि शेखर त्रिपाठी की हालत बेहद नाजुक है। उन्हें सेप्टीसीमिया का खतरा बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों ने उनकी छोटी आंत का तीन चौथाई हिस्सा काट कर फेंक दिया और लेकिन इसके बावजूद शेखर त्रिपाठी के स्वास्थ्य में कोई भी सुधार नहीं हो रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें बताया था उनके एक के बाद एक सारे अंगो ने काम करना बंद शुरू कर दिया था। डॉक्‍टरों के अनुसार यह एक बेहद नाजुक हालत थी। इसी को देखते हुए डॉक्टरों ने शेखर त्रिपाठी डायलिसिस ले लिया था।

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पत्रकार

बीती शाम अचानक शेखर त्रिपाठी स्वास्थ्य में डॉक्टरों ने एक चमत्कारिक बदलाव देखा। उन्‍होंने पाया कि शेखर त्रिपाठी का पेशाब सामान्य तौर से रिलीज हुआऍ यह एक सुखद और आशाजनक संकेत बताया जाता है। आज देर शाम डॉक्टरों ने बेहद प्रसन्नता के साथ लोगों को बताया कि शेखर त्रिपाठी की हालत में करीब 80 फ़ीसदी तक सुधार दर्ज हो रहा है। उपेंद्र पांडे का कहना है कि पेशाब होना सेप्टीसीमिया के खात्‍मे की तेज प्रक्रिया का प्रतीक है।

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पत्रकार

आपको बता दें कि आज से करीब 20 साल पहले दैनिक जागरण के संपादक नरेंद्र मोहन की हालत भी कुछ इसी तरह बेहद नाजुक हो गई थी। ऐसे में उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर के अनुसार नरेंद्र मोहन को भी सेप्टीसीमिया विकसित हो गया था। लेकिन मोहन को डॉक्टरों के तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बचाया जा सका।

लेकिन अब यह दूसरा मौका है जब दैनिक जागरण का एक वरिष्ठ पदस्‍थ सहयोगी और जागरण डॉट कॉम के संपादक शशांक शेखर त्रिपाठी को भी सेप्टीसीमिया का संक्रमण हुआ। लेकिन बेहद आश्चर्यजनक तरीके से शीघ्र ही त्रिपाठी ने साबित कर दिया कि वह साक्षात मृत्युंजय हैं। जिसे समय से पूर्व  कोई नहीं हरा सकता  मृत्यु नहीं मृत्यु नहीं हरा सकती।

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