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जागरण में उत्‍पीड़न पर रोक, तबादले का आदेश रद

: मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में श्रम विभाग ने लगायी जागरणकर्मी के ट्रांसफर पर रोक : वेज मांगने पर सिलीगुड़ी भेज दिया था एक सेल्‍समैन को : कमजोर पेड़ काटने की सुपारी दी गयी थी कुख्‍यात अजय सिंह को :

शशिकांत सिंह

कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर से दैनिक जागरण को एक बड़ा झटका लगा है। कानपुर जहां दैनिक जागरण का मुख्यालय है वहां दैनिक जागरण के मालिकान को ताजा झटका कानपुर श्रम विभाग से मिला है। वह भी जागरण के एक सेल्समैन ने उसकी स्थिति से उसको अवगत करा दिया है। सहायक श्रम आयुक्त आरपी तिवारी ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन एवं बकाये की मांग करने वाले दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत सेल्सकर्मचारी रामजी मिश्रा के सिलीगुड़ी स्थानांतरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। श्री तिवारी द्वारा जारी आदेश में दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से रामजी मिश्रा का कानपुर कार्यालय से सिलिगुड़ी किए गए तबादले को अनुचित एवं अवैधानिक करार दिया गया है और इस ट्रांसफर पर रोक लगा दी गयी है। रामजी मिश्रा दैनिक जागरण में सेल्समैन के रुप में वर्ष २००० से कार्यरत हैं।

गौरतलब है कि रामजी मिश्रा ने कानपुर श्रम विभाग में दिनांक 18 जुलाई 2017 को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में रिकवरी का क्लेम फाइल किया था। जिससे झुब्ध होकर दैनिक जागरण के प्रबंधक ने दिनांक 24 जुलाई 2017 को रामजी का तबादला सिलीगुड़ी कर दिया था। जिसके बाद रामजी ने तबादला निरस्त किए जाने की गुहार कानपुर श्रम विभाग में लगाई थी।

बतातें चलें कि 19 जून 2017 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से देश के स्वघोषित इस नंबरवन अखबार के मालिक सकते में आ गए थे। कोर्ट के रुख और भविष्य की अड़चनों को सतही तौर पर ध्यान में रखते हुए मलिकान ने "कमजोर पेड़" काटने की "सुपारी" प्रबंधक अजय सिंह को दे दी थी। जिसके बाद अजय सिंह ने बेहद शातिराना अंदाज में उत्पीड़न करने के बाद 23 लोगों का तबादला कर दिया था। ये फैसला इन्हीं 23 कर्मचारियों में शामिल रामजी मिश्रा के मामले में आया है।

फिलहाल श्रम विभाग द्वारा लगाये गये इस रोक से जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मांगने वाले कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है। देखना है कि इसी तरह दुसरे श्रम विभाग कब पहल करते हैं। एक बातचीत में रामजी मिश्रा ने कहा कि वे मजीठिया से रिलेटेड किसी भी ग्रूप में शामिल नहीं हैं और मजीठिया वेज बोर्ड की न्यूज सोशल मीडिया पर पढ़कर उन्होने भी क्लेम लगा दिया और उसके बाद उनका कंपनी ने सिलीगुड़ी ट्रांसफर कर दिया था।

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