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सोनभद्र-कांड: मासूम नहीं है ममता मौर्या, पत्रकार भी गजब खिलाड़ी

: एक मामूली दाई से सीधे नर्सिंग होम की संचालिका बन गयी ममता : सीएमओ और जिले के दीगर अफसरों की मुट्ठी गरम में करने में महारत है ममता को : हर चाल, हर दांव आजमाया था ममता ने बड़ा बनने की कोशिश में, मगर आज औंधे मुंह गिरी :

कुमार सौवीर

सोनभद्र : पत्रकार पर बलात्‍कार का मामला, अथवा एक महिला द्वारा एक पत्रकार को फंसाने का एक बड़ा मामला आज पूरे सोनांचल में दहक रहा है। इस घटना की आंच में यहां के गरीब, आम आदमी पर उत्‍पीड़न, अवैध क्रेशर और नक्‍सली वारदातों और शोर-गुल के किस्‍सों पर फिलहाल पूरी तरह दब चुका है। और तो और, कन्‍या-भ्रूण हत्‍या के सुनियोजित और भयावह धंधों और पत्रकारों की काली करतूतों से जुड़ी खबरों पर भी इस घटना ने दफ्न कर दिया है।

मामला है यहां की एक फर्जी अस्‍पताल की संचालिका ममता मौर्या और यहां का पत्रकार विष्‍णु गुप्‍त की परस्‍पर खबर-बाजी और मोहब्‍बत के बाद अब एक-दूसरे के खिलाफ जाीानलेवा मुकदमों का मामला, जहां ताजा पैंतरे के तहत ममता मौर्या ने पत्रकार को औकात में रखने का ऐसा दांव चलाया है कि जिससे बचने के लिए पत्रकार फिलहाल मैदान छोड़ कर फरार हो गया है। सच बात तो यही है कि इस आग-लगाऊ किस्‍सा की हिरोइन है ममता मौर्या, जिसके बारे में पता यह चला है कि वह इतनी भी मासूम नहीं है जितना वह पुलिस रिपोर्ट में दर्ज करा चुकी है। उधर पत्रकार विष्‍णु गुप्‍त भी इतना मासूम नहीं है, जितना उसके बारे में पत्रकारों का एक खेमा बचाव में जुटा है।

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हर रस हैं सोनभद्र में

लेकिन पहले ममता मौर्या पर चर्चा कर लीजिए। उसकी जिन्‍दगी बनारस से शुरू हुई। यहां के एक प्रतिष्ठित परिवार की यह युवती यूं तो पढाई और खेल-कूद में भी खासी होशियार थी। उसके मोहल्‍ले वाले ही नहीं, बल्कि उसके स्‍कूल-कॉलेज में भी उसकी खूब प्रसिद्धि होती थी। लेकिन अचानक एक दिन उसका पैर जिन्‍दगी में मेहनत और ईमानदारी की जमीन से बुरी तरह फिसल गया, और जल्‍दी ही वह वाराणसी छोड़ने पर मजबूर हो गयी। उसका नया आशियाना बना सोनभद्र, जहां उसने एक युवक दयाशंकर मौर्या से शादी कर अपना नया जीवन शुरू किया। नौकरी मिली एक नर्सिंग होम में दाई के तौर पर।

होशियार तो वह बचपन से ही थी ममता मौर्या, चंद ही महीनों में अपने कामधाम और उसकी बारीकियों को समझ कर उन्‍हें अपना लिया। केवल इतना ही नहीं कि मरीज की देखभाल कैसे होती है, कैसे अस्‍पताल का संचालन चलता है, कैसे दवाएं खिलायी जाती हैं, और कैसे डॉक्‍टरों से मरीज के बीच सेतु बनाया जाता है, बल्कि यह भी समझ भी लिया ममता ने कि आखिर कैसे मरीज और उसके तीमारदारों से पैसा मोटी रकम उगाही जा सकती है। लोगों से बातचीत में माहिर और सम्‍मोहित कर सकने वाली क्षमता रखने वाली ममता ने अपना निशाना साधा यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं से, जो अपना स्‍वास्‍थ्‍य चेकअप कराने के लिए अस्‍पताल आती थीं कि उनके पेट में पलते बच्‍चे की हालत क्‍या है।

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पत्रकार पत्रकारिता

बेहद वाक्‍पुट ममता ने उन महिलाओं को भी परखना शुरू कर दिया जो अपने गर्भस्‍थ भ्रूण को मादा-शिशु के तौर पर नहीं देखना चाहते थे। इसके लिए उन महिलाओं के घरवाले ही अस्‍पताल और फिर ममता के पास पहुंचने लगे थे। ख्‍याति ज्‍यादा बढने लगी, तो ममता ने सोनभद्र के उस इलाके को अपनी शिकारगाह बनाया, जहां चिकित्‍सा की सरकारी व्‍यवस्‍थाएं या तो थी ही नहीं, अथवा पूरी तरह ढह चुकी थीं। मसलन दुद्धी। ऐसे दूरस्‍थ इलाकों में बड़े डॉक्‍टरों के पास कोई सम्‍पर्क नहीं था, और ऐसे डॉक्‍टर अपने मरीज को वहां से ला कर अपने नर्सिंग होम तक ढो लाने वाले एजेंटों की खोज में रहते थे। ऐसे में ममता ने एक बड़े डॉक्‍टर की मदद से यह अपना एक नर्सिंग खोल दिया। खुद ही संचालिका बन गयी। अस्‍पताल का नाम रखा अपने पति के नाम पर ही:- दया नर्सिंग होम।

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