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बाढ़ का कहर: आइये, मदद का हाथ बढ़ाइये

: प्रशासन और गैर-संगठन तो इसमें जुटे ही हैं, लेकिन कोशिशें पर्याप्‍त नहीं हो पा रही हैं : बाढ़ के कहर का मुकाबला करने के लिए अप्रभावित क्षेत्रों के सभी लोगों को आगे आना चाहिए : यह हालत हर साल आती है, हमें इससे निपटने की कवायद भी नियमित करनी चाहिए :

धीरेंद्र श्रीवास्‍तव

लखनऊ : पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर बिहार में बाढ़ की हालत किसी कहर या विभीषिका से कम नहीं होती है। सैकड़ों गांव बह जाते हैं, मौतें मंडराने शुरू कर देती हैं। भयावह भूख और पेयजल का संकट के साथ ही साथ संक्रामक रोगों के खूनी पंजे फैलने शुरू हो जाते हैं। मजबूर होकर लाशों को बाढ़ में ही प्रवाहित कर दिया जाता है। ऐसी हालत में जरूरत है कि हम इंसान की मदद के लिए खुद इंसान बनने की शुरूआत करें। खास तौर पर वे लोग तो इसमें तत्‍काल सामने आकर दिल खोलकर मदद करने आयें जो अप्रभावित क्षेत्रों के रहने वाले हैं।

बाढ़ का पानी पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर बिहार के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। करोड़ों लोगों का जीना मोहाल हो गया है। इस प्राकृतिक आपदा में पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तर बिहार के 90 से अधिक लोगों की जानें जा चुकी है। तकरीबन एक करोड़ लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं। इन लोगों का अन्य हिस्सों से सम्पर्क कट चुका है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के  गोरखपर, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, सीतापुर, बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, बाराबंकी , बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, मिर्जापुर, संतकबीर नगर, जालौन और हमीरपुर आदि जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। मेरी जानकारी में इसमें नेपाल के सीमावर्ती जनपदों व क्षेत्रों की स्थिति काफी विकट है। बिहार में भागलपुर, कटिहार, सुपौल, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज जिले में बाढ़ का पानी कहर बरपा रहा है। मोतिहारी-वाल्मीकिनगर, नरकटियागंज-साठी, सीतामढ़ी-रक्सौल, सुगौली-रक्सौल, दरभंगा-सीतामढ़ी रेल रूट पर कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

ये लोग हमारे आपके भी हैं। बाढ़ में फंसे लोगों की पीड़ा कम करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शासन प्रशासन दिन रात जूझ रहा है लेकिन यह काम केवल सरकार औऱ प्रशासनिक अमले के लिए काफी कठिन है। अप्रभावित क्षेत्रों के लोग भी इस काम जुट जाएं तो यह काम काफी सरल हो सकता है।

बाढ़ का यह कहर कोई पहली बार नहीं बरपा हो रहा है। यह प्राकतिक आपदा कमोवेश हर साल आती है और हम सभी लोग मिलकर इसका मुकाबला करते हैं। इस मुकाबले में रोटरी क्लब, लायन्स क्लब औऱ व्यापार मंडल जैसे संगठन प्रशासन के साथ मजबूती से खड़े होते रहे हैं। कर्मचारी और अधिकारी भी अपनी एक एक दिन की तनख्वाह मुख्यमंत्री राहत कोष में देते रहे हैं। बड़े उद्यमी और व्यापारी मुख्यमंत्री राहत कोष में या जिलाधिकारी के माध्यम से बड़ी बडीं रकम दान कर अपना बड़प्पन शो करते रहे हैं।

अप्रभावित क्षेत्रों के गांव और कस्बे के लोग भी जिलाधिकारी, उप जिलाकारी या अपने क्षेत्र किसी और अधिकारी या संगठन के माध्यम से थोड़ी थोड़ी मदद कर बाढ़ की पीड़ा हरने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। मीडिया के बड़े संस्थान भी इस नेक और पुनीत कार्य बड़े भाई की तरह खड़े होते हैं। दवा के कारोबार से जुड़े लोग इस दुखद बेला में दवा की मदद का मोर्चा संभाल लेते हैं। और जब सभी लोग खड़े हो जाते हैं तो बाढ़ का कहर दुम दबाकर भाग लेता है।

माना कि यह हालत हर साल आती है, फिर तो हमें इससे निपटने की कवायद भी नियमित करनी चाहिए। बाढ़ के कहर का मुकाबला करने के लिए अप्रभावित क्षेत्रों के सभी लोगों को आगे आना चाहिए। यह नेक कार्य करने वालों को ईश्वर सुख, समृद्धि और यश देगा, अल्लाह सुख, समृद्धि और यश देगा।

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